शुक्रवार, 26 जून 2020



Ashok Leyland Q4 Result

 

Askok Leyland Q4 Result 2020

Askok Leyland headquarter चेन्नई में स्थित है . सन् 1948 में इसकी स्थापना रघुनंदन सरन द्वारा की गई वह पंजाब के एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे।|आजादी के बाद, उन्हें भारत के पहले प्रधान मंत्री नेहरू ने एक आधुनिक औद्योगिक उद्यम में निवेश करने के लिए मनाया |रघुनंदन सरन ने पहले commercial vehicle की असेंबली के लिए इंग्लैंड के Leyland के साथ बातचीत की थी |World में बसों का चौथा सबसे बड़ा Manufacturer और Globaly स्तर पर Truck  का 10 वां सबसे बड़ा Manufacturer है। 

इसने वित्त वर्ष 2016 में लगभग 140,000 Vehicles (M & HCV + LCV) बेचे। Tourister Bus के विकल्प के साथ 10 seater bus  से लेकर 74 seater bus (M & HCV = LCV) तक, अशोक लीलैंड बस सेगमेंट में एक मार्केट Leader है।1980 के दशक की शुरुआत में Askok Leyland ने जापानी कंपनी Hino Motors के साथ सहयोग किया, जिसमें से H- Searies engine के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। 

Askok Leyland Q4 Result 2020

Hinduja Groups फ्लैगशिप की भारत की सबसे बड़ी प्रमुख Commercial vehicle manufacturer Ashok Leyland Q4 Result 2020 ने इस Quarter4 के लिए 57 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन loss बताया। एक साल पहले 8,846 करोड़ रुपये से 57% घटकर 3,838 करोड़ रुपये रहा | ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन (EBITDA) से पहले की Income 81% घटकर 183 करोड़ रुपये हो गई।

कंपनी ने तिमाही में निवेश और कुछ उत्पादों के बंद होने के कारण तिमाही के दौरान 69 करोड़ रुपये का असाधारण शुल्क लिया। March 2020 को Financial year  लिए, कंपनी ने 240 करोड़ रुपये का Profit दर्ज किया| मार्च तिमाही में स्टैंडअलोन loss में 57 करोड़ रुपये की Report के बावजूद Askok Leyland NSE -0.56% के शेयर शुक्रवार के कारोबार में 3 प्रतिशत बढ़ गए। विश्लेषकों ने कहा कि परिणाम कई मोर्चों पर बेहतर-से-अपेक्षित थे

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गुरुवार, 25 जून 2020



Baba Ramdev की दवा Coronil पर लगी रोक

coronil:कोरोना कोई साधारण बीमारी नहीं है और ये बिल्कुल नया वायरस है। इसकी दवा और वैक्सीन बनाने में देशभर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। कोरोना महामारी के लिए दवा बनाने के लिए कंपनी को मंत्रालय से अनुमति लेनी होती है। कोई भी कंपनी बाजार में जाकर ये दावा नहीं कर सकती कि ये कोरोना की दवा है। कोई भी नई वैक्सीन या दवा के लिए सरकार कंपनियों को अनुमति देती है। उसके बाद ही वो कंपनी उस दवा को बना सकती है।

कोरोनिल के प्रचार पर सरकार ने लगा दी रोक

पतंजलि की ओर से लॉन्च की गई कोरोना वायरस इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल के प्रचार पर सरकार ने रोक लगा दी है। आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को आदेश दिया है कि कोविड दवा का तब तक प्रचार नहीं करें जब तक कि मुद्दे की जांच नहीं हो जाती है। मंत्रालय ने पतंजलि से दवा की डीटेल मांगी है ताकि पतंजलि के दावे की जांच की सके। आयुष मंत्रालय ने कहा है पतंजलि की कथित दवा, औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून, 1954 के तहत विनियमित है।

coronil: आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को चेतावनी दी है कि ठोस वैज्ञानिक सबूतों के बिना कोरोना के इलाज का दावे के साथ दवा का प्रचार-प्रचार किया गया तो उसे ड्रग एंड रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) कानून के तहत संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

वहीं उत्तराखंड सरकार से इस आयुर्वेदिक दवा के लाइसेंस आदि के बारे में जानकारी मांगी है।

दवा के प्रचार-प्रसार वाले विज्ञापनों पर तत्काल रोक लगाने के साथ ही पतंजलि को जल्द-से-जल्द कोरोनिल दवा में इस्तेमाल किए गए तत्वों का विवरण देने को कहा गया है।

बताना होगा कि करोनिल दवा का ट्रायल किन-किन अस्पतालों में  गया

पतंजलि को यह भी बताना होगा कि coronil दवा का ट्रायल किन-किन अस्पतालों में और कितने मरीजों पर किया गया। ट्रायल शुरू करने के क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआइ) में दवा का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। पतंजलि से सीटीआरआइ के रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ ट्रयल के परिणाम का पूरा डाटा देने को कहा गया है।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरी पड़ताल और तथ्यों के सही पाए जाने के बाद की इस दवा को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। दरअसल आयुर्वेदिक दवा को विकसित करने और बेचने से पहले आयुष मंत्रालय से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। लेकिन जिस राज्य में इस दवा का उत्पादन किया जा रहा है, वहां के लाइसेंसिंग अथारिटी से इसके लिए अनुमति लेना अनिवार्य है।

