मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

बाल झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय


सुंदर बाल हमारी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं लेकिन यदि ये बाल ही गिरने लगे तो हमारे लिए ऐसी समस्या बन जाते हैं कि इन्हें ठीक करना लगभग मुश्किल हो जाता है। गिरते, टूटते और झड़ते बाल किसी भी महिला के आत्मविश्वास को नकारात्मक तौर पर प्रभावित करते हैं

झड़ते बालों का कारण (Reasons for Hair Fall in Hindi)


1. प्राकृतिक कमी


संभव है कि आपकी डाइट से आयरन, कॉपर, जिंक और प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व कम या गायब हों। बालों के गिरने का एक अन्य कारण विटामिन डी की कमी भी है। इससे बचने के लिए सुबह की धूप सेंकना जरूरी है।

2. हार्मोनल असंतुलन


उम्र के तीसरे पड़ाव पर एक महिला हार्मोनल असंतुलन के दौर से गुजरती है जो बालों के गिरने का कारण बनता है। एस्ट्रोजेन ही वह मुख्य हार्मोन है जो महिला निर्माण करती है लेकिन टेस्टोस्टेरोन और डीएचईए जैसे अन्य एंड्रोजेन्स भी एक महिला के शरीर में उत्पन्न होते हैं।

3. थायरॉयड


यदि आपको थायरॉयड है तो बालों के गिरने के साथ ही वजन बढ़ या कम हो जाता है, ठण्ड या गरमी ज्यादा महसूस होती है।

4. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम


जिन महिलाओं को पीसीओएस होता है उनमें हार्मोनल असंतुलन होता है, जो सामान्य के मुकाबले अधिक एंड्रोजेन्स उत्पन्न करता है। इससे चेहरे और शरीर पर बाल ज्यादा होने की आशंका रहती है लेकिन सिर के बाल कम होने लगते हैं।

5. बर्थ कंट्रोल पिल्स


इन पिल्स में उपस्थित हार्मोन ऑवूलेशन को दबा देते हैं जो बालों के पतले होने का कारण बन सकता है। कई बार जब आप इन पिल्स को लेना बंद करती है तो भी बालों के गिरने की समस्या से सामना करना पड़ सकता है।

6. तनाव


अत्यधिक तनाव की वजह से बाल अचानक गिरना शुरू कर देते हैं, जो महीनों तक गिरते रह जाते हैं।

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बालों को झड़ने से रोकने के लिए​ (Baal Jharne se Rokne ke liye Gharlu Upay


1. नारियल का दूध


एक मध्यम आकार के नारियल को कसने के बाद बर्तन में डाल कर पांच मिनट के लिए धीमी आंच पर रखें। अब इसे निथार लें और ठण्डा होने दें। इसमें एक चम्मच काली मिर्च पाउडर और मेथी के बीज डालें। इसे स्कल्प और बालों पर लगाएं। 20 मिनट बाद शैंपू से धो लें। इसमें निहित प्रोटीन और एसेंशियल फैट बालों को स्वस्थ रखता है और झड़ने से रोकता है।

2. ग्रीन टी


2-3 टी बैग को दो कप गरम पानी में डालें। जब यह ठण्डा हो जाए तो इसे अपने स्कल्प पर डालें और हल्के से सिर की मालिश करें। एक घण्टे बाद ठण्डे पानी से धो लें। ग्रीन टी एंटी ऑक्सिडेंट का बेहतरीन स्रोत है जो बालों को मजबूत करता है।

3. बीटरुट जूस


बीटरुट के सात-आठ पत्तों को उबालने के बाद पांच-छह मेहंदी के पत्तों के साथ पीस लें। इस पेस्ट को बालों की जड़ों पर लगाएं और लगभग बीस मिनट के लिए छोड़ दें। गुनगुने पानी से बाल धो लें। बीटरुट का यह जूस विटामिन सी और बी6, फोलेट, मैंग्नीज, बेटेन और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है जो स्वस्थ बालों के लिए जरूरी है।

4. दही और शहद


दो चम्मच दही में एक चम्मच शहद और नींबू मिलाएं। डाई ब्राश की मदद से इस पेस्ट को स्कल्प और जड़ों पर आधे घण्टे के लिए लगाए रखें। फिर धो दें। इस पेस्ट को सप्ताह में एक बार लगाएं।

5. एलोवेरा


बालों को गिरने से रोकने में एलोवेरा अहम भूमिका निभाता है। इसके एक टुकड़े से गूदा निकालिए और पौने घंटे के लिए स्कल्प पर लगाकर छोड़ दीजिए। फिर सामान्य पानी से धो लें। बेहतरीन परिणाम के लिए इसे सप्ताह में तीन-चार बार लगा सकते हैं।
एलोवेरा में एंज़ाइम होते हैं जो बालों के स्वस्थ विकास को सीधे बढ़ावा देने में शामिल होते हैं। इसके अलावा, अपने एल्कलाइन गुण के कारण ये बालों के पीएच को एक सही स्तर पर लाने में मदद कर सकते हैं और बाल विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।
एलोवेरा के नियमित उपयोग से आप खोपड़ी की खुजली को दूर कर सकते है, खोपड़ी की लालिमा और सूजन को कम कर सकते हैं, बालों की शक्ति और चमक बढ़ा सकते हैं और रूसी को भी कम कर सकते हैं। एलो वेरा जेल और रस दोनों ही इस काम में प्रभावी हैं।

6. प्याज का जूस


प्याज के रस में उच्च मात्रा में सल्फर कंटेंट होता है, जो बालों के रोम के लिए रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, बालों के रोम का पुनर्निर्माण करने और सूजन को कम करने में मदद करता है जिसके कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है। प्याज के रस में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो बालों के झड़ने का कारण बन सकने वाले कीटाणुओं और परजीवियों को मारने में मदद करता है, और खोपड़ी संक्रमण का उपचार करता है।

प्याज में निहित एंटी बैक्टीरियल गुण स्कल्प को संक्रमण से बचाते हैं और रक्त संचार भी बढ़ाते हैं। प्याज को पीसकर इसमें से जूस निकाल लीजिए। रुई की मदद से स्कल्प पर जूस लगाइए और आधे घण्टे के लिए लगा छोड़ दीजिए। सामान्य पानी से धोने के बाद शैंपू कीजिए। सप्ताह में एख बार ऐसा कीजिए, फर्क खुद ही दिखने लगेगा।

7.बालों की तेल मालिश


अपने बालों को खोने का नुकसान कम करने के लिए जो पहला कदम आप उठा सकते हैं वह है तेल के साथ अपने सिर की मालिश करना। बालों और सिर की उचित मालिश करने से बालों के रोम में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और आपके बालों की जड़ों की शक्ति में वृद्धि होती है। यह आपको आराम पहुंचाने और तनाव की भावनाओं को कम करने में मदद भी करेगा।

8.आंवला


बालों के प्राकृतिक और तेज़ी से विकास के लिए, आप आंवले का भी उपयोग कर सकते हैं। आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है, जिसकी शरीर में कमी बालों को गिरने का एक कारण हो सकती है।

9.मेथी


मेथी बालों के झड़ने के उपचार में बहुत प्रभावी है। मेथी के बीज में हार्मोन अंटेसीडेंट होते हैं जो बालों के विकास को बढ़ाने और बालों के रोम के पुनर्निर्माण में मदद करते हैं। इसमें प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड भी होता है जो बालों के विकास को प्रोत्साहित करता है।

करी पत्ते का तेल


curry leaves करी पत्ते का एक गुच्छा ले कर उसे साफ पानी से धो लें और सूरज की धूप में तब तक सुखा लें, जब तक कि यह सूख कर कड़ा न हो जाए। फिर इसे पाउडर के रूप में पीस लें अब 200 एम एल नारियल के तेल में या फिर जैतून के तेल में लगभग 4 से 5 चम्मच कड़ी पत्ती मिक्स कर के उबाल लें। दो मिनट के बाद आंच बंद कर के तेल को ठंडा होने के लिए रख दें। तेल को छान कर किसी एयर टाइट शीशी में भर कर रख लें।

बालों को घना बनाने के लिए कैसे करें कड़ी पत्‍ते का इस्‍तेमाल?

