शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

कम्प्यूटर के अवयव


Components of Computers-


Input ( input unit/ devices )-इनपुट

Output ( output unit / devices) - आउटपुट

central processing unit-सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट

memory unit-मैमोरी यूनिट

Components of Computer in hindi

Input- इनपुट :


इनपुट यूनिट कीबॉर्ड और माउस जैसे सहायक उपकरण की सहायता से दुनिया के बाहर के डेटा या अनुदेशों को स्वीकार करता है इनपुट यूनिट को द्विआधारी संख्या प्रणाली में डेटा परिवर्तित या बदलना और आगे और अतिरिक्त प्रसंस्करण के लिए डेटा आगे पहुंचाने की जिम्मेदारी होती हे ।

Input Device कई रूप में उपलब्ध है तथा सभी के विशिष्ट उद्देश्य है टाइपिंग के लिये हमारे पास Keyboard होते है, जो हमारे निर्देशों को Type करते हैं|

  • Keyboard

  • Mouse

  • Joy Stick

  • Light pen

  • Track Ball

  • Scanner

  • Graphic Tablet

  • Microphone/ Mic

  • Magnetic Ink Card Reader (MICR)

  • Optical Character Reader (OCR)

  • Bar Code Reader

  • Optical Mark Reader


Output - आउटपुट :


आउटपुट यूनिट एक ऐसा इकाई है जो नतीजा पैदा करता है या बना देता है, जो डेटा या सूचना कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज की जाती है वह द्विआधारी रूप में होती है आउटपुट इकाई डेटा को मानव-पठनीय या बुद्धिमानी रूप में बदल देती है और उत्पादन या वितरित करती है प्रिंटर और मॉनिटर की मदद से आउटपुट उपलब्ध होती हे

  • Projector

  • Monitor/ VDU

  • Printer

  • Plotter

  • Speaker

  • Microphone

  • Sound card

  • Power supply

  • Uninterruptible power supply


3.सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट -central processing unit


CPU का पूरा नाम Central Processing Unit है । इसे processor या microprocessor भी कहता हैं । यह PC से जुड़े विभिन्न उपकरणों को नियंत्रित करता है । यह कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है । यह एक इलेक्ट्रॉनिक microchip है जो डेटा को information में बदलते हुए process करता है । इसे computer का दिमाग़ कहा जाता है । यह कम्प्यूटर system के सारे कार्यों को नियंत्रित करता है तथा यह इनपुट को आउटपुट में रूपान्तरित करता है । यह इनपुट तथा output device से मिलकर पूरा कम्प्यूटर System बनाता है ।

Components of Computer in hindi

इसके निम्नलिखित भाग है :-

Control Unit - कण्ट्रोल यूनिट :


कण्ट्रोल यूनिट को आंतरिक संचालन के पर्यवेक्षक या तंत्रिका तंत्र के रूप में कहा जा सकता है, यह कंप्यूटर सिस्टम को प्रदान किए गए हर एक ऑपरेशन में अनुवाद करता है। उस बिंदु पर जब डेटा कंप्यूटर सिस्टम को प्रदान किया जाता है, तो यह मौलिक और आवश्यक कार्रवाई करता है, यह हर एक्शन को नियंत्रित करता है और बाद में यह तय करता है कि उसे प्रस्तुत डेटा या जानकारी के साथ क्या करना है। पीसी में मौजूद प्रत्येक यूनिट के साथ नियंत्रण इकाई नियंत्रण और सुविधा होती है

ALU - एएलयू :


एएलयू "अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट" के लिए हे यह आपरेशनों में उपयोग किए जाने वाले (समान, छोटा , बड़ा जैसे अतिरिक्त, घटाव, गुणन, विभाजन, तुलना और तार्किक कार्यों जैसे सभी कार्यों के लिए जिम्मेदार और प्रभारी है । अंकगणित और तर्क इकाई से परिणाम एक अस्थायी मेमोरी में संग्रहीत रहता हैं।

4.Storage Unit - स्टोरेज यूनिट : memory unit


कंप्यूटर सिस्टम में दो प्रकार की स्टोरेज यूनिट है

Primary Storage - प्राइमरी स्टोरेज
Secondary Storage - सेकेंडरी स्टोरेज

Primary Storage - प्राइमरी स्टोरेज : प्राइमरी स्टोरेज को "मेन मेमोरी" कहा जा सकता है, अगर कोई पावर विफलता हो या कंप्यूटर सिस्टम शुरू न हो रहा हो , तो डेटा को स्टोर या सहेज नहीं सकता, इसलिए उसे "Temporary memory " कहा जा सकता है डेटा या निर्देश प्राथमिक मेमोरी में अतिरिक्त भंडारण के लिए एएलयू में स्थानांतरित करने से पहले प्राथमिक मेमोरी में जमा होता है, माध्यमिक भंडारण की तुलना में प्राथमिक स्मृति [Memory] में एक सीमित भंडारण क्षमता है, और बहुत महंगा है। उदाहरण :: रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी)

Secondary Storage - सेकेंडरी स्टोरेज: सेकेंडरी स्टोरेज को "PERMANENT STORAGE" कहा जा सकता है, सेकेंडरी स्टोरेज मेमोरी ये हमारे डाटा या फिर हमारी जानकारी को हमेशा के लिए सुरक्षित रख सकता हें आप कि जानकारी तब भी सुरक्षित रहती जब कंप्यूटर काम करना बंद कर दे या फिर बिजली चली जाये . इस मेमोरी को "Permanent Memory" भी कहा जाता हें | इस तरह की मेमोरी काफी सस्ती होती हें अगर आप तुलना करे "Primary memory " से.

कंप्यूटर का खोज कब हुआ था , किसने किया था ? - When the computer was discovered. And who did that?
कंप्यूटर का परिचय - Introduction to Computers in Hindi
कंप्यूटर का वर्गीकरण - Classification Of Computer in hindi
आकार के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण - classification of computer on the basis of Size in hindi
कम्प्यूटर के अवयव - Components of Computer in hindi

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

आकार के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण




classification of computer on the basis of Size

कंप्यूटर को चार प्रकार से विभाजित किया गया है.


1. माइक्रो कंप्यूटर(micro computer)

2. मिनी कंप्यूटर (mini computer)

3. मेनफ्रेम कंप्यूटर (mainframe computer )

4. सुपर कंप्यूटर (super computer)

1. माइक्रो कंप्यूटर  - what is micro computer in hindi


साल 1970 ई. में टेक्नोलॉजी की क्षेत्र में जानी मानी कंपनी इंटेल(intel) द्वारा माइक्रोप्रोसेसर(micro processor) का आविष्कार हुआ, इंटेल द्वारा बनाए गए माइक्रो प्रोसेसर(micro processor) के मार्केट में आने से

टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी विकास हुआ इन माइक्रोप्रोसेसर(micro processor) के प्रयोग से कंप्यूटर प्रणाली काफी हद तक सस्ती हो गई.micro computer की श्रेणी में आने वाले कंप्यूटर इतने छोटे होते थे कि इन्हें हम अपनी Desk पर भी रखकर उपयोग कर सकते थे.आज के समय में जो कंप्यूटर में उपयोग करते हैं वह भी माइक्रो कंप्यूटर की श्रेणी में आते हैं.माइक्रो कंप्यूटर का उपयोग मुख्य व्यवसाय या चिकित्सा के क्षेत्र में किया जाता है.माइक्रो कंप्यूटर के उदाहरण कुछ इस प्रकार है:- iMac,IBM PS/2,APPLE MAC इत्यादि .

माइक्रो कंप्यूटर(micro computer) कई प्रकार के होते हैं

1. डेस्कटॉप कंप्यूटर-(Desktop Computer):-


आपने अपने डेस्क पर रख कर computer तो बहुत बार ही चलाया होगा और आज आप अपने हाथ में भी लेकर computer चलाते हैं जो कि मोबाइल है हां मोबाइल को भी कंप्यूटर कह सकते हैं. जो पहले की कंप्यूटर होते थे

जिन्हें आप अपने डेस्क पर रखकर चलाते थे .उन्हें ही डेस्कटॉप कंप्यूटर कहते हैं desktop computer ज्यादातर व्यापारिक कार्यों में ही उपयोग में लाए जाते हैं और यह सबसे ज्यादा प्रयोग में लाए जाते हैं. सबसे अधिक प्रयोग में लाए जाने का इनका कारण यह है कि यह सस्ते(Cheap) और टिकाऊ(Durable) होते हैं.

2. लैपटॉप-(laptop):-


लैपटॉप शब्द से आप जरूर परिचित होंगे .1981 ई. में एडम ओसबोर्न ने लैपटॉप का आविष्कार किया था.तकनीक(Technology) ने हमारे कंप्यूटर जो कि हम अपने डेस्क पर रखकर चलाते है. उसको ऐसा रूप दे दिया है अब हम उसे डेस्क(table) पर रखकर चला सकते हैं और जहां चाहे वह लेकर भी जा सकते हैं जोकि डेस्कटॉप का आधुनिक रूप लैपटॉप(Laptop) है.

3.टैबलेट-(Tablet):-


लैपटॉप(Laptop) का छोटा रूप है टेबलेट. टेबलेट उपयोग करने में लैपटॉप(Laptop) और डेस्कटॉप(Desktop) दोनों से ही बेहतर होते हैं क्योंकि हम इन्हें अपने हाथ में लेकर चला सकते हैं.और जहाँ चाहे लेकर जा सकते है

और जहा चाहे use कर सकते है .टेबलेट Reachargable होते है .इन्हें हम एक बार चार्ज कर के घंटो तक use में ले सकते है .

2. मिनी कंप्यूटर -what is mini computer in hindi


मध्यम आकार के इन कंप्यूटरों की कार्य क्षमता और कीमत दोनों ही माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में अधिक होती है जिस कारण यह व्यक्तिगत प्रयोग में नहीं लाए जाते है . इनका उपयोग प्रायः छोटी कंपनियां करती हैं. मिनी कंप्यूटर की गति 10 से 30 (MIPS) मेगा इंस्ट्रक्शंस पर सेकंड होती है. मिनी कंप्यूटर के अंतर्गत आने वाले कुछ कंप्यूटर निम्नलिखित :- HP 9000,RISC 6000,BULL HN-DPX2 और AS 400.

3. मेनफ्रेम कंप्यूटर के बारे में-what is mainframe computer in hindi


इन computers को सायद आपने कभी भी न देखा हो .हा ,लेकिन आप इन्हें नीचे दी गयी image में देखकर अंदाजा लगा सकते है यह कंप्यूटर कैसे होते थे .

यह कंप्यूटर size में बहुत ही बड़े होते हैं यह कंप्यूटर कार्य क्षमता और कीमत में भी मिनी और माइक्रो कंप्यूटर से अधिक होते हैं. अतः बड़ी – बड़ी कंपनियों में एक केंद्रीय कंप्यूटर(Main computer) के रूप में इनका प्रयोग होता है.

मेनफ्रेम कंप्यूटर को एक्सेस(access) करने के लिए उपयोगकर्ता प्रायः नोड(Node) का इस्तेमाल करते हैं. अधिकतर कंपनियों में मेनफ्रेम कंप्यूटर(MainFrame Computer) का उपयोग बिल का ब्यौरा रखने ,विलो को भेजने ,Labours का भुगतान करने ,

आदि कार्यो में किया जाता है .मेनफ़्रेम कंप्यूटर(MainFrame Computer) के उदाहरण निम्नलिखित हैं:- CDS-CYBER,IBM 4381,ICL 39,UNIVAC-1110 आदि.

4. सुपर कंप्यूटर के बारे में-what is super computer in hindi


भारत में भी आज कल super computers की खोज होने लगी है .हाल ही में वर्तमान प्रधानमंत्री (माननीय नरेन्द्र मोदी) ने BHU में “परम शिवाय ” नामक super कंप्यूटर का लोकार्पण किया .

सुपर कंप्यूटर(super computer) सर्वाधिक गति,संग्रह क्षमता एवं उच्च विस्तार वाले होते हैं.इनका आकार(size) एक सामान्य कमरे के बराबर होता है. विश्व का प्रथम सुपर कंप्यूटर ‘क्रे रिसर्च’ कंपनी द्वारा 1976 विकसित किया गया था.जिसका नाम ”क्रे – 1″ था.

भारत के पास भी सुपरकंप्यूटर है तथा भारत के प्रथम सुपर कंप्यूटर का नाम ‘परम’ है .इसका विकास “C-DAC ” ने किया था, इसका विकसित रूप ‘परम 10000” भी अब तैयार कर लिया गया है.

सुपर कंप्यूटर का मुख्य उपयोग मौसम की भविष्यवाणी करने एनिमेशन(Animation) तथा चलचित्र(Video) का निर्माण करने अंतरिक्ष यात्रा के लिए अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने और शोध प्रयोगशालाओं में शोध व
खोज(Research) करने इत्यादि कार्यों में किया जाता है.सुपर कंप्यूटर के अंतर्गत आने वाले मुख्य कंप्यूटर इस प्रकार हैं:- PARAM,PARAM-10000,CRAY-2,NEC-500 आदि.

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कंप्यूटर का वर्गीकरण




कंप्यूटर उनके डाटा प्रोसेसिंग क्षमताओं के आधार पर भिन्न होते हैं। वे उद्देश्य, डाटा हैंडलिंग और कार्यक्षमता के अनुसार वर्गीकृत किए गए हैं।
उद्देश्य के अनुसार, कंप्यूटर या तो सामान्य उद्देश्य या विशिष्ट उद्देश्य हैं सामान्य उद्देश्य कंप्यूटर कार्यों की एक श्रृंखला को करने के लिए डिज़ाइन कर रहे हैं। उनके पास कई कार्यक्रमों को स्टोर करने की क्षमता है, लेकिन गति और दक्षता में कमी विशिष्ट उद्देश्य कंप्यूटर विशिष्ट समस्या को नियंत्रित करने या एक विशिष्ट कार्य करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। निर्देशों का एक सेट मशीन में बनाया गया है।

According to functionality, computers are classified as :


Three Types of Computer - कंप्यूटर के तीन प्रकार



  1. Analog Computers - एनालॉग कंप्यूटर

  2. Digital Computers - डिजिटल कंप्यूटर

  3. Hybrid Computers (Analog+Digital) हाइब्रिड कंप्यूटर (एनालॉग + डिजिटल)


Analog Computer - एनालॉग कंप्यूटर


एक एनालॉग कंप्यूटर (ब्रिटिश अंग्रेजी में वर्तनी एनालॉग) कंप्यूटर का एक रूप है जो समस्या का हल करने के लिए इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल या हाइड्रोलिक मात्राओं जैसे सतत भौतिक घटनाओं का उपयोग करता है।

एनालॉग कंप्यूटर "वोल्टेज, प्रेशर" और इलेक्ट्रिक करंट को मापने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं ये मात्राएं लगातार भिन्न होती हैं और लगातार एक माप से दूसरे में बदलती हैं, जैसे इंसान या व्यक्ति का तापमान। वे एक एनालॉग डेटा या सरल डेटा में दिए गए डेटा या निर्देश या जानकारी की प्रक्रिया करते हैं। वे गिनती या जांचने के बजाय मापने के लिए सुसज्जित हैं वे विशेष रूप से मापने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और संख्याओं पर अंकगणितीय गणना कर सकते हैं, जहां संख्याओं को भौतिक मात्रा मैं दर्शाया जाता है

Examples of Analog Computer - एनालॉग कंप्यूटर के उदाहरण ::

Speedometer- स्पीडोमीटर
Thermometer- थर्मामीटर

Digital Computer - डिजिटल कंप्यूटर


एक कंप्यूटर जो अंकों के रूप में दर्शाए गए मात्रा के साथ गणना और तार्किक संचालन करता है, आमतौर पर द्विआधारी संख्या प्रणाली में.