आचार्य बालकृष्ण का बयान

आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ के महामंत्री हैं। उन्होंने ट्वीट किया है, केंद्र सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन देती आई है। पतंजलि की दवा को लेकर आयुष मंत्रालय को जो भी गलतफहमी थी, वह दूर कर दी गई है। पतंजलि ने आयुर्वेदिक दवाओं की जांच (रेंडमाइज्ड प्लेसबो कंट्रोल्ड क्लीनिकल ट्रायल) के सभी आधिकारिक मानकों को सौ प्रतिशत पूरा किया है। इसकी सभी जानकारी हमने आयुष मंत्रालय को दे दी है, अब कहीं कोई संशय नहीं रह गया है।

पतंजलि कोविड-19 दवा (patanjali coronavirus medicine)

योगगुरू बाबा रामदेव ने मंगलवार को कोरोना की आयुर्वेदिक दवा ‘कोरोनिल’ लॉन्च की। योग गुरु ने बताया कि अगले सोमवार को हम OrderMe नाम से एक ऐप लॉन्च कर रहे हैं। इस ऐप के जरिए आप घर बैठे कोरोना की दवा मंगा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि आज ऐलोपैथिक सिस्टम मेडिसन को लीड कर रहा है, हमने कोरोनिल बनाई है जिसमें हमने क्लीनिकल कंट्रोल स्टडी की।

बाबा रामदेव के मुताबिक, कोरोनिल में गिलोय, अश्‍वगंधा, तुलसी, श्‍वसारि रस और अणु तेल का मिश्रण है।

यह दवा दिन में दो बार- सुबह और शाम को ली जा सकती है। योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक, अश्‍वगंधा से कोविड-19 के रिसेप्‍टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) को शरीर के ऐंजियोटेंसिन-कन्‍वर्टिंग एंजाइम (ACE) से नहीं मिलने देता। यानी कोरोना इंसानी शरीर की स्‍वस्‍थ्‍य कोशिकाओं में घुस नहीं पाता। वहीं गिलोय कोरोना संक्रमण को रोकता है। तुलसी कोविड-19 के RNA पर अटैक करती है और उसे मल्‍टीप्‍लाई होने से रोकती है।

बता दें कि दवा के लॉन्चिंग के मौके पर पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया था कि यह दवा 3-14 दिनों के अंदर कोरोना पीड़ित मरीजों का इलाज कर सकेगी। हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में लॉन्चिंग के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि कोरोनिल दवा का जिन कोरोना मरीजों पर ट्रायल किया गया, उनमें 69 फीसदी मरीज केवल तीन दिनों में ही पॉजीटिव से निगेटिव और सात दिन के अंदर 100 फीसदी रोगी संक्रमण से मुक्त हो गए।

पतंजलि योगपीठ ने आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया है कि आयुर्वेदिक की दवाओं से न सिर्फ कोविड-19 का शत-प्रतिशत इलाज संभव है, बल्कि इसके संक्रमण से बचने को इन दवाओं का बतौर वैक्सीन भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Baba Ramdev की दवा Coronil जानिए पूरी जानकारी

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बुधवार, 24 जून 2020



Patanjali Coronavirus medicine

Patanjali Coronavirus medicine – पतंजलि योगपीठ ने आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण ने दावा किया है कि आयुर्वेदिक की दवाओं से न सिर्फ कोविड-19 का शत-प्रतिशत इलाज संभव है, बल्कि इसके संक्रमण से बचने को इन दवाओं का बतौर वैक्सीन भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

योगगुरू बाबा रामदेव ने मंगलवार को कोरोना की आयुर्वेदिक दवा ‘कोरोनिल’ लॉन्च की। योग गुरु ने बताया कि अगले सोमवार को हम OrderMe नाम से एक ऐप लॉन्च कर रहे हैं। इस ऐप के जरिए आप घर बैठे कोरोना की दवा मंगा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि आज ऐलोपैथिक सिस्टम मेडिसन को लीड कर रहा है, हमने कोरोनिल बनाई है जिसमें हमने क्लीनिकल कंट्रोल स्टडी की।

बाबा रामदेव के मुताबिक, कोरोनिल में गिलोय, अश्‍वगंधा, तुलसी, श्‍वसारि रस और अणु तेल का मिश्रण है।

यह दवा दिन में दो बार- सुबह और शाम को ली जा सकती है। योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक, अश्‍वगंधा से कोविड-19 के रिसेप्‍टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) को शरीर के ऐंजियोटेंसिन-कन्‍वर्टिंग एंजाइम (ACE) से नहीं मिलने देता। यानी कोरोना इंसानी शरीर की स्‍वस्‍थ्‍य कोशिकाओं में घुस नहीं पाता। वहीं गिलोय कोरोना संक्रमण को रोकता है। तुलसी कोविड-19 के RNA पर अटैक करती है और उसे मल्‍टीप्‍लाई होने से रोकती है।

दवा में क्या-क्या है शामिल – What is included in the Coronil medicine

दवा के मुख्य घटक अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, श्वसारि रस व अणु तेल हैं। इनका मिश्रण और अनुपात शोध के अनुसार तय किया गया है।

कैसे काम करती है दवा – how coronil works

Patanjali Coronavirus medicine: आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि अश्वगंधा कोविड-19 के आरबीडी को मानव शरीर के एसीई से मिलने नहीं देता। इससे कोविड-19 वायरस संक्रमित मानव शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता।