सोमवार, 30 दिसंबर 2019

शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर


शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर


Shivaji university kolhapur


स्थापना – 1962
कैंपस – 853 एकड़
फैकल्टी – 192
कालेज टाइप – स्टेट यूनिवर्सिटी
यूनिवर्सिटी इंडिया रैंक – 65th

एवरेज प्लेसमेंट


शिवाजी यूनिवर्सिटी कोल्हापुर एक बेहतर कालेज है। NAAC ने इसे AAA+ ग्रेड दी है। यहाँ का एवरेज प्लेसमेंट 3.50 लाख रुपये है। आप यहाँ पर MAHA CET एग्जाम देकर दाखिला ले सकते हैं।

जनपद का सामाजिक विकास


पश्चिम महाराष्ट्र में कोल्हापुर का एक विशिष्ट ऐतिहासिक स्थान है।छत्रपति शिवाजी महाराजा के वैचारिक वारिस छत्रपति शाहु महाराजा ने इस जनपद का सामाजिक विकास किया है।उन्होंने अधीनस्थ राजा के रूप में अधिष्ठित होते हुए भी ‘लोकराजा’ के रूप में केवल कोल्हापुर जनपद में ही नहीं तो भारत तथा भारत के बाहर भी ख्याति प्राप्त की है।

विश्वविद्यालय की स्थापना


इसजनपद में 1962 ई. में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई जिसे ‘शिवाजी’ विश्वविद्यालय नाम दिया गया। विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग की अधिकृत स्थापना 1993 ई. में हुई है परंतु 1962 ई. से मानद अध्यापकों के सहकार्य से हिंदीभाषा तथा साहित्य में अध्ययन, अध्यापन, अनुसंधान कार्य होता रहा है।1993 ई. के बाद अनेक शोध-परियोजनाएँ प्रारंभ होने के पूर्व से ही एम.ए., एम.फिल. की कक्षाएँ तथा पीएच.डी. उपाधि हेतु शोधकार्य आरंभ हुआ था।

अनेक छात्र उक्त उपलब्धियाँ प्राप्त कर केवल महाराष्ट्र में ही नहीं तो महाराष्ट्र के बाहर भी सेवारत रहे हैं।वर्ष 2018-19 विभाग का रजत वर्ष रहा । सम्पूर्ण वर्ष में रजत वर्ष के उपलक्ष्य में विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया । अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय विद्वानों के व्याख्यानों का आयोजन किया गया जिसका लाभ विभाग के छात्रों ने उठाया ।

विभाग में एम.ए., एम.फिल., पीएच.डी. की उपाधि हेतु अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसंधान कार्य होता है। इसके साथ ही 1996 ई. से स्वयं आधारित तत्त्वावधान में ‘अनुवाद पदविका पाठ्यक्रम’ भी चलाया जा रहा है।

12 वीं पंचवार्षिक योजनांतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा हिन्दी विभाग के सक्षमीकरण तथा आधुनिकीकरण हेतु रु.54 लाख मंजूर हुए । इसके अंतर्गत विभाग में कौशल्य आधारित एम.ए. भाषा प्रौद्योगिकी तथा ‘संगणक तथा भारतीय भाषा सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग’ शीर्षक के नवीन पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं ।

भाषा तथा अभिकलनात्मक भाषाविज्ञान,प्राकृतिक भाषा संसाधन (Languages,Computational Linguistics,Natural language Processing) संगणकज्ञानादिपर बल देकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा निधि मंजूर हुआ ।

इसके साथ विभिन्न विषयों – प्रसंगों पर आधारित संगोष्ठियाँ, अधिवेशन, विस्तार-व्याख्यान, सेट-नेट पाठ्यक्रम से संबंधित कार्यशालाएँ, विभागीय प्रकाशन आदि अकादमिक गतिविधियाँ गतिशील रही हैं। अनेक छात्रों ने पीएच.डी. तथा एम.फिल. उपाधि हेतु शोधकार्य संपन्न किया है। विभागीय सदस्यों ने पांच बृहत तथा तीन लघु शोध परियोजनाएँ भी संपन्न की हैं।

विभाग में हिंदीसाहित्य, अनुवाद,‘भाषाप्रौद्योगिकी’, तुलनात्मक साहित्य, प्रयोजनमूलक हिंदीके क्षेत्र में शोधकार्य रहा है।साथ ही विभाग में सांप्रत कार्यरत तथा पूर्व कालावधि में कार्यरत सभी सदस्यों की समीक्षात्मक, शोधपरक, सृजनात्मक, अनूदित कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।इसके पूर्व विभाग में महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी, दक्षिण भारत हिंदीपरिषद एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के तत्त्वावधान में अनेक राष्ट्रीय तथा एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई है।

शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर


आज तक निम्नलिखित प्राध्यापक अध्यक्ष के रूप में कार्य सँभाल चुके हैं ।


नाम पद कार्यकाल

डॉ.वसंत मोरे
एम.ए.,पीएच.डी. प्रपाठक 6 जुलाई,1993 – 31 दिसंबर,1993

डॉ.अर्जुन चव्हाण
एम.ए.,बी.एड.,पीएच.डी. अधिव्याख्याता 1 जनवरी,1994 - 31 मई,1994
(प्रभारी कार्यकाल)

डॉ.पांडुरंग पाटील
एम.ए.,पीएच.डी. प्रपाठक 1 जून,1994 - 31 मई,2000

डॉ.अर्जुन चव्हाण
एम.ए.,बी.एड.,पीएच.डी. प्रपाठक 1 जून,2000 - 31 मई,2003

डॉ.पांडुरंग पाटील
एम.ए.,पीएच.डी. प्राध्यापक 1 जून,2003 - 31 मई, 2005

डॉ.अर्जुन चव्हाण
एम.ए.,बी.एड.,पीएच.डी. प्रपाठक 1 जून,2005 - 5 जून, 2008

डॉ.पद्मा पाटील
एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी. प्राध्यापक 6 जून, 2008-
विभाग में कार्यरत संकाय को अनेक पुरस्कार तथा सम्मान प्राप्त हुए हैं ।

प्रा. डॉ. पद्मा पाटील
‘ताज मुघलिनी’ पुरस्कार, अखिल भारतीय कवयित्री परिषद, उत्तर प्रदेश 2003 (कादम्बिनी : हिंदी कविता संग्रह)
हिंदीतर भाषी हिंदी लेखिका पुरस्कार : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय,भारत सरकार: नई दिल्ली. 2005 (मुक्तिबोध की कविता : कला, शिल्प और सौंदर्य) रु.1,00,000/-
त्रिनिदाद हिंदी अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान, त्रिनिदाद एण्ड टोबागो,वेस्ट इंडीज 2011 $ 1000

• प्रा. डॉ. अर्जुन चव्हाण
पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार,महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई 1998 (अनुवाद चिंतन) रु.15,000/-
हिंदीतर भाषा हिंदी लेखक पुरस्कार : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार: नई दिल्ली. 2003(अनुवाद: समस्याएँ एवं समाधान)रु.50,000/-

• प्रा. डॉ. पांडुरंग पाटील
मामा वरेरकर ‘अनुवाद’ पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई 2012 (अग्निदिव्य) रु. 25,000/-

• डॉ. वसंत मोरे
महाराष्ट्र राज्य ‘आदर्श शिक्षक’ पुरस्कार, महाराष्ट्र शासन, मुंबई 1993
पं. महावीरप्रसाद द्विवेदी पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई 1994 (हिंदी और उसका व्यवहार) : रु. 15,000/-
गजानन माधव मुक्तिबोध मराठी भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई 2006 रु. 51,000/-
जून, 2008 से सत्र परीक्षा तथा क्रेडिट योजनांतर्गत एम.ए. के नवीन पाठ्यक्रम का निर्धारण हुआ है। 2011 से एम. ए. में ‘भाषा प्रौद्योगिकी’ पाठ्यक्रम प्रारंभ किया है। वर्तमान में सॉफ्टवेयर्स साधित संगणक प्रयोगशाला भी विकसित की गई है। वैश्वीकरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी के जमाने में शिवाजी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के छात्र जीवन में व्यावसायिक स्तर पर अपनी जगह बना सकें, इस हेतु विभाग द्वारा हर तरह की योजनाएँ बनाई जा रही हैं । लघु अवधि के विविध पाठ्यक्रमों का आयोजन हिन्दी विभाग में किया गया है । संप्रति हिंदीविभाग की अध्यक्ष के रूप में प्रो. पद्मा पाटील कार्यरत हैं।

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शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019

सरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मुंबई


सरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मुंबई


Sardar Patel Institute of Technology

स्थापना – 2005
कैंपस – 47 एकड़
टोटल फैकल्टी – 61

इंजीनियरिंग करने के लिए कितने साल लगते हे और फीस


मुंबई में स्थित यह कालेज बहुत शानदार है। यहाँ इंजीनियरिंग करने के लिए आपको चार सालों में लगभग 6 लाख रुपये फीस देनी पड़ती है। कालेज में जिम, लाइब्रेरी, सपोर्ट क्लब जैसी सभी सुविधाएँ है।

इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम


यहाँ आप MAHA CET यानी की महाराष्ट्र में होने वाले इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम और JEE MAIN के द्वारा दाखिला ले सकते हैं। NAAC ने इसे AAAA ग्रेड में रखा है।

रैंकिंग


सरदार पटेल प्रौद्योगिकी संस्थान (Sardar Patel Institute of Technology / SPIT) , मुम्बई विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एक स्वायत्त इंजीनियरिंग शिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान है। भारत में इंजीनियरी शिक्षण संस्थानों में इसकी रैंकिंग (NIRF 2017) 101 – 150 के बीच है।

मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई, महाराष्ट्र का विश्वविद्यालय है। 1860 से 70 के दौरान जब भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा था, उस समय, विशेषकर ओवल मैदान के किनारे, अधिकांश विक्टोरियन भवनों का निर्माण हुआ। उन दिनों मैदान समुद्र के नजदीक हुआ करता था और मुंबई विश्वविद्यालय, पश्चिम रेलवे मुख्यालय का भवन तथा उच्च न्यायालय सीधे अरब सागर के सामने थे। इनमें मुंबई विश्वविद्यालय भवन सबसे शानदार है। गिलबर्ट स्कॉट ने इसका डिजाइन तैयार किया था, यह 15वीं शताब्दी का इटेलियन भवन जैसा दिखता है। इसका भवन, इसका विशाल पुस्तकालय, कन्वोकेशन हॉल और 80 मी. ऊंचा राजाबाई टावर बहुत सुंदर है।

स्कॉलरशिप्स


लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से मिलने वाली स्कॉलरशिप्स


जी हां! भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने 550 से अधिक भारतीय स्व-शासित रियासतों को एक भारत के तौर पर एकजुट किया था. भारतीय छात्रों के उत्थान के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर कुछ खास स्कॉलरशिप्स दी जाती हैं.