"डिजिटल कंप्यूटर" द्विआधारी संख्या प्रणाली में उन्हें दिए जाने पर अंकगणित और तार्किक संचालन को पूरा या निष्पादित कर सकते हैं। इस प्रकार के कंप्यूटर तापमान, विद्युत प्रवाह, और वोल्टेज जैसी भौतिक मात्राओं को मापने के लिए नहीं हैं। वे उच्च गति प्रोग्रामयोग्य मशीन या कंप्यूटर हैं जो कई गणितीय गणनाओं को चला सकते हैं, और डेटा या जानकारी को स्टोर कर सकते हैं। जब कोई निर्देश या दिशा दी जाती है तो वे उस अनुदेश या डेटा या सूचना को मशीन रीडबल फॉर्म में परिवर्तित करते हैं जो 0 या 1 है को "Binary Number System" कहा जाता है उदहारण :: Desktop Computer OR Personal Computer (PC) डेस्कटॉप कंप्यूटर या पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) लैपटॉप

Hybrid Computer (Analog+Digital) - हाइब्रिड कंप्यूटर (एनालॉग + डिजिटल)


उन कंप्यूटरों का एक संयोजन जो डिजिटल और एनालॉग संकेतों में इनपुट और आउटपुट करने में सक्षम हैं। एक हाइब्रिड कंप्यूटर सिस्टम सेटअप जटिल सिमुलेशन प्रदर्शन करने की लागत प्रभावी तरीका प्रदान करता है।

वे एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर के गुण और विशेषताओं दोनों को प्राप्त कर सकते हैं, वे भौतिक मात्राओं के साथ-साथ गिनती या जांच कर सकते हैं या उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं या आमतौर पर वैज्ञानिक और चिकित्सा उपयोग किया जाता है। बस उदाहरण के लिए कुछ मशीनें हैं जो मानव शरीर के हृदय की धड़कन और तापमान की गणना कर सकते हैं और उन्हें परिवर्तित कर सकते हैं या उन्हें संख्याओं में बदल सकते हैं।

 

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कंप्यूटर का खोज कब हुआ था , किसने किया था ?




When the computer was discovered. And who did that?

अगर एक लाइन में कहे तो कंप्यूटर का अविष्कारक को Charles Babbage माना जाता है , क्योंकि सबसे पहले उन्होंने Programmable Computer का डिजाईन तैयार किया था . 1822 में Charles Babbage नें “डिफरेंशिअल इंजन” नाम के मैकेनिकल कंप्यूटर का आविष्कार किया था | लेकिन पैसे की कमी होने के कारन वो पूरा न हो सका

इसके बाद 1938 में United States Navy ने इलेक्ट्रो मैकेनिकल कंप्यूटर बनाया | जिसका नाम था टारपीडो डाटा कंप्यूटर (Torpedo Data Computer) .

इसके बाद 1939 में Konrad Zuse ने Z2 कंप्यूटर बनाया | जिसमे पहली बार वैक्यूम ट्यूब्स का इस्तेमाल किया गया |और ये ही सबसे पहला Electromechanical Relay कंप्यूटर था | इसके बाद में इस को और बेहतर बनाया गया और इसके बाद Z3 कंप्यूटर बनाया गया जिसमें लगभग 2000 रिले का इस्तेमाल किया गया |

When the computer was discovered. And who did that?

बेल लेबोरेटरीज में 1947 में का ट्रांजिस्टर आविष्कार किया है ,ट्रांजिस्टर एक स्विच की तरह काम करता है जो की सर्किट को ON या ऑफ कर सकता है और ये एम्पलीफायर की तरह भी काम करता है |ट्रांजिस्टर के आने से कंप्यूटर की दुनिया में बहुत ज्यादा बदलाव आया पहले जो कंप्यूटर थे उनका साइज बहुत बड़ा था लेकिन ट्रांजिस्टर से उन्ही कंप्यूटर का साइज बहुत छोटा हो गया। इसके बाद आया माइक्रोप्रोसेसर जिसके कारण कंप्यूटर की स्पीड बढ़ गई और Price कम हो गए

दुनिया का सबसे पहला Desktop Personal कंप्यूटर Italian Company Olivetti ने 1964 में बनाया था | जिसका Price $ 3,200 था आज के हिसाब से लगभग 2 लाख रूपए था |

1985 में Atari Corporation ने 520ST कंप्यूटर बनाया | ये एक 32 बिट का रंगीन कंप्यूटर था और इसमें 256 Kb RAM थी और 3 1⁄2-Inch की एक Floppy Disks थी जो की स्टोरज का काम करती थी |

When the computer was discovered. And who did that?

Laptop का आविष्कार 1 9 81 में एडम ओसबोर्न ने किया था .

आईबीएम 5100 पहला पोर्टेबल कंप्यूटर है, जिसे सितंबर 1975 को जारी किया गया था। कंप्यूटर का वजन 55 पाउंड था और इसमें पांच इंच का सीआरटी डिस्प्ले, टेप ड्राइव, 1.9 मेगाहर्ट्ज पाम प्रोसेसर और 64 केबी रैम था। तस्वीर में आईबीएम 5100 का एक विज्ञापन वैज्ञानिक अमेरिका के नवंबर 1975 के अंक से लिया गया है।

पहला सचमुच पोर्टेबल कंप्यूटर या लैपटॉप ओसबोर्न I माना जाता है, जिसे अप्रैल 1981 को जारी किया गया था और एडम ओसबोर्न द्वारा विकसित किया गया था। ओसबोर्न I का वजन 24.5 पाउंड था, इसमें 5 इंच का डिस्प्ले था, 64 केबी मेमोरी, दो 5 1/4 "फ्लॉपी ड्राइव, सीपी / एम 2.2 ऑपरेटिंग सिस्टम चला, एक मॉडेम शामिल था, और यूएस $ 1,795 खर्च किया गया था।

When the laptop was discovered. And who did that?

बाद में आईबीएम पीसी डिवीजन(Division) (PCD) ने 1984 में आईबीएम पोर्टेबल जारी किया, यह पहला पोर्टेबल कंप्यूटर है जिसने वजन 30 पाउंड में किया था। बाद में 1 9 86 में, आईबीएम पीसीडी ने इसका पहला लैपटॉप कंप्यूटर, PC Division, 12 पाउंड वजन की घोषणा की। अंत में, 1994 में, आईबीएम ने एक एकीकृत(Integrated) सीडी-रोम के साथ पहली नोटबुक आईबीएम थिंकपैड 775 CD पेश की।

लैपटॉप की खोज कब हुई थी। और कौन किया था?


पहला ऐप्पल लैपटॉप, Macintosh पोर्टेबल, सितंबर 1989 में जारी किया गया था। इसके आकार और लागत (लगभग 6500 डॉलर) के कारण, यह बहुत लोकप्रिय नहीं था। ऐप्पल ने लैपटॉप विकास के लिए अपना दृष्टिकोण बदल दिया और अक्टूबर 1991 में, लैपटॉप की पावरबुक लाइन जारी की। उन्होंने पावरबुक 100, पावरबुक 140 और पावरबुक 170 जारी किए, जो कंप्यूटर बाजार में अधिक अच्छी तरह से प्राप्त हुए थे।

समय समय पर बहुत सारी कंपनी ने अपने अपने कंप्यूटर बनाये और हर बार एक बेहतर कंप्यूटर बनाते गए.

 

कंप्यूटर का खोज कब हुआ था , किसने किया था ? - When the computer was discovered. And who did that?
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कम्प्यूटर के अवयव - Components of Computer in hindi

बुधवार, 29 जनवरी 2020

कंप्यूटर का परिचय




Introduction to Computers in Hindi

full name of computer = commonly operating machine in particular used for technical educational research (विशेष रूप से तकनीकी शैक्षिक अनुसंधान के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल की जाने वाली मशीन)

Computer एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसे सूचना के साथ काम करने के लिए बनाया गया है कंप्यूटर का शब्द लैटिन शब्द "Compute" से लिया गया है, इसका मतलब है कि गणना या प्रोग्राम योग्य मशीन।

कंप्यूटर शब्द अंग्रेजी के "Compute" शब्द से बना है, जिसका अर्थ है "गणना", करना होता है इसीलिए इसे गणक या संगणक भी कहा जाता है, इसका अविष्‍कार Calculation करने के लिये हुआ था, पुराने समय में Computer का use केवल Calculation करने के लिये किया जाता था किन्‍तु आजकल इसका use डाक्‍यूमेन्‍ट बनाने, E-mail, listening and viewing audio and video, play games, database preparation के साथ-साथ और कई कामों में किया जा रहा है, जैसे बैकों में, शैक्षणिक संस्‍थानों में, कार्यालयों में, घरों में, दुकानों में, Computer का उपयोग बहुतायत रूप से किया जा रहा है

Computer केवल वह काम करता है जो हम उसे करने का कहते हैं यानी केवल वह उन Command को फॉलो करता है जो पहले से computer के अन्‍दर डाले गये होते हैं, उसके अन्‍दर सोचने समझने की क्षमता नहीं होती है, computer को जो व्‍यक्ति चलाता है उसे यूजर कहते हैं, और जो व्‍यक्ति Computer के लिये Program बनाता है उसे Programmer कहा जाता है।

Computer प्रोग्राम के बिना कुछ भी नहीं कर सकता। यह बाइनरी अंकों की स्ट्रिंग के माध्यम से दशमलव संख्याओं का प्रतिनिधित्व करता है। शब्द 'कंप्यूटर' आमतौर पर Central Processor Unite और Internal Memory को संदर्भित करता है।

Introduction to Computers in hindi

कम्प्यूटर का जनक कौन है


कम्प्यूटर का जनक चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) को कहा जाता है, चार्ल्स बैबेज जन्म लंदन में हुआ था वहां की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है तो अंग्रेजी से ही कोई शब्द क्यों नहीं लिया गया इसकी वजह यह है कि जो अंग्रेजी भाषा है उसके तकनीकी शब्द खासतौर पर प्राचीन ग्रीक भाषा और लैटिन भाषा पर आधारित है इसलिए कंप्यूटर शब्द के लिए यानी एक ऐसी मशीन के लिए जो गणना करती है उसके लिए लैटिन भाषा के शब्द कंप्यूट (Comput) को लिया गया

चार्ल्स बबेज को कंप्यूटर का "ग्रैंड फादर" कहा जाता है चार्ल्स बबेज द्वारा डिजाइन किए गए पहले मैकेनिकल कंप्यूटर को Analytical Engine कहा जाता है। यह पंच कार्ड के रूप में Read - Only Memory का उपयोग करता है

कंप्यूटर एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो उपयोगकर्ता से इनपुट के रूप में कच्चे डेटा(raw data) लेता है और निर्देशों के सेट (नियंत्रण प्रोग्राम) के नियंत्रण में इन आंकड़ों को प्रोसेस करता है और परिणाम (आउटपुट) देता है और भविष्य के उपयोग के लिए आउटपुट बचाता है। यह संख्यात्मक और गैर-संख्यात्मक (अंकगणित और तार्किक) गणनाओं पर प्रक्रिया कर सकता है।

कंप्यूटर का बेसिक क्या है?


एक कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से बना है, और यह कई प्रकार के आकार और विन्यास में मौजूद हो सकता है। हार्डवेयर शब्द आपके कंप्यूटर के भौतिक घटकों जैसे सिस्टम यूनिट, माउस, कीबोर्ड, मॉनिटर आदि को संदर्भित करता है। सॉफ्टवेयर वह निर्देश हैं जो कंप्यूटर को काम करते हैं।

कंप्यूटर की पूरी जानकारी क्या है?


एक कंप्यूटर एक प्रोग्रामेबल डिवाइस है जो डेटा को स्टोर, पुनर्प्राप्त और प्रोसेस कर सकता है। ... आज के कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं जो डेटा (इनपुट) को स्वीकार करते हैं, उस डेटा को प्रोसेस करते हैं, आउटपुट का उत्पादन करते हैं, और परिणामों को स्टोर (स्टोरेज) करते हैं।

Introduction to Computers in hindi

कंप्यूटर का मूल ज्ञान क्या है?


कंप्यूटर का ज्ञान - कंप्यूटर के मुख्य भाग। कंप्यूटर हार्डवेयर वह है जिसे आप शारीरिक रूप से स्पर्श कर सकते हैं जिसमें कंप्यूटर केस, मॉनिटर, कीबोर्ड और माउस शामिल हैं। इसमें कंप्यूटर के मामले के सभी भाग भी शामिल हैं, जैसे हार्ड डिस्क ड्राइव, मदरबोर्ड, वीडियो कार्ड, और कई अन्य।

कंप्यूटर का महत्व क्या है?


ह्यूस्टन क्रॉनिकल के अनुसार, कंप्यूटर दुनिया भर के लोगों के बीच पैसे बचाने, दक्षता में सुधार और संचार की सुविधा प्रदान करने की उनकी क्षमता के कारण महत्वपूर्ण हैं। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी बताती है कि शिक्षा और मनोरंजन दोनों के लिए अक्सर कंप्यूटर का व्यापक घरेलू उपयोग होता है।

कंप्यूटर के भागों का नाम – Computer parts Name in Hindi


प्रोसेसर – Micro Processor.
मदर बोर्ड – Mother Board.
मेमोरी – Memory.
हार्ड डिस्क – Hard Disk Drive.
मॉडेम – Modem.
साउंड कार्ड – Sound Card.
मॉनिटर – Monitor.
की-बोर्ड माउस – Keyboard/Mouse.