गिलोय भी अश्वगंधा की तरह काम करता है। यह संक्रमण होने से रोकता है। तुलसी का कंपाउंड कोविड-19 के आरएनए-पॉलीमरीज पर अटैक कर उसके गुणांक में वृद्धि करने की दर को न सिर्फ रोक देता है, बल्कि इसका लगातार सेवन उसे खत्म भी कर देता है।

श्वसारि रस गाढ़े बलगम को बनने से रोकता है और बने हुए बलगम को खत्म कर फेफड़ों की सूजन कम कर देता है। इसी तरह अणु तेल का इस्तेमाल नेजल ड्राप के तौर पर कर सकते हैं।

बाबा रामदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा

Patanjali Coronavirus medicine

-बाबा रामदेव ने लॉन्च की कोरोना वायरस की तीन दवाइयां। एक श्वासारि बट्टी, दिव्य कोरोनिल टैबलेट और अणु तेल। एकसाथ करना है इनका उपयोग।

-प्लेसवो क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल 100 लोगों के ऊपर किया गया। ये सभी 15 से 65 आयु वर्ग के हैं। इससे तीन दिन में 69 फीसद मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए हैं।

-दवाई बनाते वक्त सभी साइंटिफिक पैरामीटर का रखा गया ध्यान।

-सेकेेंड ट्रायल जल्द ही क्रिटिकल मरीजों पर किया जाएगा।

-अणुनासिक तेल भी कोरोना की दवा में शामिल। ये तीन से पांच बूंद नाक में डालने से श्वास नलिका में कोरोना के प्रभाव को खत्म कर पेट तक ले जाता है।

-बाबा रामदेव ने बताया कि ये दवा ब्लडप्रेशर, हार्ट बीट और नाड़ी को भी कंट्रोल करती है।

-बाबा रामदेव ने किया आयुर्विदेक दवा कोरोनिल के सफल परीक्षण का दावा। तीन दिन में 69 फीसद मरीज हुए कोरोना से मुुक्त हुए।

-सौ लोगों पर किया गया था ट्रायल, सात दिन में रिपोर्ट नेगेटिव आई।

-ये दवाई स्वशन सिस्टम को मजबूत करती है, जिससे कोरोना संक्रमण का असर नहीं होता। इसके साथ ही दवा सर्दी जुकाम और बुखार को भी नियंत्रित करती है।

रामरक्षा स्तोत्र अर्थसहित मराठी मध्ये

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मंगलवार, 23 जून 2020

                                                         



इस पोस्ट में हम नामदेव महाराज के जीवन परिचय के बारेमे जानेंगे।

नाम - नामदेव दामाशेठ रेलेकर
जन्म - 26 अक्टूबर, 1270
पिता का नाम - दामाशेठ
माता का नाम - गोणाई (गोणा बाई) था।
नामदेवजी का विवाह - कल्याण निवासी राजाई (राजा बाई) के साथ हुआ था
चार पुत्र - नारायण,विट्ठल,महादेव,गोविन्द
पुत्री - लिम्बाबाई.
नामदेव जी की बड़ी बहन का नाम - आऊबाई
नामदेवजी के नानाजी - गोमाजी
नामदेवजी के नानीजी - उमाबाई

संत श्री नामदेव महाराज जीवन परिचय - Biography of Namdev in Hindi Jivani


संत शिरोमणि श्री नामदेवजी का जन्म "पंढरपुर", मराठवाड़ा, महाराष्ट्र (भारत) में 26 अक्टूबर, 1270 ,कार्तिक शुक्ल एकादशी संवत् १३२७, रविवार को सूर्योदय के समय हुआ था. संत शिरोमणि श्री नामदेव जी का जन्म "शिम्पी" ( जिसे राजस्थान में "छीपा" भी कहते है) परिवार में हुआ था। नामदेव का जन्म महाराष्ट्र के सातारा जिले के कराड के पास नरसी वामनी ग्राम या मराठवाडा के परभणी में हुआ था। जबकि कुछ लोगो का मानना है की उनका जन्म महाराष्ट्र के पंढरपुर में हुआ, उनके पिता भगवान विट्ठल के भक्त थे। पंढरपुर में भगवान कृष्णा को विट्ठल के रूप में पूजा जाता है। नामदेव के पिता का नाम दामाशेठ और माता का नाम गोणाई (गोणा बाई) था। नामदेव जी का परिवार भगवान विट्ठल का परम भक्त था।

नामदेवजी का विवाह कल्याण निवासी राजाई (राजा बाई) के साथ हुआ था और इनके चार पुत्र व पुत्रवधु यथा "नारायण - लाड़ाबाई", "विट्ठल - गोडाबाई", "महादेव - येसाबाई" , व "गोविन्द - साखराबाई" तथा एक पुत्री थी जिनका नाम लिम्बाबाई था. श्री नामदेव जी की बड़ी बहन का नाम आऊबाई था. उनके एक पौत्र का नाम मुकुन्द व उनकी दासी का नाम "संत जनाबाई" था, जो संत नामदेवजी के जन्म के पहले से ही दामाशेठ के घर पर ही रहती थी.
संत शिरोमणि श्री नामदेवजी के नानाजी का नाम गोमाजी और नानीजी का नाम उमाबाई था. संत नामदेवजी ने विसोबा खेचर को गुरु के रूप में स्वीकार किया था।

sant shree namdev maharaj ने भारत के बहुत से भागो की यात्रा कर अपनी कविताओ को लोगो तक पहुचाया है। मुश्किल समय में उन्होंने महाराष्ट्र के लोगो को एकता के सूत्र में बांधने का भी काम किया है।