आजाद भारत को एकजुट करने में उनका योगदान भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा चुका है क्योंकि सरदार पटेल ने लगभग 2 वर्षों के अल्प समय में 550 से अधिक भारतीय रियासतों को आजाद भारत के साथ शामिल कर लिया था. देश की एकता और अखंडता के लिए यह अपने आप में एक अति महत्वपूर्ण कार्य था जो सरदार पटेल ने अपनी सूझ-बूझ और दूरदर्शिता से काफी कम समय में शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कर दिया था और तभी से वे भारत में “लौह पुरुष” के नाम से सुप्रसिद्ध हो गए. भारत के छात्रों को सर्वांगीण विकास के लिए आज हमारे देश में कुछ विशेष स्कॉलरशिप्स सरदार पटेल के नाम पर मेधावी और जरूरतमंद छात्रों को दी जाती हैं.

भारतीय छात्रों को लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से मिलने वाली स्कॉलरशिप्स

सरदार पटेल ने हमारे देश भारत का राजनीतिक एकीकरण करके पूरी दुनिया के सामने एक शानदार मिसाल कायम कर दी और उनके सम्मान में आज हमारे देश में कई एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स और भारतीय छात्रों के उत्थान के लिए स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी लेवल पर कुछ विशेष केटेगरीज़ में भारतीय छात्रों को स्कॉलरशिप्स प्रदान की जा रही हैं

सरदार पटेल क्राइसिस स्कॉलरशिप प्रोग्राम

यह स्कॉलरशिप ऐसे छात्रों की मदद करने के उद्देश्य से आर्थिक सहायता प्रदान करती है जो अपने जीवन में किसी संकट से जूझ रहे होते हैं. इस स्कालरशिप के तहत छात्रों को 10 हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक फाइनेंशल एड (स्कूल/ कॉलेज/ यूनिवर्सिटी को एकमुश्त में सीधा भुगतान किया जाता है) प्रदान की जाती है.

सरदार पटेल हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप्स

यह स्कॉलरशिप भी हमारे देश में समाज के कमजोर वर्गों के छात्रों को हायर एजुकेशन हासिल करने में मदद प्रदान करती है. यह स्कॉलरशिप ऐसे छात्रों को प्रदान की जाती है जो मेधावी होते हैं लेकिन किसी न किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने को मजबूर हो जाते हैं. हमारे देश में कम्युनिकेशन मल्टीमीडिया एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (CMAI) द्वारा भारत के छात्रों को हायर एजुकेशन हासिल करने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रदान की जा रही है. यह स्कॉलरशिप NRI स्टूडेंट्स को नहीं दी जाती है. इसी तरह, भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार के छात्रों को इस स्कॉलरशिप में वरीयता दी जाती है. इस स्कॉलरशिप को हासिल करने के लिए छात्रों को ऑनलाइन/ ऑफलाइन स्कॉलरशिप एग्जाम देना होता है लेकिन इस टेस्ट में सफल छात्रों को पर्सनल इंटरव्यू नहीं देना पड़ता है. इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को उनकी एजुकेशनल फीस का 10 फीसदी से 100 फीसदी भुगतान किया जाता है. इस स्कॉलरशिप के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया निम्नलिखित है:

Sardar Patel Institute of Technology Highlights:


SPIT is a well-established college in Mumbai. More Highlights of the university are mentioned below.








































Year of Establishment1962
Type Of InstitutionPrivate-Self Financed [Autonomous]
Approved ByAICTE
Affiliated ToMumbai University
Accreditated ByNAAC, NBA
InfrastructureLibrary, Seminar Hall, Computer Lab., Electronics Lab.
SPIT AddressSardar Patel Institute of Technology, Bhavan’s Campus, Munshi Nagar, Andheri

(West), Mumbai.
Contact No.022-26707440, 26287250
CoursesUndergraduate and Postgraduate

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जादू की छड़ी




जादू की छड़ी

Magical Stick


एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी। अचानक उसके कमरे की खिडकी पर बिजली चमकी। शालू घबराकर उठ गई। उसने देखा कि खिडकी के पास एक बुढिया हवा मे उड़ रही थी। बुढ़िया खिडकी के पास आइ और बोली ``शालू तुम मुझे अच्छी लड़की हो। इसलिए मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ।'' शालू यह सुनकर बहुत खुश हुई।


बुढिया ने शालू को एक छड़ी देते हुए कहा ``शालू ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़ कर दो बार घुमाओगी वह चीज गायब हो जाएगी।'' अगले दिन सुबह शालू वह छड़ी अपने स्कूल ले गई। वहा उसने शैतानी करना शुरू किया। उसने पहले अपने समने बैठी लड़की की किताब गायब कर दी फिर कइ बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला कि यह शालू की छड़ी की करामात है।


जब वह घर पहुँची तब भी उसकी शरारतें बंद नही हुई। शालू को इस खेल में बडा मजा आ रहा था। रसोई के दरवाजे के सामने एक कुरसी रखी ती। उसने सोचा, ``क्यों न मै इस कुरसी को गायब कर दूँ। जैसे ही उसने छडी घुमाई वैसे ही शालू की माँ रसोइ से बाहर निकल कर कुरसी के सामने से गुजरीं और कुरसी की जगह शालू की माँ गायब हो गईं।


शालू बहुत घबरा गई और रोने लगी। इतने ही में उसके सामने वह बुढिया पकट हुई। शालू ने बुढिया को सारी बात बताई। बुढिया ने शालू से कहा `` मै तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हू लेकिन उसके बाद मै तुमसे ये जादू की छडी वापस ले लूगी।''


शालू बोली ``तुम्हे जो भी चाहिए ले लो लेकिन मुझे मेरी माँ वापस ला दो।'' तब बुढिया ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते शालू की माँ वापस आ गई। शालू ने मुड़ कर बुढ़िया का शुक्रिया अदा करना चाहा लेकिन तब तक बुढ़िया बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी। शालू अपनी माँ को वापस पाकर बहुत खुश हुई और दौडकर गले से लग गई।


दन्त-परी 

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे (COEP)



गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे (COEP)


पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना 1854 में हुई. यह देश के सबसे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक है. यह एशिया के सबसे पुराने कॉलेजों की फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर आता है.



कॉलेज का विवरण


पुणे के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना 1854 में हुई थी. यह देश के सबसे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक है. यह एशिया के सबसे पुराने कॉलेजों की फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर आता है. दिलचस्प यह है कि यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है जो मुला और मुथा नदी के संगम पर स्थित है. 2003 में कॉलेज को ऑटोनोमस का दर्जा मिला. इंडिया टुडे-नीलसन भारत के बेस्‍ट 25 इंजीनियरिंग कॉलेज सर्वे 2016 की लिस्‍ट में COEP को 11वां स्‍थान दिया गया है.


स्थापना – 1854
कैंपस – 37 एकड़
टोटल फैकल्टी – 204
रैंक इन इंडिया – 45th


College of Engineering Pune बहुत ही अच्छा संस्थान है। समझ लीजिए की इंजीनियरिंग की चाहत रखने वाले स्टूडेंट्स के मन में आईआईटी के बाद सबसे पहले यही विचार आता है। यह कालेज बहुत पुराना है और यहाँ का सिस्टम भी बहुत अच्छा है।


NAAC ने इसे AAAA+ ग्रेड से नवाजा है। यहाँ इंजीनियरिंग अच्छे से करने के बाद एवरेज प्लेसमेंट 5 लाख रुपये सालाना तो होता ही है। यहाँ पर आप MHT CET और JEE MAIN के द्वारा एडमिशन ले सकते हैं।


कोर्स: पुणे के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में 9 अंडर ग्रेजुएटस और 23 पोस्ट ग्रेजुएटस कोर्सेज कराए जाते हैं.
पता: कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, वेलेज़ली रोड़, शिवाजीनगर, पुणे- 411005, महाराष्ट्र
फोन: +91-20-25507000
फैक्स: +91-20-25507299


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मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

इंडिया के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज



Top Engineering Colleges in India


ये हैं देश के टॉप 10 इंजीनियरिंग कॉलेज


1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, मद्रास (चेन्नई, तमिलनाडु)


2. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, बॉम्बे (मुंबई, महाराष्ट्र)


3. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, खड़गपुर (खड़गपुर, पश्चिम बंगाल)


4. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, दिल्ली (नई दिल्ली)


5. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, कानपुर (उत्तर प्रदेश)


6. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, रुड़की (उत्तराखंड)


7. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, हैदराबाद


8. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, गांधीनगर (अहमदाबाद, गुजरात)


9. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, रोपड़-रूपनगर (पंजाब)


10. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, पटना (बिहार)



1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, मद्रास (चेन्नई, तमिलनाडु)


Indian Institute of Technology Madras (IITM)
करीब 250 एकड़ में फैला यह इंस्टीट्यूट देशभर में ना सिर्फ बेहतरीन रिसर्च सेंटर के रूप में जाना जाता है बल्कि शिक्षण और इंडस्ट्रियल कंस्लटेंसी के लिए भी जाना जाता है. इंडिया टुडे-नीलसन बेस्‍ट कॉलेज सर्वे 2014 में IIT- Madras को भारत के बेस्‍ट इंजीनियरिंग कॉलेज में पांचवां स्‍थान दिया गया है.