Computer मूलत दो भागों में बॅटा होता है-

सॉफ्टवेयर
हार्डवेयर

Introduction to Computers in hindi

डिजिटल कंप्यूटर परिभाषा(Digital Computer definition )


आधुनिक डिजिटल कंप्यूटर के बुनियादी घटक हैं: इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस, सेंट्रल प्रोसेसर यूनिट (सीपीयू), बड़े पैमाने पर भंडारण उपकरण और मेमोरी एक विशिष्ट आधुनिक कंप्यूटर एलएसआई चिप्स का उपयोग करता है

कंप्यूटर के बारे में चार कार्य हैं:


Input (Data)

एक इनपुट कंप्यूटर से कंप्यूटर में प्रवेश की गई कच्ची जानकारी है। यह पत्र, संख्या, चित्र इत्यादि का संग्रह है।

Process

प्रक्रिया निर्देश के अनुसार आंकड़ों का संचालन है। यह कंप्यूटर सिस्टम की पूरी तरह से आंतरिक प्रक्रिया है।

Output:-

डेटा प्रोसेसिंग के बाद कंप्यूटर द्वारा दिए गए संसाधित डेटा आउटपुट है। आउटपुट को परिणाम के रूप में भी कहा जाता है भविष्य के उपयोग के लिए हम इन परिणामों को भंडारण उपकरणों में सहेज सकते हैं।

कंप्यूटर वर्गीकरण: - आकार और शक्ति द्वारा[types of computer in hindi]


कंप्यूटर उनके डाटा प्रोसेसिंग क्षमताओं के आधार पर भिन्न होते हैं। वे उद्देश्य, डाटा हैंडलिंग और कार्यक्षमता के अनुसार वर्गीकृत किए गए हैं।

Analog Computer : एक कंप्यूटर जो कुछ निरंतर चर भौतिक मात्रा की संख्या का प्रतिनिधित्व करता है, जिनकी विविधताएं कुछ सिस्टम के मॉडल की नकल करते हैं।

Personal Computer : एक निजी कंप्यूटर एक कंप्यूटर छोटा और कम लागत है शब्द "व्यक्तिगत कंप्यूटर" का उपयोग डेस्कटॉप कंप्यूटर (डेस्कटॉप) के वर्णन के लिए किया जाता है।

Workstation : एक नेटवर्क में टर्मिनल या डेस्कटॉप कंप्यूटर। इस संदर्भ में, वर्कस्टेशन एक "सर्वर" या "मेनफ्रेम" के विपरीत उपयोगकर्ता के मशीन (क्लाइंट मशीन) के लिए केवल एक सामान्य शब्द है

Minicomputer : एक मिनी कंप्यूटर बहुत छोटा नहीं है कम से कम, जिस तरह से हम में से ज्यादातर मिनी के बारे में सोचते हैं। आप जानते हैं कि आपका व्यक्तिगत कंप्यूटर कितना बड़ा है और इसके संबंधित परिवार

Mainframe : यह एक बड़े कंप्यूटर को दर्शाता है जो पूरे निगम चलाता है।

SuperComputer: यह पृथ्वी पर सबसे बड़ा, सबसे तेज़ और सबसे महंगा कंप्यूटर है।
MicroComputer: आपका व्यक्तिगत कंप्यूटर एक माइक्रो कंप्यूटर है

 

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मंगलवार, 28 जनवरी 2020

सांपों से इंसान में पहुंचा Corona Virus




coronavirus come from a snakes

यह वायरस एनिमल्स से संबंधित है और मीट के होल सेल मार्केट, पोल्ट्री फर्म, सांप, चमगादड़ या फर्म एनिमल्स के जरिए ह्यूमन में आया है। इसके बाद इस वायरस का जेनेटिक डिटेल्स बेस्ड एनालिसिस किया गया। जानवरों से संबंधित अलग-अलग स्पेसीज के वायरस के साथ इसका मिलान कर इसे इंवेस्टिगेट किया गया। शोध में सामने आया कि करॉन वायरस एक पेथॉजन है। पेथॉजन एक तरह का इंफेक्शन एजेंट है, जो बीमारिया प्रड्यूस करने का काम करता है। इसे आप आम भाषा मे जर्म्स के तौर पर भी समझ सकते हैं।

करॉन वायरस इंसानों में आने से पहले सांपों में था। यानी यह सांपों से इंसान में आया है। माना जा रहा है कि इंसानों में फैलनेवाला वायरस वायरल प्रोटीन के साथ रिकॉम्बिनेश के जरिए बना है। यह वायरल प्रोटीन वायरस को बॉडी की प्रोटीन सेल्स पर वाइंड करता है, जो इसके लिए रिसेप्टर का काम करती हैं। इससे व्यक्ति संक्रमित हो जाता है।

coronavirus come from a snakes

करॉन वायरस का संबंध स्नेक्स यानी सांपों से हो सकता है। इस बात की पूरी संभावना होने के बाद माना जा रहा है कि यह वायरस सांपों से पानी में रहनेवाले उन जीव-जंतुओं तक पहुंचा, जिन्हें हम बतौर सी-फूड इस्तेमाल करते हैं। इस वायरस के ताजा केस दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में सामने आए और अब यह धीरे-धीरे चीन के दूसरे शहरों सहित अन्य देशों में भी फैलने लगा है।

आज करॉन वायरस को लेकर दुनियाभर के सभी देश परेशान हैं। यह वायरस भले ही चीन से शुरू हुआ हो लेकिन सी-फूड और ह्यूमन टु ह्यूमन ट्रांसफर के चलते यह रोग अलग-अलग देशों के कई लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। अभी तक इस वायरस का कोई पुख्ता इलाज इजात नहीं किया जा सका है। इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव का तरीका है।

Coronavirus क्या है, बीमारी के लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में जानें सब

Coronavirus के लक्षण, इलाज और बचाव



What are the symptoms of coronavirus

चीन के वुहान प्रांत से जिस जानलेवा और बेहद खतरनाक करॉना वायरस की शुरुआत हुई थी उसने एशियाई देशों के साथ-साथ अब अमेरिका और यूरोप तक के लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। सिर्फ चीन की बात करें तो करॉना वायरस की वजह से फैलने वाली निमोनिया जैसी बीमारी की वजह से अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और 800 से ज्यादा मरीज इस वायरस की वजह से संक्रमित हैं। चीन के तो 13 शहरों में एक तरह से शटडाउन की स्थिति है। इन 13 शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिया गया है और करोड़ों लोगों के आने जाने पर रोक लगा दी गई है। करॉना वायरस के तेजी से बढ़ते खौफ को देखते हुए भारत में भी सतर्कता पूरी तरह से बढ़ा दी गई है। अलग-अलग देशों से आने वाले विमान यात्रियों की सख्ती से जांच भी की जा रही है। इन सबके बीच आखिर क्या है करॉना वायरस, इसके लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में यहां जानें

क्या है करॉना वायरस?


करॉना वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है, जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या तक पैदा कर सकता है। इसके अलावा करॉना वायरस से SARS और MERS जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं। इस वायरस का नाम इसके शेप के आधार पर रखा गया है। ये वायरस जानवरों और इंसान दोनों को एक साथ संक्रमित कर सकता है। शोध में सामने आया है कि यह करॉना वायरस सांपों से इंसान तक पहुंचा है। यह वायरस ऐनिमल्स से संबंधित है और मीट के होल सेल मार्केट, पोल्ट्री फर्म, सांप, चमगादड़ या फर्म एनिमल्स के जरिए ह्यूमन में आया है।

What are the symptoms of coronavirus

कितना खतरनाक है ये वायरस?


दुनियाभर के स्वास्थ्य अधिकारी इस वायरस को लेकर सतर्क हैं और लोगों को भी सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं लेकिन यह वायरस कितना खतरनाक है इसके बारे में सटीक जानकारी अब तक नहीं मिल पायी है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने करॉना वायरस और इससे फैलने वाली निमोनिया जैसी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने से मना कर दिया है।

करॉना वायरस इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं?


करॉना वायरस की वजह से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानी श्वसन तंत्र में हल्का इंफेक्शन हो जाता है जैसा कि आमतौर पर कॉमन कोल्ड यानी सर्दी-जुकाम में देखने को मिलता है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण बेहद कॉमन हैं और कोई व्यक्ति करॉना वायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जैसे-

नाक बहना
सिर में तेज दर्द
खांसी और कफ
गला खराब
बुखार
थकान और उल्टी महसूस होना
सांस लेने में तकलीफ आदि
निमोनिया
ब्रॉन्काइटिस

What are the symptoms of coronavirus

करॉना वायरस को फैलने से कैसे रोकें?


- बीमार मरीजों की सही तरीके से मॉनिटरिंग की जाए

- रेस्पिरेटरी यानी सांस से जुड़ी बीमारी के लक्षण किसी में दिखें तो उससे दूर ही रहें

- जिन देशों या जगहों पर इस बीमारी का प्रकोप फैला है वहां यात्रा करने से बचें

- हाथों को अच्छी तरह से धोएं और हाथों की सफाई का पूरा ध्यान रखें

- खांसी या छींकते वक्त अपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढंककर रखें

- अपने हाथ और उंगलियों से आंख, नाक और मुंह को बार-बार न छूएं

- पब्लिक प्लेस, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कुछ भी छूने या किसी से हाथ मिलाने से बचें

What are the symptoms of coronavirus

क्या करॉना वायरस से मौत हो सकती है?


वैसे तो करॉना वायरस की शुरुआत सामान्य सर्दी-जुकाम या निमोनिया जैसी होती है लेकिन अगर केस गंभीर हो जाए तो इस इंफेक्शन की वजह से सीवियर अक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम, किडनी फेलियर या मल्टीपल ऑर्गन फेलियर तक हो सकता है जिस वजह से मौत हो सकती है।

क्या है करॉना वायरस का इलाज


वैसे तो इस बीमारी से लड़ने के लिए अब तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं हुई है लेकिन अमेरिका के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ NIH के अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि करॉना वायरस की वजह से फैली वायरल निमोनिया की इस बीमारी से लड़ने के लिए वैक्सीन बनायी जा रही है और महज 3 महीने के अंदर इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल यानी इंसानों पर ट्रायल शुरू हो जाएगा। इसके अलावा इसका इलाज सामान्य कोल्ड की बीमारी की तरह ही होता है जिसमें खूब सारा आराम करने की सलाह दी जाती है, फ्लूइड्स का ज्यादा सेवन करने को कहा जाता है और बुखार और गला खराब की दवा दी जाती है।

सांपों से इंसान में पहुंचा Corona Virus


Coronavirus के लक्षण, इलाज और बचाव


What are the symptoms of coronavirus

चीन के वुहान प्रांत से जिस जानलेवा और बेहद खतरनाक करॉना वायरस की शुरुआत हुई थी उसने एशियाई देशों के साथ-साथ अब अमेरिका और यूरोप तक के लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। सिर्फ चीन की बात करें तो करॉना वायरस की वजह से फैलने वाली निमोनिया जैसी बीमारी की वजह से अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और 800 से ज्यादा मरीज इस वायरस की वजह से संक्रमित हैं। चीन के तो 13 शहरों में एक तरह से शटडाउन की स्थिति है। इन 13 शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिया गया है और करोड़ों लोगों के आने जाने पर रोक लगा दी गई है। करॉना वायरस के तेजी से बढ़ते खौफ को देखते हुए भारत में भी सतर्कता पूरी तरह से बढ़ा दी गई है। अलग-अलग देशों से आने वाले विमान यात्रियों की सख्ती से जांच भी की जा रही है। इन सबके बीच आखिर क्या है करॉना वायरस, इसके लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में यहां जानें

क्या है करॉना वायरस?

करॉना वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है, जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या तक पैदा कर सकता है। इसके अलावा करॉना वायरस से SARS और MERS जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं। इस वायरस का नाम इसके शेप के आधार पर रखा गया है। ये वायरस जानवरों और इंसान दोनों को एक साथ संक्रमित कर सकता है। शोध में सामने आया है कि यह करॉना वायरस सांपों से इंसान तक पहुंचा है। यह वायरस ऐनिमल्स से संबंधित है और मीट के होल सेल मार्केट, पोल्ट्री फर्म, सांप, चमगादड़ या फर्म एनिमल्स के जरिए ह्यूमन में आया है।

What are the symptoms of coronavirus

कितना खतरनाक है ये वायरस?

दुनियाभर के स्वास्थ्य अधिकारी इस वायरस को लेकर सतर्क हैं और लोगों को भी सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं लेकिन यह वायरस कितना खतरनाक है इसके बारे में सटीक जानकारी अब तक नहीं मिल पायी है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने करॉना वायरस और इससे फैलने वाली निमोनिया जैसी बीमारी को अंतर्राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने से मना कर दिया है।

करॉना वायरस इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं?

करॉना वायरस की वजह से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानी श्वसन तंत्र में हल्का इंफेक्शन हो जाता है जैसा कि आमतौर पर कॉमन कोल्ड यानी सर्दी-जुकाम में देखने को मिलता है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण बेहद कॉमन हैं और कोई व्यक्ति करॉना वायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जैसे-

नाक बहना
सिर में तेज दर्द
खांसी और कफ
गला खराब
बुखार
थकान और उल्टी महसूस होना
सांस लेने में तकलीफ आदि
निमोनिया
ब्रॉन्काइटिस

What are the symptoms of coronavirus

करॉना वायरस को फैलने से कैसे रोकें?

– बीमार मरीजों की सही तरीके से मॉनिटरिंग की जाए

– रेस्पिरेटरी यानी सांस से जुड़ी बीमारी के लक्षण किसी में दिखें तो उससे दूर ही रहें

– जिन देशों या जगहों पर इस बीमारी का प्रकोप फैला है वहां यात्रा करने से बचें

– हाथों को अच्छी तरह से धोएं और हाथों की सफाई का पूरा ध्यान रखें

– खांसी या छींकते वक्त अपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढंककर रखें

– अपने हाथ और उंगलियों से आंख, नाक और मुंह को बार-बार न छूएं

– पब्लिक प्लेस, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में कुछ भी छूने या किसी से हाथ मिलाने से बचें

What are the symptoms of coronavirus

क्या करॉना वायरस से मौत हो सकती है?

वैसे तो करॉना वायरस की शुरुआत सामान्य सर्दी-जुकाम या निमोनिया जैसी होती है लेकिन अगर केस गंभीर हो जाए तो इस इंफेक्शन की वजह से सीवियर अक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम, किडनी फेलियर या मल्टीपल ऑर्गन फेलियर तक हो सकता है जिस वजह से मौत हो सकती है।

क्या है करॉना वायरस का इलाज

वैसे तो इस बीमारी से लड़ने के लिए अब तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं हुई है लेकिन अमेरिका के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ NIH के अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि करॉना वायरस की वजह से फैली वायरल निमोनिया की इस बीमारी से लड़ने के लिए वैक्सीन बनायी जा रही है और महज 3 महीने के अंदर इस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल यानी इंसानों पर ट्रायल शुरू हो जाएगा। इसके अलावा इसका इलाज सामान्य कोल्ड की बीमारी की तरह ही होता है जिसमें खूब सारा आराम करने की सलाह दी जाती है, फ्लूइड्स का ज्यादा सेवन करने को कहा जाता है और बुखार और गला खराब की दवा दी जाती है।

सांपों से इंसान में पहुंचा Corona Virus

सोमवार, 27 जनवरी 2020

पेट और कमर की चर्बी कम करने के लिए व्यायाम


पेट और कमर की चर्बी कम करने के लिए व्यायाम


पेट और कमर की चर्बी : सबसे पहले हम कार्डियो एक्सरसाइज (ह्रदय के लिए) के बारे में बात करते हैं :

1. दौड़ना


शरीर को चुस्त व दुरुस्त रखने के लिए रनिंग से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। दौड़ लगाने से जहां ह्रदय अच्छे से काम कर पाता है, वहीं अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और धीरे-धीरे चर्बी भी कम होने लगती है। शुरुआत में कुछ मीटर ही दौड़ें और तेज की जगह धीरे-धीरे दौड़ें। जब शरीर इसका अभ्यस्त हो जाए, तो अपनी गति और समय दोनों में वृद्धि कर सकते हैं।

2. तैराकी


इससे भी शरीर में अतिरिक्त जमा वसा कम होनी शुरू होती है। तैराकी करना ह्रदय के लिए भी अच्छा है। तैराकी करने से न सिर्फ वज़न कम होता है, अपितु शरीर बेहतर शेप में आ जाता है। आप इसे हफ़्ते में एक या दो बार कर सकते हैं। अगर आपने पहले कभी तैराकी नहीं की है, तो इसे किसी ट्रेनर की देखरेख में ही करें।

Exercise to Reduce Belly Fat

3. साइकलिंग


इसे सबसे बेहतर व आसान कार्डियो एक्सरसाइज (ह्रदय के लिए) माना गया है। इससे जहां, पैरों, टांगों वह जांघों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है, वहीं शरीर की अतिरिक्त चर्बी व कैलोरी भी बाहर निकल जाती है।

4. पैदल चलना


अगर कोई ऊपर दी गई तीनों गतिविधियों को नहीं करना चाहता, तो रोज सुबह-शाम आधा घंटा पैदल जरूर चले। इससे भी शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है। संभव हो, तो तेज कदमों से चलना चाहिए। पेट कम करने के उपाय में इसे आसान और सुरक्षित माना गया है।

5. वेट ट्रेनिंग


अगर जिम जाने का समय नहीं है, तो वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं। वहां भार उठाने वाले व्यायाम करने से न सिर्फ शरीर को आकर्षक शेप मिलेगी, बल्कि पाचन क्रिया भी मजबूत होगी। ध्यान रहे कि जिम में वेट ट्रेनिंग सिर्फ पेशेवर ट्रेनर की देखरेख में ही करें।

