सोमवार, 30 सितंबर 2019

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का जीवन परिचय |







Mahatma Gandhi Biography in Hindi

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय (Mahatma Gandhi Biography in Hindi)


महात्मा गांधी भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं,लेकिन उससे भी पहले पूरा देश उनको जिस सम्मान की दृष्टि से देखता हैं,वैसा सम्मान ना कभी किसी और व्यक्तित्व को मिला हैं ना आने वाली कई शताब्दियों तक मिलने की सम्भावना हैं. वास्तव में “राष्ट्रपिता” के सम्मान से सुशोभित महात्मा गाँधी देश की अमूल्य धरोहर में से एक हैं,क्योंकि उनका सम्मान और उनके विचारों का अनुगमन ना केवल भारतीय करते हैं बल्कि भारत के बाहर भी बहुत बड़ी संख्या में लोग गांधीजी के विचारों और कार्यों को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं.

महात्मा गांधी: जन्म और परिवार (Mahatma Gandhi Birth and Family Details)


 











































पूरा नाममोहनदास करमचंद गांधी
जन्म दिनांक2 अक्तुंबर 1869
जन्मस्थानपोरबंदर (गुजरात)
पिता का नामकरमचंद
माता का नामपुतली बाई
शिक्षा1887 में मॅट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण। 1891 में इग्लंड में बॅरिस्टर बनकर
वो भारत लोटें।
विवाह – Wifeकस्तूरबा – Kasturba Gandhi
बच्चों के नामहरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
उपलब्धियांभारत के राष्ट्रपिता, भारत को आजाद दिलवाने में अहम योगदान,
सत्य और अहिंसा के प्रेरणा स्त्रोत,
भारत के स्वतंत्रा संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान भारत छोड़ो आंदोलन,
स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन स्वदेशी आंदोलन आदि।
महत्वपूर्ण कार्यसत्या और अहिंसा का महत्व बताकर इसको लोगों तक पहुंचाया,
छुआ-छूत जैसी बुराइयों को दूर किया

 

उस समय के चलन के अनुसार गांधी जी के पिता ने भी चार विवाह किए हुए थे.पेशे से दीवान करमचंद स्वयं भी नहीं जानते थे कि जब उनकी चौथी पत्नी अपनी सबसे छोटी संतान को जन्म देगी तो वह पुत्र भारत की स्वतंत्रता का प्रमुख पात्र बनेगा और इतिहास के पन्नों में स्वयं के साथ पूरे परिवार का नाम दर्ज करवाएगा.

गांधीजी की माताजी पुतलीबाई ने अपना सम्पूर्ण जीवन धार्मिक कार्यों में ही व्यतीत किया, उन्होंने कभी भौतिक जीवन में वस्तुओं को महत्व नहीं दिया. उनका ज्यादातर समय मंदिर में या घरेलू कार्यों में ही बीतता था.
वास्तव में वो परिवार को समर्पित आध्यात्मिक महिला थी, बीमार की सेवा करना,व्रत-उपवास करना जैसे काम उनके दैनिक जीवन में शामिल थे. इस तरह गांधीजी की परवरिश ऐसे माहौल में हुयी जहां पर वैष्णव मयी माहौल और जैन धर्म के मॉरल्स थे,इसी कारण वो शाकाहारी भोजन,अहिंसा,व्रत-उपवास की जीवन-शैली में विशवास करते थे,जिससे मन को शुद्ध किया जा सके.

महात्मा गांधी: प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा (Mahatma Gandhi: Early life and Education)


पोरबंदर में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण मोहनदास ने अपनी प्राथमिक शिक्षा मुश्किल परिस्थितियों में पूरी की थी. उन्होंने मिट्टी में उंगलियों से उकेर कर वर्णमाला सीखी थी. बाद में किस्मत से उनके पिता को राजकोट में दीवानी मिल गई, जिससे उनकी समस्याएं काफी हद तक कम हो गई.