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, चेन्नई में 35 के करीब कोर्स पढ़ाए जाते हैं, जिनमें बी.ई / बी. टेक, एम.ई. / एम.टेक, बी.एस.सी., एम.एस.सी, बीई. मरीन इंजीनियरिंग और एम.ई मरीन इंजीनियरिंग शामिल हैं.



2. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, बॉम्बे (मुंबई, महाराष्ट्र)


Indian Institute of Technology Bombay (abbreviated as IITB or IIT Bombay)


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई मुम्बई शहर के उत्तर-पश्चिम में पवई झील के किनारे स्थित भारत का अग्रणी स्वशासी अभियांत्रिकी विश्वविद्यालय है। यह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रृंखला का दूसरा सबसे बड़ा परिसर और महाराष्ट्र राज्य का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। आई. आई. टी., मुंबई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रृंखला का दूसरा संस्थान था.



3. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, खड़गपुर (खड़गपुर, पश्चिम बंगाल)


Indian Institute of Technology Kharagpur (IIT Kharagpur or IIT-KGP)


पश्चिम बंगाल स्थित इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी खड़गपुर (IIT Kharagpur) की स्थापना हिजली बंदी गृह के पास 1950 में हुई. जब यहां पहले सत्र की शुरुआत हुई थी तब 42 शिक्षक और 224 छात्र थे.
इंडिया टुडे-नीलसन बेस्‍ट कॉलेज सर्वे 2016 में भारत के बेस्‍ट इंजीनियरिंग कॉलेज में IIT Kharagpur को दूसरा स्‍थान दिया गया है.
यह उन पहले आइआइटी में से है जिनकी स्थापना सरकार ने सबसे पहले की थी. कैंपस की स्थापना खडग़पुर के कुख्यात हिजली बंदी गृह के पास की गई है.



4. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, दिल्ली (नई दिल्ली)


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी- दिल्ली (IIT- Delhi)
IIT-Delhi की स्थापना सन् 1961 में की गई थी. पहले इस कॉलेज को कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता था. दिल्ली का यह इंजीनियरिंग कॉलेज दक्षिण दिल्ली के हौज़ खास में स्थित है.
इंडिया टुडे-नीलसन बेस्‍ट कॉलेज सर्वे 2015 में इसे भारत के बेस्‍ट इंजीनियरिंग कॉलेज में पांचवें नंबर पर रखा गया है.
IIT-Delhi चारों ओर से हरे-भरे इलाके से घिरा है, इसमें 13 हॉस्‍टल और शॉपिंग मॉल हैं. इसकी अपनी वॉटर और इलेक्ट्रिसिटी सप्‍लाई है और 11 मल्‍टीडिसिप्‍लिनरी सेंटर हैं. एग्‍जीक्‍यूटिव एमबीए और फैकल्‍टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम्‍स के लिए यह सोनीपत में अपना दूसरा कैंपस स्‍थापित करने जा रहा है.



5. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, कानपुर (उत्तर प्रदेश)


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी- कानपुर (IIT-Kanpur)
इंडिया टुडे-नीलसन बेस्‍ट कॉलेज सर्वे 2016 में इसे भारत के बेस्‍ट इंजीनियरिंग कॉलेज में पहले स्‍थान पर रखा गया है.
IT- Kanpur की शुरुआत कानपुर में एग्रीकल्‍चरल गार्डंस की कैंटीन में सिंगल रूम में हुई थी. आज इसके पास 1,000 एकड़ का कैंपस है, 5,400 स्‍टूडेंट्स हैं और अपने आउटरीच प्रोग्राम के लिए नोएडा में इसकी ब्रांच खोलने की योजना है.


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6. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, रुड़की (उत्तराखंड)


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT- Roorkee) रुड़की, उत्तराखंड
उत्तराखंड के रूड़की में स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक है. यहां इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से संबंधित कोर्स चलाए जाते हैं.
यह कॉलेज पहले यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (1948-2001) और थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग (1853-1948) के नाम से जाना जाता था. साल 2001 में इस कॉलेज का नाम आईआईटी रुड़की कर दिया गया.



7. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, हैदराबाद


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद(abbreviated IIT Hyderabad or IITH)
The Indian Institute of Technology Hyderabad (abbreviated IIT Hyderabad or IITH) is a public engineering and research institution located in Sangareddy district, Telangana, India. IITH is known for its academic strength, research, publications and proximity to IT and industrial hubs.



8. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, गांधीनगर (अहमदाबाद, गुजरात)


ndian Institute of Technology Gandhinagar (also known as IIT Gandhinagar or IITGN) is a public engineering institution located in Gandhinagar, Gujarat, India. It has been declared to be an Institute of National Importance by the Government of India.



9. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, रोपड़-रूपनगर (पंजाब)


Indian Institute of Technology Ropar (IIT Ropar) or IIT-RPR
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित संस्थान है। संस्थान का पहला सत्र सन २००८ में शरू हुआ। संस्थान पंजाब के रूपनगर जिले में स्थित है।
संस्थान निम्नलिखित शिक्षण क्षेत्र में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बी.टेक्) पाठ्यक्रम प्रदान करता हैः


कम्प्यूटर विज्ञान तथा इंजीनियरी,
विद्युत इंजीनियरी तथा
यांत्रिक इंजीनियरी।



10. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनॉलजी, पटना (बिहार)


Indian Institute of Technology Patna (abbreviated IIT Patna or IITP)


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना , बिहार का एकमात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है जो उन आठ भारतीय प्रौद्योगिक संस्थानों में से एक है, जिसे केंद्र सरकार ने वर्ष 2008- 2009 के मध्य स्थापित किया था।
इस संस्थान में इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई होती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी के आठ प्रोफेसर यहाँ पढ़ाते हैं। नए स्थापित आठ संस्थानो में पटना पहला संस्थान है जिसने डॉक्टरेट का पाठ्यक्रम भी प्रारम्भ किया है। यहाँ कम्प्यूटर विज्ञान, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र ,कला एवं सामाजिक विज्ञान में डॉक्टरेट पाठ्यक्रम संचालित होते है।



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कर्नाटक के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज


Top Engineering Colleges in Karnataka


कर्नाटक के इंजीनियरिंग कॉलेज में चयन प्रक्रिया (ADMISSION PROCESS IN KARNATAKA ENGINEERING COLLEGE)


कर्नाटक में इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश जेईई (JEE) मुख्य परीक्षा के आधार पर होता है कर्नाटक के सभी जिलो में इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए जेईई (JEE)परीक्षा मुख्य होता है. कर्नाटक में इस के अलावा यहाँ दो राज्य स्तरीय कॉमन एंट्रेंस टेस्ट KCET और COMEDK होते है जो इंजीनियरिंग, मेडिकल और कृषि कोर्सेज में प्रवेश के लिए कराये जाते है.



कर्नाटक के टॉप टेन इंजीनियरिंग कॉलेज(TOP TEN ENGINEERING COLLEGES IN KARNATAKA)


1. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, सूरथकल NATIONAL INSTITUTE OF TECHNOLOGY, SURATHKAL


2. इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी बैंगलोर INTERNATIONAL INSTITUTE OF INFORMATION TECHNOLOGY BANGALORE (IIIT-B)


3. R.V. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग ,बैंगलोर RASHTREEYA VIDYALAYA COLLEGE OF ENGINEERING (RVCE)


4. P.E.S यूनिवर्सिटी, बैंगलोर P.E.S University, Bangalore


5. मनिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मनिपाल Manipal Institute of Technology, Manipal


6. B.M.S कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, बैंगलोर Businayana Mukundadas Sreenivasaiah College of Engineering


7. M.S रामया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बैंगलोर MS Ramaiah Institute of Technology, Bangalore


8. क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैंगलोर Christ University, Bangalore


9. द नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग मैसूर The National Institute of Engineering, Mysore


10. बैंगलोर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बैंगलोर Bangalore Institute of Technology, Bangalore



1. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, सूरथकल NATIONAL INSTITUTE OF TECHNOLOGY, SURATHKAL


नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एन.आई.टी), सूरथकल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान सूरतकल भारत सरकार के द्वारा 6 अगस्त 1960 को स्थापित किया गया था. इस संस्थान को पहले से कर्नाटक रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (KREC) के रूप में जाना जाता था. यह इंस्टिट्यूट राष्ट्रीय राजमार्ग 66 पर श्रीनिवास नगर भूमि पर स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


रासायनिक अभियांत्रिकी
असैनिक अभियंत्रण
कंप्यूटर इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
सूचान प्रौद्योगिकी
मैकेनिकल इंजीनियरिंग



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2. इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी बैंगलोर INTERNATIONAL INSTITUTE OF INFORMATION TECHNOLOGY BANGALORE (IIIT-B)


सूचना प्रौद्योगिकी बैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय संस्थान को IIIT-B के नाम से भी जाना जाता है. इसकी स्थापना 1999 में बंगलोर में की गयी थी. यह यू.जी.सी (UGC) द्वारा एप्रूव्ड यूनिवर्सिटी है. यह कैंपस बैंगलोर में होसुर रोड जो सिलिकॉन वैली के रूप में कहा जाता है पर स्थित है।


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


सूचना प्रौद्योगिक(Information technology)
PhD डिग्री
M.Tech डिग्री
M.Tech इंटीग्रेटेड डिग्री



3. R.V. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग ,बैंगलोर RASHTREEYA VIDYALAYA COLLEGE OF ENGINEERING (RVCE)