6.स्विमिंग


स्विमिंग करने से शरीर और पेट में अतिरिक्त जमा चर्बी कम होने लगती है। तैराकी दिल के लिए भी अच्छा है। इससे न सिर्फ वजन कम होता है, बल्कि शरीर बेहतर शेप (Swimming to tone your stomach) में आता है। आप सप्ताह में दो से तीन बार स्विमिंग कर सकते हैं।


पेट की चर्बी कम करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं-Diet Tips to Get Flat Tummy in Hindi


Exercise to Reduce Belly Fat

योगासन


योगासन भी पेट कम करने के उपायों में से एक है। आगे हम कुछ योगासनों के बारे में बता रहे हैं :

1. सेतुबंध योगासन


पेट कम करने के लिए सेतुबंध योगासन

[caption id="attachment_760" align="aligncenter" width="300"]पेट और कमर की चर्बी पेट और कमर की चर्बी[/caption]

इस आसन को करने से पेट व कमर के पास जमा चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही पेट व जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। अगर किसी की गर्दन में दर्द या फिर खिंचाव महसूस हो रहा है, तो इस आसन को करने से वह भी ठीक हो सकता है। इतना ही नहीं अगर गलत तरीके से बैठने के कारण रीढ़ की हड्डी एक तरफ झुक गई है, तो यह आसन उसे भी ठीक कर सकता है।

करने का तरीका :

जमीन पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और दोनों घुटनों को मोड़ें व एड़ियों को कूल्हों के साथ सटा लें।

इसके बाद दोनों हाथों से एड़ियों को पकड़ लें।

अब सांस लेते हुए कमर को ऊपर की ओर उठाएं, जबकि पैरों व हाथों को उसी स्थिति में रहने दें।

कुछ 30 सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।

इसके बाद सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं।

इस आसन से 4-5 राउंड किए जा सकते हैं।

सावधानी : उच्च रक्तचाप से ग्रसित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

2. कपालभाती :


पेट कम करने के लिए कपालभाती

[caption id="attachment_761" align="aligncenter" width="300"]पेट और कमर की चर्बी पेट और कमर की चर्बी[/caption]

मोटापा कम करने के लिए इस योगासन को सबसे ज्यादा फायदेमंद माना गया है। कहा जाता है कि इसके परिणाम जल्द ही देखने को मिलते हैं। इसे नियमित रूप से करने पर कब्ज, गैस व एसिडिटी जैसी समस्याएं गायब हो जाती हैं। पेट की नसें मजबूत होती हैं और पाचन तंत्र भी अच्छे से काम करता है।

करने का तरीका :

जमीन पर सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।

एक लंबी गहरी सांस लें और छोड़ दें।

अब धीरे-धीरे नाक के जरिए सांस को बाहर छोड़ें। जब आप सांस बाहर छोड़ेंगे, तो आपका पेट अंदर की ओर जाएगा।

ध्यान रहे कि इसे करते हुए मुंह को बंद रखें। सांस को सिर्फ छोड़ना है। सांस लेने की प्रक्रिया अपने आप होगी

प्रतिदिन इस आसन के पांच चक्र सुबह-शाम खाली पेट करने से लाभ होगा।

सावधानी : सुबह खाली पेट ही यह आसन करना चाहिए और इसे करने के आधे घंटे बाद ही कुछ खाना चाहिए। अगर शाम को कर रहे हैं, तो खाना खाने के पांच घंटे बाद करें। गभर्वती महिला को इसे नहीं करना चाहिए।

3. अनुलोम-विलोम प्राणायाम :


पेट कम करने के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम

[caption id="attachment_762" align="aligncenter" width="300"]पेट और कमर की चर्बी पेट और कमर की चर्बी[/caption]

बेशक यह आसन करने में आसान है, लेकिन मोटापा कम करने में कारगर है। मुख्य रूप से इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहते हैं। इससे शरीर में रक्त का प्रवाह ठीक से होता है।

करने का तरीका :

जमीन पर सुखासन की मुद्रा में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।

अब दाएं हाथ के अंगुठे से दाएं तरफ की नासिका छिद्र को बंद कर दें और बाईं नासिका से सांस लें।

अब दाएं हाथ की सबसे छोटी व उसके साथ की उंगली से बाएं तरफ की नासिका को बंद कर दाईं तरफ से सांस को धीरे-धीरे छोड़ें।

अब इसी स्थिति में रहते हुए सांस को अंदर खींचे और फिर दाईं तरफ से नाक को बंद कर बाईं तरफ से सांस को छोड़ें।

इस तरह के चक्र क्षमतानुसार चार-पांच बार किए जा सकते हैं।

सावधानी : उच्च रक्तचाप व ह्रदय के रोगी को प्रशिक्षित योग गुरु से सलाह लेकर व उनकी देखरेख में इसे करना चाहिए। साथ ही इसे कभी जोर से या तेज गति से नहीं करना चाहिए।

exercise to Reduce Belly Fat in Hindi

4. बालासन :


पेट कम करने के लिए बालासन

[caption id="attachment_763" align="aligncenter" width="300"]पेट और कमर की चर्बी पेट और कमर की चर्बी[/caption]

पेट की चर्बी कैसे घटाएं में बालासन भी शामिल है। इस आसन को करते समय स्थिति मां के कोख में पलने वाले भ्रूण की तरह होती है। इसलिए, इसे बालासन योग कहा जाता है। बालासन करने से पेट की मासपेशियां मजबूत होती हैं। इसे रोज करीब 10 मिनट करने से पेट अंदर हो सकता है।

करने का तरीका :

सबसे पहले वज्रासन यानी आप घुटनों के बल बैठ जाएं और पूरा वजन एड़ियों पर डालें।

अपनी कमर को सीधा रखते हुए सांस लेते हुए हाथों को सीधा ऊपर ले जाएं।

अब सांस छोड़ते हुए आगे की तरफ झुक जाएं।

कोशिश करें कि आपका सिर जमीन से लग जाए और हाथे सीधे रखें।

कुछ सेकंड इस स्थिति में रहते हुए सामान्य गति से सांस लेते रहें और फिर सांस लेते हुए उठ जाएं।

सावधानी : अगर पीठ में दर्द हो या फिर घुटनों का ऑपरेशन हुआ हो, तो यह आसन न करें। साथ ही, जिन्हें दस्त हो, वो भी यह आसन न करें।

exercise to Reduce Belly Fat in Hindi

5. नौकासन :


पेट कम करने के लिए नौकासन

[caption id="attachment_764" align="aligncenter" width="300"]पेट और कमर की चर्बी पेट और कमर की चर्बी[/caption]

कमर और पेट कम करने के उपायों में यह आसन फायदेमंद है। इसे करने से छोटी आंत, बड़ी आंत और पाचन तंत्र बेहतर हो जाता है।

करने का तरीका :

सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं और एड़ियों व पंजों को आपस में मिला लें।

दोनों हाथ कमर के साथ सटे होने चाहिए और हथेलियां जमीन की ओर होनी चाहिए।

पहले एक लंबी गहली सांस लें और फिर सांस छोड़ते हुए दोनों पैर, हाथ व गर्दन को सामांतर ऊपर की तरफ उठाएं, ताकि शरीर का पूरा भार कूल्हों पर आ जाए।

इस स्थिति में करीब 30 सेकंड रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं।

सावधानी : जिन्हें कमर व पेट संबंधी कोई गंभीर रोग हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी इस आसन से परहेज करना चाहिए।

पेट की चर्बी कम करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं-Diet Tips to Get Flat Tummy in Hindi

शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

पेट की चर्बी कम करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं


 


Diet Tips to Get Flat Tummy in Hindi


सुबह उठते ही :


सुबह उठने के बाद करीब दो गिलास गुनगुना पानी पिएं, ताकि पेट साफ हो जाए। शौच से निवृत होने के बाद एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पिएं। जिन्हें शुगर है, वो नींबू पानी में चीनी न मिलाएं और जिन्हें उच्च रक्तचाप है, वो बिना नमक के पिएं। वैज्ञानिक शोध में साबित हुआ है कि नींबू पानी पीने से वजन कम होता है ।

नाश्ते से पहले :


नाश्ता करने से 15 मिनट पहले करीब 5-6 बादाम खाएं। इन बादाम को रात भर पानी में भिगोकर रखें और सुबह छिलके उतारकर खाएं। बादाम खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। बादाम में फाइबर होता है, जो भूख को मिटाता है।

नाश्ता :


कम फैट वाले दही के साथ एक चपाती खा सकते हैं। इसकी जगह दो ब्राउन ब्रेड भी ले सकते हैं, जिस पर बादाम वाला बटर लगा सकते हैं। इनकी जगह एक कटोरी ओट्स भी खा सकते हैं। साथ ही प्रोटीन युक्त आहार का सेवन कर सकते हैं।

दो घंटे बाद :


सुबह समय पर नाश्ता कर लेने के बाद 11 बजे के आसपास कोई भी फल खा सकते हैं या फिर विभिन्न फलों की सलाद बनाकर भी खा सकते हैं।

दोपहर का खाना :


खाने से पहले सब्जियों की सलाद जरूर खाएं। सलाद खाने से शरीर को अतिरिक्त फाइबर मिलता है। इसके बाद एक या दो रोटी और साथ में मिक्स सब्जी ले सकते हैं। अगर नॉन वेज खाते हैं, तो मछली का एक टुकड़ा ले सकते हैं। कोशिश करें कि खाना एक बजे तक खा लें।

शाम को :


डिनर से पहले शाम करीब पांच बजे एक फल या फिर एक गिलास बिना क्रीम वाला दूध पी सकते हैं। इनके अलावा, ग्रीन-टी या फिर नारियल पानी भी पी सकते हैं।

रात का खाना :


डिनर हमेशा हल्का होना चाहिए और आठ बजे तक कर लेना चाहिए। डिनर में बिना बटर के वेज या फिर चिकन सूप ले सकते हैं। इसके बाद सब्जी के साथ एक या दो रोटी ले सकते हैं।

इनसे बनाएं दूरी :


शक्कर युक्त व डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ खाने से बचें।

स्टार्च युक्त खाद्य पदार्थ जैसे:- चावल, नूडल्स, पास्ता और ब्रेड। इनकी जगह ब्राउन राइस व ब्राउन ब्रेड का सेवन करना चाहिए।

तंबाकु, शराब व सिगरेट से परहेज करना चाहिए।

Diet Tips to Get Flat Tummy


पेट और कमर की चर्बी कम करने के लिए व्यायाम-Exercises to Reduce Belly Fat in Hindi

पेट और कमर की चर्बी के लिए कुछ और टिप्स – Tips to Reduce Belly Fat in Hindi


आइए, बात करते हैं कुछ अन्य टिप्स के बारे में, जिन्हें अपनाने से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी छूमंतर हो सकती है।

संतुलित मात्रा में खाएं :


दिनभर में तीन बार पेट भरकर खाने से हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता। इसलिए, हर दो से तीन घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाते रहें।

अधिक पानी पिएं :


दिनभर में आठ-दस गिलास पानी पीना सेहत के लिए जरूरी है। पानी तभी नहीं पीना चाहिए, जब प्यास लगी हो या फिर गला सूख रहा हो। हर तय समय पर थोड़ा-सा पानी पीना चाहिए। पानी पीने से ओवर इटिंग की आदत कम हो सकती है।

नाश्ता न भूलें :


जितना जरूरी सांस लेना है, उतना ही जरूरी नाश्ता है। कुछ लोग सोचते हैं कि नाश्ता नहीं करने से वजन कम होता है, जबकि ऐसा नहीं है। उल्टा नाश्ता न करने से हमारी भूख बढ़ती है और हम ज्यादा खा लेते हैं, जिससे वजन बढ़ने की समस्या पैदा हो सकती है।

Diet Tips to Get Flat Tummy

ग्रीन-टी :


इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है, जो मोटापा व चर्बी घटाने में सहायक सिद्ध होता है। इसलिए, दिनभर में कम से कम एक कप ग्रीन-टी पी सकते हैं।

पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ :


एवोकाडो, केला, पपीता, आम व खरबूजे में भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और वजन कम करने में मदद करता है।

फल व सब्जियां :


दिनभर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फल व सब्जियों का सेवन करते रहना चाहिए। इससे भूख कम लगेगी और मोटापा कम करने में मदद मिलेगी।

स्मूदी :


संभव हो तो दिन की शुरुआत फलों की स्मूदी के साथ करें। खासकर, तरबूज की स्मूदी का सेवन करना चाहिए। तरबूज में पर्याप्त मात्रा में पानी होता है। इसे खाने के बाद पेट भरा रहता और कुछ खाने का मन नहीं करता। ऐसे में जब आप खाना नहीं खाएंगे, तो संभव है कि पेट की चर्बी कम होगी।

पूरी नींद :


चर्बी को कम करने के लिए पूरी नींद सोना भी जरूरी है। हर किसी को सात-आठ घंटे की नींद लेनी ही चाहिए। कम या ज्यादा सोना, दोनों ही वजन बढ़ाने के लिए अहम कारण हैं। कहा भी जाता है कि अगर आप पूरी नींद सोते हैं, तो पाचन तंत्र अच्छे से काम करता है और भोजन को पचाता है।

कमर या फिर पेट पर जमा चर्बी, ऐसी समस्या नहीं है कि उसे दूर न किया जा सके। बस जरूरत है, तो तय दिनचर्या का पालन करने और नियमित व्यायाम करने की।


पेट और कमर की चर्बी कम करने के लिए व्यायाम-Exercises to Reduce Belly Fat in Hindi

गुरुवार, 23 जनवरी 2020

 मोरया गोसावी


 



मोरया गोसावी 14वीं शताब्दी के वो महान गणपति भक्त हैं जिनकी आस्था की चर्चा उस दौर के पेशवाओं तक पहुंची तो वो भी इस दर पर अपना माथा टेकने यहां तक चले आए। उन्हीं के नाम पर बना मोरया गोसावी समाधि मंदिर आज करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। पुणे से करीब 18 किलोमीटर दूर चिंचवाड़ में इस मंदिर की स्थापना खुद मोरया गोसावी ने की थी।

कहते हैं कि मोरया गोसावी हर गणेश चतुर्थी को चिंचवाड़ से पैदल चलकर 95 किलोमीटर दूर मयूरेश्वर मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन करने जाते थे। ये सिलसिला उनके बचपन से लेकर 117 साल तक चलता रहा। उम्र ज्यादा हो जाने की वजह से उन्हें मयूरेश्वर मंदिर तक जाने में काफी मुश्किलें पेश आने लगी थीं। तब एक दिन गणपति उनके सपने में आए।

चिंचवाड़ देवस्थान के ट्रस्टी विश्राम देव कहते हैं कि 1492 की बात है। 117 साल उम्र थी। मयूरेश्वर जी सपने में आए, कहा कि जब स्नान करोगे तो मुझे पाओगे। जैसा सपने में देखा था, ठीक वैसा ही हुआ। मोरया गोसावी जब कुंड से नहाकर बाहर निकले तो उनके हाथों में मयूरेश्वर गणपति की छोटी सी मूर्ति थी। उसी मूर्ति को लेकर वो चिंचवाड़ आए और यहां उसे स्थापित कर पूजा-पाठ शुरू कर दी। धीरे-धीरे चिंचवाड़ मंदिर की लोकप्रियता दूर-दूर तक फैल गई।

महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग कोनों से गणेश भक्त यहां बप्पा के दर्शन के लिए आने लगे। इस मंदिर में प्रवेश करते ही आपको कण-कण में भगवान गणेश की छाप दिखेगी।मान्यता है कि जब मंदिर का ये स्वरूप नहीं था तब भी यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती थी। यहां आने वाले भक्त सिर्फ गणपति बप्पा के दर्शन के लिए नहीं आते थे, बल्कि विनायक के सबसे बड़े भक्त मोरया का आशीर्वाद लेने भी आते थे। भक्तों के लिए गणपति और मोरया अब एक ही हो गए थे।

morya gosavi ganpati informastion

पुणे शहर से 15 किलोमीटर दूर बसा चिंचवाड़ गांव मोरया गोसावी के नाम से मशहूर है। मोरया गोसावी मंदिर इस गांव की शान माना जाता है। गणेश के सबसे बड़े भक्त बनकर मोरया गोसावी ने गणेश का वरदान पाया और गणेश के नाम के साथ अपना नाम हमेशा के लिए जोड़कर सिद्धि प्राप्त कर ली। यही वजह है की चिंचवाड़ गावों में लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो वह नमस्ते नहीं बल्कि मोरया कहते हैं।

मोरया गोसावी को सबसे बड़े गणेश भक्त का दर्जा यूं ही नहीं मिल गया था। कहा जाता है कि 1375 में मोरया गोसावी का जन्म भी भगवान गणेश की कृपा से ही हुआ था। उनके पिता वामनभट और मां पार्वतीबाई की भक्ति से खुश होकर भगवान ने कहा था कि वो उनके यहां पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। यही वजह है कि मोरया गोसावी का जन्मस्थल भी गणेश भक्तों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है।बचपन से ही मोरया गोसावी गणेश भक्ति में कुछ इस तरह रम गए कि उन्हें दीन-दुनिया का कुछ ख्याल ही नहीं रहता। थोड़े बड़े हुए तो मोरगांव के मयूरेश्वर मंदिर में गणपति के दर्शन के लिए जाने लगे। ये सिलसिला तब तक चला जब तक कि स्वयं भगवान गणेश ने उन्हें स्वयं अपना प्रतिरूप नहीं सौंप दिया। तबसे गणपति के भक्त चिंचवाड़ के गजानन को मयूरेश्वर गणपति का अंश मानते हैं। साल में दो बार भगवान गणेश को पालकी में लेकर मयूरेश्वर मंदिर जाते हैं, ताकि भगवान का अपने अंश से भेंट हो सके।

मयूरेश्वर मंदिर परिसर में इस पेड़ के नीचे मोरया गोसावी की ये मूर्ति भक्ति की एक अनोखी कहानी कहती है। बताया जाता है कि एक बार चिंचवाड़ से चलकर मोरया गोसावी यहां तक आ तो गए, लेकिन आगे का रास्ता बाढ़ की वजह से बंद हो चुका था। तब इसी पेड़ के नीचे बैठकर मोरया गोसावी ने मयूरेश्वर गणपति को याद किया और भगवान अपने भक्त को दर्शन देने यहां तक चले आए। यहां आने वाले भक्तों की जितनी श्रद्धा मयूरेश्वर गणपति में हैं, उतनी ही मोरया गोसावी में है। भक्त मोरया गोसावी को मयूरेश्वर गणपति का अवतार मानते हैं। भक्तों के मुताबिक यहां आकर उन्हें दोनों देवों के दर्शन हो जाते हैं, उन्हें मनचाही मुराद मिल जाती है।

कहते हैं कि मोरया गोसावी जी ने संजीवन समाधि ले ली थी, यानी जीते जी वो समाधि में लीन हो गए थे। भक्त मानते हैं कि आज भी मोरया गोसावी इन दोनों तीर्थस्थलों में मौजूद हैं। यही वजह है कि यहां गणपति के साथ-साथ मोरया की भी पूजा की जाती है। भक्त सच्चे मन से एक ही जयकारा लगाते हैं।

ये हैं

अष्टविनायक मंत्र

List of Ashtavinayak Temples


1. मयूरेश्वर (मोरेश्वर) गणपति, मोरगाँव

2.सिद्धिविनायक मंदिर, सिद्धटेक

3. बल्लालेश्वर गणपति मंदिर, पाली 

4. वरदविनायक मंदिर ,महड

5, चिंतामणि गणपति मंदिर ,थेउर

6. श्री गिरिजात्मज गणेश मंदिर, लेण्याद्री

7. विघ्नेश्वर मंदिर, ओझर

8. रांजणगाव श्री महागणपती

कहते हैं कि इन आठों गणपति के दर्शन के बाद भक्त की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। अष्टविनायक की ये यात्रा मयूरेश्वर मंदिर से शुरू होता है, इसीलिए इसे सर्वाद्य मंदिर कहते हैं।

क्‍यों कहते हैं 'गणपति बप्पा मोरया'


इस समय हर किसी कि जुबान पर एक ही जयकारा है और वह है ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’। पर इस बात क्‍या आपने कभी गौर किया है कि गणपति बप्‍पा मोरया क्‍यों बोला जाता है।
गणपति के जयकारे की यह कथा महाराष्‍ट्र के पुणे के पास बसे चिंचवाड़ गांव से जुड़ी है। चिंचवाड़ गांव में एक ऐसे संत पैदा हुए जिनकी भक्ति और आस्‍था ने भगवान के नाम के साथ उनका नाम जोड़ दिया। बहुत समय पहले इस गांव में एक मोरया गोसावी नाम के व्‍यक्ति रहा करते थे। कहते है भगवान गणेश के आर्शीवाद के बाद ही मोरया का जन्‍म हुआ था और वह अपने माता-पिता के साथ प्रारंभ से ही गणेश भक्ति में लीन रहने लगे।

इसी क्रम में हर साल वह गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर मोरगांव गणेश की पूजा करने के लिए पैदल जाया करते थे। कहा जाता है कि बढ़ती उम्र की वजह से एक दिन खुद भगवान गणेश उनके सपने में आए और उनसे कहा कि उनकी एक मूर्ति उन्हें नदी में मिलेगी। इसके बाद जैसा उन्‍होंने सपने में देखा था वैसा ही हुआ नदी में स्‍नान करने के दौरान उन्‍हें गणेश प्रतिमा प्राप्‍त हुई।

लोगों को जब इस घटना की जानकारी हुई तो लोग चिंचवाड़ गांव में मोरया गोसावी के दर्शन के लिए आने लगे। इस दौरान भक्‍त पैर छूकर उन्‍हें मोरया करने लगे और संत मोरया भक्‍तों को मंगलमूर्ति के नाम से जानने लगे। इस प्रकार से शुरू हुआ जयकारा मंगलमूर्ति मोरया का और इस गांव से यह निकलकर पूरे देश और दुनिया में फैल गया।

सिद्धिविनायक गणपति मंदिर, Mumbai (अष्टविनायकों से अलग होते हुए भी सिद्धिविनायक गणपति मंदिर, Mumbai महत्ता किसी सिद्ध-पीठ से कम नहीं।)

चिंचवड के मोरया गोसावी गणपति

बुधवार, 22 जनवरी 2020

गणतन्त्र दिवस




गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था।
एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था।

26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो स्‍वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती हैं।

What is Republic Day and why it is celebrated

इतिहास


सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाता, तो भारत अपने को पूर्णतः स्वतंत्र घोषित कर देगा। 26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया।

गणतंत्र दिवस समारोह


26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय राष्ट्र ध्वज को फहराया जाता हैं और इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है। गणतंत्र दिवस को पूरे देश में विशेष रूप से भारत की राजधानी दिल्ली में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस अवसर के महत्व को चिह्नित करने के लिए हर साल एक भव्य परेड इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन (राष्ट्रपति के निवास) तक राजपथ पर राजधानी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है।

ऐसे होती है परेड


इस भव्य परेड में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट, वायुसेना, नौसेना आदि सभी भाग लेते हैं।

इस समारोह में भाग लेने के लिए देश के सभी हिस्सों से राष्ट्रीय कडेट कोर व विभिन्न विद्यालयों से बच्चे आते हैं, समारोह में भाग लेना एक सम्मान की बात होती है। परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) जो राजपथ के एक छोर पर इंडिया गेट पर स्थित है पर पुष्प माला डालते हैं|

इसके बाद शहीद सैनिकों की स्मृति में दो मिनट मौन रखा जाता है। यह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए लड़े युद्ध व स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के बलिदान का एक स्मारक है। इसके बाद प्रधानमंत्री, अन्य व्यक्तियों के साथ राजपथ पर स्थित मंच तक आते हैं, राष्ट्रपति बाद में अवसर के मुख्य अतिथि के साथ आते हैं।

परेड में विभिन्न राज्यों की प्रदर्शनी भी होती हैं, प्रदर्शनी में हर राज्य के लोगों की विशेषता, उनके लोक गीत व कला का दृश्यचित्र प्रस्तुत किया जाता है। हर प्रदर्शिनी भारत की विविधता व सांस्कृतिक समृद्धि प्रदर्शित करती है। परेड और जुलूस राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित होता है और देश के हर कोने में करोड़ों दर्शकों के द्वारा देखा जाता है। 2014 में, भारत के 64वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर, महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल विभाग ने पहली बार मुंबई के मरीन ड्राईव पर परेड आयोजित की, जैसी हर वर्ष नई दिल्ली में राजपथ में होती है।


संस्‍कृति और इतिहास यहा देखियए

सोमवार, 20 जनवरी 2020

Mutual Fund


Mutual Fund क्या है


What is Mutual Fund in hindi

सरल शब्दों में Mutual Funds के बारे में कहें तो यह विभिन्न एक्सपर्ट लोगों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक Investment है।
जैसा की आप जानते हैं की Invest करने के लिए Market में तरह-तरह की प्रतिभूतियां या Securities उपलब्ध हैं।


आम भाषा में इन्हें कंपनियों के Share, Government Bonds या Commodity के नाम से जाना जाता है। लेकिन क्योंकि एक साधारण व्यक्ति Share Market के दाँव-पेंच से अनभिज्ञ होता है और वो यह बिलकुल नहीं जानता कि कब कौन सी कंपनी के Share या Debenture या अन्य Securities में इन्वेस्ट करना लाभदायक होता है और कब उन्हें वापस बाज़ार में बेच कर अच्छी आय कमाई (Return) जा सकती है। इस परेशानी का हल हैं Mutual Funds.


जिस तरह कंपनियां Shares जारी करती हैं उसी तरह Mutual Funds अपने Units जारी करती हैं| अगर हमें म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना होता हैं तो हमें Mutual Funds की Units खरीदनी होती हैं|


हजारों लोगों द्वारा Mutual Funds में Invest की गयी रकम को Mutual Funds के वित्तीय एक्सपर्ट (Fund Manager) अपनी एक्सपर्ट नॉलेज और Mutual Fund स्कीम के उद्देश्यों के अनुसार विभिन्न प्रकार के इनवेस्टमेंट या Securities में Invest करते हैं। फंड मैनेजर आपके फंडस को इकट्ठा करके उन्हें विभिन्न Investment के टूल्स जैसे कंपनी के Shares, Bonds या Saving Schemes में सही तरीके से Investment करते हैं और जो भी Return प्राप्त होता हैं उन्हें Dividend और अन्य तरीकों से निवेशकों को बाँटा जाता हैं।


Mutual Fund उन लोगों के लिए बेहतर होता हैं जिन्हें जिन्हें Share Market और अन्य Investment का ज्यादा नॉलेज नहीं होता या इतना समय नहीं होता कि वे Shares और अन्य सिक्योरिटीज़ की पूरी जानकारी जुटाएं इसलिए वे म्यूच्यूअल फण्ड की विभिन्न स्कीमों में निवेश करते है| और म्यूच्यूअल फण्ड उन्हें अपनी दक्षता और अनुभव के अनुसार आगे शेयर मार्किट एंव अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करते है |



Types of Mutual Fund – म्यूच्यूअल फंड के प्रकार


Open End फंड:


इस प्रकार के Mutual Funds फंड Liquidity की दृष्टि से सबसे अच्छे होते हैं। यह फंड निवेशक को पूरे वर्ष खरीद और बिक्री के लिए उपलब्ध होते हैं। Net Asset Value (NAV) के आधार पर यह फंड वर्ष में कभी भी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी से सीधा खरीदे या बेचे जा सकते हैं। इसका मुख्य कारण, इन फंडस का Subscriptionऔर Redemption कभी भी किया जा सकता है। इन फंडस की Maturity तिथि के निश्चित न होने के कारण निवेशक के पास यह तरल नकदी Liquid Cash के रूप में उपलब्ध रहते हैं।



Close End फंड:


इस प्रकार के फंडस का Redemption एक निश्चित तिथि के आधार पर ही हो सकता है। यह तिथि 3 से 6 वर्ष तक हो सकती है। यह Fund लांच होने के कुछ समय बाद ही निश्चित समय के लिए आवेदन के लिए उपलब्ध होते हैं। इस प्रकार के फंडस Stock Exchange में लिस्टिड किए जाते हैं और एक बार पूर्ण रूप से Subscribe हो जाने के बाद वे Stock Exchange में कभी भी ख़रीदे-बेचे जा सकते हैं।



Interval फंड


यह फंड ओपेन और क्लोज़ एंड फंड के मिले-जुले फ़ायदों के साथ आते हैं। इन फंड को स्टॉक एक्सचेंज की सहायता से ट्रेड किया जा सकता है और प्रचलित शुद्ध संपत्ति मूल्य (NAV) के आधार पर बिक्री या Redemption के लिए पूर्व-निर्धारित समयान्तराल पर उपलब्ध होते हैं।


What is Mutual Fund in hindi

Types of Mutual Fund Investment Schemes – निवेश के दृष्टिकोण से म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार


Equity or Growth Fund:


जो निवेशक दीर्घकालीन Capital Gain या वृद्धि के इच्छुक होते हैं और बाजार में होने वाले जोखिम के लाभ-हानि से पूरी तरह से अवगत होते हैं, वो इस प्रकार के फंड स्कीम में Investment करना चाहते हैं। इस स्कीम में फंड का पूरा धन बाज़ार के इक्विटी Share में Investment कर दिया जाता है। इस स्कीम में लाभ और जोखिम दोनों ही अधिकतम होते हैं।



Debt या Income Mutual Fund:


यह स्कीम उन निवेशकों के लिए सबसे अच्छी होती है जो बिना जोखिम उठाए अधिकतम Investment आय का अर्जन करना चाहते हैं। इस स्कीम के अंतर्गत एकत्रित फंडस कॉर्पोरेट ऋण स्कीम और सरकारी ऋण स्कीम में Investment किया जाता है। इस Mutual Funds फंड में निवेशित धन की वापसी की लगभग गारंटी होती है और जोखिम बहुत ही कम होती हैं।



Balanced Mutual Funds:


Balance फंड स्कीम में इक्विटी और Debt फंड का मिला-जुला फायदा होता है। इस प्रकार के फंड में एकत्रित फंडस को इक्विटी और डैब्ट दोनों में ही Investment किया जाता है। इस स्कीम में फंड मैनेजर Investment बाज़ार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए इक्विटी बाज़ार में Investment करते हैं जिससे निवेशकों को अधिक से अधिक आय कमाने का मौका दिया जा सके। इस प्रकार के फंडस निवेशकों को एक ओर तो आय में स्थिरता देते हैं दूसरी ओर पूंजीगत वृद्धि (Capital Profits) का लाभ भी उन्हें मिलता है।



Liquid Funds:


