गुरुवार, 28 नवंबर 2019

मार्गशीर्ष गुरुवार महालक्ष्मी की पूजा विधि, व्रत और इसका महत्व


 


मार्गशीर्ष गुरुवार महालक्ष्मी की पूजा


Mahalaxmi puja vidhi, Vrat Katha and mahatv

मार्गशीर्ष मास का बड़ा महत्व है। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है, पर मार्गशीर्ष के महीने में गुरुवार को मां लक्ष्मी की धूमधाम से पूजा होती है। मार्गशीर्ष महीने के हर गुरुवार को धन और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी का व्रत (Mahalakshmi Vrat) और पूजन किया जाता है. मार्गशीर्ष महीना भगवान श्रीकृष्ण और देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है. इस महीने महिलाएं मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत (Margashirsha Guruvar Vrat) का पालन करती हैं, जिसे महालक्ष्मी व्रत के नाम से भी जाना जाता है.


माता लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि की कामना से अधिकांश विवाहित महिलाएं मार्गशीर्ष गुरुवार का व्रत रखती हैं. महालक्ष्मी व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक किया जाता है. इस दिन घर की अच्छे से सफाई की जाती है और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. घर के मुख्य द्वार पर देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए सुंदर रंगोली बनाई जाती है.


कहते हैं कि जो भी इस महीने में व्रत रखकर मां लक्ष्मी की पूजा करता है उस पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और उसके भंडार धन-धान्य से भर जाते हैं।


श्री माह लक्ष्मी की व्रत कथा वण और पठन करने से दुःख दारिद्र्य दूर हो जाता है, श्री महालक्ष्मी माता की कृपा से सुख, संपत्ति,ऐश्वर्य प्राप्त होता है, मन की इच्छा पुरी होती है।


महालक्ष्मी को धन और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है. मान्यता है कि जब माता लक्ष्मी अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं तो उनके जीवन को सुख-समृद्धि से भर देती हैं. मार्गशीर्ष महीने के गुरुवार का व्रत वैसे तो विवाहित महिलाएं करती हैं, लेकिन इस व्रत को पति-पत्नी एक साथ कर सकते हैं. इस व्रत का समापन मार्गशीर्ष महीने के आखिरी गुरुवार को विधिवत किया जाता है.



मां लक्ष्मी की पूजा


- सबसे पहले सुबह सवेरे स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।


- घर के द्वार, आंगन और पूजा स्थान पर चावल के आटे के घोल से अल्पना बनाएं। अल्पना में मां लक्ष्मी के पैर जरूर बनाएं।


- इसके बाद मां लक्ष्मी का आसन सजाएं। मां लक्ष्मी का आसन या सिंहासन सजाने के लिए आम का पत्ता, आंवले का पत्ता और धान की बालियों का इस्तेमाल करें।


-इसके बाद कलश स्थापित करें।


- सबसे पहले कलश और भगवान गणेश की पूजा करें। इसके बाद मां लक्ष्मी का पूजन करें।


-मां लक्ष्मी को विशेष प्रकार के पकवानों का भोग लगाएं। ऐसी मान्यता है कि अगहन महीने के हर गुरुवार को अलग-अलग पकवान चढ़ाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


- शाम को मां लक्ष्मी की दोबारा पूजा करें और दीप जलाएं। घर के बाहर और आंगन में भी दीप रखें।


- पूजन के बाद घर की बहू-बेटियों और आस पड़ोस की महिलाओं को भोजन कराएं।


-इसी तरह मार्गशीर्ष के हर गुरुवार को मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा व व्रत करें।



श्री महालक्ष्मी माहात्म्य कथा


श्री महालक्ष्मी माता की कृपा से सुख, संपत्ति,ऐश्वर्य प्राप्त होता है, मन की इच्छा पुरी होती है। श्री महालक्ष्मी माता के अनेक रूप तथा नाम हैं। भूतल में वे छाया, शक्ति, तृष्णा, शांति, जाती, लज्जा, श्राद्धा, कान्ति, वृत्ति, स्मृति, दया, तुष्टि, माता, अधिष्ठात्री, एवं लक्ष्मी के रूप में स्थित है। उन्हें प्रणाम करते हैं। कैलाश पर्वत पर पार्वती, क्षीरसागर में सिन्धुकन्या, स्वर्गलोक में महालक्ष्मी, भूलोक में लक्ष्मी, ब्रह्मलोक में सावित्री, ग्वालों में राधिका, वृन्दावन में रासेश्वरी, चंदनवन में चन्द्रा, चम्पकवैन में गिरजा, पद्मवन में पद्मा, मल्टीवं में मालती, कुन्दनवन में कुंददंती, केतकी वन में सुशीला, कदंबवन में कदंबमाला, राजप्रसाद में राजलक्ष्मी और घर घर में गृहलक्ष्मी इन विभन्न नामों से पहचानी जाती है।


भारतवर्ष के सौराष्ट्र देश में द्वापर युग की यह कहानी हुई है।सौराष्ट्र में उस समय भद्रश्रवा नाम के राजा थे। वे बड़े पराक्रमी राजा थे। चार वेद, छः शास्त्र, अठारह पुराणों का उन्हें ज्ञान था। उनकी रानी का नाम सुरतचंद्रिका था। रानी दिखने में सुन्दर और सुलक्षणा थी तथा पतिव्रता थी। उन दोंनो को सात पुत्र तथा उसके बाद एक कन्या का वरदान मिला था। कन्या का नाम शामबाला था। एक बार महालक्ष्मी जी के मन में आया की जाकर उस राजा के राजप्रसाद में रहे। इससे राजा को दुगनी धन - दौलत की प्राप्ति होगी और वह इस धन दौलत से अपनी प्रजा को और सुख दे पायेगा। गरीब के घर अगर रहे और उसे धन-दौलत प्राप्त हो तो वह स्वार्थी की तरह केवल अपने ऊपर ही खर्च करेगा। यह सोचकर श्री महालक्ष्मी जी ने बुढ़ी ब्राह्मण स्त्री का रूप धारण किया, हाथ में लाठी लिये लाठी के सहारे रानी के द्वार तक पहुँची। यद्यपि उन्होंने बुढ़ी औरत का रूप धारण किया था पर उनके चहरे पर देवी का तेज था। उन्हें देखते ही एक दासी सामने आई, उसने इनका नाम, धाम, काम, धर्म पूछ डाला। वृद्ध ब्राह्मण का रूप धारित माता लक्ष्मी ने कहा, "बालिके मेरा नाम कमला है मेरे पति का नाम भुवनेश है। हम द्वारिका में रहते है तुम्हारी रानी पिछले जन्म में एक वैश्य की पत्नी थी। वह वैश्य गरीब था। दारिद्र्य के कारण हर रोज घर में झगड़े होते थे तथा उसका पति रोज उसे मारता था। इन बातों से तंग आ कर वह घर छोड़कर चली गयी तथा बन जंगल में खाली पेट भटकने लगी। उसकी इस दुर्दशा पर मुझे दया आई।तब मैने उसे सुख सम्पति देने वाली श्री महालक्ष्मी की कथा सुनाई। मेरे कहने पर उसने श्री महालक्ष्मी का व्रत किया। श्री महालक्ष्मी प्रसन्न हुई उसकी गरीबी दूर हुई। उसका घर- संसार दौलत,संतति , संपत्ति से भर गया। बाद में पति पत्नी दोनों परलोक सिधारे। लक्ष्मी व्रत करने के कारण वे लक्ष्मी लोक में रहे। उन्होंने जितने साल महालक्ष्मी का व्रत किया उतने हजारों साल उन्हें सुखभोग मिला। इस जन्म में उसका जन्म राजघराने में हुआ है, परंतु वह श्री महालक्ष्मी का व्रत करना भूल गई है। उसे यह याद दिलाने में यहाँ आई हूँ। " बुढ़िया की बाटे सुनकर दासी ने उन्हें प्रणाम किया , तथा श्री महालक्ष्मी का व्रत किस तरह किया जाये इस बारे में पुछा बुढ़िया रूप धारण किये हुऐ श्री महालक्ष्मी माता ने दासी को पूजा की विधि तथा महिमा बताई। इसके बाद वह दासी माता को प्रणाम कर रानी को बताने अंदर चली गई। राजवैभव में रहते हुऐ रानी को अपने ऐश्वर्य का बहुत घमंड हुआ था। संपत्ति तथा अधिकार की वजह से वह उन्मत्त हो गई थी। दासी द्वारा बताई गई बुढ़िया की बातें सुनकर वह आग बबूला हो कर राजद्वार पर आ कर बुढ़िया रुपी श्री महालक्ष्मी पर बरस पड़ी। उसे यह मालूम नहीं था की श्री महालक्ष्मी माता बुढ़िया का रूप धारण किये द्वार तक आईं है। परंतु रानी का इस कदर रूख बर्ताव तथा अपना अनादर देखकर माता ने वहाँ ठहरना ठीक न समझा। वे वहाँ से चल पडी। राह में उन्हें राजकुमारी शामबाला मिली उन्होंने शामबाला को सारी बात बताई शामबाला ने अपनी और से श्री महालक्ष्मी माता से क्षमा माँगी। माता को उस पर दया आई। उन्होंने शामबाला को श्री माहलक्ष्मी व्रत के बारे में बताया। उस दिन अगहन (मार्गशीर्ष) माह का पहला गुरुवार था। शामबाला ने परम श्रद्धा से श्री महालक्ष्मी का व्रत रखा। फल स्वरूप राजा सिद्धेश्वर के सुपुत्र मालाधर से उसका विवाह हुआ। वह धन-दौलत, ऐश्वर्य , वैभव से मालामाल हो गई। पति के साथ ससुराल में आनंद से दिन बिताने लगी। इधर श्री महालक्ष्मी का रानी पर प्रकोप हुआ। फलस्वरूप राजा भद्रश्रवा का राज्य एवं राजकरोबर नष्ट हो गया। यहाँ तक की खाने के लाले पड़ गये। ऐसी हालात में एक दिन रानी ने राजा से निवेदन किया " हमारा दामाद इतना बड़ा राजा है, धनवान है, ऐश्वर्यशाली है, क्यों न उसके पास जाये, अपना हाल उसे बताये, वह जरूर हमारी मदद करेगा।" इस बात पर राजा भद्रश्रवा दामाद के पास रवाना हुऐ। राज्य में पहुँचकर एक तालाब के किनारे थोड़ी देर विश्राम लेने के लिऐ ठहरे। तालाब से पानी लेने आते जाते दसियों ने उन्हें देखा। उन्होंने विनम्रता से उनकी पूछताछ की जब उन्हें यह मालूम हुआ की वे रानी शामबाला के पिता है तो दौड़ते हुऐ जा कर उन्होंने रानी को सारी बात बताई। रानी ने दासी के हाथ राजपरिधान भेजकर बड़े ठाठ से उनका स्वागत तथा आदरसत्कार किया।खान पान करवाया। जब वे लौटने लगे तो सोने की मोहरों से भरा घड़ा दिया। राजा भद्रश्रवा जब वापस लौटे तो उन्हें देखकर रानी सुरतचंद्रिका खुश हुई। उन्होंने सोने की मोहरों से भरे घड़े का मुँह खोल, पर हाय भगवान ! घड़े में धन के बदले कोयले मिले यह सब श्री महालक्ष्मी के प्रकोप से हुआ इस प्रकार दुर्दशा में और कई दिन बीत गये। इस बार रानी स्वयं अपनी कन्या के पास गई। वह दिन अगहन माह का अन्तिम गुरुवार था। शामबाला ने श्री महालक्ष्मी का व्रत किया, पूजा की , अपनी माता से भी व्रत करवाया। इसके बाद रानी अपने घर आई। श्री महालक्ष्मी का व्रत रखने पर उसे फिर से अपना राजपाठ, धन-दौलत, ऐश्वर्य प्राप्त हुआ। वह फिर से सुख, शान्ति, आनंदमय जीवन बिताने लगी। कुछ दिनों बाद राजकन्या शामबाला अपने पिता के घर आई , उसे अपने घर देखकर सुरतचंद्रिका को पुरानी बातें याद आई। यहीं की शामबाला ने अपने पिता को घड़ा भर कोयला दिया था और उसे तो कुछ भी नहीं दिया था। इसी कारण शामबाला को पिता के घर आने पर उसका कोई आदर आतिथ्य नहीं हुआ। बल्कि अनादर हुआ। पर उसने इस बात का बुरा नहीं माना। अपने घर लौटते समय उसने पिता के घर से थोडा नमक ले लिया।आपने घर लौटने पर उसके पति ने पूछ, "अपने मायके से क्या लाई हो?" इस पर उसने जवाब दिया, " वहाँ का सार लाई हूँ।" पति ने पुछा "इसका मतलब क्या हुआ ? " शामबाला ने कहा "थोडा धीरज रखे, सब मालूम हो जायेगा।" उस दिन शामबाला ने सारा भोजन नमक डाले बिना बनाया और परोसा। पति ने खाना चखा। सारा खाना नमक बिना था इसलिये स्वाद न आया। फिर शामबाला ने थाली में नमक डाला इससे सारा भोजन स्वादिष्ट लगने लगा। तब शामबाला ने पति से कहा , "यही है वह मायके से लाया हुआ सार।" पति को उसकी बात सही लगी। फिर वह दोंनो हँसी मजाक करते हुऐ भोजन करने लगे।


कहा गया है की इस तरह जो कोई श्राद्धा भाव से श्री महालक्ष्मी की पूजा करे उसे माता की कृपा प्राप्त होती है। सुख, संपत्ति ,शांति प्राप्त होती है सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। परंतु यह सब प्राप्त होने पर माता की पूजा को भूलना नहीं चाहिये। हर गुरुवार को व्रत पाठ अवश्य करना चाहिये इस तरह श्री महालक्ष्मी की महिमा भक्तो की मनोकामना पूरी करती है।



श्री महालक्ष्मी आरती -Shri Mahalaxmi Aarti


जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥


करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।
पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।
कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।
सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥ १ ॥


मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।
झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।
माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।
शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥ २ ॥


तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।
सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।
गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।
प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी॥ ३ ॥


अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।
मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।
वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।
हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी॥ ४ ॥


चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।
लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।
पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।
मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी॥ ५ ॥


जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।
वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥


परिक्रमा(प्रदक्षिणा) कयों करते है और लाभ

अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला


 


अयोध्या केस सुप्रीम कोर्ट का फैसला


supreme court verdict on ayodhya ram mandir

दशकों पुराने तथा पूरे देश को आंदोलित करते रहे केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित भूमि का कब्ज़ा सरकारी ट्रस्ट को मंदिर बनाने के लिए दे दिया गया है, तथा उत्तर प्रदेश के इसी पवित्र शहर में एक 'प्रमुख' स्थान पर मस्जिद के लिए भी ज़मीन आवंटित की जाएगी. इस केस में वादी भगवान रामचंद्र के बालस्वरूप 'रामलला' को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक दिया गया है.


सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ ज़मीन का एक 'उपयुक्त' प्लॉट दिया जाएगा. न्यायमूर्तियों ने कहा कि ऐसा किया जाना ज़रूरी था, क्योंकि 'जो गलतियां की गईं, उन्हें सुधारना सुनिश्चित करना भी' कोर्ट का उत्तरदायित्व है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 'सहिष्णुता तथा परस्पर सह-अस्तित्व हमारे देश तथा उसकी जनता की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता को पुष्ट करते हैं...' कोर्ट ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट या बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए.


अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन पर रामलला का हक माना है यानी विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है. यानी कोर्ट ने अयोध्या में ही मस्जिद बनाने के लिए अलग जगह जमीन देने का आदेश दिया है. राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया है.



राम मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाए सरकार


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन का अधिकार हिंदू पक्ष को दे दिया है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाया जाए, जो मंदिर निर्माण का काम देखे. यानी कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में गया है और अब केंद्र सरकार को आगे की रूपरेखा तय करनी है.



तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाए सरकार


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार तीन महीने में स्कीम लाए और ट्रस्ट बनाए. यह ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण करेगा.



मुस्लिम पक्ष को मिलेगी 5 एकड़ जमीन


सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि विवादित जमीन पर मुसलमान अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए. इसलिए विवादित जमीन पर रामलला का हक है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी. कोर्ट ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन दे.



विवादित जमीन पर रामलला का हक


सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे पुराने केस में ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. इस फैसले में कोर्ट ने विवादित जमीन पर रामलला का हक दिया है. जबकि मुस्लिम पक्ष यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है.


मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीनकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक जमीन दी जाए. यानी कोर्ट ने मुस्लिमों को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया है.


परिक्रमा कयों करते है और लाभ

बुधवार, 27 नवंबर 2019

सर्दियों में खाए ये चीजें तो रहेंगे सेहतमंद



सर्दियों में खाए ये चीजें तो रहेंगे सेहतमंद


Will eat these things healthy in winter

सर्दियों में खाए ये चीजें तो रहेंगे सेहतमंद : बदलते मौसम के साथ एडजस्ट होने में समय लगता है। विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को। उन्हें इस दौरान एहतियात बरतने की जरूरत होती है। थोड़ी लापरवाही हुई नहीं कि सर्दी-जुकाम, कफ आदि की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। इसलिए सेहतमंद रहने के लिए निचे दिए गाने चीजे खाना जरुरी हे


सिर्फ गर्म कपड़े पहन कर ही ठंड से नहीं बचा जा सकता बल्कि शरीर में अंदरूनी गर्मी होना भी बहुत जरूरी है। अच्छे खान-पान की बदौलत ही इस गर्माहट को कायम रखा जा सकता है। सर्दी में डाइट अच्छी होगी तो ठंड भी कम लगेगी और बॉडी कई तरह के इंफैक्शन से भी बची रहेगी। कुछ लोगों का इम्युन सिस्टम कमजोर होता है, जिस वजह से वह ठंड में सर्दी खांसी-जुकाम का जल्दी शिकार हो जाते हैं, खासकर बच्चे। अगर उनकी डाइट में अच्छी चीजें शामिल कर दी जाए तो सर्दी में भी सेहतमंद रहा जा सकता है।



लहसुन


लहसुन में जीवाणुरोधी, ऐंटीफगल और ऐंटीवायरल गुण होते हैं और इन्ही गुणों की वजह से सर्दियों से इसका इस्तेमाल जड़ी-बूटियों के रूप में किया जा रहा है। लहसुन को आप चिकन सूप या शोरबा में मिलकर इसे और प्रभावशाली बना सकते हैं, जो सर्दी जुकाम के लक्षणों को कम करता है।



ओट्स


सर्दी जुकाम में ओट्स खाना फायदेमंद है। ओट्स खाने से पर्याप्त मात्रा में विटमिन, खनिज और कैलरी प्राप्त होती है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन भी मौजूद होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।



हरी सब्जियों


बीमार होने पर हरी सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। पालक, पत्ता गोभी आदि सब्जियों में पर्याप्त मात्र में विटमिन और मिनरल्स होते हैं। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन ए, विटामिन के और विटामिन सी होता है। साथ ही हरी सब्जियों में एंटीऑक्सिडेंट मौजूद होते हैं, जो आपकी मांसपेसियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं और सूजन को कम करते हैं।



गुड़


वैसे आप गुड़ का सेवन हर मौसम में कर सकते हैं वेकिन सर्दियों में यह स्वास्थय के लिए काफी फायदेमंद होता है। दरअसल, सर्दियों में बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, जिससे ब्लड प्रैशर की समस्या हो जाती हैं। अगर आप गुड़ खाएंगे तो आपको यह परेशानी नहीं होगी। अगर आपको ब्लड प्रैशर संबंधी कोई प्रॉब्लम नहीं भी हैं तो भी आप इसका सेवन करें।


गुड़ की तासीर गर्म होती हैं, जिससे शरीर का तापमान ठीक रहता हैं जिससे ठंड ज्यादा महसूस नहीं होती।


जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं उन्हें कोल्ड कफ की परेशानी जल्द हो जाती हैं। ऐसे लोगों को रोजाना गुड़ का सेवन करना चाहिए ताकि वह जुकाम और खांसी से बचे रहें।


इसमें कैल्शियम व मैग्नीशियम तत्व पाए जाते हैं जो हड्डियों के साथ मांसपेशियों व नसों की थकान को दूर करता है।
सर्दी के मौसम में गले व फेफड़ों का इंफैक्शन बहुत जल्दी होता है। ऐसे में गुड़ का सेवन करें और इन संक्रमण को दूर रखें।


रोजाना गुड़ का सेवन करने से आपका पाचन तंत्र भी तंदरूस्त रहता है।
डायबिटीज के शिकार लोग चीनी की जगह मीठे के रूप में गुड़ खा सकते हैं क्योंकि यह नैचुरल शुगर है।



मूंगफली


अगर आप मूंगफली के लाल छिलके उतार कर सेवन करें और बाद में कम से कम आधा घंटा पानी ना पीएं तो कभी खांसी नहीं लगेगी।
खून की कमी नहीं होने देती मूंगफली


कैल्शियम और विटामिन डी नहीं होने देता हड्डियों को कमजोर
कोलेस्ट्रॉल का स्तर सही रहता है।


50 या 100 ग्राम मूंगफली रोजाना खाने से पाचन सहीं और हार्मोंन्स भी संतुलित रहती है।


मूंगफली के तेल की मालिश करने से जोड़ों का दर्द सही।


एनर्जी से भरपूर मूंगफली शरीर को अंदर से गर्म रखता है जिससे सर्दी जुकाम की प्रॉब्लम नहीं होती।


बच्चों को जरूर दें क्योंकि इसमें होती हैं प्रोटीन की पूरी मात्रा


ध्यान रखेंः जिन लोगों की स्किन सेंसटिव या किसी तरह की एलर्जी का शिकार हैं उन्हें मूंगफली का सेवन चिकित्सक की सलाह लेकर करना



तुलसी, लौंग अदरक रखें ठण्‍ड को दूर


तुलसी, लौंग, अदरक और काली मिर्च का दूध व चाय के साथ प्रयोग करना चाहिए। ये औषधियां ठण्‍ड के मौसम में बेहद लाभकारी साबित होती हैं। जानकार बताते हैं कि इनके सेवन से न सिर्फ ठंड से बचने में मदद मिलती है, बल्कि ये सर्दी, जुकाम से भी राहत दिलाने का काम करती हैं।



खजूर खाएं हुजूर


सर्दियों के मौसम में खजूर के फायदे के बारे में आप अपने बुजुर्गों से सुनते आए होंगे। जी, खजूर की तासीर गर्म होती है और इसलिए इसे सर्दियों के लिए बेहद मुफीद माना जाता है। खजूर को गर्म दूध के साथ खाने से सर्दी से तत्‍काल राहत मिलती है। यह न केवल बच्‍चों बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होता है। आप चाहें तो खजूर का हलवा बनाकर भी खा सकते हैं। हालांकि इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए।



गर्म पदार्थों का सेवन


इस मौसम में गरम पानी खूब पिएं। इसे अलावा बादाम वाला अथवा हल्दी वाला दूध, सूप वगैरह पीते रहना अच्छा होगा।


सर्दियों में खाए ये चीजें तो रहेंगे सेहतमंद

एक्सट्रा टिप्स Extra Tips-winter health tips


1. इस मौसम में वायरल बुखार सबसे अधिक होते हैं, इसलिए खुद को उससे बचाए रखना भी बेहद जरूरी है।


2. थ्रोट इंफेक्शन इस मौसम में बहुत होता है, इसलिए यह जरूरी है कि सिर्फ गर्म कपड़ों से शरीर को न ढकें, बल्कि अपने कानों को भी ढकें और हाथों में भी ग्लब्स जरूर पहनें। कई तरह की बीमारियां शरीर के इन अंगों से भी आसानी से फैलती हैं।


3. रात में कोशिश करें कि रूम में रूम हीटर का प्रयोग कम से कम ही करें, क्योंकि इससे आस-पास के वातावरण में मौजूद जरूरी नमी भी खत्म हो जाती है। अगर ठंड बहुत ज्यादा लग रही है तो प्राकृतिक आग जला कर शरीर ताप लें।


4. शाम होते ही घर के दरवाजे बंद कर दें, ताकि ठंडी हवा घर में प्रवेश न करें।


5. इस मौसम में गर्म पानी खूब पिएं। ठंड लगते ही डॉक्टर से सलाह लें।


6. अदरक वाली चाय पीते रहें।


7.मोजे और स्पोर्ट्स शूज अधिक पहनें। सैंडल कम पहनें। जूते इस मौसम में अधिक पहनें, ताकि पैरों में ठंड न लगे।


8.अच्छी क्वालिटी के गर्म कपड़ें लें, वरना शरीर में कई बार खुजली जैसी परेशानी हो जाती है।


9.मिनी स्कर्ट वगरैह की जगह पैंट्स, जींस अधिक पहनें ।


10. कोशिश करें कि कोल्ड और सनस्क्रीन क्रीम लगाकर ही निकलें। यह भ्रम है कि इस मौसम में शरीर पर टैन नहीं होता, जबकि सबसे अधिक इसी मौसम में टैन होता है। सो अपनी त्वचा का खास ख्याल रखें।



गुड़ की चाय पीने के फायदे और नुकसान


 

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

फार्मेसी क्या है



 फार्मेसी क्या है : चिकित्सा में प्रयुक्त द्रव्यों के ज्ञान को औषधनिर्माण अथवा भेषज विज्ञान या 'भेषजी' या 'फार्मेसी' (Pharmacy) कहते हैं।


मेडिकल (medical) के क्षेत्र में फार्मेसी का अहम स्थान है. फार्मेसी का क्षेत्र जॉब के लिए बहुत ही शानदार फिल्ड हैं. इस फिल्ड में अनेक प्रकार की जॉब मिल जाती है. फार्मेसी का क्षेत्र (filed) दवाइयों से जुड़ा हुआ है. जिसमें आपको करियर के साथ-साथ लोगों की सेवा करने का अवसर भी मिलता है. वैसे तो आजकल करियर बनाने के लिए छात्रों को बहुत सारे ऑप्शन मिल जाते हैं. मगर मेडिकल लाइन ऐसी है जहा पर हमेशा जॉब के बहुत सारे स्कोप मिल जाते हैं.


फार्मेसी में दो प्रकार के कोर्स होते है बी फार्मा और डी फार्मा. इन कोर्सेस को करने के बाद स्टूडेंट्स अपना फ्यूचर आसानी से सिक्योर कर सकते हैं. यदि आपको साइंस और लाइफ साइंस तथा दवाइयों (medicine) के प्रति दिलचस्पी है तो आप आसानी से फार्मेसी के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं.



Bachelor of Pharmacy


Bachelor of Pharmacy जिसको संक्षिप्त में B.Pharma भी कहते है | B.Pharma चार साल का undergraduate course है | ये कोर्स पूरा करने के बाद आपको ‘Bachelor of Pharmacy’ की डिग्री प्राप्त होगी | इस डिग्री के मिलने के बाद आप भारत में Pharmacist की practice भी कर सकते है या फिर विदेश भी जा सकते है | Science stream की छात्र चाहे वो Mathematics से हो या फिर Biology से 12 वी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद B.Pharma के लिए Eligible होते है | वैसे सामन्यत: Biology वाले छात्र Pharmacy लाइन में जाना ज्यादा पसंद करते है |


B.Pharma की चार साल की पढाई को 8 सेमेस्टर में बांटा जाता है और हर semester छ: महीने का होता है | हर semester में students को एक theoretical external examination देना जरुरी होता है जिसे मेन एग्जाम कहते है | कुछ semesters में practical exam भी होते है जिसमे hospital pharmacy, clinical pharmacy और community pharmacy जैसे विषय शामिल होते है |



बी.फार्मा का कोर्स कंटेंट Course Content


वैसे तो सामान्यत: सभी कॉलेज में यूनिवर्सिटी के आधार पर syllabus अलग अलग होता है लेकिन फिर भी सभी कॉलेज में विषय एक जैसे होते है जो सेमेस्टर बदलने पर बदलते रहते है | B.Pharma के प्रथम वर्ष में Human Anatomy , Physiology , Dispensing and General Pharmacy और Pharmaceutical Chemistry (Organic, Inorganic and Physical) विषय होते है | दुसरे वर्ष में Health Education , Clinical Chemistry , Biochemistry , Pharmaceutical Analysis , Advanced Organic Chemistry , Pharmaceutics , Molecular Biology , Mathematics होते है |


तीसरे वर्ष में Industrial Management , Computer Applications , Pharmacology 1 और Chemistry of Natural Products विषय होते है | चौथे और अंतिम वर्ष में Pharmacy Practice , Pharmaceutical Analysis (Advanced) , Pharmaceutics (Advanced) और Pharmacology 2 विषय होते है | चौथे वर्ष में आपको एक प्रोजेक्ट वर्क भी सबमिट करवाना होता है जो अलग अलग कॉलेज में अलग अलग होता है |



D.Pharma Information


D.Pharma जिसे Diploma in Pharmacy भी कहते है दो साल का डिप्लोमा कोर्स होता है | अगर आपको pharmacy के क्षेत्र में ही जाना है और आपके पास समय की कमी हो या फिर आर्थिक स्तिथि ठीक ना हो तो D.Pharma आपके लिए Best Option है | भारत में Pharmacist बनने के लिए यह minimum qualification होती है | वैसे B.Pharma की वैल्यू ज्यादा होती है लेकिन अगर कोई D.Pharma करने के बाद भी B.Pharma करना चाहे तो ये सम्भव हो सकता है | इसके लिए आपको B.Pharma में सीधे दुसरे साल में प्रवेश मिल जाता है जिसे Lateral entry कहते है |


फार्मेसी में डिप्लोमा (D.Pharma) पाठ्यक्रम इस तरह से डिजाइन किया गया है, कि इसमें व्यावहारिक और सिद्धांत दोनों विषयों को शामिल किया गया हो| पाठ्यक्रम छात्रों को नशीले पदार्थों के नियंत्रण, तीसरे पक्ष की बिलिंग, दवा वितरण, प्री-पैकिंग फार्मास्यूटिकल्स, कंप्यूटर प्रसंस्करण, और लिपिक और अन्य कर्तव्यों में सहायता के लिए तैयार करता है|


फार्मेसी क्या है

फार्मेसी के बाद के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स PG Courses


Bachelor of Pharmacy पुरी करने के बाद कई छात्र Post Graduate करने की इच्छा रखते है इसलिए Master डिग्री पाने के लिए उन छात्रों को एक कदम आगे बढाकर M.Pharma करना पड़ता है | M.Pharma जिसे Master of Pharmacy कहते है दो साल का PG course है | PG course करने के बाद ग्रेजुएट किसी विशेष फील्ड में specialize बन सकते है | इसके बाद वो ओर ज्यादा advanced course जैसे PhD और खोजबीन के क्षेत्र में भी जा सकते है | Master of Pharmacy करने के बाद Lecturer के रूप में भी अपना करियर बना सकते है | कई छात्र MBA करके इस क्षेत्र में व्यवसाय करने की चाह भी रखते है |


[ads1]

फार्मेसी से सम्बंधित कोर्स PHARMACY RELATED COURSES


फार्मेसी करने के लिए अनेक कोर्स हैं. फार्मेसी कोर्स करने के लिए स्टूडेंट्स को साइंस विषय (subject) के साथ बारहवीं (12th) परीक्षा उत्तीर्ण (pass) करनी अनिवार्य होती है. इसके बाद स्टूडेंट्स दो साल के डी फार्मा कोर्स या चार साल के बी फार्मा कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं.