कहा जाता है की पंजाब के गुरदासपुर जिले के घुमन ग्राम में उन्होंने 20 साल से भी ज्यादा समय व्यतीत किया था। पंजाब में सिक्ख समुदाय के लोग उन्हें नामदेव बाबा के नाम से जानते थे। संत नामदेव में हिंदी भाषा में तक़रीबन 125 अभंगो की रचना की है। जिनमे से 61 अभंग को गुरु ग्रंथ साहिब (सिक्ख शास्त्र) में नामदेवजी की मुखबानी के नाम से शामिल किया गया है।

पंजाब के शब्द कीर्तन और महाराष्ट्र के वारकरी कीर्तन में हमें बहुत से समानताये भी दिखाई देती है। पंजाब के घुमन में उनका शहीद स्मारक भी बनवाया गया है। उनकी याद में सिक्खों द्वारा राजस्थान में उनका मंदिर भी बनवाया गया है।

50 साल की उम्र में नामदेव महाराज पंढरपुर में आकर बस चुके थे, जहाँ उनके आस-पास उनके भक्त होते थे। उनके अभंग काफी प्रसिद्ध बन चुके थे और लोग दूर-दूर से उनके कीर्तन सुनने के लिए आते थे। नामदेव के तक़रीबन 2500 अभंगो को नामदेव वाची गाथा में शामिल किया गया है। साथ ही इस किताब में लंबी आत्मकथात्मक कविता तीर्थावली को भी शामिल किया गया है, जिसमे नामदेव और संत ज्ञानेश्वर की यात्रा के बारे में बताया गया है।

जुलाई, 1350 में 80 साल की उम्र में पंढरपुर में भगवान की शरण के निचे उनकी मृत्यु हो गयी। पंढरपुर के मंदिर में संत नामदेव को एक विशेष दर्जा दिया जाता है। हर साल लाखो भक्त पंढरपुर आकार विट्ठल भगवान और संत नामदेव के दर्शन करते है।

एक छोटे बच्चे ने ज्ञानोबा माउली तुकाराम पे किया गजर यहाँ देखिये


श्री संत नामदेव महाराज पुण्यतिथि - shree sant namdev  maharaj ki punyatithi  kab manai jati he


आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी के दिन महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत नामदेव की पुण्यतिथि मनाई जाती है। इस दिन भगवान नामदेव ने जीवित अवस्था में समाधि ली थी। तभी से आज के दिन को पुण्यतिथि के रूप में मनाते है । समाजजन एकत्र होकर कार्यक्रम आयोजित करते है। पुरुष और महिलाओं द्वारा भजनर्कीतन किया जाता है।

निकाली जाती है दिंडी यात्रा


संत श्री महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूजा अर्चना की जाती हे । कार्यक्रम का समापन भंडारे के बाद भगवान नामदेव की दिंडी यात्रा निकालकर कियाजाता हे ।नगर मेें घुमाई जाने वाली दिंडी यात्रा में समाज के सभी लोगभजन भगवान नामदेव के भजन कीर्तन के साथ के जयघोष लगाते हुए निकलते है।

story of sant namdev maharaj


एक दिन उनके पिता बाहर गांव की यात्रा पर गए थे, तब उनकी माता ने नामदेव को दूध दिया और कहा कि वे इसे भगवान विठोबा को भोग में चढा दें। तब नामदेव सीधे मंदिर में गए और मूर्ति के आगे दूध रखकर कहा, ‘लो इसे पी लो।’ उस मंदिर में उपस्थित लोगों ने उनसे कहा- यह मूर्ति है, दूध कैसे पिएगी?

परंतु पांच वर्ष के बालक नामदेव नहीं जानते थे कि विठ्ठल की मूर्ति दूध नहीं पीती, मूर्ति को तो बस भावनात्मक भोग लगवाया जाता है। तब उनकी बाल लीला समझ कर मंदिर में उपस्थित सब अपने-अपने घर चले गए। जब मंदिर में कोई नहीं था तब नामदेव निरंतर रोए जा रहे थे और कह रहे थे, ‘विठोबा यह दूध पी लो नहीं तो मैं यहीं, इसी मंदिर में रो रोकर प्राण दे दूंगा।’

तब बालक का भोला भाव देखकर विठोबा पिघल गए। तब वे जीवित व्यक्ति के रूप में प्रकट हुए और स्वयं दूध पीकर नामदेव को भी पिलाया। तब से बालक नामदेव को विठ्ठल नाम की धुन लग गई और वे दिनरात विठ्ठल नाम की रट लगाए रहते थे।

उनका सारा जीवन मधुर भक्ति-भाव से ओतप्रोत था। विट्ठल-भक्ति भक्त नामदेव जी को विरासत में मिली।

उनका संपूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा। मूर्ति पूजा, कर्मकांड, जातपात के विषय में उनके स्पष्ट विचारों के कारण हिन्दी के विद्वानों ने उन्हें कबीर जी का आध्यात्मिक अग्रज माना है। संत नामदेव जी ने पंजाबी में पद्य रचना भी की। भक्त नामदेव जी की बाणी में सरलता है। वह ह्रदय को बांधे रखती है। उनके प्रभु भक्ति भरे भावों एवं विचारों का प्रभाव पंजाब के लोगों पर आज भी है।

आषाढ़ी एकादशी के बारेमे पूरी जानकारी 

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सोमवार, 22 जून 2020


Why Ashadhi Ekadashi is celebrated?