यह फंडस उन निवेशकों के लिए सबसे अच्छा होता है जो कम से कम समय में सुरक्षित रूप से Investment आय का अर्जन करना चाहते हैं। इस स्कीम के अंतर्गत Investment मैनेजर 91 दिन या इससे कम अवधि के लिए उपलब्ध सर्टिफिकेट ऑफ डिपाज़िट, ट्रेजरी एंड कमर्शियल पेपर आदि स्कीम में फंड का Investment करते हैं। आसानी से Investment का Redemption होने के कारण यह स्कीम कॉर्पोरेट और निजी निवेशकों के लिए सबसे अच्छा Investment टूल है।



Glit Funds:


यह फंड सबसे अधिक सुरक्शित माना जाता है क्योंकि इस फंड में एकत्रित धन को सरकारी योजनाओं में Investment किया जाता है। सरकारी तंत्र का सहयोग होने के कारण निवेशकों के फंडस इन स्किम्स में पूरी तरह सुरक्षित माने जाते हैं।


What is Mutual Fund in hindi

Benefits: म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश के लाभ


1. विशेषज्ञों का प्रबंधन:


Mutual Funds फंड में Investment करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है की इसकी देख-रेख एक्सपर्ट या विशेषज्ञों के द्वारा की जाती है। यह एक्सपर्ट Investment बाज़ार पर पैनी नज़र रखते हैं और बाज़ार में आने वाले तीखे उतार-चड़ाव को ध्यान में रखते हुए Investment संबंधी निर्णय लेते हैं। आम भाषा में इन एक्सपर्ट को Portfolio मैनेजर कहा जाता है।



2. विविधता:


Mutual Funds फंड में Investment करने से विभिन्न प्रकार के इनवेस्टमेंट टूल्स में Investment करने का मौका और फायदा मिलता है। इसकी अलग-अलग स्कीम, विभिन्न क्षेत्रों के शेयर्स, Bonds और Securities Deposits में Investment करने से सबका लाभ निवेशकर्ता को मिलता है। इस प्रकार Mutual Funds फंड में Investment करने से विविधता का लाभ आपको बहुत अच्छी तरह से मिलता है। आपके Portfolio मैनेजर आपकी इच्छानुसार आपके फंड को विभिन्न Industries और Assets में Investment करते हैं।



3. लिक्विडिटी:


इस प्रकार का Investment सबसे अधिक लिक्विड या तरल Investment माना जाता है। जब तक किसी Investment में लॉक-इन पीरियड न हो, वह Investment आपकी इच्छानुसार कभी भी नकद रूप में बदला जा सकता है।



4. लोचशीलता:


आपके लिए सबसे अच्छा Investment वही माना जाता है जो आपकी इच्छानुसार आपको Redemption और नकद वापसी की सुविधा दे। ओपन एंड Mutual Funds में उपलब्ध सभी स्कीम आपको यही सुविधा देतीं हैं। इनके अंतर्गत आप अपनी इच्छानुसार Investment को Redeme कर सकते हैं। Close-Ended Fund में आप Mutual Fund को Stock Market में बेच सकते हैं



5. न्यूनतम ट्रांजेकशन लागत:


एक व्यक्तिगत रूप में यदि आप Investment करते हैं तो आपको ट्रान्सैक्क्षन लागत के रूप में काफी अधिक धन चुकाना पढ़ता है। यह आपकी Investment की लागत बन जाती है। जबकि Mutual Funds में यह लागत न्यूनतम होकर आपके लाभ को अधिकतम कर देती है।



6. पारदर्शिता:


आपका Portfolio मैनेजर आपको बाज़ार की हर हरकत से पूरी तरह से अवगत करवाते हैं। इसी जानकारी के आधार पर आप अपना Investment नियंत्रित कर सकते हैं।



7. सुनियंत्रित:


भारत में Mutual Funds सेबी (सिक्युरिटीज और एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के द्वारा नियमित और नियंत्रित होती है। इससे निवेश कर्ताओं के हितों की पूरी सुरक्षा होती है।


 अटल पेंशन योजना के द्वारा अब मिल सकती हे १० हजार पेंशन हर महीना

गुरुवार, 16 जनवरी 2020

सुकन्या समृद्धि योजना




सुकन्या समृद्धि योजना मोदी सरकार द्वारा शुरू की गयी छोटी बचत स्कीम है. 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत इसे शुरू किया गया था. यह स्कीम बेटियों की शिक्षा और उनके शादी-ब्याह के लिए रकम जुटाने में मदद करती है. अभी स्कीम के तहत 8.1 फीसदी ब्याज मिलता है.

इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने पर टैक्स छूट भी मिलती है. यानी सालाना 1.5 लाख रुपये के निवेश पर आप टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं. सुकन्या समृद्धि स्कीम से मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स फ्री है.

बेटी की उम्र 10 साल होने से पहले कभी भी सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया जा सकता है.

सुकन्या समृद्धि खाता 250 रुपये से खुल जाता है. पहले इसके लिए 1,000 रुपये जमा करने पड़ते थे. किसी भी वित्त वर्ष में सुकन्या समृद्धि में अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं.

सुकन्या समृद्धि खाता किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक की शाखा में खुलवाया जा सकता है.

सुकन्या समृद्धि खाता खुलने के 21 साल तक इसे चालू रखा जा सकता है. माता-पिता चाहें तो 18 साल की उम्र में बेटी की शादी होने तक इसे चला सकते हैं.

बेटी के 18 साल का हो जाने पर उसकी उच्च शिक्षा के लिए सुकन्या समृद्धि खाते से 50 फीसदी तक रकम निकाली जा सकती है.
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क्या हैं सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के नियम?


सुकन्या समृद्धि खाता बेटी के माता-पिता या कानूनी अभिभावक उसके नाम से खुलवा सकते हैं. इसे बेटी के जन्म से उसके 10 साल का होने तक खुलवाया जा सकता है. नियमों के मुताबिक, एक बच्ची के लिए एक ही सुकन्या समृद्धि खाता खोला जा सकता है और उसमें पैसा जमा किया जा सकता है. यानी एक बच्ची के लिए दो खाते नहीं खोले जा सकते हैं.

खाता खोलने के लिए तीन दस्‍तावेजों की आवश्‍यकता है


1. अस्‍पताल या सरकारी अधिकारी द्वारा प्रदान किया गया लड़की का जन्‍म प्रमाण पत्र

2. लड़की के माता-पिता या कानूनी अभिभावक के निवास का प्रमाण पत्र, जो पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली या टेलीफोन बिल, मतादाता पहचान पत्र, राशन कार्ड या भारत सरकार द्वारा प्रदत्‍त अन्‍य कोई भी प्रमाण पत्र जिसमें निवास का उल्‍लेख हो,

3. पैन कार्ड या हाईस्‍कूल प्रमाण पत्र भी खाता खोलने के लिए मान्‍य है। खाता खोले जाने के बाद उसे भारत में कहीं भी स्‍थानांतरित किया जा सकता है।

Sukanya Samriddhi Yojana in hindi

कितनी रकम जमा कर सकते हैं?


सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाने के लिए 250 रुपये काफी हैं. बाद में 100 रुपये के गुणक (मल्टीपल) में पैसे जमा कराए जा सकते हैं. किसी एक वित्त वर्ष में कम से कम 250 रुपये जरूर जमा करने पड़ते हैं. इसी तरह एक बार या कई बार में अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कराए जा सकते हैं.

सुकन्या समृद्धि खाता खुलने के दिन से 15 साल तक पैसे जमा कर सकते हैं.

9 साल की बेटी के मामले में उसके 24 साल का हो जाने तक पैसे जमा कराए जा सकते हैं. बेट ..

Sukanya Samriddhi Yojana in hindi

सुकन्या समृद्धि खाते में कैसे जमा होती है रकम?


सुकन्या समृद्धि खाते में कैश, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या ऐसे किसी इंस्ट्रूमेंट से रकम जमा कर सकते हैं जिसे बैंक स्वीकार करता हो. इसके लिए पैसे जमा करने वाले और खाताधारक का नाम लिखना जरूरी है.

सुकन्या समृद्धि खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर मोड से भी पैसे जमा कर सकते हैं. शर्त यह है कि उस पोस्ट ऑफिस या बैंक में कोर बैंकिंग सिस्टम मौजूद हो. अगर सुकन्या समृद्धि खाते में चेक या ड्राफ्ट से पैसे जमा किए जाते हैं तो क्लियर होने के बाद से उस पर ब्याज दिया जाएगा. जबकि ई-ट्रांसफर के मामले में डिपॉजिट के दिन से यह कैलकुलेशन होगा.

किन स्थितियों में समय से पहले बंद हो जाता है सुकन्या समृद्धि खाता?


खाताधारक की मौत हो जाने पर मृत्यु प्रमाणपत्र दिखाकर सुकन्या समृद्धि खाता बंद कराया जा सकता है. इसके बाद सुकन्या समृद्धि खाते में जमा रकम बेटी के अभिभावक को ब्याज सहित वापस दी जाएगी. इसके अलावा सुकन्या समृद्धि खाता खुलने से पांच साल के बाद इसे बंद किया जा सकता है. यह भी खास स्थितियों में किया जा सकता है. मसलन किसी जानलेवा बीमारी के मामले में. इसके बाद भी अगर किसी दूसरे कारण से सुकन्या समृद्धि खाता बंद किया जाता है तो इसकी इजाजत है. लेकिन, तब ब्याज सेविंग अकाउंट के हिसाब से मिलेगा.

क्या सुकन्या समृद्धि खाता ट्रांसफर हो सकता है?


जी, यह संभव है. सुकन्या समृद्धि अकाउंट देशभर में कहीं भी ट्रांसफर हो सकता है. शर्त यह है कि जिस बेटी के नाम से सुकन्या समृद्धि खाता खुला है वह एक जगह से कहीं और शिफ्ट हो रही है.

ट्रांसफर में कोई फीस नहीं लगती है. इसके लिए सुकन्या समृद्धि अकाउंट होल्डर या उसके माता-पिता/अभिभावक के शिफ्ट होने का सबूत दिखाना पड़ता है. अगर इस तरह का कोई सबूत नहीं दिखाया गया तो सुकन्या समृद्धि अकाउंट ट्रांसफर के लिए पोस्ट ऑफिस या बैंक को 100 रुपये फीस चुकानी पड़ेगा जहां खाता खोला गया है.

सुकन्या समृद्धि खाते से आंशिक निकासी के नियम क्‍या हैं?


खाताधारक की वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए खाते से आंशिक निकासी की जा सकती है. इनमें उच्च शिक्षा और शादी जैसे काम शामिल हैं. इसमें सुकन्या समृद्धि खाते में पिछले वित्त वर्ष के अंत तक जमा रकम का 50 फीसदी निकाला जा सकता है. खाते से यह निकासी तभी संभव है, यदि अकाउंट होल्डर 18 साल की उम्र पार कर ले. सुकन्या समृद्धि अकाउंट से रकम निकालने के लिए एक लिखित आवेदन और किसी शैक्षणिक संस्थान में एडमिशन ऑफर या फीस स्लिप की जरूरत होती है.

क्या NRI बेटी के नाम से सुकन्या समृद्धि खाता खुलवा सकते हैं?


स्कीम का लाभ सिर्फ भारत में रहने वाली बेटियों को ही मिलता है. यानी अनिवासी भारतीय सुकन्या समृद्धि खाता नहीं खुलवा सकते हैं. हालांकि, स्कीम की अवधि के दौरान यदि बेटी की नागरिकता बदलती है तो उसी दिन से सुकन्या समृद्धि खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाएगा जिस दिन से नागरिकता के दर्जे में बदलाव होगा.

सुकन्या समृद्धि स्कीम में टैक्स बेनिफिट क्या हैं?


सुकन्या समृद्धि स्कीम को एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट का दर्जा प्राप्त है. यानी सुकन्या समृद्धि योजना में किए जाने वाले निवेश पर टैक्स छूट के साथ इससे मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स फ्री होता है.

प्रधानमंत्री आवास योजना में कैसे मिल सकती है होम लोन सब्सिडी?

प्रधानमंत्री आवास योजना में कैसे मिल सकती है होम लोन सब्सिडी?




home loan subsidy under PMAY

PMAY stands for Pradhan Mantri Awas Yojana which is a Credit Linked Subsidy Scheme (CLSS) introduced by the Central Government with the aim of making affordable housing available for the economically weaker sections of the society – the rural and urban poor. By the 31st of March, 2022, this social welfare flagship programme targets to construct around 20 million affordable houses.

अगर आपके पास अपना खुद का घर नहीं है और आप अपना घर लेने की योजना बना रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास योजना आपके लिए एक बेहतर विकल्प है। पहले जहां इस योजना का लाभ गरीब वर्ग के लिए था वहीं अब इस योजना में लोन की रकम बढ़ाकर शहरी गरीब और मध्यम वर्ग को भी दायरे में लाया गया है। पहले लोन की रकम 3 से 6 लाख रुपए तक थी जिसे बढ़ाकर अब 18 लाख रुपए तक कर दिया गया है।

विशेषताएं


इस योजना के तहत मिलने वाली राशि और सब्सिडी राशि डायरेक्ट उम्मीदवार के बैंक खाते में आएगी जो कि आधार कार्ड से लिंक होगा जिससे कि उसे इसका सम्पूर्ण फायदा मिल सके।

प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले पक्के मकान 25 स्कार मीटर (लगभग 270 स्कार फिट) के होंगे जो की पहले से बड़ा दिए गए है पहले इनका आकर 20 स्कार मीटर (लगभग 215 स्कार फिट) तय किया गया था।

इस योजना में लगने वाला खर्चा केंद्र सरकार और राज्य सरकार के द्वारा मिलकर किया जायेगा । मैदानी क्षेत्रोँ में इस शेयर की जाने वाली राशि का अनुपात 60:40 होगा वहीं उत्तर-पूर्व और हिमालय वाले तीन राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह अनुपात 90:10 होगा।

प्रधान मंत्री आवास योजना को स्वच्छ भारत योजना से भी जोड़ा गया है इसके अंतर्गत बनने वाले शौचले के लिए स्वच्छ भारत योजना के तहत 12,000 रूपए अलग से आवंटित किये जायेंगे।

इस योजना के तहत यदि लाभार्थी चाहे तो 70 हजार रुपय का लोन भी ले सकता है जो की बिना ब्याज के होगा जिस क़िस्त रूप में पुनः भरना होगा जो की उसे विभिन्न फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट से अप्लाई करके लेना होगा। शहरी चैत्र में उम्मीदबार 70 हजार से अधिक लोन ले सकता है जो की बहुत ही काम ब्याज डरो पर उपलभ्ध होगा। लोन केटेगरी LIG, HIG, MIG केटेगरी के हिसाब से मिलेगी ।

लाभार्थी को संपूर्ण सुविधा जैसे टॉयलेट, पीने का पानी, बिजली, सफाई खाना बनाने के लिए धुआ रहित ईंधन, सोशल और तरल अपशिष्टो से निपटने के लिए इस योजना को अन्य योजनाओं से जोड़ा भी गया है।

आयवर्ग क्या है अगर आप पीएम आवास योजना के अंतरगत घर लेना चाहते हैं तो सबसे पहले ये देखें कि आप किस आयवर्ग में आते हैं।

अगर आप 3 से 6 लाख रुपए तक के आयवर्ग में आते हैं तो आपको ब्याज पर ज्यादा सब्सिडी मिलेगी, वहीं 6 से 12 लाख रुपए और 12 से 18 लाख रुपए सालाना आय वर्ग के लोगों का सब्सिडी कम होगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत कमजोर आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस या EWS) और लोअर इनकम ग्रुप (एलआईजी या LIG) को मिलने वाली क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (ब्याज सब्सिडी) का फायदा अगले साल तक उठाया जा सकता है.