आर.वी इंजीनियरिंग कॉलेज बंगलौर एक प्राइवेट संस्थान है. यह 1963 में राष्ट्रीय शिक्षण समिति ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया था. आर.वी इंजीनियरिंग कॉलेज विस्वेस्वर्या टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU), बेलगाम से अफिलेटेड है. यह कैंपस बंगलौर सिटी, सिलिकॉन वैली से 13 किलोमीटर की दूरी पर मैसूर रोड पर स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


रासायनिक अभियांत्रिकी
असैनिक अभियंत्रण
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार
मैकेनिकल इंजीनियरिंग



4. P.E.S यूनिवर्सिटी, बैंगलोर P.E.S University, Bangalore


PES यूनिवर्सिटी, बैंगलोर-पी.इ.एस विश्वविद्यालय पब्लिक शिक्षा सोसायटी (पी.इ.एस) द्वारा एक निजी और स्व-वित्तपोषित संस्था के रूप में 1988 में बंगलौर में स्थापित किया गया था. पी.इ.एस विश्वविद्यालय के अन्तर्गत इंजीनियरिंग, प्रबंधन और जीवन विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र में शिक्षा प्रदान की जाती है. यह एआईसीटीई (AICTE) द्वारा अनुमोदित है. यह कैंपस बंगलौर सिटी के शहरी क्षेत्र में बनशंकरी पर 100 फीट रिंग रोड पर स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


B.Tech कोर्सेज
M.Tech कोर्सेज



5. मनिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मनिपाल Manipal Institute of Technology, Manipal


मनिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्रौद्योगिकी, मनिपाल यूनिवर्सिटी को हम MIT मनिपाल यूनिवर्सिटी के नाम से भी जानते है. इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1957 में की गयी. यह ए.आई.सी.टी.ई (AICTE) द्वारा मान्यता प्राप्त है. यह कैंपस एम.आई.टी मणिपाल उडुपी रेलवे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर स्थित है।


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग
जैव प्रौद्योगिकी
रासायनिक अभियांत्रिकी
असैनिक अभियंत्रण
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग



6. B.M.S कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, बैंगलोर Businayana Mukundadas Sreenivasaiah College of Engineering


BMS कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग बैंगलोर कॉलेज की स्थापना 1946 में एक महान परोपकारी स्वर्गीय श्री बी.एम श्रीनिवासया के द्वारा की गयी थी. यह ए.आई.सी.टी.ई, एन.बी.ए और सी.ओ.ए द्वारा मान्यता प्राप्त है. यह परिसर बंगलौर के बुल मंदिर (Bull Temple) रोड पर स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


जैव प्रौद्योगिकी
रासायनिक अभियांत्रिकी
असैनिक अभियंत्रण
कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
औद्योगिक इंजीनियरिंग और प्रबंधन
मैकेनिकल इंजीनियरिंग



7. M.S रामया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बैंगलोर MS Ramaiah Institute of Technology, Bangalore


एम.एस रमैय्या प्रौद्योगिकी संस्थान, (MSRIT) की स्थापना 1962 में गोकुल एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा बंगलौर शहर में की गयी थी. यह कॉलेज विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध(Affilted) है और एआईसीटीई (ACITE) द्वारा एप्रूव्ड है. यह परिसर बेल रोड और एम.एस रमैय्या सड़क एम.एस.आर कॉलेज रोड पर बीच में स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


असैनिक अभियंत्रण
औद्योगिक इंजीनियरिंग और प्रबंधन
मैकेनिकल इंजीनियरिंग
इंस्ट्रूमेंटेशन प्रौद्योगिकी
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग
सूचना विज्ञान और इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग
टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग
मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स
रासायनिक अभियांत्रिकी
जैव प्रौद्योगिकी


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8. क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैंगलोर Christ University, Bangalore


क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बंगलौर की स्थापना सन 1969 में की गयी थी. यह यूनिवर्सिटी बंगलौर विश्वविद्यालय से संबद्ध(Affiletd ) है. इसे मसीह कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया था। यह यूनिवर्सिटी होसुर रोड, बंगलौर, कर्नाटक में स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


लॉ कोर्सेज


B.A.LLB (ऑनर्स)
BBA.LLB (ऑनर्स)
पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज


एल.एल.एम
डॉक्टरेट कोर्सेज


कानून में एम.फिल
कानून में पी.एचडी



9. द नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग मैसूर The National Institute of Engineering, Mysore


इंजीनियरिंग संस्थान मैसूर (NIE) बंगलौर के प्रमुख संस्थान में से एक है इसकी स्थापना1946 में कर्नाटक के मैसूर में की गयी थी इंजीनियरिंग संस्थान मैसूर ए.आई.सी.टी.ई (AICTE) द्वारा एप्रूव्ड है. यह परिसर मानन्दवादी रोड, विद्यारण्यपुरम, मैसूर, कर्नाटक में स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


असैनिक अभियंत्रण
मैकेनिकल इंजीनियरिंग
इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग
औद्योगिक और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग
कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग



10. बैंगलोर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बैंगलोर Bangalore Institute of Technology, Bangalore


प्रौद्योगिकी संस्थान, बंगलौर एक प्राइवेट संस्थान है. इसकी स्थापना 1979 वोक्कलिगारा संघ द्वारा की गयी थी. यह कॉलेज विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध (affiliated) है और ए.आई.सी.टी.ई (AICTE) द्वारा एप्रूव्ड किया गया है. यह परिसर के.आर रोड, वी.वी पुरम, बेंगलुरू, कर्नाटक में स्थित है.


कराये जाने वाले कोर्स और प्रोग्राम (Courses and Program)-


औद्योगिक इंजीनियरिंग और प्रबंधन


इंस्ट्रूमेंटेशन प्रौद्योगिकी


इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग


कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग


सूचना विज्ञान और इंजीनियरिंग


मैकेनिकल इंजीनियरिंग


 

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सोमवार, 23 दिसंबर 2019

महाराष्ट्र के टॉप इंजीनियरिंग कालेज


महाराष्ट्र के टॉप इंजीनियरिंग कालेज


Top Engineering Colleges in Maharashtra


1.COEP, पुणे – College of Engineering Pune (COEP)


2. सरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मुंबई – Sardar Patel Institute of Technology


3. शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर – Shivaji University Kolhapur


4.BVP, पुणे – Bharati Vidyapeeth Deemed University


5. आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, पुणे – Army Institute of Technology


6. वीरमाता जीजाबाई टेक्निकल इंस्टिट्यूट, मुंबई (VJTI) – Veermata Jijabai Technological Institute (VJTI)


7. श्री विठ्ठल एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, सोलापुर – Shri Vithal Education & Research Institute


8. वालचंद कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, सांगली – Walchand College of Engineering, Sangli


9. गवर्नमेंट कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, औरंगाबाद – Government College Of Engineering, Aurangabad


10.DY पाटिल, पुणे – Dr. D. Y. Patil Institute of Technology Pune



1.COEP, पुणे – Top College of Engineering Pune


स्थापना – 1854
कैंपस – 37 एकड़
टोटल फैकल्टी – 204
रैंक इन इंडिया – 45th


पुणे के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना 1854 में हुई थी. यह देश के सबसे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक है. यह एशिया के सबसे पुराने कॉलेजों की फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर आता है. दिलचस्प यह है कि यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है जो मुला और मुथा नदी के संगम पर स्थित है. 2003 में कॉलेज को ऑटोनोमस का दर्जा मिला. इंडिया टुडे-नीलसन भारत के बेस्‍ट 25 इंजीनियरिंग कॉलेज सर्वे 2016 की लिस्‍ट में COEP को 11वां स्‍थान दिया गया है.
College of Engineering Pune (COEP) बहुत ही अच्छा संस्थान है। समझ लीजिए की इंजीनियरिंग की चाहत रखने वाले स्टूडेंट्स के मन में आईआईटी के बाद सबसे पहले यही विचार आता है। यह कालेज बहुत पुराना है और यहाँ का सिस्टम भी बहुत अच्छा है।


NAAC ने इसे AAAA+ ग्रेड से नवाजा है। यहाँ इंजीनियरिंग अच्छे से करने के बाद एवरेज प्लेसमेंट 5 लाख रुपये सालाना तो होता ही है। यहाँ पर आप MHT CET और JEE MAIN के द्वारा एडमिशन ले सकते हैं।



2. सरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मुंबई – Sardar Patel Institute of Technology


Top Engineering Colleges in Maharashtra


स्थापना – 2005
कैंपस – 47 एकड़
टोटल फैकल्टी – 61
मुंबई में स्थित यह कालेज बहुत शानदार है। यहाँ इंजीनियरिंग करने के लिए आपको चार सालों में लगभग 6 लाख रुपये फीस देनी पड़ती है। कालेज में जिम, लाइब्रेरी, सपोर्ट क्लब जैसी सभी सुविधाएँ है।


यहाँ आप MAHA CET यानी की महाराष्ट्र में होने वाले इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम और JEE MAIN के द्वारा दाखिला ले सकते हैं। NAAC ने इसे AAAA ग्रेड में रखा है।



3. शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर – Shivaji University Kolhapur


स्थापना – 1962
कैंपस – 853 एकड़
फैकल्टी – 192
कालेज टाइप – स्टेट यूनिवर्सिटी
यूनिवर्सिटी इंडिया रैंक – 65th
शिवाजी यूनिवर्सिटी कोल्हापुर एक बेहतर कालेज है। NAAC ने इसे AAA+ ग्रेड दी है। यहाँ का एवरेज प्लेसमेंट 3.50 लाख रुपये है। आप यहाँ पर MAHA CET एग्जाम देकर दाखिला ले सकते हैं।