Ashadhi Ekadashi आषाढ़ी एकादशी को पदमा एकादशी, देवशयानी एकादशी और हरी शयनी एकादशी नाम से भी जाना जाता हे. धार्मिक दृस्टिसे इस दिन का बड़ा महत्त्व होता हे. पुराणों अनुसार ऐसे मन जाता हे की आषाढ़ी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हे. इस दिन पूजा करने और व्रत करने का खास महत्त्व होता हे. इस व्रत के करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

आषाढ़ी एकादशी का महत्त्व (importance of Ashadhi Ekadashi)


धार्मिक दृस्टिसे इस दिन का बड़ा महत्त्व होता हे. पुराणों अनुसार ऐसे मन जाता हे की आषाढ़ी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हे. इस दिन पूजा करने और व्रत करने का खास महत्त्व होता हे. वैसे तो महीने में आने वाली एकादशी का काफी महत्व होता है। लेकिन साल की इस एकादशी की विशेष मान्यता है। इस व्रत के करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि आषाढ़ी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है।

आषाढ़ी एकादशी पर निकलती हे दिंडी यात्रा


महाराष्ट्र ये अनेक महान संतों की कर्मभूमि है। इन संतों के जन्म या समाधि स्थलों से ये पालकियां व दिंडियां निकलती हैं, जो लंबा सफर तय कर पंढरपुर पहुंचती हैं।

आषाढ़ी एकादशी पर महाराष्ट्र के कोने-कोने से वारकरी पालकियों और दिंडियों के साथ पंढरपुर में विट्ठल के दर्शन को पहुंचते हैं।

पालकी के साथ एक मुख्य संत के मार्गदर्शन में समूह यानी दिंडी (कीर्तन/भजन मंडली), चलते है, जिसमें वारकरी भी शामिल होते हे। महाराष्ट्र में ईश्वर के सगुण-निर्गुण और बहुदेव रूप की विविधता को एकरूप या एकता में बांधने का कार्य किया है वारकरी संप्रदाय ने।

हर साल पंढरपुर की वारी (तीर्थयात्रा) करने वाले को वारकरी कहलाते है,जो विट्ठल का भक्त है। हर वारकरी की जीवन की अंतिम अभिलाषा यही होती है कि  हर जन्म में विट्ठल की भक्ति का लाभ मिले।

चातुर्मास (chaturmas)


व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के 4 महीने को हिन्दू धर्म में 'चातुर्मास' कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शारीरिक और मानसिक स्थिति तो सही होती ही है, साथ ही वातावरण भी अच्छा रहता है। चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है।

श्रावण, भाद्रपद, आश्‍विन और कार्तिक। चातुर्मास के प्रारंभ को 'देवशयनी एकादशी' कहा जाता है और अंत को 'देवोत्थान एकादशी'

वर्जित कार्य : 4 माह में विवाह संस्कार, जातकर्म संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं।

How can I fast on Ashadhi ekadashi?


इस व्रत में दूध, शकर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाता। श्रावण में पत्तेदार सब्जियां यथा पालक, साग इत्यादि, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल आदि का त्याग कर दिया जाता है।

पौराणिक कथा - story


सूर्यवंश में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा हुआ है, जो सत्यवादी और महान प्रतापी था। वह अपनी प्रजा का पुत्र की भांति पालन किया करता था। उसकी सारी प्रजा धनधान्य से भरपूर और सुखी थी। उसके राज्य में कभी अकाल नहीं पड़ता था।

एक समय उस राजा के राज्य में तीन वर्ष तक वर्षा नहीं हुई और अकाल पड़ गया। प्रजा अन्न की कमी के कारण अत्यंत दुखी हो गई। अन्न के न होने से राज्य में यज्ञादि भी बंद हो गए। एक दिन प्रजा राजा के पास जाकर कहने लगी कि हे राजा! सारी प्रजा त्राहि-त्राहि पुकार रही है, क्योंकि समस्त विश्व की सृष्टि का कारण वर्षा है।

वर्षा के अभाव से अकाल पड़ गया है और अकाल से प्रजा मर रही है। इसलिए हे राजन! कोई ऐसा उपाय बताओ जिससे प्रजा का कष्ट दूर हो। राजा मांधाता कहने लगे कि आप लोग ठीक कह रहे हैं, वर्षा से ही अन्न उत्पन्न होता है और आप लोग वर्षा न होने से अत्यंत दुखी हो गए हैं। मैं आप लोगों के दुखों को समझता हूं। ऐसा कहकर राजा कुछ सेना साथ लेकर वन की तरफ चल दिया। वह अनेक ऋषियों के आश्रम में भ्रमण करता हुआ अंत में ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचा। वहां राजा ने घोड़े से उतरकर अंगिरा ऋषि को प्रणाम किया।

मुनि ने राजा को आशीर्वाद देकर कुशलक्षेम के पश्चात उनसे आश्रम में आने का कारण पूछा। राजा ने हाथ जोड़कर विनीत भाव से कहा कि हे भगवन! सब प्रकार से धर्म पालन करने पर भी मेरे राज्य में अकाल पड़ गया है। इससे प्रजा अत्यंत दुखी है। राजा के पापों के प्रभाव से ही प्रजा को कष्ट होता है, ऐसा शास्त्रों में कहा है। जब मैं धर्मानुसार राज्य करता हूं तो मेरे राज्य में अकाल कैसे पड़ गया? इसके कारण का पता मुझको अभी तक नहीं चल सका।