जिन लोगों की आमदनी तीन लाख रुपये सालाना से कम है वे EWS कैटेगरी में आते हैं. छह लाख रुपये सालाना तक कमाने वाले लोग LIG में आते हैं. इन दोनों कैटेगरी में PMAY के तहत छह लाख रुपये तक के लोन पर 6.5 फीसदी तक ब्याज सब्सिडी का फायदा उठाया जा सकता है.

home loan subsidy under PMAY

ऐसे समझिए PMAY योजना


क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) में मध्यम आय वर्ग के ऐसे लोगों को जिनकी सालाना आय 6 लाख से 12 लाख रुपए के बीच है, उन्हें 9 लाख रुपये के 20 साल अवधि वाले होम लोन (Home Loan) पर 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलेगी.

मसलन होम लोन (Home Loan) पर ब्याज की दर 9 फीसदी है तो आपको PMAY के तहत यह 5 फीसदी ही चुकानी होगी. 12 लाख से 18 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को 4 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलेगी.

कहां से उठा सकते हैं फायदा


बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्माल फाइनेंस बैंक और बहुत से संस्थान इस योजना का लाभ ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं. नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) और हुडको (HUDCO) भी इस योजना में शामिल हैं.

क्या हैं शर्तें

1. सबसे पहले तो ऐसे लोग जिनके पास इस पहले से घर है वह इस योजना का लाभ नहीं उठा सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना का नियम है कि लाभ उसे ही मिलेगा जिसके पास पहले से कोई पक्का मकान नहीं होगा।

2. इस योजना की दूसरी शर्त है कि परिवार के किसी सदस्य को भारत सरकार की किसी योजना के तहत आवास योजना का लाभ ना मिला हो। यदि परिवार में किसी सदस्य को सरकारी योजना के तहत आवास का लाभ मिला है उसके किसी अन्य सदस्य को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सकता है।

3. इस योजना के लिए आवेदन के वक्त अविभाजित परिवार के सभी सदस्यों का आधार कार्ड का नंबर देना जरूरी है। इसमें पति-पत्नी, और अविवाहित बेटे और बेटी शामिल हैं। शादी के बाद बेटा या बेटी इस योजना के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं।


जानिए सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में


home loan subsidy under PMAY

जरुरी निर्देश


पक्के घर का लाभ उठाने वाले माता-पिता के विवाहित बेटे-बेटियां तो वैसे भी अलग परिवार माने जाते हैं। हालांकि, पति-पत्नी दोनों PMAY का लाभ नहीं ले सकते। यानी, बेटे-बहू या बेटी-दामाद के नाम पर हर हाल में एक ही मकान पर सब्सिडी मिल सकती है। यह उनकी मर्जी होगी कि मकान का मालिकाना हक कोई एक अपने पास रखें या दोनों साथ-साथ। आगे पढ़ें कितनी ब्याज पर कितनी सब्सिडी देगी सरकार।

12 लाख प्रति वर्ष आय वर्ग के लोगों के लिए


इसी तरह 12 लाख प्रतिवर्ष की आय वाले लोगों को 9 लाख रुपए तक लोन मिलेगा जिसमें ब्याज दर पर 4 फीसदी की सब्सिडी मिलेगी इसमें मासिक ईएमआई पर 2,158 रुपए की बचत होगी जो कि 20 वर्ष की अवधि में 2 लाख 39 हजार 843 रुपए तक होगी।

12 से 18 लाख आयवर्ग


यदि आपकी सालाना आय 12 से 18 लाख रुपए के बीच है तो आपको 12 लाख रुपए तक के लोन पर ब्याज दरों में 3 फीसदी की छूट मिलेगी। ये 110 स्क्वायर मीटर में हो रहे घर के निर्माण को लेकर दिए गए लोन पर निर्भर करेगा। 12 लाख रुपए पर 3 फीसदी की सब्सिडी को 20 साल में चुकाना होगा जिसके ब्याज पर मिली कुल छूट 2.30 लाख रुपए होगी। इस तरह से देखा जाए तो सरकार आपके लोन के लिए 2.30 लाख रुपए देगी जो कि आज के वक्त में बड़ी बचत है।

6 लाख सालाना आय वर्ग के लोगों के लिए


वहीं 6 लाख रुपए की वार्षिक आय वालों को 6 लाख रुपए तक का होम लोन मिल सकता है और ब्याज दर पर सरकार की तरफ से 6.5 फीसदी की सब्सिडी मिलती है। जिससे मासिक EMI में 2,219 रुपए की बचत होती है, ये बचत 20 वर्ष की अवधि में 2 लाख 46 हजार 625 रुपए तक होती है।

समझें ब्याज पर सब्सिडी का पूरा गणित


इसे ऐसे समझें मान लीजिए आपकी वार्षिक आय 18 लाख रुपए है तो आपको 12 लाख रुपए तक लोन मिलेगा जिस लोन पर सरकार आपको ब्याज दर पर 3 फीसदी की सब्सिडि देगी। इससे प्रतिमाह आपको 2,200 रुपए की बचत होगी जिसका 20 वर्ष में कुल 2 लाख 44 हजार 468 रुपए लाभ मिलेगा।

5 साल और बढ़ी


अगर आपकी सालाना आय 18 लाख रुपए है तो आपको पीएम आवास योजना पर 20 साल के होम लोन पर 2.4 लाख रुपए का लाभ मिल सकता है, बशर्ते आप पहली बार घर खरीदने जा रहे हों। पहले लोन चुकाने की सीमा 15 वर्ष थी जिसे बढ़ाकर अब 20 साल कर दिया गया है। सरकार अब आपके ब्याज पर सब्सिडी देगी जिससे मिलने वाली छूट का लाभ बढ़ जाएगा। इसके लिए सरकार ने रियल स्टेट मार्केट को चुना है।

home loan subsidy under PMAY

घर की मरम्मत कराने के लिए भी मिलेगा लाभ


आप किसी बिल्डर से घर खरीद रहे हैं या कोई पुराना मकान खरीद रहे हैं तो आप PMAY का लाभ उठा सकते हैं। जो लोग घर खरीदने की बजाय इसे खुद बनवा रहे हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। जिनके पास अभी पक्का मकान है, वो इसकी मरम्मत करने या इसमें कुछ और कमरे जुड़वाने या किसी दूसरे तरह से इसका विस्तार करने के लिए भी लोन ले सकते हैं। बैंक आपको मौजूदा पक्का मकान में किचन, कमरा आदि बनाने के लिए योजना के तहत लोन देने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकता कि आपके पास पहले से ही पक्का मकान है।

कार्पेट एरिया


हर कैटिगरी के लाभार्थी के अनुसार घर का क्षेत्रफल भी तय है। हालांकि, इसके तहत उसी एरिया को मापा जाता है जो दीवारों से घिरा हो जिसे कार्पेट एरिया कहा जाता है। इसमें दीवार की मोटाई का माप शामिल नहीं होता। आसान शब्दों में कहें तो जिस भाग पर आप दरी बिछा सकते हैं, वही घर का कार्पेट एरिया कहलाएगा। MIG I के लोगों के लिए कार्पेट एरिया 90 वर्ग मीटर यानी 968.752 वर्ग फीट है जबकि MIG II कैटिगरी के लिए यह 110 वर्ग मीटर यानी 1184.03 वर्ग फीट है।

खत्म हो सकती है कार्पेट एरिया की सीमा


एरिया तय किए जाने से शहरी क्षेत्र में लोग इस योजना के प्रति बहुत दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार कार्पेट एरिया की सीमा खत्म कर देगी।

कहां से ले सकते हैं लोन


आप कमर्शल बैंकों, हाउजिंग फाइनैंस कंपनियों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों, शहरी सहकारी बैंकों, छोटे वित्तीय बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों आदि से लोन लेकर ब्याज पर उचित सब्सिडी पा सकते हैं। आपको किसी तरह का प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं देना होगा। हां, आप योजना के तहत जितना लोन लेने के योग्य हैं, उससे ज्यादा लोन ले रहे हैं तो अतिरिक्त रकम पर आपको नॉर्मल प्रोसेसिंग फी देनी पड़ सकती है।


जानिए सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में

बुधवार, 15 जनवरी 2020

12वीं के बाद होते हैं ये एंट्रेंस एग्जाम



12वीं क्लास के बाद छात्रों को आगे के करियर के बारे में बहुत कुछ पता नहीं होता है। इससे वे असमंजस की स्थिति में रहते हैं। उनको पता ही नहीं होता कि क्या करें, कौन सा एंट्रेंस दे। इसी चीज को देखते हुए हम आज आपको उन एंट्रेंस एग्जाम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आप 12वीं के बाद दे सकते हैं।

इंजिनियरिंग के एंट्रेंस एग्जाम


entrance exam after 12th science

12वीं के बाद आप बैचलर ऑफ टेक्नॉलजी (बीटेक) या बैचलर ऑफ इंजिनियरिंग (बीई) कर सकते हैं।

दोनों में थोड़ा सा फर्क है। बीटेक में प्रैक्टिकल ज्यादा है जबकि बीई थिअरी बेस्ड कोर्स है।

इंजिनियरिंग कोर्सों में दाखिले के लिए सबसे बड़ा एंट्रेंस एग्जाम जेईई मेन है। इसका आयोजन साल में दो बार जनवरी और अप्रैल में नैशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा किया जाता है।

जेईई मेन के बाद जेईई अडवांस्ड देना होता है। उसके अलावा कुछ राज्यों द्वारा भी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है जैसे UPSEE, KEAM, KCET, WBJEE, AP EAMCET, TS EAMCET

प्राइवेट यूनिवर्सिटियों में दाखिला या तो जेईई मेन के आधार पर होता है या फिर यूनिवर्सिटी अपने एंट्रेंस एग्जाम का खुद आयोजन करती है।

इंजिनियरिंग के लिए कुछ प्रसिद्ध यूनिवर्सिटियों में वीआईटी, एसआरएम, मणिपाल, गितम और केआईआईटी हैं जो अपने प्रवेश परीक्षा का खुद आयोजन करती हैं।

मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम


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एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष में दाखिले के लिए राष्ट्रीय स्तर के एक प्रवेश परीक्षा NEET का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा JIPMER और AIIMS की प्रवेश परीक्षाओं भी आयोजन होता है।

आर्किटेक्चर एंट्रेंस एग्जाम


आर्किटेक्चर में दो मुख्य कोर्स होते हैं बैचलर ऑफ आर्किटेक्चचर (बी.आर्क) और बैचलर ऑफ प्लानिंग (बी.प्लान)।

आर्किटेक्चर के अंडरग्रैजुएट कोर्सों में दाखिले के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं JEE Main और NATA का आयोजन किया जाता है। कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी अपना खुद का एंट्रेंस कराती हैं।

फैशन और डिजाइन एंट्रेंस एग्जाम


फैशन स्ट्रीम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाता है। ज्यादातर संस्थान अपने खुद के एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं।

लॉ एंट्रेंस एग्जाम


एलएलबी, बीए एलएलबी, बीबीए एलएलबी और अन्य लॉ कोर्सों के लिए राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर और यूनिवर्सिटी स्तर पर प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन होता है।

टॉप लॉ एंट्रेंस एग्जाम है CLAT जिसका आयोजन नैशनल लॉ यूनिवर्सिटियों द्वारा किया जाता है। लेकिन एनएलयू दिल्ली अपना प्रवेश परीक्षा खुद आयोजित करती है।

आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ, सिम्बायॉसिस लॉ स्कूल, भारतीय विद्यापीठ जैसे संस्थान खुद का भी एंट्रेंस करवाते हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के आधार पर भी दाखिला देते हैं।

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होटल मैनेजमेंट एंट्रेंस एग्जाम


देश में कई कॉलेज होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग टेक्नॉलजी का कोर्स कराते हैं।

होटल मैनेजमेंट एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन राष्ट्रीय, राज्य और कॉलेज स्तरों पर होता है।

नाटा द्वारा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा NCHMCT JEE का आयोजन किया जाता है।

राज्य स्तरीय परीक्षाओं में महाराष्ट्र होटल मैनेजमेंट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट, होटल मैनेजमेंट के बैचलर कोर्सों में डब्ल्यूबीजेईई जॉइंट ऐडमिशन एग्जाम।, रिसर्च (जेईएचएओम), उथ्तर प्रदेश एंट्रेंस एग्जाम शामिल है। भारतीय विद्यापीठ, पंजाब यूनविर्सिटी जैसे संस्थान अपना खुद का होटल मैनेजमेंट एंट्रेंस टेस्ट कराते हैं।

मीडिया और जर्नलिजम एंट्रेंस एग्जाम


इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की किसी प्रवेश परीक्षा का आयोजन नहीं होता है। वैसे एमआईसीए और आईआईएमसी जैसे संस्थान काफी लोकप्रिय हैं।

पढाई के बारेमे सबकुछ देखे यहा 

रविवार, 12 जनवरी 2020

CBSE बोर्ड और ICSE बोर्ड में क्या अंतर है


 


CBSE vs ICSE Board

प्रत्येक माता-पिता यह करने के लिए इस चरण से गुजरते है कि कौन सा बोर्ड उनके बच्चे के लिए अच्छा होगा या कौन सा उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करेगा। हर बच्चे की अपनी अलग-अलग योग्यता स्तर और आकांक्षाएं होती है। CBSE और ICSE दोनों बोर्ड अपनी योग्यता के माध्यम से शिक्षा प्रदान करते है तथा दोनों ही बोर्ड के द्वारा उच्च शिक्षा प्रदान की जाती है। लेकिन इन दोनों ही बोर्ड के कार्य करने में बहुत बड़ा अंतर होता है।

CBSE बोर्ड क्या है | What is CBSE Board in Hindi


CBSE केन्द्र सरकार द्वारा संचालित एजुकेशन बोर्ड है।

CBSE का पुरा नाम Central board of secondary education (केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) है. इसकी हेड आफिस दिल्ली में हैं CBSE को क्षेत्र के अनुसार 7 जोन और 16 क्लस्टर बाटा गया हैं और इसके 2 जोन India से बहार है।

CBSE भारत का एक शिक्षा बोर्ड है। यह राष्ट्रीय स्तर पर सभी प्राइवेट तथा पब्लिक स्कूल को संचालित करता है।

इस बोर्ड को भारत सरकार के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। तथा यह बोर्ड सभी केन्द्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों, तथा निजी विद्यालयों को मान्यता प्रदान करता है। भारत में 19 हजार से भी ज्यादा स्कूलों को CBSE की मान्यता प्राप्त है।

सीबीएसई बोर्ड में विज्ञान और गणित के विषयों पर ज्यादा जोर दिया जाता है तथा यह NCERT द्वारा मान्यता प्राप्त है।

CBSE हर साल 10वीं और 12वीं की परीक्षा करवाती है, तथा इन परीक्षाओं के अलावा यह JEE Main, NEET आदि कुछ परीक्षाएं भी आयोजित करवाती है। साथ ही AIPMT (All India Pre Medical Test) भी आयोजित करती है। यह परीक्षा मेडिकल कॉलेजेस में प्रवेश लेने के लिए आयोजित की जाती है।

CBSE vs ICSE Board

ICSE  बोर्ड क्या है | What is ICSE  Board in Hindi


ICSE BOARD KI FULL FORM होती है – INDIAN CERTIFICATE OF SECONDARY EDUCATION

ICSE Board की Exam CISCE (Indian School Certificate Examination) के द्वारा ली जाती है। CISCE एक NGO संस्था है। यह बोर्ड 12वीं कक्षा तक की परीक्षा आयोजित करती है।