4.BVP, पुणे – Bharati Vidyapeeth Deemed University


स्थापना – 1983
कैंपस – 85 एकड़
टोटल फैकल्टी – 174
इंडिया रैंक – 83th
इस कालेज की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है। महाराष्ट्र नहीं बल्कि भारत के सबसे बेहतर संस्थानों में इसका नाम लिया जाता है। यहाँ से निकलने वाले छात्रो का एवरेज प्लेसमेंट 8 लाख रुपये सालाना है।


चार साल इंजीनियरिंग करने के लिए आपको यहाँ 4.80 लाख रुपये खर्च करने पड़ते है। NAAC ने इसे AAAA ग्रेड दिया है। यहाँ का हाईएस्ट पैकेज 17.74 लाख सालाना रहा है।


आप यहाँ JEE MAIN, MAHA CET, और BVP CET के द्वारा एडमिशन ले सकते हैं।


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Top Engineering Colleges in Maharashtra


5. आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, पुणे – Army Institute of Technology


स्थापना – 1994
कैंपस – 30 एकड़
फैकल्टी – 87
इंडिया रैंक – 88th
आर्मी इंस्टिट्यूट ऑफ़ पुणे – Army Institute of Technology अपने आप में बहुत ही अच्छा संस्थान है। यहाँ इंजीनियरिंग की टोटल फीस लगभग 6.20 लाख रुपये है। NAAC ने इसे AAAA ग्रेड दिया है। यहाँ JEE MAIN के द्वारा एडमिशन होता है।



6. वीरमाता जीजाबाई टेक्निकल इंस्टिट्यूट, मुंबई (VJTI) – Veermata Jijabai Technological Institute (VJTI)


स्थापना – 1887
कैंपस – 16 एकड़
टोटल फैकल्टी – 134
इंडिया रैंक – 95th
वीरमाता जीजाबाई टेक्निकल इंस्टिट्यूट भारत के सबसे बेहतर कालेजो में से एक है। यहाँ चार साल की इंजीनियरिंग की फीस लगभग 3.35 लाख रुपये है। NAAC ने इसे AAAA ग्रेड में रखा है। यहाँ आप JEE MAIN और MAHA CET के द्वारा दाखिला ले सकते हैं।


यहाँ का एवरेज प्लेसमेंट 5 लाख रुपये सालाना है। कालेज में जिम, कैफेटेरिया, गर्ल्स/बॉयज हॉस्टल जैसी सभी सुविधाएँ है।



7. श्री विठ्ठल एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट, सोलापुर – Shri Vithal Education & Research Institute


स्थापना – 1998
कैंपस -10 एकड़
टोटल फैकल्टी – 186
कालेज टाइप – प्राइवेट
श्री विठ्ठल एजुकेशन रिसर्च इंस्टिट्यूट कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग सोलापुर – Shri Vithal Education & Research Institute एक बहुत अच्छा संस्थान है। यहाँ आपको चार साल की इंजीनियरिंग के लिए लगभग 3 लाख रुपये खर्च करने पड़ते है।


NAAC ने इसे AAA ग्रेड में रखा है और यहाँ पढने वाले स्टूडेंट्स इसे अच्छा बताते है। यहाँ आप कई सारे एग्जाम जैसे की XAT, MAT, MAHA CET और JEE MAIN दे सकते हैं। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में यहाँ सालाना एवरेज पैकेज 3 लाख रुपये है। कालेज में जिम, कैफेटेरिया, बैंक, गर्ल्स/बॉयज हॉस्टल आदि सबकी सुविधा है।



8. वालचंद कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, सांगली – Walchand College of Engineering, Sangli


स्थापना – 1947
कैंपस – 90 एकड़
टोटल फैकल्टी – 110
एवरेज प्लेसमेंट – 5.10 लाख रुपये सालाना
वालचंद कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग बहुत पुराना संस्थान है। चार साल की इंजीनियरिंग में यहाँ आपको 3.40 लाख रुपये फीस देनी पड़ती है। NAAC ने इसे AAAA ग्रेड दिया है। यहाँ एडमिशन लेने के लिए आप JEE MAIN या फिर MAHA CET का एग्जाम दे सकते हैं। कालेज में लैब, ट्रासंपोर्ट, हॉस्टल जैसी सुविधाएँ है।



9. गवर्नमेंट कालेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, औरंगाबाद – Government College Of Engineering, Aurangabad


स्थापना – 1960
टोटल फैकल्टी – 75
एवरेज प्लेसमेंट – 3.60 लाख रुपये सालाना
यह एक शासकीय संस्थान है। यहाँ पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। हालाँकि यहाँ के स्टूडेंट्स का कहना है की आप इस जगह कालेज लाइफ को एन्जॉय नहीं कर सकते हैं। NAAC ने इसे AAA+ ग्रेड दी है। आप यहाँ JEE MAIN और MAHA CET का एग्जाम देकर दाखिल हो सकते हैं।



10.DY पाटिल, पुणे – Dr. D. Y. Patil Institute of Technology Pune


स्थापना – 1998
फैकल्टी – 201
एवरेज पैकेज – 3 लाख सालाना
कालेज टाइप – प्राइवेट
डॉ. DY पाटिल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी पुणे एक अच्छा संस्थान है। NAAC ने इसे AAA+ ग्रेड में रखा है। यहाँ चार साल इंजीनियरिंग की फीस 3.52 हजार रुपये है। आप यहाँ MAHA CET से एडमिशन ले सकते हैं। कालेज में सभी सुविधाएँ मौजूद है।



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बुधवार, 18 दिसंबर 2019

पतंग



kite information in hindi

पतंग एक धागे के सहारे उड़ने वाली वस्तु है जो धागे पर पडने वाले तनाव पर निर्भर करती है। पतंग तब हवा में उठती है जब हवा (या कुछ मामलों में पानी) का प्रवाह पतंग के ऊपर और नीचे से होता है, जिससे पतंग के ऊपर कम दबाव और Kite के नीचे अधिक दबाव बनता है। यह विक्षेपन हवा की दिशा के साथ क्षैतिज खींच भी उत्पन्न करता है। पतंग का लंगर बिंदु स्थिर या चलित हो सकता है।

पतंग आमतौर पर हवा से भारी होती है, लेकिन हवा से हल्की पतंग भी होती है जिसे हैलिकाइट कहते है। ये पतंगें हवा में या हवा के बिना भी उड़ सकती हैं। हैलिकाइट पतंगे अन्य पतंगों की तुलना में एक अन्य स्थिरता सिद्धांत पर काम करती हैं क्योंकि हैलिकाइट हीलियम-स्थिर और हवा-स्थिर होती हैं।

पतंग एक महज आसमान में उड़ने वाला कागज का टुकड़ा ही नही। यह वह है जो जिन्दगी जीने का ढंग सिखाती है। पतंग अपने सतरंगी रंगो से जीवन के सम्पूर्ण रंग बताती है और कहती है कि जिंदगी एक कागज का टुकड़ा है जो बुलदिंयों के आसमां को छूना चाहती है। जब वह अपनी मंजिल की सीढ़ियाँ चढ़ने लगती हैं। तब आसमान की अन्य पतंगें उसे रोकती हैं और उसे काटना चाहती हैं। उस समय पतंग के चारो ओर समस्याओं का घेरा बन जाता हैं। वह समस्याओं को काटते हुए आगें बढ़ती हैं। तो उच्चाई पर चलती हवा उसका स्वागत करती हैं। तब उच्चाई पर पहुची अन्य पतंगें उसको विरोध करती हैं और डराती हैं। नीचे पायदान में उड़ रही पतंगें उससे घृणा करती हैं और उसे काटने व गिराने का असंभव प्रयास करती हैं। वह सबकी प्रवाह किये बगैर आसमां की अंंनत उच्चाइयों तक उड़ती जाती हैं। वह अपने विश्वास, हौसलों व परिवार रूपी डोरी के कारण ही आसमां में उड़ पाती हैं। उसे मालूम हैं कि यदि वह डोरी उसका साथ नही देती तो वह बिलकुल भी नही उड़ पाती और कचरे में पड़ी होती।

इतिहास


माना जाता है कि पतंग का आविष्कार ईसा पूर्व तीसरी सदी में चीन में हुआ था। दुनिया की पहली पतंग एक चीनी दार्शनिक "हुआंग थेग"ने बनाई थी। इस प्रकार पतंग का इतिहास लगभग २,३०० वर्ष पुराना है। पतंग बनाने का उपयुक्त सामान चीन में उप्लब्ध था जैसे:- रेशम का कपडा़, पतंग उडाने के लिये मज़बूत रेशम का धागा और पतंग के आकार को सहारा देने वाला हल्का और मज़बूत बाँस।

पतंग भारत समेत दुनिया के अनेक देशों में एक शौक का माध्यम बनने के साथ-साथ आशाओं, आकांक्षाओं और मान्यताओं को पंख भी देती है।

kite उड़ाने का शौक चीन, कोरिया और थाइलैंड समेत दुनिया के कई अन्य भागों से होकर भारत में पहुंचा। देखते ही देखते यह शौक भारत में एक शगल बनकर यहां की संस्कृति और सभ्यता में रच-बस गया। खाली समय का साथी बनी kite  को खुले आसमान में उड़ाने का शौक बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के सिर चढ़कर बोलने लगा। भारत में पतंगबाजी इतनी लोकप्रिय हुई कि कई कवियों ने इस साधारण सी हवा में उड़ती वस्तु पर भी कविताएँ लिख डालीं।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि चीनी यात्रि F Hien और Huin Tsang पतंग को भारत में लाए थे. यह टिशू पेपर और बांस के ढाचे से बनी होती है. लगभग सभी पतंगों का आकार एक जैसा ही होता है. kite  उड़ाने का खेल भारत में काफी लोकप्रिय है. हमारे देश के विभिन्न भागों में कुछ विशेष त्यौहार एवं वर्ष के कुछ महीने पतंगबाजी या पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता से संबंधित हैं.