अब मैं आपके पास इसी संदेह को निवृत्त कराने के लिए आया हूं। कृपा करके मेरे इस संदेह को दूर कीजिए। साथ ही प्रजा के कष्ट को दूर करने का कोई उपाय बताइए। इतनी बात सुनकर ऋषि कहने लगे कि हे राजन! यह सतयुग सब युगों में उत्तम है। इसमें धर्म को चारों चरण सम्मिलित हैं अर्थात इस युग में धर्म की सबसे अधिक उन्नति है। लोग ब्रह्म की उपासना करते हैं और केवल ब्राह्मणों को ही वेद पढ़ने का अधिकार है। ब्राह्मण ही तपस्या करने का अधिकार रख सकते हैं, परंतु आपके राज्य में एक शूद्र तपस्या कर रहा है। इसी दोष के कारण आपके राज्य में वर्षा नहीं हो रही है।

इसलिए यदि आप प्रजा का भला चाहते हो तो उस शूद्र का वध कर दो। इस पर राजा कहने लगा कि महाराज मैं उस निरपराध तपस्या करने वाले शूद्र को किस तरह मार सकता हूं। आप इस दोष से छूटने का कोई दूसरा उपाय बताइए। तब ऋषि कहने लगे कि हे राजन! यदि तुम अन्य उपाय जानना चाहते हो तो सुनो।

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पद्मा नाम की एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करो। व्रत के प्रभाव से तुम्हारे राज्य में वर्षा होगी और प्रजा सुख प्राप्त करेगी क्योंकि इस एकादशी का व्रत सब सिद्धियों को देने वाला है और समस्त उपद्रवों को नाश करने वाला है। इस एकादशी का व्रत तुम प्रजा, सेवक तथा मंत्रियों सहित करो।

मुनि के इस वचन को सुनकर राजा अपने नगर को वापस आया और उसने विधिपूर्वक पद्मा एकादशी का व्रत किया। उस व्रत के प्रभाव से वर्षा हुई और प्रजा को सुख पहुंचा। अत: इस मास की एकादशी का व्रत सब मनुष्यों को करना चाहिए। यह व्रत इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति को देने वाला है। इस कथा को पढ़ने और सुनने से मनुष्य के समस्त पाप नाश को प्राप्त हो जाते हैं।

पंढरपुर के आसपास क्या देखें


pandharpur ke aas pas kya dekhe?

श्री विट्ठल मंदिर के साथ ही आप यहां रुक्मिणीनाथ मंदिर, पुंडलिक मंदिर, लखुबाई मंदिर इसे रुक्मिणी मंदिर के नाम से जाना जाता है, अंबाबाई मंदिर, व्यास मंदिर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर, पंचमुखी मारुति मंदिर, कालभैरव मंदिर और शकांबरी मंदिर, मल्लिकार्जुन मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, काला मारुति मंदिर, गोपालकृष्ण मंदिर और श्रीधर स्वामी समाधि मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं. पंढरपुर के जो देवी मंदिर प्रसिद्ध हैं उनमें पद्मावती, अंबाबाई और लखुबाई सबसे प्रसिद्ध है.

प्रदक्षिणा में छिपा इतिहास यहाँ देखिये

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शुक्रवार, 19 जून 2020



China app kon kon se he?: हम जब कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो प्राइवेसी की शर्तों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते. बस ' yes ' और ' Alloow' पर टिक करते चले जाते हैं. हम अपनी फ़ोटो गैलरी , लोकेशन और कॉन्टैक्ट नंबर इन सबका एक्सेस दे देते हैं. इसके बाद हमारा डेटा कहां जा रहा , इसका क्या इस्तेमाल हो रहा है , हमें कुछ पता नहीं चलता."

चीन अब इंडियन आर्मी के राज जानने के लिए कई तरह के स्मार्ट फोन्स और एप्स की मदत ले रहा हे. बताया गया हे की चीन के सॉफ्टवेयर इंजनियर्स कई एंड्राइड और आईओएस एप्स तैयार किये हे जो यूजर्स का डाटा और अन्य जानकारिया चुराते हे. अगर आपका जानकर, या अधिकारी या जवान कोही भी चायना के एप्स use कर रहे हे तो उन्हें तुरंत अनइंस्टॉल करने के लिए कहे. इसके साथ ही स्मार्ट फोन भी फॉर्मेट करे.

विशेषज्ञों की मानें तो ये सभी एप्स आपके लिए खतरनाक हैं। ये ऐप भारत के कानूनी का भी उल्लंघन कर सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी भी उनकी भाषा चीनी में दी गई है। ऐसे में आप और हम उसे ना पढ़ पाते हैं और ना ही समझ पाते हैं।

अगर आप इन्हें एक बार भी इस्तेमाल करते हैं तो ये आपसे जुड़ी कई जानकारियां अपने पास हमेशा के लिए जुटा लेते हैं इसलिए इन्हें लेकर ज़्यादा सतर्क होने की ज़रूरत है. टिकटोक से हमारा महत्वपूर्ण डेटा चीन के पास जा रहा है जिसे साइबर अपराध का खतरा बढ़ गया है।