मोहनदास ने अपने स्कूल के दिनों में काफी इनाम जीते,उनके शिक्षा सम्बन्धित उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वो इंग्लिश में अच्छे थे, गणित में ठीक थे लेकिन जियोग्राफी में कमजोर थे, उनकी हैण्ड राइटिंग भी कुछ विशेष अच्छी नहीं थी.

1887 में गांधीजी ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ बॉम्बे से मेट्रिक का एग्जाम पास किया और भावनगर का सामलदास कॉलेज जॉइन किया, जहां पर उन्होंने अपनी मातृभाषा गुजरती को छोडकर इंग्लिश सीखी,इसके कारण उन्हें लेक्चर समझने में परेशानी भी हुई.

इसी दौरान उनका परिवार उनके भविष्य को लेकर बहुत चिंतित था,क्योंकि वो डॉक्टर बनना चाहते थे,लेकिन वैष्णव परिवार से होने के कारण वो डॉक्टर का काम नहीं कर सकते थे, इसलिए उनके परिवार वालों को लगा की उन्हें अपने परिवार की परम्परा को निभाते हुए गुजरात के किसी हाई-ऑफिस में अधिकारी के पद पर लगना होगा, इसके लिए उन्हें बेरिस्टर बनना होगा. और उस समय मोहनदास भी सामलदास कॉलेज में खुश नहीं थे, वो ये सुनकर बहुत खुश हो गये. उस समय की उनकी युवावस्था ने भी उन्हें इंग्लैंड के कई सपने दिखाए, एक भूमि जहां पर बहुत से फिलोसोफर और पोएट्स होंगे, वो सिविलाइजेशन का केंद्र होगा. वैसे उनके पिता ने उनके लिए बहुत कम सम्पति और पैसे छोड़े थे, और उनकी माँ भी उन्हें विदेश भेजने से डर रही थी,लेकिन गांधीजी अपने निर्णय पर अडिग थे कि वो इंग्लैंड जायेंगे. उनके भाई ने आवश्यक पैसों का इंतजाम किया, और उन्होंने अपनी माँ को ये कहकर मनाया कि वो घर से दूर रहकर भी कभी शराब को हाथ नहीं लगायेंगे, किसी पर-स्त्री को नहीं देखेंगे, या मीट नहीं खायेंगे. हालांकि मोहनदास ने इस राह में आने वाली आखिरी बाधा मतलब शर्त को मानने से इनकार कर दिया था जिसके अनुसार वो समुन्द्र की यात्रा नहीं कर सकते थे और इस तरह सितम्बर 1888 को वो रवाना हो गए. वहाँ पर पहुचने के 10 दिनों बाद उन्होंने लंदन लॉ कॉलेज में से एक “इनर टेम्पल” को जॉइन कर लिया. मदन मोहन मालवीय के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े

गांधीजी का विवाह (Mahatama Gandhi’s Marriage details)


13 वर्ष में उनका विवाह हो गया था,इस कारण उन्होंने एक साल के लिए स्कूल छोड़ दिया था. गांधी का विवाह कस्तूरबा मकनजी से हुआ था. इनकी पत्नी एक व्यापारी की पुत्री थी.

गांधीजी का साउथ अफ्रीका का सफर (Gandhi in South Africa)