एक समय में मनोरंजन के प्रमुख साधनों में से एक, लेकिन समय के साथ-साथ पतंगबाज़ी का शौक भी अब कम होता जा रहा है। एक तो समय का अभाव और दूसरा खुले स्थानों की कमी जैसे कारणों के चलते इस कला का, जिसने कभी मनुष्य की आसमान छूने की महत्वकांक्षा को साकार किया था, अब इतिहास में सिमटने को तैयार है। अब तो केवल कुछ विशेष दिनों और पतंगोत्सवों में ही पतंगों के दर्शन हो पाते हैं।

पतंग उत्सव


राजस्थान में तो पर्यटन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष तीन दिवसीय पतंगबाजी प्रतियोगिता होती है जिसमें जाने-माने पतंगबाज भाग लेते हैं। राज्य पर्यटन आयुक्त कार्यालय के सूत्रों के अनुसार राज्य में हर वर्ष मकर संक्रांति के दिन परंपरागत रूप से पतंगबाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जिसमें राज्य के पूर्व दरबारी पतंगबाजों के परिवार के लोगों के साथ-साथ विदेशी पतंगबाज भी भाग लेते हैं।

इसके अतिरिक्त दिल्ली और लखनऊ में भी पतंगबाजी के प्रति आकर्षण है। दीपावली के अगले दिन जमघट के दौरान तो आसमान में पतंगों की कलाबाजियां देखते ही बनती हैं। दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी पतंग उडा़ने का चलन है।

आइये देखते है भारत में कब-कब पतंग उड़ाई जाती हैं


1. बसंत पंचमी में पतंग उड़ाई जाती हैं


पंजाब क्षेत्र में बसंत पतंग महोत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है. यह बसंत मौसम में आता है, इसलिए इसे बसंत पंचमी भी कहते हैं.Kite को धागा या मांझे से उड़ाया जाता हैं. इस त्यौहार के दौरान कई प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है. इसमें कुछ जज भी होते है, जो यह तय करते है कि, किसकी पतंग सबसे सुन्दर है, बड़ी है और सबको हराकर आसमान को छु रही हैं. यह त्यौहार हरियाली और रंगीन पतंगों के रंगों के साथ रंग और खुशियाँ लाता है.

2. उत्तरायण या मकर संक्रान्ति पतंग महोत्सव


उत्तरायण या मकर संक्रान्ति को यह त्यौहार जोर शोर से मनाया जाता है. गुजरात में संक्रान्ति से एक महीने पहले लोग अपने घरों में पतंगों को बनाना शुरू कर देते है. भारतीय कैलेंडर के अनुसार, उत्तरायण या मकर संक्रान्ति का त्यौहार उस दिन को चिह्नित करता है जब सर्दी गर्मी में बदल जाती है, अर्थार्त बसंत का आगमन होता है. यह किसानों के लिए एक संकेत है कि सूरज वापस आ गया है और उस फसल का मौसम आ रहा है. गुजरात में और कई अन्य राज्यों में जैसे कि बिहार,पश्चिम बंगाल, राजस्थान और दिल्ली में भी इस त्यौहार को मनाया जाता है. लोग अपने दोस्तों, परिवारों और रिश्तेदारों के साथ, छतों पर इकट्ठा होते हैं और साथ में पतंगबाजी करते हैं. गुजरात में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का भी आयोजन होता है और कई देशों के लोग इसमें भाग लेते हैं. डेजर्ट पतंग महोत्सव उत्तरायण के दौरान कई सालों से जयपुर में आयोजित किया जा रहा है.

3. दक्षिण भारत में पतंग पोंगल पर्व में उड़ाई जाती हैं


दक्षिण भारत में पोंगल को मनाने के लिए, लोग Kite उड़ना पसंद करते हैं. कुछ समुद्र तट पर पतंगबाजी करने का आनंद लेते हैं. लोग ट्यूब-लाइट को तोड़कर, उसे पीसकर, चावल के पानी के साथ मिलाकर Kite के धागे पर लगाते हैं उसको पैना करने के लिए ताकि दुसरे की पतंग को काट सके. पतंगों को अलग-अलग तरीकों से सजाया जाता हैं किसी में फिल्म स्टार्स और कार्टून की छवियाँ भी होती हैं.

4. दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाई जाती हैं


दिल्ली में 15 अगस्त को पतंगों को उड़ाया जाता हैं. यह सबसे लोकप्रिय गतिविधियों और परंपरा में से एक है जो कि दिल्लीवासियों द्वारा एक लंबे समय से की जा रही है. ऐसा कहा जाता है कि पतंग उडाना स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है. 1927 में साइमन कमीशन के विरोध में "गो बैक साइमन" का नारा दिया गया था. उस समय देशभक्तों ने पतंगों पर "गो बैक साइमन" लिख कर उड़ाया था और विरोध किया था. तब से स्वतंत्रता दिवस के दिन पतंग उडाना एक परंपरा बन गई है.

5. दिल्ली में पतंग उड़ाना एक त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है


दिल्ली में जनवरी के महीने में पतंग यानी फ्लाइंग फेस्टिवल मनाया जाता हैं. पुरे देश से लोग इस त्योहार में हिस्सा लेते हैं. यह दिल्ली में आयोजित एक विशेष पतंग उदय उत्सव है. इस त्योहार को दिल्ली के कनॉट प्लेस में पालिका बाजार के पास मनाया जाता हैं. इस फ्लाइंग फेस्टिवल में दो अलग-अलग प्रमुख स्पर्धाएँ आयोजित की जाती है: फाइटर काईट फेस्टिवल (Fighter Kite Competition)और सोम्बर डिस्प्ले फ्लाइंग (somber Display Flying). जीतने वाले को रोमांचक पुरस्कार और ट्राफियां प्रदान की जाती हैं. यहाँ पर प्रतिभागियों के लिए डिनर का भी आयोजन किया जाता हैं.


मकर संक्रान्ति महत्त्व

मकर संक्रान्ति



मकर संक्रान्ति


ख़ुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों में यह त्यौहार अलग-अलग नाम और परम्परा के अनुसार मनाया जाता है।


मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है।


मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है और लोग बेहद आनंद और उल्लास के साथ पतंगबाजी करते हैं। इस दिन कई स्थानों पर पतंगबाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं।


यह भारतवर्ष तथा नेपाल के सभी प्रान्तों में अलग-अलग नाम व भाँति-भाँति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।


महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बाँटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं -"तिळ गूळ घ्या आणि गोड़ गोड़ बोला" अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो। इस दिन महिलाएँ आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बाँटती हैं।


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मकर संक्रान्ति का महत्व


शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ठ होता है-


माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।


स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥


मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी कारण यहाँ पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतएव इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी। ऐसा जानकर सम्पूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा विविध रूपों में सूर्यदेव की उपासना, आराधना एवं पूजन कर, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की जाती है। सामान्यत: भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियाँ चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किन्तु मकर संक्रान्ति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष १४ जनवरी को ही पड़ता है।



मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व


ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।



मकर संक्रांति के रूप (Names of Makar Sankranti in Hindi)


उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, पंजाब हरियाणा में लोहड़ी, असम में बिहू और दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग खिचड़ी बनाकर भगवान सूर्यदेव को भोग लगाते हैं, जिस कारण इस पर्व को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह- सुबह पवित्र नदी में स्नान कर तिल और गुड़ से बनी वस्तु को खाने की परंपरा है। इस पवित्र पर्व के अवसर पर पतंग उड़ाने का अलग ही महत्व है। बच्चे पतंगबाजी करके ख़ुशी और उल्लास के साथ इस त्यौहार का भरपूर लुत्फ़ उठाते हैं।


इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और गीता के अनुसार जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है, वह श्री कृष्ण के परम धाम में निवास करता है। इस दिन लोग मंदिर और अपने घर पर विशेष पूजा का आयोजन करते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन प्रयाग और गंगासागर में स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है, जिस कारण इस तिथि में स्नान एवं दान का करना बड़ा पुण्यदायी माना गया है।



मकर संक्रांति व्रत विधि (Makar Sankranti Vrat Vidhi in Hindi)


भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण या दक्षिणायन के दिन संक्रांति व्रत करना चाहिए। इस व्रत में संक्रांति के पहले दिन एक बार भोजन करना चाहिए। संक्रांति के दिन तेल तथा तिल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद सूर्य देव की स्तुति करनी चाहिए।
मान्यतानुसार इस दिन तीर्थों में या गंगा स्नान और दान करने से पुण्य प्राप्ति होती है। ऐसा करने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही संक्रांति के पुण्य अवसर पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण अवश्य प्रदान करना चाहिए।



संक्रांति पूजा समय (Auspicious Timing For Pooja on Makar Sankranti )


संक्रांति के दिन पुण्य काल में दान देना, स्नान करना या श्राद्ध कार्य करना शुभ माना जाता है। इस साल यह शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 05 बजकर 41 मिनट तक का है। (शुभ मुहूर्त दिल्ली समयानुसार है।)