Chinese Apps in India

शेयरइट, न्यूज डॉग, टिक-टॉक जैसे चाइनीज ऐप भारतीय यूजर्स की जरूरत से ज्यादा जानकारियों को इकट्ठा करते हैं और खास बात यह है कि आपकी इन निजी जानकारियों को विदेशी कंपनियों को बेचा जा रहा है। डाटा लेने के लिए ये ऐप आपसे कैमरा, माइक्रोफोन और मैसेज तक का एक्सेस मांगते हैं। डाटा स्टोर करने वाले ऐप्स में हेलो, शेयरइट, टिक-टॉक, वीगो वीडियो, ब्यूटी प्लस, क्लब फैक्ट्री एवरीथिंग, न्यूज डॉग और वीमैट जैसे 10 ऐप्स के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ऐप यूजर्स की प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ करते हैं।

चीनी ऐप कौन-कौन से हैं?  जिनसे हे खतरा


Which Chinese apps are there? From whom is the danger transfer

China app kon kon se he?

Chinese apps list in India

  • BeautyPlus

  • VivaVideo

  • टिक-टॉक (Tik – Tok)

  • हेलो (Helo)

  • यूसी ब्राउजर (UC Browser)

  • यूसी न्यूज (UC News)

  • शेयर इट (Sharit)

  • लाइकी (Likee)

  • 360 सिक्योरिटी (360 Security)

  • न्यूज डॉग (NewsDog)

  • शिन (SHEIN)

  • विगो वीडियो (Vigo Video)

  • वी चैट (WeChat)

  • वीबो (Weibo)

  • वीबो लाइव (Vibo live)

  • क्लब फैक्टरी (Club Factory)

  • झूम (zoom )

  • Kwai

  • LiveMe

  • ROMWE,Photo Wonder,APUS Browser,Perfect Corp, CM Browser, Virus Cleaner (Hi Security Lab),Mi Community, DU recorder, YouCam Makeup,Mi Store, DU Cleaner, DU Privacy, Clean Master – Cheetah,CacheClear DU apps studio, Baidu Translate, Baidu Map,Wonder Camera, ES File Explorer, QQ International,QQ Launcher, QQ Security Centre, QQ Player, QQ Music,QQ Mail, QQ NewsFeed, WeSync, SelfieCity, Clash of Kings
    Mail Master, Mi Video call-Xiaomi, Parallel Space

  • Chinese apps have grown in popularity in India over the past year.


Social content platforms: Helo and SHAREit

Entertainment and engagement apps: TikTok, LIKE, and Kwai;

Web browser: UCBrowser/UCBrowser Mini

Video and live streaming ones: LiveMe, Bigo Live, and Vigo Video;

Utility apps: BeautyPlus, Xender and Cam Scanner;

Gaming apps: PUBG, Clash of Kings, Mobile Legends;

E-commerce apps: ClubFactory, SHEIN, and ROMWE.

अगर आपका जानकार, या अधिकारी या जवान कोही भी चायना के एप्स use कर रहे हे तो उन्हें तुरंत अनइंस्टॉल करने के लिए कहे. इसके साथ ही स्मार्ट फोन भी फॉर्मेट करे.

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CBSE बोर्ड और ICSE बोर्ड में क्या अंतर है


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मंगलवार, 2 जून 2020



आज हम इस पोस्ट में बता रहे हे की फेशियल और ब्लीच में क्या अंतर है ?,What is difference between facial and bleaching?,ब्लीच करने के फायदे,ब्लीच के नुकसान,फेसिअल करवाने के तुरंत बाद आपको किन बातो पर विशेष ध्यान देना चाहिए,अक्सर एक सवाल पूछा जाता हे की फेशियल के बाद ब्लीच कर सकते हैं क्या?।,Can I do facial after bleach?, facial ke baad bleach kar sakte hain kya?, facial ke bad bleach kare ya na kare? इन सबका answer आपको यहाँ पता चलेगा तो चलिए जानते है।

महिलाओंको facial करवाना उनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। २८ उम्र पर हो जानेपर महिनेमे एक बार तो फेसिअल जरूर करवाना चाहिए। कई तरह के फेसिअल होते हे.  और हर कोई अपने skin के हिसाबसे उनका उपयोग करता है क्युकी उनकी स्किन हेल्दी और ग्लोइंग बन जाये। लेखिन कभी भी फेसिअल और ब्लीच करते समय विशेष बातो पर ध्यान देना जरुरी हे.

फेशियल और ब्लीच में क्या अंतर है ?(What is difference between facial and bleaching?)


फेशियल का इस्तेमाल चेहरे को खूबसूरत और ग्लोइंग स्किन बनाने के लिए होता है

जबकि ब्लीच का प्रयोग चेहरे के बालों का रंग हल्का करने और टैनिंग दूर करने के लिए होता है।

फेशियल की सारी प्रोसेस को कम से कम दो घंटे लगते हैं जबकि ब्लीच को अधिकतम 30 मिनट लगते हैं.

facial includes various steps that aim to improve skin quality through deep cleansing and rejuvenating procedures.

bleach specifically refers to a whitening chemical or ingredient which aims to lighten complexion. On the other hand.
फेसिअल करवाने के तुरंत बाद आपको कई बातो पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अगर आप इस बारेमे सावधानी नहीं रखते तो चेहरे पे रैशेस भी पद सकते हे.