कुछ समय तक भारत में एक लॉयर के रूप में संघर्ष करने के बाद साउथ अफ्रीका में इन्हे लीगल सर्विस का एक साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला था इस कारण अप्रैल 1893 में वो साउथ अफ़्रीकन स्टेट ऑफ़ नेटल के डरबन के लिए रवाना हो गए.
वहाँ उन्हें रंगभेद का सामना करना पडा,डरबन के कोर्ट रूम में उन्हें अपनी पगड़ी हटाने को कहा गया,जिससे उन्होंने मना कर दिया और उन्होंने कोर्ट रूम छोड़ दिया. नेटल एडवरटाइजर ने उनका प्रिंट (शायद कोई अख़बार में) में मजाक बनाया और लिखा “एन अनवेलकम विजिटर”.
7 जून 1893 को ट्रेन ट्रिप के दौरान उनके जीवन में एक घटना घटी जिसने उनकी जिन्दगी बदलकर रख दी. वो प्रेटोरिया जा रहे थे, तभी एक अंग्रेज ने उनके फर्स्ट क्लास रेलवे कम्पार्टमेंट में बैठने पर आपत्ति की, जबकि उनके पास टिकट था, उन्होंने ट्रेन से उतरने से मना कर दिया इसलिए उन्हें पिटरमार्टिजबर्ग (Pietermaritzburg) स्टेशन पर ट्रेन से नीचे फैंक दिया गया. उनका यह अपमान उन्हें अंदर तक प्रभावित कर गया और उन्होंने खुदको इस रंगभेद के विरुद्ध लड़ने के लिए तैयार किया. उन्होंने उस रात ये प्रतिज्ञा की वो इस समस्या को जड़ से समाप्त कर देंगे. इस तरह उस रात एक सामान्य आदमी से महानायक गांधी का जन्म हुआ. गांधी ने रंगभेद से लड़ने के लिये ही 1894 में नेटल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की. एक साल के कॉन्ट्रैक्ट के बाद उन्होंने जब भारत लौटने की तैयारी शुरू की, उससे पहले नेटल लेजिसलेटिव असेम्बली ने भारतीयों को वोट देने से वंचित कर दीया. उनके साथियों ने भी उन्हें लेजिस्लेशन के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए आश्वस्त किया, इस तरह गांधीजि ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक इस मुद्दे को उठाया.

कुछ समय तक भारत में रहने के बाद गांधीजी अपने पत्नी और बच्चों के साथ साउथ अफ्रीका लौट गए, वहाँ उन्होंने लीगल प्रैक्टिस की. बोअर वॉर के दौरान उन्होंने साउथअफ्रीका में ब्रिटिश सरकार की मदद की थी,उनका मत था की यदि भारतीय ब्रिटिश एम्पायर में अपने मूलभूत नागरिक अधिकार चाहते हैं तो उन्हें अपने कर्तव्यों को भी पूरा करना होगा. सरोजिनी नायडू के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े
वास्तव में गांधीजी ने अपने जीवन में पहली बार साउथ अफ्रिका में ही नागरिक समानता के लिए रैली निकाली और अपने नॉन-वायलेंट प्रोटेस्ट को सत्याग्रह का नाम दिया, इस कारण वहाँ उन्हें कुछ समय के लिए जेल भी हुयी,उन्होंने कुछ परिस्थितयों में ब्रिटिश का सपोर्ट भी किया, बोएर वार (Boer War ) और ज़ुलु रिबेलियन(Zulu rebellion.) के लिए किए गए उनके प्रयासों के लिए ब्रिटिश सरकार ने उनकी अनुशंसा भी की.

सत्याग्रह,अहिंसात्मक और असहयोग आंदोलन (Satyagraha and Nonviolent Civil Disobedience)


1906 में गांधीजी ने अपने जीवन का पहला असहयोग आंदोलन किया था,जिसे उन्होंने सत्याग्रह का नाम दिया. ये असह्योग आंदोलन साउथ अफ्रीका के ट्रांसवाल गवर्नमेंट के भारतीयों पर लगाई जाने वाली पाबंदियों (जिनमे हिन्दू विवाह को नही मानना भी शामिल था) की प्रतिक्रिया में किया था. कई वर्षों तक ये संघर्ष चलने के बाद सरकार ने गाँधी के साथ कई भारतीयों को जेल में डाल दिया था. आखिर में दबाव के चलते साउथ अफ्रीका की सरकार ने गांधी और जनरल जेन क्रिश्चियन स्मट के मध्य हुए समझौते को स्वीकार कर लिया था जिसके अनुसार वहाँ पर हिन्दू विवाह को मान्यता भी मिली और भारतीयों के लिए पोल टैक्स को समाप्त किया गया. गांधीजी 1914 में जब भारत लौटे तब स्मट ने लिखा “संत ने हमारा साथ छोड़ दिया हैं,मैं हमेशा उनके लिए प्रार्थना करता हूँ”. इसके बाद विश्व युद्ध प्रथम के समय गांधीजी ने कुछ महीने लंदन में बिताये थे. लाला लाजपत राय के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े

महात्मा गाँधी का भारत की स्वतंत्रता के लिए योगदान (Mahatama Gandhi’s contributuion for Indian Freedom)


महात्मा गाँधी ने भारत के स्वतंत्रा के लिए बहुत संघर्ष किये। वह हमेशा शांति से आंदोलन करने पैर विश्वास करते थे। उन्होंने बहुत सारे आंदोलन किये जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को हिला कर रख दिया.