  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी (PHARM) + मास्टर ऑफ़ बिज़नस

  • मास्टर ऑफ़ फार्मेसी (PHARM)

  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी (PHARM)


फार्मेसी के बाद करियर की सम्भावनाये किस क्षेत्र में पा सकते हैं रोजगार CAREER IN THE FIELD OF PHARMACY
फार्मेसी कोर्स करने के बाद छात्रों को इस फिल्ड में जॉब के लिए काफी सारे ऑप्शन मिल जाते हैं. जिसमें अच्छी जॉब के साथ-साथ सैलरी भी मिल जाती है.




  • मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव

  • क्लीनिकल रेसेअर्चेर

  • मार्किट रिसर्च एनालिस्ट

  • मेडिकल राइटर

  • एनालिटिकल केमिस्ट

  • फार्मासिस्ट

  • मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव

  • क्लीनिकल रेसेअर्चेर

  • ऑन्कोलॉजिस्ट

  • एनालिटिकल केमिस्ट

  • रेगुलेटरी मेनेजर


Pharmacy करने के बाद ग्रेजुएट छात्र Pharmacist , Medical representative , Scientist (Research field) , Teacher (Junior Lecturer) , Quality Control Officer , Clinical Research professional , Drug Inspector , Marketing professional जैसी जॉब तो आसानी से कर सकता है और उनको Hospitals and Clinics (Government and Private) , Medical Shop chains (the likes of Apollo Pharmacy) , State wise Drugs and Pharmaceutical Boards और कई जानी मानी pharmaceutical companies जैसे सिपला, GSK, Sun फार्मा अदि में जॉब मिल सकती है |


M.Pharm क्या है

M.Pharm क्या है



What is M.Pharm


M.Pharma का पूरा नाम Master of Pharmacy है. M.Pharma एक Postgraduate Academic Degree है जो Pharmacy के चिकित्सा क्षेत्र में एक Course या Program के लिए प्रदान की जाती है. Pharmacy दवाओं की तैयारी, वितरण और उचित उपयोग से निपटने वाले स्वास्थ्य विज्ञान की शाखा है. कुछ संस्थान इसे M.Pharma Course के रूप में पेश करते हैं. Pharmacy में Master Degree की अवधि 2 वर्ष है.


पहले फार्मेसी की पढ़ाई करने के लिए कुछ गिने-चुने संस्थान (Institute) ही थे मगर आजकल इस क्षेत्र में विस्तार होने के कारण अनेक संस्थानों में ऐसे कोर्सो को शुरू कर दिया गया है. जिसके कारण आज अनेक छात्र इस क्षेत्र में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं. यदि आप मेडिकल लाइन में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो आप मास्टर ऑफ़ फार्मेसी का कोर्स करके आसानी से इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं.

M.Pharma Course को कई सेमेस्टर में विभाजित है किया गया है प्रत्येक सेमेस्टर के अंत में, एक परीक्षा होती है जिसमें उम्मीदवारों को उस सेमेस्टर के लिए निर्धारित पाठ्यक्रमों में परीक्षा दी जाती है. इसके बाद छात्रों को अंतिम सेमेस्टर के अंत में Thesis जमा करने की भी आवश्यकता होती है. Pharmacy में Master Degree Research Methods, Instrumental Techniques, Emerging Areas और औद्योगिक संचालन के विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं के साथ एक उम्मीदवार प्रदान करता है. भारत में विभिन्न Pharmacy School हैं जो Master of Pharmacy Course प्रदान करते हैं.


मास्टर ऑफ़ फार्मेसी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए छात्रों की दिमागी विश्लेषण (Brain analysis) क्षमता (capacity) अच्छी होनी चाहिए तथा दवाइयों (Medicines) के प्रति रूचि होनी चाहिए.


[ads1]

एम.फार्मा कोर्स करने के लिए शैक्षिक योग्यता EDUCATIONAL QUALIFICATION FOR M. PHARM COURSE


वर्तमान में फार्मेसी के क्षेत्र में काफी बढ़ोतरी हो गयी है जिससे इस क्षेत्र में करियर बनाने के कई स्कोप मिल जाते हैं. एम.फार्मा कोर्स करने के लिए स्टूडेंट्स को किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 50% अंको के साथ मास्टर ऑफ़ फार्मेसी या समकक्ष योग्यता होनी अनिवार्य होती है. मास्टर ऑफ़ फार्मेसी कोर्स 2 साल का होता है जिसमे चार सेमेस्टर होते हैं.



मास्टर ऑफ़ फार्मेसी करने के फायदे ADVANTAGES OF M. PHARM


मास्टर ऑफ़ फार्मेसी कोर्स करने के बाद छात्रों (students) को अनेक स्थानों में जॉब मिल जाती है. इस कोर्स को करने के छात्रों को अनेक फायदे (benefits) होते हैं. एम.फार्मा कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स क्लीनिकल रिसर्च, रिसर्च असिस्टेंट, फार्मासिस्ट, मेडिकल राइटर आदि पोस्ट में जॉब कर सकते हैं.



मास्टर ऑफ़ फार्मेसी के बाद करियर की सम्भावनाये किस फिल्ड में पा सकते हैं रोजगार CAREER IN THE FIELD OF M. PHARM


एम.फार्मा यानी मास्टर ऑफ़ फार्मेसी कोर्स करने के बाद छात्रों को अनेक स्थानों में आसानी से जॉब मिल जाती है. क्योंकि आजकल मेडिकल क्षेत्र में काफी विस्तार (Expand) हो गया है जिसके कारण इस क्षेत्र में रोजगार बनाने के अच्छे अवसर मिल जाते हैं.


हेल्थ सेंटर्स
हॉस्पिटल
एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स
क्लीनिकल
रिसर्च एजेंसीज
मेडिकल डिस्पेंसिंग स्टोर
सेल्स एंड मार्केटिंग डिपार्टमेंट



टॉप 10 एम.फार्मा कॉलेजेस इन इंडिया TOP 10 M. PHARM COLLEGES IN INDIA


इंडिया में एम.फार्मा कोर्स करने के लिए अनेक कॉलेज है. इस कॉलेजेस में एम.फार्मा यानी मास्टर ऑफ़ फार्मेसी के क्षेत्र से जुड़े हुए हर विषय के बारे में पढाया जाता है जिससे छात्र इस क्षेत्र में आसानी से अपना करियर बना सके.


मद्रास मेडिकल कॉलेज – (MMC), चेन्नई


नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, मोहाली


कॉलेज ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, विशाखापत्तनम


यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, चंडीगढ़


बॉम्बे कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, मुम्बई


जेएसएस कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, नीलगिरिस


एलऍम कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, अहमदाबाद


जादवपुर यूनिवर्सिटी, फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोल्कता


सिंहगड इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मेसी – (SIOP), पुणे


गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, बैंगलोर


फ्रेशर्स को रिज्यूमे बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना है।

फार्मेसी क्या है


 फार्मेसी क्या है : चिकित्सा में प्रयुक्त द्रव्यों के ज्ञान को औषधनिर्माण अथवा भेषज विज्ञान या ‘भेषजी’ या ‘फार्मेसी’ (Pharmacy) कहते हैं।

मेडिकल (medical) के क्षेत्र में फार्मेसी का अहम स्थान है. फार्मेसी का क्षेत्र जॉब के लिए बहुत ही शानदार फिल्ड हैं. इस फिल्ड में अनेक प्रकार की जॉब मिल जाती है. फार्मेसी का क्षेत्र (filed) दवाइयों से जुड़ा हुआ है. जिसमें आपको करियर के साथ-साथ लोगों की सेवा करने का अवसर भी मिलता है. वैसे तो आजकल करियर बनाने के लिए छात्रों को बहुत सारे ऑप्शन मिल जाते हैं. मगर मेडिकल लाइन ऐसी है जहा पर हमेशा जॉब के बहुत सारे स्कोप मिल जाते हैं.

फार्मेसी में दो प्रकार के कोर्स होते है बी फार्मा और डी फार्मा. इन कोर्सेस को करने के बाद स्टूडेंट्स अपना फ्यूचर आसानी से सिक्योर कर सकते हैं. यदि आपको साइंस और लाइफ साइंस तथा दवाइयों (medicine) के प्रति दिलचस्पी है तो आप आसानी से फार्मेसी के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं.

Bachelor of Pharmacy

Bachelor of Pharmacy जिसको संक्षिप्त में B.Pharma भी कहते है | B.Pharma चार साल का undergraduate course है | ये कोर्स पूरा करने के बाद आपको ‘Bachelor of Pharmacy’ की डिग्री प्राप्त होगी | इस डिग्री के मिलने के बाद आप भारत में Pharmacist की practice भी कर सकते है या फिर विदेश भी जा सकते है | Science stream की छात्र चाहे वो Mathematics से हो या फिर Biology से 12 वी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद B.Pharma के लिए Eligible होते है | वैसे सामन्यत: Biology वाले छात्र Pharmacy लाइन में जाना ज्यादा पसंद करते है |

B.Pharma की चार साल की पढाई को 8 सेमेस्टर में बांटा जाता है और हर semester छ: महीने का होता है | हर semester में students को एक theoretical external examination देना जरुरी होता है जिसे मेन एग्जाम कहते है | कुछ semesters में practical exam भी होते है जिसमे hospital pharmacy, clinical pharmacy और community pharmacy जैसे विषय शामिल होते है |

बी.फार्मा का कोर्स कंटेंट Course Content

वैसे तो सामान्यत: सभी कॉलेज में यूनिवर्सिटी के आधार पर syllabus अलग अलग होता है लेकिन फिर भी सभी कॉलेज में विषय एक जैसे होते है जो सेमेस्टर बदलने पर बदलते रहते है | B.Pharma के प्रथम वर्ष में Human Anatomy , Physiology , Dispensing and General Pharmacy और Pharmaceutical Chemistry (Organic, Inorganic and Physical) विषय होते है | दुसरे वर्ष में Health Education , Clinical Chemistry , Biochemistry , Pharmaceutical Analysis , Advanced Organic Chemistry , Pharmaceutics , Molecular Biology , Mathematics होते है |

तीसरे वर्ष में Industrial Management , Computer Applications , Pharmacology 1 और Chemistry of Natural Products विषय होते है | चौथे और अंतिम वर्ष में Pharmacy Practice , Pharmaceutical Analysis (Advanced) , Pharmaceutics (Advanced) और Pharmacology 2 विषय होते है | चौथे वर्ष में आपको एक प्रोजेक्ट वर्क भी सबमिट करवाना होता है जो अलग अलग कॉलेज में अलग अलग होता है |

D.Pharma Information

D.Pharma जिसे Diploma in Pharmacy भी कहते है दो साल का डिप्लोमा कोर्स होता है | अगर आपको pharmacy के क्षेत्र में ही जाना है और आपके पास समय की कमी हो या फिर आर्थिक स्तिथि ठीक ना हो तो D.Pharma आपके लिए Best Option है | भारत में Pharmacist बनने के लिए यह minimum qualification होती है | वैसे B.Pharma की वैल्यू ज्यादा होती है लेकिन अगर कोई D.Pharma करने के बाद भी B.Pharma करना चाहे तो ये सम्भव हो सकता है | इसके लिए आपको B.Pharma में सीधे दुसरे साल में प्रवेश मिल जाता है जिसे Lateral entry कहते है |

फार्मेसी में डिप्लोमा (D.Pharma) पाठ्यक्रम इस तरह से डिजाइन किया गया है, कि इसमें व्यावहारिक और सिद्धांत दोनों विषयों को शामिल किया गया हो| पाठ्यक्रम छात्रों को नशीले पदार्थों के नियंत्रण, तीसरे पक्ष की बिलिंग, दवा वितरण, प्री-पैकिंग फार्मास्यूटिकल्स, कंप्यूटर प्रसंस्करण, और लिपिक और अन्य कर्तव्यों में सहायता के लिए तैयार करता है|

फार्मेसी क्या है

फार्मेसी के बाद के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स PG Courses

Bachelor of Pharmacy पुरी करने के बाद कई छात्र Post Graduate करने की इच्छा रखते है इसलिए Master डिग्री पाने के लिए उन छात्रों को एक कदम आगे बढाकर M.Pharma करना पड़ता है | M.Pharma जिसे Master of Pharmacy कहते है दो साल का PG course है | PG course करने के बाद ग्रेजुएट किसी विशेष फील्ड में specialize बन सकते है | इसके बाद वो ओर ज्यादा advanced course जैसे PhD और खोजबीन के क्षेत्र में भी जा सकते है | Master of Pharmacy करने के बाद Lecturer के रूप में भी अपना करियर बना सकते है | कई छात्र MBA करके इस क्षेत्र में व्यवसाय करने की चाह भी रखते है |

[ads1]

फार्मेसी से सम्बंधित कोर्स PHARMACY RELATED COURSES

फार्मेसी करने के लिए अनेक कोर्स हैं. फार्मेसी कोर्स करने के लिए स्टूडेंट्स को साइंस विषय (subject) के साथ बारहवीं (12th) परीक्षा उत्तीर्ण (pass) करनी अनिवार्य होती है. इसके बाद स्टूडेंट्स दो साल के डी फार्मा कोर्स या चार साल के बी फार्मा कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं.

  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी (PHARM) + मास्टर ऑफ़ बिज़नस
  • मास्टर ऑफ़ फार्मेसी (PHARM)
  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी (PHARM)

फार्मेसी के बाद करियर की सम्भावनाये किस क्षेत्र में पा सकते हैं रोजगार CAREER IN THE FIELD OF PHARMACY
फार्मेसी कोर्स करने के बाद छात्रों को इस फिल्ड में जॉब के लिए काफी सारे ऑप्शन मिल जाते हैं. जिसमें अच्छी जॉब के साथ-साथ सैलरी भी मिल जाती है.

  • मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव
  • क्लीनिकल रेसेअर्चेर
  • मार्किट रिसर्च एनालिस्ट
  • मेडिकल राइटर
  • एनालिटिकल केमिस्ट
  • फार्मासिस्ट
  • मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव
  • क्लीनिकल रेसेअर्चेर
  • ऑन्कोलॉजिस्ट
  • एनालिटिकल केमिस्ट
  • रेगुलेटरी मेनेजर

Pharmacy करने के बाद ग्रेजुएट छात्र Pharmacist , Medical representative , Scientist (Research field) , Teacher (Junior Lecturer) , Quality Control Officer , Clinical Research professional , Drug Inspector , Marketing professional जैसी जॉब तो आसानी से कर सकता है और उनको Hospitals and Clinics (Government and Private) , Medical Shop chains (the likes of Apollo Pharmacy) , State wise Drugs and Pharmaceutical Boards और कई जानी मानी pharmaceutical companies जैसे सिपला, GSK, Sun फार्मा अदि में जॉब मिल सकती है |

M.Pharm क्या है

सोमवार, 25 नवंबर 2019

सरकारी नौकरी के फायदे



सरकारी नौकरी


Benefits of Government Job


सरकारी नौकरी को लेकर सभी के विचार अलग अलग हैं कुछ सरकारी नौकरी को ही अपना लक्ष्य मानते हैं तो कुछ प्राइवेट नौकरियों को अहमियत देते हैं। सरकारी नौकरी का सबसे बड़ा फायदा है कि आपको निश्चित घंटे ही काम करना पड़ता है जिसे आप 9 से 5 की जॉब भी बोल सकते है जो अलग अलग विभागों में अलग अलग हो सकती है | सामान्यत: सरकारी नौकरी में आठ घंटे की नौकरी होती है जिसमे उसको दैनिक जीवन के अन्य काम निपटाने में काफी समय मिल जाता है |


नौकरी शब्द ही कुछ ऐसा जिसका सामना हर किसी को करना पड़ता है. कुछ लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए नौकरी करते हैं तो कुछ लोग Experience के लिए नौकरी करते हैं. हर किसी का एक मकसद होता है. कुछ लोग न चाहते हुए भी नौकरी करते हैं क्यूंकि नौकरी के अलावे उनके पास कोई और आप्शन नहीं होता है. जैसी की आपने पोस्ट टाइटल में पढ़ा सरकारी नौकरी के फायदे ! बंदा कितने भी हिफी घर से क्यूँ न हो उसके माँ बाप चाहते है मेरा बच्चा सरकारी नौकरी करे.


Upper Higher Class में भी सरकारी नौकरी का बहुत ज्यादा Craze है. Private Job के Comparison में यह कई गुणा अच्छा नौकरी है. सरकारी नौकरी का मतलब ही है आरामदायक नौकरी। काम हो या न हो Salary तो आएगी ही ! साथ ही कुछ … कमाई ! आप … का मतलब जरूर समझ गए होंगे. सरकारी नौकरी में कई विभाग और पद है. पद का अपना रुतबा है और … का अपना ! समझ में आया No Time !, No Work ! but Fix Salary + … = मोटी कमाई. … पद के अनुसार होता है !



सरकारी नौकरी के फायदे


1. ऑफिस टाइमिंग के बाद रुकने की जरुरत नहीं


प्राइवेट नौकरियों में अक्सर काम के बोझ के चलते ऑफिस टाइम के बड़ा भी रूककर अपना काम निपटान होता है लेकिन गवर्नमेंट जॉब करने वाले कर्मचारी इन दिक्कतों से बहुत दूर हैं। सरकारी कर्मचारियों पर कोई दबाव नहीं होता की वो ऑफिस टाइम के बाद तक रुकें।



2. MNC कंपनियों से बेहतर सैलरी पैकेज


हालाँकि प्राइवेट नौकरियों में इन्क्रीमेंट गवर्नमेंट जॉब के मुकाबले ज्यादा मिलता है लेकिन अगर गवर्नमेंट जॉब में मिलने वाले इंसेंटिव और वेतन भत्तों को जोड़ा जाये तो सरकारी नौकरी कर्मचारी का सैलरी पैकेज कई MNC कंपनियों से भी बेहतर होता है।


[ads1]

3. On Time Salary (समय पर वेतन)


Government Job की सबसे अच्छी बात है On Time Salary. यदि किसी महीने On Time Salary नहीं मिल पाया तो भी कोई Tension नहीं है. Salary सुरक्षित है. देश का GDP घटे या बढे आपका Salary Fix है.



4. Prestige (सम्मान)


सरकारी नौकरी (Government Job) का ठप्पा लगते ही सम्मान में बढ़ोत्तरी हो जाती. आपके प्रति लोगो का perception अलग हो जाता है. Salary matter नहीं करता है. बात सिर्फ होती है सरकारी नौकरी (Government Job) की !



5. Low Work Pressure (काम का दवाब कम)


Government Job में Work Pressure बहुत कम न के बराबर होता है ! ऐसा कोई जरूरी नहीं काम आज Complete करना है ! Responsibility होती तो है लेकिन बहुत कम ! किसी भी काम का कोई dead line नहीं होता है. सिर्फ Banking Sector में Light Work Pressure है.



6. एक सम्मानजनक नौकरी खासतौर पर अगर आप विदेश में यहाँ की तरफ से सेवा दे रहे हों


कई सरकारी विभाग अपने कर्मचारियों को काम के सिलसिले में अक्सर विदेश में पोस्टिंग देते हैं और वहां कर्मचारी के रहने खाने का खर्च सरकार ही उठती है और भत्ते भी विदेश के मुताबिक ही मिलते हैं। विदेश में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में एक सम्मानजनक काम है।



7. छुट्टियों की सुविधा


प्राइवेट नौकरी में आप कहीं घूमने जाने के लिए छुट्टियों के लिए तरस जाते हैं लेकिन गवर्नमेंट जॉब में हर त्योंहार पर आपको छुट्टी मिलती है इतना ही नहीं आपके पास मेडिकल, प्रसूति इत्यादि के लिए भी सिमित अवकाश लेने का अधिकार होता है साथ ही इसके बाद आप अपनी तनख्वाह कटवाकर भी सिमित अवकाश ले सकते हैं। कई ऐसे सरकारी नौकरी है जिसमे Saturday और Sunday दो दिन छुट्टी रहता है. 1 साल में 52 सप्ताह होता है तो 52*2 = 104 Holidays. बच गया 16 दिन तो National Holiday : Republic Day, Labors Day, Independence Day, Gandhi Jayanti. इसके अलावे महाशिवरात्रि, होली, राम नवमीं, महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बुद्ध पूर्णिमा, ईद उल फितर, बकरीद, दशहरा, मुहर्रम, दीपावली, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस.



8. आपका चिकित्सा खर्च पूरी तरह से सरकार वहन करती है


सरकारी कर्मचारियों के सभी चिकित्सा खर्च सरकार वहन करती है जबकि प्राइवेट नौकरी में ऐसा नहीं होता।



9. रहने की सुविधा


गवर्नमेंट जॉब को कई सरकारी कंपनियां रहने के लिए आवास की सुविधा देती है जबकि साधारणतः प्राइवेट कंपनियों में ऐसी सुविधा नहीं होती।



10.Feel Like King (बादशाहत)


सरकारी पैसा सभी चाहते हैं और जरा सोच कर देखिए कि सरकारी खर्चे पर आपको विदेश में रहने का मौका मिल जाये तो कितना मज़ा आएगा ! खुद का कोई खर्च भी नहीं और Foreign की outing अलग से. कई सरकारी नौकरियों में आपको अलग-अलग तरह के भत्‍ते मिलता है. इन भत्‍तों के तहत आपको मिलने वाली कई सुविधाओं का खर्च सरकार ही उठाती है. सरकारी नौकरी में Medical Leave के साथ साथ पूरे महीने की पगार (Salary) भी हाथ में होती है और इलाज के लिए अलग से Medical Allowance (चिकित्‍सकीय भत्‍ता). यही नहीं किसी भी सरकारी अस्‍पताल में पूरी तरह से फ्री-चेकअप की भी सुविधा मिलती है फिर क्‍या है ढूंढिए सरकारी नौकरी और बन जाइए बादशाह !



11. रिटायरमेंट के बाद भी वेतन


आपको शायद ही ऐसी कोई प्राइवेट कंपनी मिलेगी जो किसी कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद उसे पेंशन देती हो जबकि गवर्नमेंट जॉब का सबसे बड़ा फायदे यही है की रिटायरमेंट के बाद भी पेंशन मिलती है ताकि वृद्धावस्था में किसी पर निर्भर ना रहना पड़े।
सरकारी नौकरी का सबसे अच्छी बात पेंशन स्कीम है. सरकारी नौकरी से सेवा निवृत होने के बाद सरकार आपके आखिरी सांस तक आपको पेंशन देती है. दे भी क्यूँ लगातार पूरी जिन्दगी आपने अपना सेवा दिया है. सरकारी नौकरी करने वालों को बुढ़ापा के बारें में सोचना नहीं पड़ता है. आपके नहीं रहने पर यह पेंशन आपके पति / पत्नी को आखिरी सांस तक मिलेगा!



12. All Types of Allowances (सभी सरकारी सुविधा)


सरकारी नौकरी आपका बहुत ख्याल रखती है. यह आपके Extra expenses को ध्यान में रखते हुए DA, TA और HRA देती है.


DA : Dearness Allowance (महंगाई भत्ता)


TA : Travel Allowance (यात्रा भत्ता)


HRA : House Rent Allowance (घर का किराया)


यदि आप Railway में नौकरी कर रहे हो तो Railway आपको free pass देती है. Pass पर Confirm Ticket मिलता है. Pass ख़त्म हो जाने की स्थिति में आपको one third fare लगता है.



13. Increment and Promotion (वेतन वृधि और पदोन्नति)


सरकारी नौकरी में Promotion और Salary increment के लिए समय निर्धारित होता है. इसके लिए कोई Extra काम नहीं करना होता है, न ही कोई Milestone Complete करना होता है. समय पूरा हुआ आपको Promotion के साथ – साथ Salary Increment. Central Government ने Pay Commission लागू कर दिया तो Salary में चार-चांद लगना निश्‍चित हैं.



14. लोन आसानी से मिल जाता है


सरकारी कर्मचारियों को कोई भी संस्था या बैंक आसानी से लोन दे देती है क्योंकि गवर्नमेंट जॉब का पूरा रिकॉर्ड साफ़ होता है और उनकी पूरी पहचान प्राप्त की जा सकती है।
कभी किसी काम के लिए Urgent में पैसो की जरूरत हो जाती है. ऐसे में सरकारी नौकरी में नौकरी के ही आधार पर आपको आसानी से Loan भी मिल जाता और उस पर ब्‍याज की दर सामान्य से कम होता है.


(BMC) बृहन्मुंबई महानगरपालिका वाहनचालक पद 65 जागा भरती 2020

 

सोमवार, 18 नवंबर 2019

डिप्लोमा क्या होता है


 


डिप्लोमा क्या होता है


Diploma kya hota he

डिप्लोमा एक ऐसा सर्टिफिकेट है जो कि किसी शैक्षणिक संस्थान द्वारा वहां पर पड़ने वाले विद्यार्थी को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दिया जाता है. अगर आप किसी विषय से संबंधित डिप्लोमा प्राप्त करना चाहते हैं तो आप पॉलिटेक्निक से या ITI से अपना डिप्लोमा प्राप्त कर सकते हैं. डिप्लोमा अलग-अलग विषयों में अलग-अलग समयावधि पर दिया जाता है. जैसे कि अगर आप पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा करते हैं. तो आपको 3 साल के बाद डिप्लोमा मिलेगा और अगर आप Iti से डिप्लोमा करते हैं तो आपको 1 साल या 2 साल में डिप्लोमा मिल जाएगा यह ब्रांच पर निर्भर करता है कि आप को कितने साल पढ़ाई करनी पड़ेगी.


आजकल ज्यादातर छात्र 10 वीं के बाद डिप्लोमा कोर्स करना पसंद कर रहे हैं। वहीं डिप्लोमा कोर्सेस करने का सबसे बड़ा फायदा है यह है कि छात्र को एक विशेष स्ट्रीम में पूरा ज्ञान मिल जाता है और वे उस स्ट्रीम में अपना करियर बना सकते हैं।
वहीं तेजी से डिप्लोमा कोर्सेस की बढ़ती मांग को देख भारत में कई डिप्लोमा कोर्सेस आ रहे हैं उन छात्रों के लिए जो कि 10वीं क्लास के बाद नौकरी पाने की आशा करते हैं। जबकि डिप्लोमा कोर्सेस का ये भी फायदा है कि छात्र डिप्लोमा प्रोग्राम के बाद छात्र सरकारी नौकरी के लिए भी एप्लाई कर सकते हैं।



10वीं के बाद कौन-कौन से डिप्लोमा कोर्स कर सकते है / Diploma Courses After 10th


10वीं पास करने के बाद ज्यादातर छात्र जहां आगे की पढ़ाई जारी रखते हैं तो कई स्टूडेंट ऐसे भी होते हैं जो करियर की दिशा में आगे बढ़ते हैं। वो चाहते हैं कि जल्द से जल्द वो अपने पैरों पर खड़े हों और अपना खर्चा खुद उठाए। अगर आप भी उन्ही छात्रों में से एक है जो जल्द से जल्द नौकरी करना चाहते हैं, तो डिप्लोमा कोर्स के जरिए आप अपनी इच्छा को पूरा कर सकते है। इससे फायदा ये होगा कि सिर्फ प्राइवेट सेक्टर ही नहीं बल्कि सरकारी क्षेत्र में भी आपको नौकरी आसानी से मिल जाएगी।

डिप्लोमा इन फाइन आर्ट्स


एनीमेशन, डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग, ग्राफ़िक्स, विज्युलाइज़ेशन जैसे क्षेत्र में अगर आप अपना करियर बनाना चाहते है तो फाइन आर्ट्स चुन सकते हैं। 10वी कक्षा के बाद 5 साल का फाइन आर्ट्स का डिप्लोमा कोर्स है। अगर आप क्रिएटिव है तो ये कोर्स आपके लिए ही बना है।

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग


इंजीनियर बनेन का ख्वाब देखते हैं तो 10वीं पास करने के बाद उस सपने को साकार किया जा सकता है। कई सारे संस्थान और पॉलीटेक्निक कॉलेज ऐसे हैं जो दसवीं के बाद इंजीनियरिंग डिप्लोमा करवाते हैं। इनको करने के बाद आपको इंजीनियरिंग फील्ड से जुड़े मिडिल लेवल के जॉब आसानी से मिल सकते हैं।

  1. डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग

  2. डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग

  3. डिप्लोमा इन एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग

  4. डिप्लोमा इन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग

  5. डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग

  6. डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग

  7. डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग

  8. डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग

  9. डिप्लोमा इन बायोमेडिकल इंजीनियरिंग

  10. डिप्लोमा इन पेट्रोलियम इंजीनियरिंग

  11. डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग

  12. डिप्लोमा इन ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग

  13. डिप्लोमा इन एनवॉयरमेंटल इंजीनियरिंग

  14. डिप्लोमा इन फायर इंजीनियरिंग शामिल है।


डिप्लोमा इन स्टेनोग्राफी


देश में बहुत से ऐसे संस्थान है जो स्टेनोग्राफी में डिप्लोमा करवाते हैं। जिसे करते ही बैंक, शिक्षा, कोर्ट के साथ साथ कई और क्षेत्रों में नौकरी के अवसर आपके लिए खुल जाएंगे। हर सरकारी विभाग या निजी कंपनियों में ऐसी नौकरियां निकलती रहती हैं जिनके लिए स्टेनोग्राफर की भर्ती की ज़रूरत होती है। ऐसे में ये स्कोप काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर


ये भी एक कलात्मक फील्ड है। इसमें बिल्डिंग के निर्माण, डिज़ाइन, उसकी संरचना पर काम किया जाता है। जो कोई भी छात्र बेहद क्रिएटिव हो और फिजिक्स और गणित का ज्ञान रखता हो वो इस डिप्लोमा कोर्स को करने के बाद करियर की नई उड़ान भर सकता है।

डिप्लोमा इन बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन


कॉमर्स विषय में रूचि है और बिज़नेस की लाइन में जाना चाहते हैं तो 10वीं के बाद बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन में डिप्लोमा किया जा सकता है। इसमें बिज़नेस को चलाने के दांव पेंच सिखाए जाते हैं इस डिप्लोमा कोर्स को करने के बाद जहां आप किसी कंपनी में आसानी से नौकरी पा सकते हैं तो वही खुद का बिज़नेस भी शुरू कर सकते हैं।

इन सब के अलावा भी ढेरो डिप्लोमा कोर्स ऐसे हैं जो 10वीं के बाद आपके करियर को एक नई दिशा दे सकते हैं, जैसे :



  1. डिप्लोमा इन गारमेंट टेक्नोलॉजी

  2. डिप्लोमा इन प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी

  3. डिप्लोमा इन लेदर टेक्नोलॉजी

  4. डिप्लोमा इन इंस्ट्रूमेंटेशन टेक्नोलॉजी

  5. डिप्लोमा इन मरीन इंजीनियरिंग

  6. डिप्लोमा इन प्रोडक्शन

  7. डिप्लोमा इन टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी

  8. डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी

  9. डिप्लोमा इन बायोटेक्नोलॉजी

  10. डिप्लोमा इन ब्यूटी कल्चर

  11. डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर

  12. डिप्लोमा इन एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग

  13. डिप्लोमा इन फैशन डिजाइन

  14. डिप्लोमा इन अपेरल डिजाइन

  15. डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी

  16. डिप्लोमा इन मेडिकल लैब

  17. डिप्लोमा इन लाइब्रेरी एंड इनफॉरमेशन साइंस


जिस कोर्स के लिए 12वीं के बाद चार साल लगते हैं वही 10वीं के बाद ये डिप्लोमा कोर्स महज़ 3 साल का होता है। वही डिप्लोमा धारकों को कई सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां हाथों हाथ नौकरियां भी देती है।

डिप्लोमा क्या होता है

10वीं के बाद डिप्लोमा कोर्स की लिस्ट – Diploma Courses After 10th


Diploma in Stenography


ये डिप्लोमा कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को शॉर्ट-हैंड- डिक्टेशन्स लेने में मद्द मिेलती है साथ ही वे लिपिक कर्तव्यों का भी पालन कर सकते हैं।


समय- 1 साल


जॉब- ये कोर्स करने वाले विद्यार्थी सरकारी अथवा प्राइवेट सेक्टर में स्टेनोग्राफर की जॉब आसानी से पा सकते हैं।



Art Teacher Diploma


ये क डिप्लोमा कोर्स के माध्यम से छात्र बेसिक और मौलिक सिद्दान्तों की ट्रेनिंग लेते हैं इसके साथ ही छात्र विजुअल और डिजायनिंग का भी अनुभव ले सकते हैं।


समय अवधि- 2 साल


जॉब- इस डिप्लोमा कोर्स के बाद छात्र आर्ट टीचर बन सकते हैं।



Diploma in Agriculture


एग्रीकल्चर डिप्लोमा के माध्यम से छात्र खेती करने के तरीके समेत तमाम तरह मिट्टी की जानकारी एकत्र कर सकते हैं।


समय- 2 साल


जॉब- इस कोर्स के माध्यम से छात्र बीटेक में एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में करियर बना सकते हैं।



Commercial Art Diploma


इन डिप्लोमा कोर्स की मदद से छात्र खरीदने-बेचने की अवधारणा को आसानी से समझ सकते हैं। आपको बता दें कि ये कोर्स फाइन आर्ट के कोर्स से एकदम अलग है।


समय- 2 से 3 साल


जॉब- इस कोर्स को करने के बाद छात्र एडवरजाइजिंग कंपनी, आर्ट स्टूडियो, पब्लिशिंग हाउसेस, फैशन हाउसेस में जॉब कर अपना करियर बना सकते हैं।



Diploma in 3D Animation


इस एनिमेशन कोर्स का भी स्कोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इस कोर्स की मद्द से छात्र 3D एनिमेशन से जुड़ी स्किल्स से संबंधित ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।


समय- 18 महीने से 2 साल


जॉब- एनिमेशन डिप्लोमा कोर्सेस करने वाले छात्र किसी भी एनिमेशन कंपनी में 3D एनिमेटर की जॉब आसानी से पा सकते हैं।



Diploma in Hotel Management and Catering Technology


इस कोर्स का भी स्कोप बहुत तेजी से बढ़ रहा है ज्यादातर बच्चे होटेल मैनेजमेंट में अपना करियर बनाना पसंद कर रहे हैं।


समय – 2 साल


जॉब- इस डिप्लोमा कोर्स की माध्यम से छात्र केटरिंग ऑफिसर, कैटरिंग सुपरवाइजर एंड असिसटेंट, केबिन क्रू की जॉब पा सकते हैं।



Diploma in Beauty Care


ये डिप्लोमा कोर्स लड़कियो के बीच काफी लोकप्रिय है, इस डिप्लोमा कोर्स के माध्यम से लड़कियां ब्यूटीशियन के कौशल को निखार सकती हैं।


समय- 4 साल


जॉब- ये कोर्स करने के बाद लड़किया ब्यूटीशियन बन सकती है और खुद का ब्यूटी पार्लर भी खोल कर सकती हैं।



Diploma in Cosmetology


इस कोर्स के माध्यम से छात्र कॉस्मेटिक के विस्तार को गहराई से समझ सकते हैं।


समय – 5 महीने


जॉब- इस कोर्स को करने के बाद स्टूडेंट्स, ब्यूटीशियन बन सकते हैं या फिर खुद का ब्यूटी पार्लर खोल सकते है। इसके अलावा वे किसी कॉस्मेटिक बनाने वाली कंपनी में सेल्समेन की नौकरी भी कर सकते हैं।



Diploma in Cyber Security


इस कोर्स के माध्यम से छात्र ऐथिकल हैकिंग से संबंधित ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।


साल 1- साल


जॉब- इस कोर्स के बाद छात्र सरकारी और प्राइवेट एजेंसी में एथिकल हैकर बन सकते हैं साथ ही अलग तरह की मिट्टी ले सकते हैं।



Diploma in Commercial Practice


इस कोर्स के माध्यम से छात्र को किसी वस्तु को बेचने का अनुभव होगा साथ ही वस्तु का प्रमोशन भी कर सकेंगे।


समय- 3 साल


जॉब- इस डिप्लोमा की मद्द से छात्र कॉर्मशियल एकाउंट मैनेजर, कॉर्मशियल एक्सीक्यूटिव, बिजनेस जूनियर हेड, ब्रांच जूनियर असिस्टेंट मैनेजर की जॉब पा सकते हैं।



Diploma in Dental Mechanics


समय- 2 साल


जॉब- डेंटिस्ट, असिसटेंट डेंटल सर्जन, डेंटल टेक्नीशियन, रिसर्च असिसटेंट



Diploma in Plastics Technology


साल- 3 साल


जॉब- प्लास्टिक पार्ट मोल्ड डिजायन इंजीनियर, प्रोजक्ट इंजीनियर, इंडस्ट्रियल इंजीनियर, प्रोडक्ट डिजायन इंजीनियर



Diploma in Ceramic Technology


समय- 3 साल


जॉब- इस कोर्स के बाद छात्र या तो सिरेमिक टेक्नोलॉजी में में पार्श्व प्रवेश कर सकते हैं या फिर सिरेमिक इंजीनियर बन सकते हैं।



Diploma in Engineering


समय- 3 साल


जॉब- इस कोर्स के बाद बीटेक में प्रवेश ले सकते हैं या फिर इससे संबंधित क्षेत्र में जॉब पा सकते हैं।



Diploma in Fire Safety Engineering


समय- 6 महीने


जॉब- फायर सेफ्टी ऑफिसर



Diploma in Fashion Technology


समय- 3 साल


जॉब- फैशन डिजायनर, कॉस्ट्यूम डिजायनर, टेक्सटाइल डिजायनर, ब्राइडल वियर डिजायनर, स्टायलिस्ट


डिप्लोमा क्या होता है

डिप्लोमा इन इनजीनियरिंग कोर्सेस


10 वीं के बाद छात्र इंजीनियरिंग कोर्सेस में भी डिप्लोमा कर सकते हैं। लेकिन ये डिप्लोमा कोर्स छात्र तभी कर सकते हैं जब उनके पास क्लास 10th में गणित और विज्ञान हो।


वहीं इंजीनियरिंग प्रोग्राम में डिप्लोमा 3 साल का होता है। भारत में कई तरह के डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग कोर्सेस उपलब्ध हैं। जिनमें से कुछ इस तरह हैं।




  • डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन ईसी इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा ने आईसी इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा ने माइनिंग इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन टैक्सटाइल इंजीनियरिंग


डिप्लोमा कोर्स पूरा होने के बाद, छात्र प्रत्यक्ष रूप से बीटेक और बीई के 2nd ईयर में प्रवेश ले सकते हैं जिसे लेटरल एंट्री भी कहा जाता है।



ITI कोर्सेस


आईटीआई जिसका मतलब है, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इन्सटिट्यूट, इसमें छात्रों को इंडस्ट्रियल लेवल पर काम करने के लिए तैयार किया जाता है ताकि बच्चे अच्छी जॉब पा सकें। वहीं आईटीआई की खासियत यह है कि ये थ्योरी के मुकाबले प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ज्यादा जोर देता है ताकि बच्चों को अच्छे से समझ में जाए।


आईटीआई प्रोग्राम 1-2 साल के होते हैं, कोर्स की समय अवधि कोर्स के नैचर पर निर्भर करती है , कुछ मुख्य आईटीआई प्रोग्राम इस प्रकार हैं –




  • आईटीआई इलैक्ट्रिशियन कोर्स

  • आईटीआई प्लमबर कोर्स

  • आईटीआई वेल्डर कोर्स

  • आईटीआई टर्नर कोर्स

  • आईटीआई मैकेनिक कोर्स

  • अन्य वोकेशनल कोर्सेस


आईटीआई, पॉलीटेक्निक कॉलेज और दूसरे एजूकेशनल इंस्टीट्यूट, जॉब दिलवाने कोर्सेस नौकरी उन्मुख व्यवसायिक पाठ्यक्रम के लिए जाने जाते हैं। ऐसे प्रोग्राम डिप्लोमा और सर्टिफिकेशन कोर्सेस भी होते हैं। उदाहरण के लिए-




  • डिप्लोमा इन हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग

  • पैरामेडिकल कोर्सेस

  • CERTIFICATE COURSES


ऊपर लिखे गए कोर्सेस के अलावा भी कई सर्टिफिकेशन कोर्सेस उपलब्ध है जिन्हें छात्र 10वीं क्लास के बाद कर सकता है। उदाहरण के लिए-




  • सर्टिफिकेट इन वेब डिजायनिंग

  • सर्टिफिकेट इन एथिकल हैकिंग

  • सर्टिफिकेट इन ग्राफिक डिजाइन

  • सर्टिफिकेट इन एप डेवलपमेंट


तो इस प्रकार छात्र अपनी रूचि का कोई एक कोर्स चुन कर अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकता है।

रविवार, 17 नवंबर 2019

10th के बाद क्या करे कोनसा सब्जेक्ट ले



10th के बाद क्या करे कोनसा सब्जेक्ट ले


what to do after 10th how to choose subject

दसवीं क्लास की परीक्षा के बाद क्या करें, किस स्ट्रीम का चुनाव करें, क्या मुझे किसी प्रोफेशनल कोर्स का चयन करना चाहिए या फिर ट्रेडिशनल विकल्पों की तरफ ही अपने आप को केन्द्रित करना चाहिए आदि कुछ ऐसे सवाल हैं जो लगभग हर दसवीं पास या दसवीं की पढ़ाई कर रहे छात्रों के दिमाग में उठते हैं और इससे वे बेवजह परेशान रहते हैं. वस्तुतः इन प्रश्नों के उत्तर का सीधा सीधा सम्बन्ध भविष्य में उनके अध्ययन तथा प्रोफेशन से होता है. इनका मुख्य फोकस इन्हीं दो बातों पर होता है. इस लिए इस दौरान ऐसे प्रश्नों के विषय में सोंचकर परेशान होना स्वाभाविक है.


दसवीं के बाद कुछ भी करने का निर्णय छात्रोंन के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करता है. इस समय वे एक ऐसी राह पर खड़े होते हैं जहाँ आपको एक निर्णय लेना है जो आपके जीवन को सुखी और समृद्ध बना सके. यदि आप करियर से जुड़े इस निर्णय को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं तथा कहीं न कहीं आपके मन में किसी तरह का संदेह हो,तो इस सम्बन्ध में निर्णय लेना काफी मुश्किल हो जाता है.साथ ही इस दौरान अगर आपने कोई गलत निर्णय ले लिया तो उसका परिणाम आपको जीवन भर भुगतना पड़ेगा.



सही डिसीजन (निर्णय) लेने की क्षमता का विकास


किसी भी काम की सफलता के पीछे मुख्यतः सही समय पर लिए गए सही निर्णय की ही अहम भूमिका होती है. इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने सीनियर्स, टीचर्स या माता-पिता तथा अभिभावकों की राय अवश्य लेनी चाहिए.इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि यह बात सही है कि इस निर्णय का प्रभाव दूरगामी होता है लेकिन यह आपके जीवन का आखिरी निर्णय नहीं होता है. वस्तुतः निर्णय लेने की क्षमता जैसी क्वालिटी की डिमांड जॉब मार्केट में बहुत ज्यादा होती है. आप चाहे किसी भी क्षेत्र में जाएं हर जगह आपके इस क्वालिटी की परख की जाती है और इसी पर आपका करियर कुछ हद तक डिपेंड करता है. इसलिए दसवीं के बाद आप सही निर्णय लेने की कोशिश करते हैं जिससे आपके तार्किक क्षमता का विकास होता है और इसी दौरान आप जीवन से जुड़े पहलुओं पर गौर करना सीखते हैं.

इससे आपको अपने अनुसार चयन करने की स्वतन्त्रता मिलती है -


अभी तक आपसे जुड़े हर चीज का निर्णय आपके माता पिता या अभिभावकों द्वारा लिया जाता है लेकिन दसवीं के बाद आप अपने करियर से जुड़े ऑप्शंस को चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं. इसलिए दसवीं के बाद मुझे क्या करना है ? इस महत्वपूर्ण निर्णय को अब आपको ही लेना होता है. हो सकता है कि बहुत सारे करियर विकल्पों की उपस्थिति में आप थोड़ा बहुत कन्फ्यूज हो जाएं लेकिन अत्यधिक सूक्ष्म परीक्षण और डिस्कशन के बाद आप सशक्तता पूर्वक अपने लिए फायदेमंद और तार्किक रूप से संगत करियर विकल्प का चयन अपने लिए कर सकते हैं.