मकर संक्रांति पूजा मंत्र (Surya Mantra for Makar Sankranti)
मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव की निम्न मंत्रों से पूजा करनी चाहिए:
ऊं सूर्याय नम:
ऊं आदित्याय नम:
ऊं सप्तार्चिषे नम:
अन्य मंत्र हैं- ऋड्मण्डलाय नम: , ऊं सवित्रे नम: , ऊं वरुणाय नम: , ऊं सप्तसप्त्ये नम: , ऊं मार्तण्डाय नम: , ऊं विष्णवे नम:


सूर्य मंत्र: मकर संक्रांति के दिन, सूर्य मंत्र जाप किया जाना चाहिए और सूर्य की पूजा की जानी चाहिए। सूर्य मंत्र: "ओम हरेम हरेम ह्रौम्म साह सूर्य्या नमः।"



मकर संक्रांति के बारे में – Makar sankranti 10 lines in Hindi


1. यह त्यौहार भारत के अलग राज्यों में मनाया जाता है तथा हर राज्य में इसे अलग-2 नाम से जाना जाता है जो की निम्नलिखित है :
मकर संक्रान्ति : छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल, और जम्मू


ताइ पोंगल, उझवर तिरुनल : तमिलनाडु
उत्तरायण : गुजरात, उत्तराखण्ड
माघी : हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब
भोगाली बिहु : असम
शिशुर सेंक्रात : कश्मीर घाटी
खिचड़ी : पश्चिमी बिहार
पौष संक्रान्ति : पश्चिम बंगाल
मकर संक्रमण : कर्नाटक


2. इस दिन भारत की सभी पवित्र नदियों में लोग स्नान करके लोग इस दिन पहला सनान पवित्र नदियों में करना ही उचित मानते है इसीलिए इस दिन का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है |


3. हिन्दू पुराणों की मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान् सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने जाते है लेकिन शनि मकर राशि के स्वामी है व ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल असंभव व हानिकारक है इसीलिए सूर्य देव खुद शनि के पास जाते है इसीलिए यह दिन पिता पुत्र के संबंधो के बीच पारस्परिक निकटता दर्शाता है


4. इस दिन विश्व प्रसिद्ध कुम्भ का मेला भी इसी पवित्र महीने में हर पवित्र नदी वाले स्थानों पर मेले का आयोजन किया जाता है और दूर-2 से लोग मेले को देखने के लिए आते है |


5. इस दिन खाने में सबसे अधिक चावल तथा खिचड़ी सबसे लोकप्रिय माने जाते है कई राज्यों में इसे खिचड़ी का पर्व के नाम से भी जाना जाता है | कई लोग खिचड़ी को गुड़ व घी के साथ भी खाते है तथा इस त्यौहार का आनंद लेते है |


6. इस उत्सव को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है व इस दिन घर-2 में पतंगबाजी की जाती है कई स्थानों पर पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं की जाती है |


7. इस दिन लोग अपने घर में तिल की मिठाइयां बनाते है तथा उन मिठाइयों को वह लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों व सगे-सम्बन्धियों को बांटते है |


8. यह दिन पिता व पुत्र के बीच पारस्परिक प्रेम को दर्शाता है इसीलिए इस दिन पुत्र को अपने पिता को तिलक लगा कर स्वागत करना चाहिए तथा इस दिन की शुरुआत करनी चाहिए |


9. इस दिन का महत्त्व इसीलिए और भी अधिक बढ़ जाता है क्योकि इसी दिन महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपने देह को त्यागने के लिए इसी दिन को चुना था |


10. जिस तरह के भारत के अलग-2 राज्यों में इस पर्व का नाम अलग-2 रखा गया है और लोग इसे अपनी मान्यताओं के अनुसार ही मनाते है उसी तरह से इस पर्व पर अपनी मान्यतओं के अनुसार ही पकवान बनाये जाते है |


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सोमवार, 9 दिसंबर 2019

जीरा पानी के फायदे और नुकसान


जानें खाली पेट जीरे का पानी के फायदेयह पूरे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी लाभकारी है. इस पानी को बनाना भी बेहद आसान है. एक ग्‍लास पानी में दो चम्‍मच जीरा डालकर उसे 10 मिनट तक उबाल लीजिए. इसके बाद आंच से उतारकर इसे ठंडा कर पी लीजिए.

जीरा पानी पीने के फायदे - Health Benefits Of Cumin Water:


अगर हम आपसे कहें कि हमारे पास एक ऐसी जादू की छड़ी है, जो बिना जिम या एक्सरसाइज के आपका वजन झटाक से कम कर देगा. और इसमें आपके पैसे भी नहीं लगेंगे. यकीनन आपको लगेगा कि यह कोई जोक है, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. इस काम में आपकी मदद करेगा किचन में रख जीरा... जी हां, जीरे का पानी कोई आम पानी नहीं बल्‍कि एक किस्‍म का जादू है. जीरे का पानी वजन तो कम करता ही है साथ ही यह पूरे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी लाभकारी है. इस पानी को बनाना भी बेहद आसान है. एक ग्‍लास पानी में दो चम्‍मच जीरा डालकर उसे 10 मिनट तक उबाल लीजिए. इसके बाद आंच से उतारकर इसे ठंडा कर पी लीजिए. हम में से ज्‍यादातर लोगों को वजन कम करने के लिए रोज सुबह उठकर जिम जाना किसी भारी-भरकम टास्‍क से कम नहीं लगता. बढ़ते वजन की वजह से आप अपने फेवरेट कपड़े भी नहीं पहन पाते हैं. न ही आपके पास सुबह की भागमभाग में जिम जाने का टाइम और न ही एक्‍सरसाइज करने की फुर्सत. ऐसे में वजन कम करने का सबसे कारगर उपाय है जीरे का पानी.

आइए जानते हैं कि जीरे का पानी किस तरह अपना करिश्‍मा दिखाकर वजन कम करने में मदद करता है:

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1 : पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखने में मददगार


जीरे के पानी में एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन और मिनरल होते हैं और ये डाइजेशन में लाभकारी है. यह डाइजेस्‍टिव स‍िस्‍टम यानी कि पाचन तंत्र को हेल्‍दी रखता है. इसके अलावा इसे पीने से उल्‍टी-दस्‍त, मॉर्निंग सिकनेस, गैस और कॉन्‍स्‍ट‍िपेशन से राहत मिलती है. जीरे के पानी से शरीर में ऐसे इंजाइम बनते हैं जो कार्बोहाइड्रेट, फैट और ग्‍लूकोस को तोड़कर पचाने में सहायक होते हैं.

2 : एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर


जीरे में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं, जो शरीर में इकट्ठा हो रहे जहरीली पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है. इससे शरीर के अंदरुनी अंग बेहतर तरीके से काम करते हैं. जीरे को थोड़े से पानी में रात भर भिगोकर रख लीजिए अगली सुबह इस पानी को पीने से लीवर में बाइल प्रोडक्‍शन बढ़ता है, जिससे आपको एसिडिटी और गैस से राहत मिलती है. बाइल एक ऐसा तरल पदार्थ है जिसका निर्माण लीवर करता है. यह फैट को पचाने का काम करता है.

3 : बढ़ाए इम्‍यूनिटी


जीरे का पानी आयरन का बहुत अच्‍छा स्रोत है. आयरन की मौजूदगी में ही इम्‍यून सिस्‍टम सही से काम करता है. यही नहीं इस पानी में भरपूर मात्रा में विटामिन A और विटामिन C मौजूद रहते हैं और इन दोनें में ही एंटीऑक्‍सीडेंट प्रॉपर्टीज़ होती हैं. जीरे के पानी को रोजाना पीने से इम्‍यूनिटी लेवल बढ़ता है और कई बीमारियों भी कोसों दूर रहती हैं. सबसे जरूरी यह वजन को बढ़ने नहीं देता है.

Jeere Ka Pani: जीरा पेट से जुड़ी समस्याओं से निजात दिला सकता है.

4 : आएगी अच्‍छी नींद


मोटापे की वजह से नींद न आना आम बात है. अगर आपको नींद नहीं आती है तो जीरे का पानी आपकी मदद कर सकता है. जीरे का पानी रोज पीने से आपको अच्‍छी नींद आएगी.

5 : शरीर की सफाई


जीरे के पानी में फाइबर भी पाया जाता है जो कि शरीर से टॉक्‍सिक यानी कि बेकार की चीजों को बाहर निकलने में सहायक है. जीरे के पानी से शरीर की सफाई होती है. यह आपके शरीर को हाइड्रेट रखता है जिससे आप तरोताजा महसूस करते हैं. इससे आपका वजन भी कम होता है.

जीरा पानी पीने के नुकसान – Jeere ke Pani ke Nuksan in Hindi


1. जीरे के पानी के फायदे बहुत है पर कुछ स्थितियों में जीरे के पानी को अवॉयड करना चाहिए।

2. गर्भवती महिलाएं अधिक मात्रा में जीरे के पानी का सेवन करने से बचे।

3. जीरे के पानी का अधिक मात्रा में सेवन हार्ट बर्न का एक कारण बन सकता है।

4. जीरे में मौजूद तेल अत्‍यधिक अस्थिर होने के कारण, लंबे समय तक जीरे का अधिक मात्रा में सेवन लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा

5. सकता है। इसलिए जीरे के पानी का सेवन उचित मात्रा में हो करें।

6. अधिक मात्रा में जीरे के सेवन से शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर कम होने लगता है।

 

 

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