A. चम्पारण और खेडा आंदोलन


1918 में गांधीजी ने ब्रिटिश लैंड लॉर्ड्स के खिलाफ चम्पारण आंदोलन का नेतृत्व किया था. उस समय अंग्रेजों द्वारा नील की खेती के संबंध में किसानों पर जो रुल्स लगाए जा रहे थे उससे व्यथित होकर आखिर में इन किसानों ने गांधीजी से सहायता मांगी जिसका परिणाम अहिंसक आंदोलन के रूप में हुआ,जिसमें जीत गांधीजी की हुई.
1918 में खेडा में जब बाढ़ आई तब वहाँ के किसानों को टैक्स में छूट की सख्त आवश्यकता थी. उस समय भी गांधीजी ने अहिंसक आंदोलन से अंग्रेजों तक अपनी बात पहुचाई,इस आंदोलन में भी गांधीजी को बहुत बड़ा जन-समर्थन मिला और अंतत: मई 1918 में सरकार ने टैक्स की राशि में छूट दी.

B. भारत में गांधीजी का पहला असहयोग आंदोलन

1919 में भारत पर जब ब्रिटिश का शासन था तब गांधीजी राजनैतिक आंदोलन कर रहे थे, उस समय ही एक अंग्रेजो द्वारा एक्ट रोलेट एक्ट लाया गया था जिसके अनुसार बिना किसी सुनवाई के क्रांतिकारियों को सजा दी जा सके,ऐसा प्रावधान अंग्रेजों ने बनाया था,गांधीजी ने इसका पूरजोर विरोध किया. उन्होंने इसके खिलाफ सत्याग्रह और शान्तिपूर्वक आंदोलन किये.
इसी दौरान अमृतसर में जलियांवाला बाग़ हत्याकांड भी हुआ जिसमें ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल डायर ने सैकड़ो लोगों को गोलियों से भून दिया, गांधीजी इससे नाराज हो गए और उन्होंने वो मैडल लौटा दिए जो उन्होंने साउथ अफ्रीका में मिलट्री सर्विस के लिए जीते थे और उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों को वर्ल्ड वॉर में भाग लेने की अनिवार्यता का भी विरोध किया.
इस तरह गांधी इंडियन होम-रुल मूवमेंट का प्रमुख चेहरा बन गए,उन्होंने अंग्रेजों के सम्पूर्ण बहिष्कार का आह्वान किया, उन्होंने सरकारी अधिकारीयों को ब्रिटिश क्राउन के लिए काम बन्द करने के लिए प्रेरित किया,छात्रों को सरकारी स्कूलों में नहीं जाने के लिये,सैनिकों को अपना पद छोड़ने और नागरिकों को टैक्स ना भरने और ब्रिटिश सामान ना खरीदने के लिए भी प्रेरित किया. उन्होंने खुद भी ब्रिटिश द्वारा बनाये गए कपडे के स्थान पर चरखा चलाकर खादी का निर्माण करने पर ध्यान केन्द्रित किया. और यही चरखा जल्द ही भारतीय स्वतन्त्रता और स्वायत्तता का प्रतीक बन गया. गांधी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप की और होम-रूल के लिए अहिंसा और असहयोग आंदोलन की नीव रखी

ब्रिटिश सरकार ने 1922 में गांधीजी पर राजद्रोह के 3 मुकदमे लगाकर उनको अरैस्ट कर लिया और 6 वर्ष के कारवास में डाल दिया. गांधीजी को उनकी अपेंडिक्स की सर्जरी के बाद फरवरी 1924 में छोड़ा गया. जब वो स्वतन्त्र हुए तो उन्होंने देखा कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम एक दुसरे के खिलाफ खड़े हो चुके हैं. इसलिए उस साल उन्होंने 3 महीने के लिए उपवास किया, उसके बाद वो आगामी कुछ सालों तक राजनीति से दूर ही रहे.