10th के बाद क्या करे कोनसा सब्जेक्ट ले

आप को किन किन स्ट्रीम्स का चयन करना चाहिए ?-


दसवीं के बाद सबसे कठिन निर्णय होता है स्ट्रीम का चुनाव करना. सही स्ट्रीम का चुनाव करना बहुत जरुरी है.कारण कि भविष्य के सभी निर्णय मुख्यतः आपके इसी निर्णय पर अवलंबित होते हैं.



किस विषय का चुनाव स्टूडेंट्स को करना चाहिए ?


कभी कभी स्टूडेंट्स अपने जीवन हर्ड मेंटालिटी ( झुण्ड मानसिकता) के दबाव में आकर उस स्ट्रीम का चुनाव कर लेते हैं जो उनकी रुची तथा क्षमता के बिलकुल विपरीत होते हैं लेकिन चूँकि उनके मित्र या जानकार भी इसे ही चुने हैं,इसलिए वे भी ऐसा करते हैं.लेकिन यह एक गलत प्रैक्टिस है और इसके परिणाम आपके लिए भयावह हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अपनी रुचि,योग्यता और क्षमता के अनुरूप ही किसी स्ट्रीम का चयन करें ताकि आप बेहतर रीजल्ट पा सकें.



साइंस


सामान्यतः सबका पसंदीदा विषय – विज्ञानं अधिकांश स्टूडेंट्स का पसंदीदा विषय होता है और लगभग हर माता पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा विज्ञान विषय से ही पढ़ाई करे. यह स्ट्रीम स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे कई आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करती है और विभिन्न डोमेनों में शोध करने का अवसर भी प्रदान करती है. दसवीं के बाद विज्ञान विषय चुनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे लेने के बाद आगे चलकर वे आर्ट्स या कॉमर्स किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन ले सकते हैं. इसके विपरीत अगर आपने 12 वीं तथा ग्रेजुएशन आर्ट्स या कॉमर्स से की है तो आप भविष्य में साइंस नहीं ले सकते हैं जबकि साइंस स्ट्रीम वाले पुनः किसी भी स्ट्रीम का चुनाव कर सकते हैं.


[ads1]

जहां तक ​​ कक्षा 11 वीं और 12 वीं का सवाल है,तो आपको कंप्यूटर विज्ञान, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ ऐच्छिक विषयों के साथ भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और गणित जैसे आधारभूत विषयों का चयन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स द्वारा चुने गए इंस्ट्रक्शन के भाषा के आधार पर उन्हें एक अनिवार्य भाषा का भी चुनाव करना होगा. साथ ही क्लास में थियरी की पढ़ाई के अतिरिक्त लेबोरेट्री में प्रैक्टिकल भी करना होगा.


यदि आप इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो आप पीसीएम या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित को मूल विषयों के रूप में चुन सकते हैं, लेकिन आगर आप मेडिसिन में रुचि रखते हैं तो आप पीसीएमबी या भौतिकी + रसायन विज्ञान + गणित + जीवविज्ञान ले सकते हैं.



कॉमर्स


बिजनेस के लिए सर्वश्रेष्ठ - साइंस के बाद स्टूडेंट्स द्वारा सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला स्ट्रीम है कॉमर्स. यदि स्टैटिक्स, फायनांस या इकोनॉमिक्स के फील्ड में जाना चाहते हैं तो आपको इस स्ट्रीम का चुनाव करना होगा. अगर करियर की बात की जाय तो कॉमर्स स्ट्रीम से चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी, एकाउंटेंट्स, निवेश बैंकिंग और वित्तीय सलाहकार जैसे कुछ सबसे अधिक आकर्षक और उच्च भुगतान वाली नौकरियों में जाया जा सकता है हालांकि, इसकेलिए कक्षा 12 के बाद इन संबंधित डोमेन में प्रोफेशनल कोर्सेज का चयन करना होगा.


कॉमर्स स्टूडेंट्स के रूप में आपको बिजनेस इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडी और बिजनेस लॉ आदि मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा. इसके अतिरिक्त स्टूडेंट्स को कॉमर्स स्ट्रीम के एक हिस्से के रूप में अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, इनकम टैक्स, मार्केटिंग और जेनरल बिजनेस इकोनोमिक्स में आधारभूत प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. साइंस के स्टूडेंट्स की तरह ही इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा का चयन करना होता है.



आर्ट्स/कला / मानविकी


आजकल आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास अन्य स्ट्रीम की भांति ही आकर्षक और संतोषजनक करियर विकल्प मौजूद हैं. एक आर्ट्स का स्टूडेंट जर्नलिज्म, लिटरेचर, सोशल वर्क, एजुकेशन और कई अन्य करियर विकल्पों का चयन कर सकता है.


जहां तक ​​विषयों का संबंध है, तो आर्ट्स स्टूडेंट्स के पास विभिन्न प्रकार के विषयों के चयन का विकल्प होता है जिनमें से समाजशास्त्र, इतिहास, साहित्य, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, दर्शन, अर्थशास्त्र इत्यादि विषय शामिल हैं. इन्हें भी एक अनिवार्य भाषा विकल्प का चयन करना पड़ता है.



सही करियर विकल्प की पहचान करें


एक बार जब आप उन चीज़ों की पहचान करना शुरू करते हैं जिनके बारे में आप रुचि रखते हैं, तो बहुत सारे और विविध विकल्प आपके सामने होते हैं, जिनमें से सबका चयन करना सही निर्णय नहीं हो सकता है. उदाहरण के लिए मानलीजिये कि आपको पतंग उड़ाना बहुत पसंद है, लेकिन एक करियर विकल्प के रूप में इसका चयन करना शायद एक सही निर्णय नहीं हो सकता है.


इसलिए, आपको यह पहचानने की आवश्यकता है कि आपके कौन से इन्ट्रेस्ट क्षेत्र आपको अच्छे अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिसमें आप एक स्थायी करियर बना सकते हैं. इसके लिए आप प्रोफेशनल करियर काउंसेलर की मदद ले सकते हैं. वे आपको अपने कौशल का विश्लेषण करने में मदद कर सकते हैं और सही करियर विकल्प चुनने में आपकी सहायता कर सकते हैं.



दूसरों की मदद लें


यदि आपको अभी भी लगता है कि आप स्ट्रीम के चयन को लेकर भ्रमित और अनिश्चित हैं, तो आपको कक्षा 10 के बाद अपने माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर से सलाह लेनी चाहिए. आजकल मार्केट में कई अन्य करियर विकल्प और अवसर मौजूद हैं जो कक्षा 10 के बाद आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं जिनका आप चयन कर सकते हैं. माता-पिता, प्रोफेशनल काउंसेलर या सीनियर आपको हमेशा सही सलाह देंगे तथा सही स्ट्रीम के चयन में आपकी भरपूर मदद करेंगे.



10वीं क्लास के बाद क्या करें – Courses After 10th


10वीं के बाद कोर्सेस की लिस्ट



  • 11th and 12th PUC

  • डिप्लोमा इन इनजीनियरिंग कोर्सेस

  • ITI कोर्सेस

  • वोकेशनल कोर्सेस

  • सर्टिफिकेट कोर्सेस


अगर कोई छात्र अपनी 10 वीं तक की पढ़ाई के बाद ही नौकरी की सोच रखता है तो आज कल कुछ डिप्लोमा और पार्ट टाइम कोर्सेस भी हैं जो ऐसे छात्रों को नौकरी दिलवाने में उनकी मदत सकते हैं।


अगर आपकी आर्थिक स्थिति ठीक है और आपको किसी ऐसी समस्या से नहीं जूझ रहे हैं जो आपके आगे की पढ़ाई को प्रभावित करे, तो आपके करियर के लिए बेहतर होगा कि आप 10th के बाद जॉब नहीं करें और आगे की पढ़ाई पर ध्यान दें।


क्योंकि अगर आप 10 वीं के बाद जॉब करने लगते हैं तो आप कम सैलरी तक तक सीमित रह जाते हैं जब तक की आपको सरकारी नौकरी नहीं मिलती ( जैसे की आर्मी, नेवी, रेलवे और पुलिस ) में आप नियुक्त नहीं हो जाते।


10 वीं के बाद ज्यादातर छात्र 12 वीं तक अपनी स्कूल की पढ़ाई जारी रखना पसंद करते हैं वहीं 11वीं 12 वीं की पढ़ाई के लिए छात्रों को तीन मुख्य विषय विज्ञान, कॉमर्स और आर्ट्स में से ही चयन करना पड़ता है।


अगर कोई छात्र अपने करियर के लिए विज्ञान विषय का चयन करता है तो वह PUC में फिर से कॉमर्स और आर्ट्स के क्षेत्र में अपना करियर बना सकता है। विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में भी करियर बनाने के लिए कई विकल्प हैं जिन्हें चुनकर वे अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।


छात्र कन्वेशनल कोर्सेस जैसे इंजीनियरिंग, मेडीकल, मैनेजमेंट कोर्सेस कर सकते हैं। अगर आप कॉमर्स स्ट्रीम से PUC करने की सोच रहे हैं तो आप बाद में आर्ट फील्ड्स में भी अपना करियर बना सकते हैं लेकिन आप विज्ञान के क्षेत्र मे नहीं जा सकते हैं।


आजकल ज्यादातर छात्र 10 वीं के बाद डिप्लोमा कोर्स करना पसंद कर रहे हैं। वहीं डिप्लोमा कोर्सेस करने का सबसे बड़ा फायदा है यह है कि छात्र को एक विशेष स्ट्रीम में पूरा ज्ञान मिल जाता है और वे उस स्ट्रीम में अपना करियर बना सकते हैं।
वहीं तेजी से डिप्लोमा कोर्सेस की बढ़ती मांग को देख भारत में कई डिप्लोमा कोर्सेस आ रहे हैं उन छात्रों के लिए जो कि 10वीं क्लास के बाद नौकरी पाने की आशा करते हैं। जबकि डिप्लोमा कोर्सेस का ये भी फायदा है कि छात्र डिप्लोमा प्रोग्राम के बाद छात्र सरकारी नौकरी के लिए भी एप्लाई कर सकते हैं।


10th के बाद क्या करे कोनसा सब्जेक्ट ले

10वीं के बाद डिप्लोमा कोर्स की लिस्ट – Diploma Courses After 10th


Diploma in Stenography


ये डिप्लोमा कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को शॉर्ट-हैंड- डिक्टेशन्स लेने में मद्द मिेलती है साथ ही वे लिपिक कर्तव्यों का भी पालन कर सकते हैं।


समय- 1 साल


जॉब- ये कोर्स करने वाले विद्यार्थी सरकारी अथवा प्राइवेट सेक्टर में स्टेनोग्राफर की जॉब आसानी से पा सकते हैं।



Art Teacher Diploma


ये क डिप्लोमा कोर्स के माध्यम से छात्र बेसिक और मौलिक सिद्दान्तों की ट्रेनिंग लेते हैं इसके साथ ही छात्र विजुअल और डिजायनिंग का भी अनुभव ले सकते हैं।


समय अवधि- 2 साल


जॉब- इस डिप्लोमा कोर्स के बाद छात्र आर्ट टीचर बन सकते हैं।



Diploma in Agriculture


एग्रीकल्चर डिप्लोमा के माध्यम से छात्र खेती करने के तरीके समेत तमाम तरह मिट्टी की जानकारी एकत्र कर सकते हैं।


समय- 2 साल


जॉब- इस कोर्स के माध्यम से छात्र बीटेक में एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में करियर बना सकते हैं।



Commercial Art Diploma


इन डिप्लोमा कोर्स की मदद से छात्र खरीदने-बेचने की अवधारणा को आसानी से समझ सकते हैं। आपको बता दें कि ये कोर्स फाइन आर्ट के कोर्स से एकदम अलग है।


समय- 2 से 3 साल


जॉब- इस कोर्स को करने के बाद छात्र एडवरजाइजिंग कंपनी, आर्ट स्टूडियो, पब्लिशिंग हाउसेस, फैशन हाउसेस में जॉब कर अपना करियर बना सकते हैं।



Diploma in 3D Animation


इस एनिमेशन कोर्स का भी स्कोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इस कोर्स की मद्द से छात्र 3D एनिमेशन से जुड़ी स्किल्स से संबंधित ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।


समय- 18 महीने से 2 साल


जॉब- एनिमेशन डिप्लोमा कोर्सेस करने वाले छात्र किसी भी एनिमेशन कंपनी में 3D एनिमेटर की जॉब आसानी से पा सकते हैं।



Diploma in Hotel Management and Catering Technology


इस कोर्स का भी स्कोप बहुत तेजी से बढ़ रहा है ज्यादातर बच्चे होटेल मैनेजमेंट में अपना करियर बनाना पसंद कर रहे हैं।


समय – 2 साल


जॉब- इस डिप्लोमा कोर्स की माध्यम से छात्र केटरिंग ऑफिसर, कैटरिंग सुपरवाइजर एंड असिसटेंट, केबिन क्रू की जॉब पा सकते हैं।



Diploma in Beauty Care


ये डिप्लोमा कोर्स लड़कियो के बीच काफी लोकप्रिय है, इस डिप्लोमा कोर्स के माध्यम से लड़कियां ब्यूटीशियन के कौशल को निखार सकती हैं।


समय- 4 साल


जॉब- ये कोर्स करने के बाद लड़किया ब्यूटीशियन बन सकती है और खुद का ब्यूटी पार्लर भी खोल कर सकती हैं।



Diploma in Cosmetology


इस कोर्स के माध्यम से छात्र कॉस्मेटिक के विस्तार को गहराई से समझ सकते हैं।


समय – 5 महीने


जॉब- इस कोर्स को करने के बाद स्टूडेंट्स, ब्यूटीशियन बन सकते हैं या फिर खुद का ब्यूटी पार्लर खोल सकते है। इसके अलावा वे किसी कॉस्मेटिक बनाने वाली कंपनी में सेल्समेन की नौकरी भी कर सकते हैं।


[ads1]

Diploma in Cyber Security


इस कोर्स के माध्यम से छात्र ऐथिकल हैकिंग से संबंधित ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।


साल 1- साल


जॉब- इस कोर्स के बाद छात्र सरकारी और प्राइवेट एजेंसी में एथिकल हैकर बन सकते हैं साथ ही अलग तरह की मिट्टी ले सकते हैं।



Diploma in Commercial Practice


इस कोर्स के माध्यम से छात्र को किसी वस्तु को बेचने का अनुभव होगा साथ ही वस्तु का प्रमोशन भी कर सकेंगे।


समय- 3 साल


जॉब- इस डिप्लोमा की मद्द से छात्र कॉर्मशियल एकाउंट मैनेजर, कॉर्मशियल एक्सीक्यूटिव, बिजनेस जूनियर हेड, ब्रांच जूनियर असिस्टेंट मैनेजर की जॉब पा सकते हैं।