तथा यह भारत में स्कूल शिक्षा का एक निजी, गैर सरकारी बोर्ड (Non Govermental Board) है। जो ICSE की परीक्षा को अंग्रेजी माध्यम के द्वारा आयोजित करती है।

इसे भारत में नई शिक्षा नीति (New Education Policy) 1986 की सिफारिशों को पूरा करने के लिए बनाया गया था। ICSE की परीक्षा सिर्फ अंग्रेजी में होती है। ICSE के Affiliated Colleges के नियमित छात्र ही यह परीक्षा दे सकते है। निजी छात्रों को यह परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाती है।

आईसीएसई भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। उनमें से प्रत्येक प्रमाण पत्र प्रदान करता है जो वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त होते हैं | अगर आप आईसीएसई स्कूल में पढ़ रहे हैं तो आपको नुकसान नहीं होगा, क्योंकि सरकार को भी उनकी देखभाल करने के लिए बाध्य है।

CBSE बोर्ड और ICSE में क्या अंतर है


CBSE vs ICSE Board

ICSE Vs CBSE में दोनों की सुविधाओं और कार्यो को करने में बहुत अंतर है।

चिकित्सा या इंजीनियरिंग का अध्ययन करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए CBSE बोर्ड ज्यादा उपयुक्त है। CBSE के द्वारा AIEEE की परीक्षा आयोजित की जाती है। लेकिन I CSE इस परीक्षा को आयोजित नहीं करती है।

ICSE में पर्यावरण विषय का अध्ययन अनिवार्य है। जबकि CBSE में पर्यावरण विषय का अध्ययन अनिवार्य नहीं है।

ICSE केवल अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रदान करती है।

CBSE अंग्रेजी और हिंदी दोनों माध्यम की शिक्षा प्रदान करती है। जिसमें छात्र 2 भाषाओं में से किसी एक को चुन सकते है।

CBSE में छात्रों के ग्रेड के द्वारा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाता है।

जबकि ICSE के द्वारा 2 तरह से परीक्षा परिणाम घोषित होते है। एक ग्रेड और दूसरा अंकों के द्वारा।

अगर आप CBSE के छात्र है और आप 10वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहे है। तो आपको सिर्फ 6 विषयों का ही अध्ययन करना होगा।

और अगर आप ICSE के छात्र है तो आपको 12 विषयों का अध्ययन करना होगा।

CBSE छात्रवृति पर आधारित परीक्षाओं के अवसर प्रदान करती है। तथा छात्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित करने की परीक्षाओं का अधिक अवसर देती है। जो विभिन्न विषयों या अपनी रूचि के लिए छात्रों को पुरस्कार देता है।

ICSE भी इस तरह की परीक्षा आयोजित करती है। लेकिन CBSE बोर्ड इन परीक्षाओं को अधिक तथा नियमित रूप से करवाता है।

CBSE  छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है,

ICSE का उद्देश्य व्यावहारिक परीक्षणों के जरिए सख्ती से कौशल सीखाने के लिए जाना जाता है। व्यावहारिक परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि छात्रों ने सैद्धांतिक रूप से ज्ञान प्राप्त करने के बाद, इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की क्षमता आयी या नहीं।

CBSE भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है, ICSE नहीं है। उनमें से प्रत्येक प्रमाण पत्र प्रदान करता है जो वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त होते हैं लेकिन CBSE को भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसलिए, स्थानीय स्तर पर इसे सरकार का समर्थन प्राप्त होता है।

CBSE बोर्ड और स्टेट बोर्ड में क्या अंतर है

शनिवार, 11 जनवरी 2020

भारत के टॉप MBA एग्जाम्स


 



india ke top MBA entrance exam

दुनिया के अन्य देशों की तरह ही हमारे देश में भी प्रत्येक MBA एंट्रेंस एग्जाम्स का अपना एक अलग सिलेबस तथा पैटर्न होता है. इसलिए स्टूडेंट्स को प्रत्येक MBA एंट्रेंस एग्जाम्स के अपडेटेड पैटर्न की पूरी जानकारी होनी ही चाहिए.  स्टूडेंट्स को अगर MBA एंट्रेंस एग्जाम पैटर्न और सिलेबस की सटीक और पूरी जानकारी होगी तो वे अपडेटेड करिकुलम के मुताबिक अच्छी तैयारी करके एंट्रेंस एग्जाम में सफलता हासिल कर लेंगे.

India ke top MBA entrance exam in hindi

भारत के टॉप 8 MBA एंट्रेंस एग्जाम की जानकारी


1.CAT (CAT) कॉमन एंट्रेंस टेस्ट

2.XAT – जेवियर एडमिशन टेस्ट

3.MAT (मैट)– मैनेजमेंट एप्टीटयूड टेस्ट

4.SNAP – सिम्बायोसिस नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट

5. नरसी मोंजी मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट

6.CMAT – कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट

7.IIFT – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड MBA एंट्रेंस टेस्ट

8.MH-CET – महाराष्ट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट

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1.CAT (CAT) कॉमन एंट्रेंस टेस्ट


CAT को अक्सर MBA एंट्रेंस एग्जाम का ‘होली ग्रेल” माना जाता है. इसे अक्टूबर या नवंबर के महीने में आयोजित किया जाता है. CAT एग्जाम कैंडिडेट्स को सभी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIMs) में सभी पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम में एडमिशन लेने में सक्षम बनाता है. इसके अलावा, कई टॉप मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स भी अपने यहां एडमिशन देने के लिए CAT स्कोर को ही स्वीकार करते हैं. इस वजह से इस एग्जाम का महत्व और बढ़ जाता है.

एलिजिबिलिटी : किसी भी विषय में 50 फ़ीसदी मार्क्स अथवा CGPA स्कोर वाले ग्रेजुएट स्टूडेंट्स CAT एग्जाम में बैठ सकते हैं.

एग्जाम पैटर्न : CAT एग्जाम में वर्बल एबिलिटी तथा रीडिंग कम्प्रिहेंशन, डाटा इंटरप्रिटेशन, लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एबिलिटी सहित कुल मिलाकर 3 सेक्शन होते हैं. इस एग्जाम में कुल 100 प्रश्न पूछे जाते हैं और प्रत्येक सही उत्तर के लिए 3 अंक दिए जाते हैं.

2.XAT – जेवियर एडमिशन टेस्ट


XLRI द्वारा आयोजित, XAT भारत के सबसे पुराने मैनेजमेंट एंट्रेंस एग्जाम्स में से एक है. XLRI हर साल जनवरी में भारत के 33 प्रमुख शहरों में XAT एग्जाम आयोजित करता है. 70 से अधिक बी-स्कूल्स पर्सनलाइज्ड ग्रुप डिस्कशन/ पर्सनल इंटरव्यू के साथ अपने प्राइमरी एंट्रेंस क्राइटेरिया के रूप में XAT स्कोर को स्वीकार करते हैं.

एलिजिबिलिटी : किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन करने वाला कोई भी व्यक्ति XAT के लिए अप्लाई कर सकता है.

एग्जाम पैटर्न : XAT एग्जाम में मुख्यतः 4 सेक्शंस से कुल 100 MCQ (मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन्स) पूछे जाते हैं. वे चार सेक्शंस हैं - वर्बल एवं लॉजिकल एबिलिटी, क्वांटिटेटिव एबिलिटी, डाटा इंटरप्रिटेशन और डिसीजन मेकिंग तथा जनरल अवेयरनेस. XAT कैंडिडेट्स के मेरिट स्कोर के आधार पर उन्हें पर्सनल इंटरव्यू तथा ग्रुप डिस्कशन के लिए बुलाया जाता है.

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3.MAT (मैट)– मैनेजमेंट एप्टीटयूड टेस्ट


मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट (MAT) मैनेजेंट प्रोग्राम कराने वाले इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन हेतु एक नेशनल लेवल का एंट्रेंस एग्जाम है. इस टेस्ट का आयोजन भारत के 350 बी-स्कूल्स में एडमिशन के लिए AIMA (ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन) द्वारा वर्ष में 4 बार किया जाता है.

एलिजिबिलिटी : किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन करने वाला कोई भी व्यक्ति MAT के लिए अप्लाई कर सकता है.

एग्जाम पैटर्न : मैट एग्जाम,स्टूडेंट्स को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों ही मोड में एग्जाम देने की सुविधा प्रदान करता है. इस टेस्ट में प्रश्न मुख्यतः 5 कोर एरियाज लैंग्वेज कम्प्रिहेंसन,मैथेमेटिकल स्किल्स,डाटा एनालिसिस एंड सफिसियेंसी,इंटेलिजेंस और क्रिटिकल रीजनिंग तथा इंडियन एवं ग्लोबल इनवायरमेंट आदि से पूछे जाते हैं. इस टेस्ट का कुल समय 2 घंटा 30 मिनट होता है.

4.SNAP – सिम्बायोसिस नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट


सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी भारत में सबसे अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त प्राइवेट बी स्कूलों में से एक है. सालों से, इसने कैंडिडेट्स को विशेष और विरले MBA स्पेशलाइजेशन प्रदान करके खुद के लिए एक जगह बनाई है. SNAP नेशनल लेवल का एप्टीट्यूड टेस्ट है जो सिम्बियोसिस द्वारा पेश किए गए सभी पोस्ट ग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम में एडमिशन देने के लिए आयोजित की जाती है.

एलिजिबिलिटी : किसी भी विषय में 50 फ़ीसदी मार्क्स अथवा CGPA स्कोर वाले ग्रेजुएट स्टूडेंट्स SNAP एग्जाम में बैठ सकते हैं.

एग्जाम पैटर्न : SNAP एक ऑब्जेक्टिव टाइप MCQ टेस्ट है जिसका आयोजन प्रतिवर्ष दिसंबर महीने में किया जाता है. इसके सिलेबस में मुख्यतः चार टॉपिक जनरल इंग्लिश, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, जनरल अवेयरनेस तथा लॉजिकल और एनालिटिकल रीजनिंग को कवर किया जाता है. इस एग्जाम में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 25 फ़ीसदी निगेटिव मार्क्स दिए जाते हैं. इसकी कुल अवधि 2 घंटे है तथा इसमें कुल 125 प्रश्न पूछे जाते हैं.

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5. नरसी मोंजी मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट


NMIMS में एडमिशन के लिए यह एक MBA एंट्रेस एग्जाम है. NMIMS (नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज) मुम्बई में स्थित एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है. नरसी मोंजी एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित यह यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को विभिन्न डिसिप्लिन में MBA प्रोग्राम करने की सुविधा प्रदान करती है. एग्जीक्यूटिव और पार्ट टाइम MBA के लिए यह यूनिवर्सिटी सर्वाधिक स्टूडेंट्स की पसंद है.

एलिजिबिलिटी : किसी भी विषय में 50 फ़ीसदी मार्क्स अथवा CGPA स्कोर वाले ग्रेजुएट स्टूडेंट्स नरसी मोंजी मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट में बैठ सकते हैं

एग्जाम पैटर्न : एनM एक MCQ बेस्ड 2 घंटे का एग्जाम होता है. इस एग्जाम में मुख्यतः लैंग्वेज स्किल्स, क्वांटिटेटिव स्किल्स,डाटा इंटरप्रिटेशन और डाटा सफिसियेंसी और लॉजिकल रीजनिंग को कवर किया जाता है. लिखित एग्जाम के आधार पर स्टूडेंट्स की मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है तथा उन्हें उनके मार्क्स के आधार पर ग्रुप डिस्कशन तथा पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है. यहाँ एग्जीक्यूटिव MBA में एडमिशन वर्क एक्सपीरियेंस के आधार पर भी दिया जाता है.

6.CMAT – कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट


CMAT आल इंडिया काउंसिल फ़ॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) द्वारा मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन के लिए आयोजित एक MBA एंट्रेंस एग्जाम है. इसका आयोजन आल इंडिया काउंसिल फ़ॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) द्वारा ही किया जाता है.

एलिजिबिलिटी : किसी भी विषय में 50 फ़ीसदी मार्क्स अथवा CGPA स्कोर वाले ग्रेजुएट स्टूडेंट्स CMAT एग्जाम दे सकते हैं.

एग्जाम पैटर्न : CMAT एक ऑनलाइन टेस्ट है. इसके प्रश्न पत्र में कुल 100 ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न पूछे जाते है. इस एग्जाम की कुल अवधि 180 मिनट होती है.इस एग्जाम में 25 प्रश्न इसके मेन सेक्शन जैसे क्वांटिटेटिव टेक्नीक्स और डाटा इंटरप्रिटेशन, लॉजिकल रीजनिंग, लैंग्वेज कम्प्रिहेंशन और जनरल अवेयरनेस से पूछा जाता है. यह एग्जाम कुल 400 मार्क्स का होता है.प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 मार्क्स दिए जाते हैं तथा प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1 मार्क्स घटाया जाता है.

7.IIFT – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड MBA एंट्रेंस टेस्ट


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड भारत के सर्वश्रेष्ठ बी स्कूल्स में से एक है. IIFT इंटरनेशनल बिजनेस में MBA की डिग्री प्रदान करता है. भारत जैसे देश में इंटरनेशनल बिजनेस में MBA की डिग्री की बहुत डिमांड है. यह IIFT डिग्री स्टूडेंट्स को ग्लोबल सेटअप में मल्टीनेशनल कारपोरेशन को हैंडल करने की योग्यता का विकास स्टूडेंट्स में करती है और वे एक सफल मैनेजर साबित होते हैं. IIFT हरेक साल नवंबर महीने में MBA एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन IIFT दिल्ली और IIFT कलकत्ता कैम्पस में एडमिशन के लिए करता है.

एलिजिबिलिटी : किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन करने वाला कोई भी व्यक्ति IIFT का एग्जाम देने के योग्य है.

एग्जाम पैटर्न : MBA इंटरनेशनल बिजनेस प्रोग्राम में एडमिशन के लिए IIFT खुद का MBA एंट्रेस एग्जाम आयोजित करता है. यह लिखित एग्जाम, एस्से राइटिंग टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू के जरिये स्टूडेंट्स की टेस्ट लेता है. इसके टेस्ट पेपर में इंग्लिश कम्प्रिहेंशन, जनरल नॉलेज और अवेयरनेस,लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एनालिसिस आदि विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं.

8.MH-CET – महाराष्ट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट


जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि MH - CET, महारष्ट्र में गवर्नमेंट, यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट,यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट और महाराष्ट्र के अवैतनिक इंस्टीट्यूट्स से MBA / एमएमएस और पीजीडीबीएम / पीजीडीएम की दो साल का फुलटाइम पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्सेज में एडमिशन के लिए मुख्य मैनेजमेंट एंट्रेंस एग्जाम है.

एलिजिबिलिटी : किसी भी विषय में 50 फ़ीसदी मार्क्स अथवा CGPA स्कोर वाले ग्रेजुएट स्टूडेंट्स MH - CET एग्जाम दे सकते हैं.

एग्जाम पैटर्न - MH - CET मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन्स वाला एक कंप्यूटराइज्ड ऑब्जेक्टिव टेस्ट है. इसमें विभिन्न सब्जेक्ट्स जैसे वर्बल एबिलिटी,रीडिंग कम्प्रिहेंसन,क्वांटिटेटिव एनालिसिस,डाटा इंटरप्रिटेशन, डाटा सफिसियेंसी,एनालिटिकल रीजनिंग, वर्बल रीजनिंग और नॉन वर्बल रीजनिंग आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं. इसमें कुल 200 प्रश्न पूछे जाते हैं तथा उन्हें 150 मिनट में हल करना होता है.

12वीं के बाद होते हैं ये एंट्रेंस एग्जाम

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