फेसिअल करवाने के तुरंत बाद आपको किन बातो पर विशेष ध्यान देना चाहिए।


फेसिअल करवानेके तुरंत बाद कभी वैक्सीन नहीं करवानी चाहिए क्योंकि फेसिअल के बाद चेहरे की ऊपरी त्वचा बहुत ही सेन्सिटिव हो जाती हे.और वैक्स करने से ओ skin डैमेज हो सकती हे.

अगर आपको थ्रेडिंग और फेसिअल दोनों करवाना हे तो पाहिले थ्रेडिंग करवाना चाहिए। फेसिअल करने के बाद थ्रेडिंग कराने से ज्यादा तकलीफ का सामना करना पद सकता हे.

फेसिअल करने के बाद तुरंत धुप में नहीं जाना चाहिए। इससे सनबर्न का खतरा बढ सकता हे. अगर जाना जरुरी ही हे तो मुँह को पूरी तरह से किसी कॉटन कपडेसे कवर करके जाना चाहिए।

फेसिअल के बाद चेहरा बहोत सेन्सिटिव हो जाता हे तो फेसिअल करवाने के बाद चेहरे को बार बार touch नहीं करना चाहिए। genarly भी चेहरे को बार बार touch नहीं करना चाहिए।

ब्लीच करते समय ध्यान देने योग्य बातें


थ्रैडिंग, वैक्सिंग, स्टीम व स्क्रबिंग के बाद कभी ब्लीच न करें.

ब्लीचिंग करने से पहले प्री ब्लीच लोशन या लाइट मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें खासकर शुष्क व सैंसिटिव स्किन पर.

दि ब्लीच लगाने पर जलन महसूस हो, तो ठंडे पानी से चेहरे को तुरंत धो लें. बर्फ लगाएं.

ब्लीच का इस्तेमाल पैच टैस्ट के बाद ही करें.

कटीफटी त्वचा पर bleach का इस्तेमाल न करें.

ब्लीच का इस्तेमाल 15 से 20 दिन से पहले दोबारा न करें.

ब्लीच को 15 मिनट से ज्यादा समय तक न लगाएं रखें.

ब्लीच क्रीम में ऐक्टिवेटर मिक्स करते समय मैटल चम्मच व मैटल बाउल का इस्तेमाल न करें.

चेहरे के ब्लीच को शरीर पर और शरीर के ब्लीच को चेहरे पर न लगाएं.

ब्लीच करते समय टीवी देखने या किताब पढ़ने से परहेज करें, क्योंकि यह आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है.

ब्लीच करने के 6 घंटे बाद तक साबुन या फेसवाश का प्रयोग न करें.

धूप से आने के तुरंत बाद ब्लीच न करवाएं. शरीर का तापमान सामान्य होने पर करवाएं.

जिन की बौडी हीट ज्यादा रहती हो वे स्किन की जांच करवा कर ही स्किन के अनुरूप ब्लीच करवाएं.

आफ्टर ब्लीच सनगार्ड लगा कर ही धूप में निकलें.

फेशियल के बाद ब्लीच कर सकते हैं क्या? (Can I do facial after bleach?)


कभी फेशियल करने के बाद ब्लीच का इस्तेमाल न करें वरना परिणाम गंभीर हो सकता है.

पाहिले ब्लीच करना चाहिए फिर फेसिअल करना चाहिए।

When you bleach your skin, it opens the pores , if you do not close it, dirt go inside and start damaging your skin. So make sure you do facial/clean up after bleach.

ब्लीच करने के फायदे



  • ब्लीच से फेशियल हेयर स्किनटोन अच्छी तरह मैच हो कर ईवन फेयर ग्लो देती है.

  • 10 से 15 मिनटों में ही स्किन फेयर व रैडिएंट नजर आने लगती है.

  • ब्लीच स्किन की डैड लेयर को रिमूव कर के स्किन को ब्राइट लुक प्रदान करता है.

  • पोस्ट ब्लीच पैक स्किन को हाइड्रेट कर के व्हाइटनिंग बैनिफिट देता है.

  • सनटैन को रिमूव कर के मैलानिन को लाइट कर के स्किनटोन को लाइटर व फेयर करता है.


ब्लीच के नुकसान



  • ब्लीच में मरकरी होता है, जो त्वचा को नुकसान पहुंचता है, इसलिए ब्लीच का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा न करें.

  • ब्लीच के बाद त्वचा लाल हो जाए, तो धूप व आंच के संपर्क में न आएं.

  • सांवलों को ही नहीं गोरी रंगत वालों को भी ब्लीचिंग की जरूरत पड़ती है, लेकिन स्किन के अनुरूप ब्लीच न होने पर यह स्किन डैमेज का कारण भी बन सकता है.

  • ब्लीच के परिणामस्वरूप त्वचा में दर्द, उस का छिलना, लाल व भूरे रंग के धब्बे या सूजन होने का मतलब ब्लीच रिऐक्ट कर गया है.

  • अगर आप ने कैमिकल पीलिंग करवाई है, तो ब्लीच का इस्तेमाल कम से कम 4 से 6 महीने तक न करें. सौंदर्य विशेषज्ञा से सलाह ले कर ही ब्लीचिंग का इस्तेमाल करें.

  • ब्लीच को आंखों व भौंहों के आसपास न लगाएं वरना परेशानी हो सकती है.

  • ब्लीच कुशल हाथों से ही करवाएं और ब्रैंडेड प्रोडक्ट्स branded products का ही इस्तेमाल करें.


होंठ काले पड़ने के कारण और इलाज

 

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