Diploma in Dental Mechanics


समय- 2 साल


जॉब- डेंटिस्ट, असिसटेंट डेंटल सर्जन, डेंटल टेक्नीशियन, रिसर्च असिसटेंट



Diploma in Plastics Technology


साल- 3 साल


जॉब- प्लास्टिक पार्ट मोल्ड डिजायन इंजीनियर, प्रोजक्ट इंजीनियर, इंडस्ट्रियल इंजीनियर, प्रोडक्ट डिजायन इंजीनियर



Diploma in Ceramic Technology


समय- 3 साल


जॉब- इस कोर्स के बाद छात्र या तो सिरेमिक टेक्नोलॉजी में में पार्श्व प्रवेश कर सकते हैं या फिर सिरेमिक इंजीनियर बन सकते हैं।



Diploma in Engineering


समय- 3 साल


जॉब- इस कोर्स के बाद बीटेक में प्रवेश ले सकते हैं या फिर इससे संबंधित क्षेत्र में जॉब पा सकते हैं।



Diploma in Fire Safety Engineering


समय- 6 महीने


जॉब- फायर सेफ्टी ऑफिसर



Diploma in Fashion Technology


समय- 3 साल


जॉब- फैशन डिजायनर, कॉस्ट्यूम डिजायनर, टेक्सटाइल डिजायनर, ब्राइडल वियर डिजायनर, स्टायलिस्ट



डिप्लोमा इन इनजीनियरिंग कोर्सेस


10 वीं के बाद छात्र इंजीनियरिंग कोर्सेस में भी डिप्लोमा कर सकते हैं। लेकिन ये डिप्लोमा कोर्स छात्र तभी कर सकते हैं जब उनके पास क्लास 10th में गणित और विज्ञान हो।


वहीं इंजीनियरिंग प्रोग्राम में डिप्लोमा 3 साल का होता है। भारत में कई तरह के डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग कोर्सेस उपलब्ध हैं। जिनमें से कुछ इस तरह हैं।




  • डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन ईसी इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा ने आईसी इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा ने माइनिंग इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन टैक्सटाइल इंजीनियरिंग


डिप्लोमा कोर्स पूरा होने के बाद, छात्र प्रत्यक्ष रूप से बीटेक और बीई के 2nd ईयर में प्रवेश ले सकते हैं जिसे लेटरल एंट्री भी कहा जाता है।



ITI कोर्सेस


आईटीआई जिसका मतलब है, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इन्सटिट्यूट, इसमें छात्रों को इंडस्ट्रियल लेवल पर काम करने के लिए तैयार किया जाता है ताकि बच्चे अच्छी जॉब पा सकें। वहीं आईटीआई की खासियत यह है कि ये थ्योरी के मुकाबले प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर ज्यादा जोर देता है ताकि बच्चों को अच्छे से समझ में जाए।


आईटीआई प्रोग्राम 1-2 साल के होते हैं, कोर्स की समय अवधि कोर्स के नैचर पर निर्भर करती है , कुछ मुख्य आईटीआई प्रोग्राम इस प्रकार हैं –




  • आईटीआई इलैक्ट्रिशियन कोर्स

  • आईटीआई प्लमबर कोर्स

  • आईटीआई वेल्डर कोर्स

  • आईटीआई टर्नर कोर्स

  • आईटीआई मैकेनिक कोर्स

  • अन्य वोकेशनल कोर्सेस


आईटीआई, पॉलीटेक्निक कॉलेज और दूसरे एजूकेशनल इंस्टीट्यूट, जॉब दिलवाने कोर्सेस नौकरी उन्मुख व्यवसायिक पाठ्यक्रम के लिए जाने जाते हैं। ऐसे प्रोग्राम डिप्लोमा और सर्टिफिकेशन कोर्सेस भी होते हैं। उदाहरण के लिए-




  • डिप्लोमा इन हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग

  • पैरामेडिकल कोर्सेस

  • CERTIFICATE COURSES


ऊपर लिखे गए कोर्सेस के अलावा भी कई सर्टिफिकेशन कोर्सेस उपलब्ध है जिन्हें छात्र 10वीं क्लास के बाद कर सकता है। उदाहरण के लिए-




  • सर्टिफिकेट इन वेब डिजायनिंग

  • सर्टिफिकेट इन एथिकल हैकिंग

  • सर्टिफिकेट इन ग्राफिक डिजाइन

  • सर्टिफिकेट इन एप डेवलपमेंट


तो इस प्रकार छात्र अपनी रूचि का कोई एक कोर्स चुन कर अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकता है।


BCA course की पूरी जानकारी

शनिवार, 16 नवंबर 2019

अध्यात्म क्या है ?



आध्यात्म शब्द संस्कृत भाषा का है। जिन लोगों को संस्कृत भाषा नहीं भी आती है वो भी इस शब्द का प्रयोग करते हैं क्योंकि यह लगभग हर भारतीय भाषा में वर्णित है। अध्यात्म का व्यापक रूप से अर्थ है परमार्थ चिंतन, लेकिन इस शब्द के मूल में इसके दूसरे अर्थ भी देखना आवश्यक है। यह एक संस्कृत शब्द है। ग्रीक, लेटिन और फारसी की तरह ही संस्कृत भी पुरातन भाषा है। कई पुरातन भाषाओं की तरह ही संस्कृत भाषा में ज़्यादातर शब्द जड़ या मूल से लिए गए हैं।

अध्यात्म शब्द उपसर्ग ‘आधी’ और ‘आत्मा’ का समास है। ‘आत्मा’, आत्मन शब्द का संक्षिप्त रूप है, जो सांस लेने, आगे बढने आदि से लिया गया है। ‘आत्मन’ शब्द का अर्थ आत्मा से है जिसमें जीवन और संवेदना के सिद्धान्त, व्यक्तिगत आत्मा, उसमें रहने वाले अस्तित्व, स्वयं, अमूर्त व्यक्ति, शरीर, व्यक्ति या पूरे शरीर को एक ही और विपरीत भी मानते हुए अलग-अलग अंगों में ज्ञान, मन, जीवन के उच्च व्यक्तिगत सिद्धान्त, ब्राह्मण, अभ्यास, सूर्य, अग्नि, और एक पुत्र भी शामिल है।

अज्ञात परतत्व की खोज, परमात्मा की खोज, परमात्मा के अस्तित्व, उसके स्वरूप, गुण, स्वभाव, कार्यपद्धति, जीवात्मा की कल्पना, परमात्मा से उसका संबंध, इस भौतिक संसार की रचना में उसकी भूमिका, जन्म से पूर्व और उसके पश्चात की स्‍थिति के बारे में जिज्ञासा, जीवन-मरण चक्र और पुनर्जन्म की अवधारणा इत्यादि प्रश्नों पर चिंतन और चर्चाएं की गईं और उनके आधार पर अपनी-अपनी स्थापनाएं दी गईं। इन्हीं के आधार पर पुराणों और अन्य शास्त्रों में व्याख्‍याएं, कथाएं, सूत्र, सिद्धांत लिखे और गढ़े गए।


यह भी सही है कि नैतिकता, पवित्र जीवनमूल्य, नकारात्मक कार्यों और विचारों से बचना, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन को आघात पहुंचाने वाले कार्यों को पाप समझना, परोपकार, सत्य, न्याय, कर्तव्यनिष्ठा जैसे शाश्वत मूल्य सदैव अपने जीवन को प्रकाशित करते रहें, इसमें कभी किसी का विश्वास नहीं डिगना चाहिए। यही सच्चा अध्यात्म है।


अध्यात्म का अर्थ है अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना,मनना और दर्शन करना अर्थात अपने आप के बारे में जानना या आत्मप्रज्ञ होना |गीता के आठवें अध्याय में अपने स्वरुप अर्थात जीवात्मा को अध्यात्म कहा गया है | अध्यात्म क्या है


"परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते "


आत्मा परमात्मा का अंश है यह तो सर्विविदित है | जब इस सम्बन्ध में शंका या संशय,अविश्वास की स्थिति अधिक क्रियमान होती है तभी हमारी दूरी बढती जाती है और हम विभिन्न रूपों से अपने को सफल बनाने का निरर्थक प्रयास करते रहते हैं जिसका परिणाम नाकारात्मक ही होता है |


अध्यात्म की अनुभूति सभी प्राणियों में सामान रूप से निरंतर होती रहती है |


परमात्मा के असीम प्रेम की एक बूँद मानव में पायी जाती है जिसके कारण हम उनसे संयुक्त होते हैं किन्तु कुछ समय बाद इसका लोप हो जाता है और हम निराश हो जाते हैं,सांसारिक बन्धनों में आनंद ढूंढते ही रह जाते हैं परन्तु क्षणिक ही ख़ुशी पाते हैं |


जब हम क्षणिक संबंधों,क्षणिक वस्तुओं को अपना जान कर उससे आनंद मनाते हैं,जब की हर पल साथ रहने वाला शरीर भी हमें अपना ही गुलाम बना देता है | हमारी इन्द्रियां अपने आप से अलग कर देती है यह इतनी सूक्ष्मता से करती है - हमें महसूस भी नहीं होता की हमने यह काम किया है ?


जब हमें सत्य की समझ आती है तो जीवन का अंतिम पड़ाव आ जाता है व पश्चात्ताप के सिवाय कुछ हाथ नहीं लग पाता | ऐसी स्थिति का हमें पहले ही ज्ञान हो जाए तो शायद हम अपने जीवन में पूर्ण आनंद की अनुभूति के अधिकारी बन सकते हैं |हमारा इहलोक तथा परलोक भी सुधर सकता है |


अब प्रश्न उठता है की यह ज्ञान क्या हम अभी प्राप्त कर सकते हैं ? हाँ ! हम अभी जान सकते हैं की अंत समय में किसकी स्मृति होगी, हमारा भाव क्या होगा ? हम फिर अपने भाव में अपेक्षित सुधार कर सकेंगे | गीता के आठवें अध्याय श्लोक संख्या आठ में भी बताया गया है


यंयंवापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् |


तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भाव भावितः ||


अर्थात-"हे कुंतीपुत्र अर्जुन ! यह मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, उस-उस को ही प्राप्त होता है ;क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहता है |"


एक संत ने इसे बताते हुए कहा था की सभी अपनी अपनी आखें बंद कर यह स्मरण करें की सुबह अपनी आखें खोलने से पहले हमारी जो चेतना सर्वप्रथम जगती है उस क्षण हमें किसका स्मरण होता है ? बस उसी का स्मरण अंत समय में भी होगा | अगर किसी को भगवान् के अतिरिक्त किसी अन्य चीज़ का स्मरण होता है तो अभी से वे अपने को सुधार लें और निश्चित कर लें की हमारी आँखें खुलने से पहले हम अपने चेतन मन में भगवान् का ही स्मरण करेंगे |बस हमारा काम बन जाएगा नहीं तो हम जीती बाज़ी भी हार जायेंगे |


कदाचित अगर किसी की बीमारी के कारण या अन्य कारण से बेहोशी की अवस्था में मृत्यु हो जाती है तो दीनबंधु भगवान् उसके नित्य प्रति किये गए इस छोटे से प्रयास को ध्यान में रखकर उन्हें स्मरण करेंगे और उनका उद्धार हो जाएगा क्योंकि परमात्मा परम दयालु हैं जो हमारे छोटे से छोटे प्रयास से द्रवीभूत हो जाते हैं |


अध्यात्म क्या है आध्यात्म का अर्थ व्यक्तिगत या खुद का स्वभाव होता है, जो हर शरीर में सर्वोच्च भाव के रूप में ब्राह्मण की तरह रहता है। इसका अर्थ, जो अस्तित्व के स्वयं के रूप में शरीर में निवास करती है, आत्मा, वह शरीर को उसके रहने के लिए अधिकृत करती है और जो परम विश्लेषण का उच्च स्तर है। अध्यात्म भी ज्ञान अर्जित करता है जो आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता और आखिरकार मोक्ष या मुक्ति तक ले जाता है। यह ज्ञान अध्यात्म से संबन्धित है, जो स्वयं से तो संबन्धित है ही साथ ही स्वयं और दूसरी आत्मा के बीच के संबंध से भी संबन्धित है। अध्यात्म, आत्मा के ज्ञान से संबन्धित है, और जिस रास्ते पर चलकर ये प्राप्त हो सकता है, वह ज्ञान अनंत है। अध्यात्म का अर्थ उस ब्राह्मण के बारे में बताना है, जो परम सच्चाई है। शास्त्रों के पढ़ने और किसी के आत्मा के स्वभाव को समझना ही अध्यात्म कहलता है। इसका अर्थ भगवान के सामने आत्म समर्पण करना और अपने अहंकार को तिलांजलि देना है।

गुरुवार, 14 नवंबर 2019

बाल दिवस


Children's Day बाल दिवस हर साल पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिवस पर 14 नवंबर को मनाया जाता है. बाल दिवस उत्सव का आयोजन देश के भविष्य के निर्माण में बच्चों के महत्व को बताता है.



जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिवस पर क्यों मनाया जाता है बाल दिवस? Children's Day


बाल दिवस (Children's Day) देश भर में हर साल 14 नवंबर को मनाया जाता है. 14 नवंबर (14 November) को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) की जंयती होती है. बाल दिवस (Children's Day) के दिन कई स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है और बच्चों के लिए खेल कूद का आयोजन होता है. कई स्कूलों में बाल दिवस (Bal Diwas) के दिन बच्चों को पिकनिक पर ले जाया जाता है.


बाल दिवस के दिन बच्चों को गिफ्ट्स दिए जाते हैं. बाल दिवस उत्सव का आयोजन देश के भविष्य के निर्माण में बच्चों के महत्व को बताता है. साथ ही इस दिन बाल अधिकारों के प्रति लोगों को जागरुक किया जाता है. ये बेहद जरूरी है कि बच्चों को सही शिक्षा, पोषण, संस्कार मिले क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य है.



14 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है बाल दिवस Children's Day


यूएन ने 20 नवंबर 1954 को बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी और भारत में पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन से पहले 20 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता था. लेकिन 27 मई 1964 को पंडित जवाहर लाल नेहरु के निधन के बाद बच्चों के प्रति उनके प्यार को देखते हुए सर्वसम्मति से यह फैसला हुआ कि अब से हर साल 14 नवंबर को चाचा नेहरू के जन्मदिवस पर बाल दिवस मनाया जाएगा. जिसके बाद से ही हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाने लगा.



अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है बाल दिवस


अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस (International Children's day) 20 नवंबर को मनाया जाता है.1959 में संयुक्त राष्ट्र की आम सभा (जनरल असेंबली) ने बाल अधिकारों की घोषणा की थी. बाल अधिकारों को चार अलग-अलग भांगों में बांटा गया है - जीवन जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और विकास का अधिकार. हालांकि कई देश ऐसे हैं जहां 20 नवंबर की जगह अलग-अलग दिन बाल दिवस मनाया जाता है.


कई देशों में 1 जून को बाल दिवस मनाया जाता है. वहीं, चीन में 4 अप्रैल, पाकिस्तान में 1 जुलाई, अमेरिका में जून के दूसरे रविवार को बाल दिवस मनाया जाता है. इसके अलावा ब्रिटेन में 30 अगस्त, जापान में 5 मई, पश्चिमी जर्मनी में 20 सितम्बर को बाल दिवस मनाते हैं.



ऐसा था नेहरूजी का बाल प्रेम


जब पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे और तीन मूर्ति भवन उनका सरकारी निवास था। एक दिन तीन मूर्ति भवन के बगीचे में लगे पेड़-पौधों के बीच से गुजरते हुए घुमावदार रास्ते पर नेहरू जी टहल रहे थे और पौधों पर छाई बहार देखकर खुशी से निहाल हो ही रहे थे तभी उन्हें एक छोटे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।


नेहरू जी ने आसपास देखा तो उन्हें पेड़ों के बीच एक-दो माह का बच्चा दिखाई दिया जो दहाड़ मारकर रो रहा था। नेहरूजी ने मन ही मन सोचा- इसकी मां कहां होगी? उन्होंने इधर-उधर देखा। वह कहीं भी नजर नहीं आ रही थी।


चाचा जी ने सोचा शायद वह बगीचे में ही कहीं माली के साथ काम कर रही होगी। नेहरूजी यह सोच ही रहे थे कि बच्चे ने रोना तेज कर दिया। इस पर उन्होंने उस बच्चे की मां की भूमिका निभाने का मन बना लिया।

नेहरूजी ने बच्चे को उठाकर अपनी बांहों में लेकर उसे थपकियां दीं,तो बच्चा चुप हो गया और मुस्कुराने लगा। बच्चे को मुस्कुराते देख चाचा जी खुश हो गए और बच्चे के साथ खेलने लगे।

जब बच्चे की मां दौड़ते वहां पहुंची तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। उसका बच्चा नेहरूजी की गोद में मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।

ऐसे ही एक बार जब पंडित नेहरू जी तमिलनाडु के दौरे पर गए, तब जिस सड़क से वे गुजर रहे थे वहां वे लोग साइकिलों पर खड़े होकर तो कहीं दीवारों पर चढ़कर नेताजी को निहार रहे थे।

प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए हर आदमी इतना उत्सुक था कि जिसे जहां समझ आया वहां खड़े होकर नेहरू को निहारने लगा। इस भीड़भरे इलाके में नेहरूजी ने देखा कि दूर खड़ा एक गुब्बारे वाला पंजों के बल खड़ा डगमगा रहा था। ऐसा लग रहा था कि उसके हाथों के तरह-तरह के रंगबिरंगी गुब्बारे मानो पंडितजी को देखने के लिए डोल रहे हो।


नेहरूजी की गाड़ी जब गुब्बारे वाले तक पहुंची तो गाड़ी से उतर कर वे गुब्बारे खरीदने के लिए आगे बढ़े तो गुब्बारे वाला हक्का-बक्का-सा रह गया।

नेहरूजी ने अपने तमिल जानने वाले सचिव से कहकर सारे गुब्बारे खरीदवाएं और वहां उपस्थित सारे बच्चों को वे गुब्बारे बंटवा दिए। ऐसे प्यारे चाचा नेहरू को बच्चों के प्रति बहुत लगाव था। नेहरूजी के मन में बच्चों के प्रति विशेष प्रेम और सहानुभूति देखकर लोग उन्हें चाचा नेहरू के नाम से संबोधित करने लगे और जैसे-जैसे गुब्बारे बच्चों के हाथों तक पहुंचे, बच्चों ने चाचा नेहरू-चाचा नेहरू की तेज आवाज से वहां का वातावरण उल्लासित कर दिया। तभी से वे चाचा नेहरू के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

जवाहरलाल नेहरु के अनमोल विचार


1. एक नेता या कर्मठ व्यक्ति संकट के समय लगभग हमेशा ही अवचेतन रूप में कार्य करता है और फिर अपने किये गए कार्यों के लिए तर्क सोचता है.


2. एक ऐसा क्षण जो इतिहास में बहुत ही कम आता है , जब हम पुराने के छोड़ नए की तरफ जाते हैं , जब एक युग का अंत होता है , और जब वर्षों से शोषित एक देश की आत्मा , अपनी बात कह सकती है.


3. एक सिद्धांत को वास्तविकता के साथ संतुलित किया जाना चाहिए.


4. जब तक मैं स्वयं में आश्वस्त हूँ की किया गया काम सही काम है तब तक मुझे संतुष्टि रहती है.


5. कार्य के प्रभावी होने के लिए उसे स्पष्ठ लक्ष्य की तरफ निर्देशित किया जाना चाहिए.


6. नागरिकता देश की सेवा में निहित है.


7. संकट और गतिरोध जब वे होते हैं तो कम से कम उनका एक फायदा होता है कि वे हमें सोचने पर मजबूर करते हैं.


8. संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है.


9. लोकतंत्र और समाजवाद लक्ष्य पाने के साधन है, स्वयम में लक्ष्य नहीं.


10. लोकतंत्र अच्छा है . मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि बाकी व्यवस्थाएं और बुरी हैं.


11. संकट के समय हर छोटी चीज मायने रखती है.


12. तथ्य तथ्य हैं और आपके नापसंद करने से गायब नहीं हो जायेंगे.


13. असफलता तभी आती है जब हम अपने आदर्श, उद्देश्य, और सिद्धांत भूल जाते हैं.


14.महान कार्य और छोटे लोग साथ नहीं चल सकते.


15.मैं पूर्व और पश्चिम का अनूठा मिश्रण बन गया हूँ, हर जगह बेमेल सा , घर पर कहें का नही. Children's Day

बुधवार, 13 नवंबर 2019

अकल दाढ़ दर्द के लक्षण, कारण, इलाज



अकल दाढ का दर्द


अकल दाढ़ दर्द के लक्षण-कारण और इलाज: अकल दाढ उन दाँतों के नाम हैं जो आखिर में निकलते हैं। अधिकतर लोगों को चार अकल दाढ होते हैं - मुँह के हर कोने में एक - ये ज्यादातर जवानी में निकलते हैं।


हम में से बहुत से लोंगो के लिये 17 से 21 की उम्र में निकलने वाले 4 अक्‍ल के दांतों का आना काफी ज्‍यादा दर्द भरा अनुभव होता है। कई लोगों में ये 25 के बाद भी आती है। ये दांत काफी मजबूत होते हैं जो कि काफी देर के बाद आते हैं। हमारे मुंह में 28 दांत पहले से ही निकल चुके होते हैं और वह पूरे मुंह भर में अपनी जगह बना चुके होते हैं, लेकिन अक्‍ल के दांत काफी लेट से आते हैं, जिसके कारण उन्‍हें फैलने की जगह नहीं मिलती जिसके चलते आपको काफी दर्द होता है। इसके साथ ही मसूड़ों पर भी दवाब बनता है। इस वजह से दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन और असहजता की शिकायत हो जाती है।


यह संभव है कि अकल दाढ जबड़ों की हड्डी में अटक जाएं, या फिर निकलें ही नहीं। ऐसा होने पर बाकी दाँत ठसने या खिसकने लग सकते हैं, या नजदीकी दाँतों में सड़न या संक्रमण हो सकता है या मसूड़ों में बीमारी फैल सकती है। जबड़ों में अकल दाढ के अटकने का कारण यह हो सकता है कि वे किसी असाधारण अवस्था में हों, जैसे कि सपाट, जिसकी वजह से वो सामान्य रूप से बाहर नहीं निकल सकते। अधिकतर लोगों को अटके हुए अकल दाढ को निकलवाने की सलाह दी जाती है। दाँत की अवस्था के अनुसार, तीसरे दाढ (अकल दाढ) को आपके दाँत के डॉक्टर के दफ्तर में, किसी बाहरी रोगी क्लिनिक में या अस्पताल में भर्ती करके निकाला जा सकता है। सामान्यतया एक व्यस्क की अकल दाढ निकलने के बाद उसके दाँतों की संख्या ३२ हो जाती है |और इसके निकलने में मीठा दर्द भी होता है जो आपको कोई काम करने नही देगा ।



दर्द और सूजन


जब अक़्ल दाढ़ का मामला हो, तो बारबार होने वाले दर्द और सूजन को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे में दर्द कम करने की दवा या पेनकिलर लेने के बजाय डेंटिस्ट के पास जाएँ। दर्द की मदद से शरीर समस्या की तरफ़ इशारा करता है। पेनकिलर दर्द को सिर्फ़ दबाने का काम करती हैं, जिससे असली समस्या सुलझने के बजाय बढ़ जाती है।



टेढ़े दाँत


कई लोगों के जबड़ों में अक़्ल दाढ़ के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती, जिसकी वजह से ये दाँत टेढ़े निकलते हैं। ऐसी स्थिति में डेंटिस्ट इन दाँतो को निकालने की सलाह देते हैं। इन दाँतों को निकलवाने में देरी नहीं करनी चाहिए, क्यूँकि उम्र के साथ इन्हें निकालना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्यूँकि दाँत के आसपास की हड्डी उम्र के साथ सख़्त हो जाती है और आसानी से दाँत को निकलने नहीं देती। उम्र जितनी कम हो घाव उतनी ही जल्दी भर भी जाता है और परेशानी कम होती है।


अकल दाढ़ दर्द के लक्षण-कारण और इलाज

मसूड़े का दाँत को ढकना


पेरिकोरोनाइटिस एक ऐसी समस्या है, जिसमें मसूड़े आधी निकली हुई अक़्ल दाढ़ के ऊपर रह जाते हैं। इसकी वजह से मसूड़े और दाँत के बीच की जगह में खाना इकट्ठा हो जाता है, जिससे उस जगह पे इन्फ़ेक्शन, दर्द, सूजन के अलावा मुँह खोलने में तकलीफ़ होती हैं। खाना खाने पर ये दर्द बढ़ जाता है।
अगर पेरिकोरोनाइटिस हो जाए, तो डेंटिस्ट उस जगह को डिसिन्फ़ेक्टंट से साफ़ करते हैं, और दर्द कम करने के लिए उचित दवा देते हैं। अगर ये तकलीफ़ बारबार होने लगे, तो इसका मतलब ये हो सकता है कि अक़्ल दाढ़ के निकलने के लिए जबड़ों में जगह नहीं है। ऐसे में इन्फ़ेक्शन को फैलने से बचाने के लिए इन दाँतों को जल्द से जल्द निकालना उचित होता है।


[ads1]

खाना फँसना


कई बार अक़्ल दाढ़ के साथ के दाँत की सीध में नहीं निकलते। इससे दोनो दाँतों के बीच में खाना फ़सने लगता है, और इनमे से एक या दोनो दाँत सड़ सकते हैं। अगर सड़न दाँत की नसों तक पहुँच जाए, तो दर्द शुरू हो जाता है।
अक़्ल दाढ़ के साथ वाला दाँत खाना चबाने के लिए बहुत ही ज़रूरी होता है। इस दाँत को बचाने के लिए सड़े दाँतों को समय से ठीक करना और कई बार अक़्ल दाढ़ को निकालना ज़रूरी होता है। इलाज में देरी होने से तकलीफ़ तो बढ़ती ही है, इलाज भी मुश्किल और खर्चीला हो जाता है।


अगर आपके डेंटिस्ट को लगता है कि आपकी अक़्ल दाढ़ के निकलने में कोई परेशानी नहीं होगी, तो इसे ना छेड़ना ही बेहतर है। पर अगर ऊपर लिखी कोई भी समस्या आपकी अक़्ल दाढ़ में होने लगे, तो तुरंत इलाज कराएँ। इस दाँत को ब्रश से साफ़ रखना और इसमें हो रही तकलीफ़ों को ख़ुद देख पाना बहुत मुश्किल है। इस विषय में जागरूकता और सही समय से किया इलाज ख़र्चे और परेशानी से बचाता है।



जब अक्ल दाढ़ का दर्द सताए तो अपनाएं ये घरेलू उपाय


1. लौंग


दांत के दर्द के लिए हममें से ज्यादातर लोग लौंग का इस्तेमाल करते हैं. अक्ल दाढ़ निकलने के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका anesthetic और analgesic गुण दर्द को शांत करने में मददगार होता है. इसके अलावा इसका एंटी-सेप्टिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी इंफेक्शन नहीं होने देता है. आप चाहें तो कुछ लौंग मुंह में रख सकते हैं या फिर उसके तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.



2. नमक


दांत दर्द में नमक का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है. ये मसूड़ों की जलन को कम करने में मददगार है. इसके अलावा नमक के इस्तेमाल से इंफेक्शन का खतरा भी कम हो जाता है.
दांत दर्द में नमक का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। दर्द को दूर करने के लिये पानी को हल्‍का गुनगुना करके उसमें नमक डाल लें और गरारा करें, और मुंह में भरकर सेंक दें। इससे दांतों का संक्रमण दूर हो जाएगा और आपको दर्द से निज़ात मिल जाएगा। सुबह ब्रश करते समय भी आप नमक वाले पानी का ही इस्‍तेमाल करें।



3. लहसुन


लहसुन में antioxidant, antibiotic, anti-inflammatory और दूसरे कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो अक्ल दाढ़ के दर्द को कम करने में मदद करते हैं. ये मुंह के बैक्टीरिया को भी पनपने नहीं देता.
लहसुन को अगर छीलकर उसकी कलियों को चबाया जाएं, तो दांतों के दर्द में आराम मिलता है। दिन में दो बार दो-दो कलियों को चबाने से जल्‍दी ही दर्द के दांतों से छुटकारा मिल जाता है।



4. प्याज


प्याज में एंटी-सेप्ट‍िक, एंटी-बैक्टीरियल और दूसरे कई गुण पाए जाते हैं. इसके इस्तेमाल से दांत दर्द में आराम मिलता है. ये मसूड़ों को भी इंफेक्शन से सुरक्षित रखने में मददगार है.
इसे अगर कच्‍चा खाया जाए तो दांतों के दर्द में आराम मिलता है। अगर आपके दांतों में दर्द इतना ज्‍यादा है कि आप इसे कच्‍चा नहीं खा सकते हैं तो इसका रस निकालकर दांतों में निकाल लें।



5. अमरूद की पत्त‍ियां


अमरूद की पत्तियां दांत दर्द में दवा की तरह काम करती हैं. अमरूद की पत्त‍ियों में anti-inflammatory और antimicrobial गुण भी पाया जाता है जो दांत दर्द में फायदेमंद है.



6. हींग:


हींग में कई आयुर्वेदिक गुणों का होते हैं। इसमें कई anti-inflammatory, एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो दांतों से दर्द में राहत प्रदान करते है। इसके इस्‍तेमाल के लिए आप हींग को बहुत कम मात्रा में लें और उसे दर्द वाली जगह पर लगा लें या इसे एक चौथाई पानी में घोल बनाकर माउथवॉश की तरह इस्‍तेमाल करें।


Impacted wisdom teeth are third molars at the back of the mouth that don't have enough room to emerge or develop normally.Wisdom teeth also can be impacted -- they are enclosed within the soft tissue and/or the jawbone or only partially break through or erupt through the gum. Partial eruption of the wisdom teeth allows an opening for bacteria to enter around the tooth and cause an infection, which results in pain, swelling, jaw stiffness, and general illness. Partially erupted teeth are also more prone to tooth decay and gum diseas,e because their hard-to-reach location and awkward positioning makes brushing and flossing difficult.


होंठ काले पड़ने के कारण और इलाज

Like Us

लोकप्रिय पोस्ट