C. खिलाफत आंदोलन


गांधीजी ने 1919 में मुस्लिमों के हितों के रक्षा की तरफ ध्यान दिया क्योंकि उन्हें लगा की कांग्रेस इस स्थिति में बहुत कमजोर हैं उस समय दुनिया भर में मुस्लिम खलीफा के विरुद्ध चले रहे संघर्ष के लिए खिलाफत आंदोलन शुरू किया गया था.
गांधीजी ने आल इंडिया मुस्लिम कांफ्रेंस में भाग लिया और इवेंट के मुख्य सदस्य बने. इस आंदोलन को मुस्लिमों का बहुत समर्थन मिला,और इस आंदोलन की सफलता ने उन्हें भारतीय राजनीती की मुख्यधारा में ना केवल स्थान दिया बल्कि कांग्रेस पार्टी में उनकी स्थिति और भी मजबूत हो गयी.

D. गाँधीजी और नमक सत्याग्रह


1930 में गांधी ने वापिस सक्रिय राजनीति में पदार्पण किया, और उन्होंने ब्रिटिश सरकार का नमक आंदोलन का विद्रोह किया,इस एक्ट के अनुसार भारतीय ना नमक बना सकते थे ना बेच सकते थे. और नमक पर कर भी लगा दिया गया था,जिसके कारण गरीब भारतीयों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था. गांधीजी ने इसका विरोध करने के लिए एक नये तरह का सत्याग्रह किया जिसमें वो 390 किलोमीटर/240 मील तक चलकर अरेबियन सागर तक गये, वहाँ पर उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से नमक इकठ्ठा किया. इस मार्च से एक दिन पहले उन्होंने लार्ड इरविन को लिखा था “ मेरा उद्देश्य सिर्फ एक हैं कि मैं अहिंसात्मक तरीके से ब्रिटिश सरकार को ये महसूस करवाऊ कि वो भारतीयों के साथ कितना गलत कर रहे हैं”. 12 मार्च के दिन गांधीजी ने एक धोती और शाल पहनकर एक लकड़ी के सहारे साबरमती से ये मार्च को शुरू किया था जिसके 24 दिन बाद वो कोस्टल टाउन दांडी पहुंचे,और वहाँ उन्होंने वाष्पीकृत होने वाले समुंद्री जल से नमक बनाकर अंग्रेजों के बनाए नियम को तोडा. इस तरह इस नमक यात्रा से पूरे देश में क्रान्ति की लहर दौड़ पड़ी, लगभग 60,000 भारतीयों को साल्ट एक्ट तोड़ने के जुर्म में जेल में डाला गया,जिनमे गांधीजी खुद भी शामिल थे. वो इसके कारण भारत में ही नहीं दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गयें और 1930 में ही टाइम मैगजीन ने उन्हें मैन ऑफ़ दी ईयर का ख़िताब दिया. जनवरी 1931 में उन्हे जेल से छोड़ा गया और इसके भी 2 महीने बाद उन्होंने लार्ड इरविन से समझौता किया और नमक सत्याग्रह समाप्त किया. इस समझौते के अनुसार हजारों राजनीतिक बंदियों को रिहा किया गया, इसके साथ ही ये उम्मीद भी जगी की स्वराज्य के लिए ये सत्याग्रह मील का पत्थर साबित होगा. गांधीजी ने 1931 में लन्दन में आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में इंडियन नेशनल कांग्रेस के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया,हालाकिं ये कांफ्रेंस निर्थक सिद्ध हुयी,इसका उद्देश्य भारतीय संविधान में सुधार करना था.

D. भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)


गांधी जब लंदन से लौटे तो 1932 में उन्हें वापिस जेल में डाल दिया गया उस समय भारत में एक नया वायसराय लार्ड विल्लिंगटन आया था,इसके बाद जब गांधीजी बाहर आए तो 1934 में उन्होने इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप छोड़ दी,और उनकी जगह जवाहर लाल नेहरु ने सम्भाली,और इस तरह गांधीजी फिर से राजनीति से दूर हो गए,उन्होंने अपना ध्यान शिक्षा,गरीबी और अन्य समस्याएं जो भारत के रुरल एरिया को प्रभावित कर रही थी पर लगाया.

1942 में द्वितीय विश्व युद्ध छिड गया,ग्रेट ब्रिटेन जब इस युद्ध में उलझा था तब गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की. अगस्त 1942 में अंग्रेजो ने गांधी,उनकी पत्नी और इंडियन नेशनल कांग्रेस के अन्य नेताओं को गिफ्तार कर लिया, इन सबको पुणे के आगाखान पैलेस में रखा गया. 19 महिने के बाद गांधी को रिहा किया गया लेकिन उनकी पत्नी की मृत्यु जेल में हुई, फरवरी 1944 में उनकी पत्नी ने उनकी बांहों अंतिम श्वास ली.

1945 में जब ब्रिटिश के आम चुनाव में लेबर पार्टी ने चर्चिल के कंजर्वेटिव पार्टी को हरा दिया तब इंडियन नेशनल कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मोहम्मद अली जिन्ना ने देश की स्वतंत्रता की मुहीम को और तेज कर दिया.जिसमें गांधीजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,लेकिन वो विभाजन को नहीं रोक सके, और धर्म के आधार पर भारत दो टुकड़ों भारत-पाकिस्तान में बंट गया. इस दौरान हिन्दू-मुस्लिम दंगे भडक गए, गांधीजी ने दंगा प्रभावित क्षेत्रं का दौरा किया और इस खून-खराबे को रोकने के लिए शान्ति की अपील की और व्रत भी किया. कुछ हिन्दुओं को लग रहा था कि गांधीजी का झुकाव मुस्लिम वर्ग की तरफ ज्यादा हैं.
गांधीजी से जुड़े रोचक तथ्य (Unknown and Interesting facts about Gandhi Ji)

शुरू में उन्होंने वकालत में अपनी जगह बनाने की कोशिशे शुरू की, अपने पहले कोर्ट केस में वो बहुत नर्वस थे. और जब गवाह के सामने उनके बोलने का समय आया तो वो ब्लेंक हो गये,और वो कोर्ट से बाहर आ गए,इस कारण उन्होंने अपने क्लाइंट को उसकी लीगल फीस भी लौटा दी.
गांधीजी को अब तक 5 बार नोबेल प्राइज के लिए नामांकित किया जा चूका है,और कमिटी इस बात के लिए अफ़सोस जता चुकी हैं,कि उन्हें अभी तक अवार्ड नहीं मिला हैं गाँधी 4 कॉन्टिनेंट और 12 देशों में सिविल राईट मूवमेंट के लिए जिम्मेदार थे.
उनके लिए विश्व-व्यापी सम्मान और उनकी अनुयायियों की संख्या का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं कि महात्मा गांधी की शव यात्रा 8 किलोमीटर लम्बी थी. अपनी मृत्यु के एक दिन पहले वो कांग्रेस को समाप्त करने की सोच रहे थे.

महात्मा गांधी अपने पूरे जीवनकाल में प्रति दिन अठारह किलोमीटर पद यात्रा करते थे जो कि पूरी दुनिया के चक्कर 2 बार लगाने जितना हैं.महात्मा गांधी ने टॉलस्टॉय,आइन्स्टीन और हिटलर जैसी बड़ी हस्तियों से भी पत्र व्यवहार किया था.

स्टीव जॉब्स गांधीजी का बहुत बड़े फैन हैं,उनके राउंड ग्लासेस ना केवल गांधीजी के चश्मे के जैसे हैं बल्कि ये जॉब्स की गांधीजी को श्रद्धांजलि भी हैं.
गांधीजी के पास नकली दांत भी थे जिन्हें वो अपने कपड़ों में साथ लेकर घूमते थे.महत्मा गाँधी का पहला अंग्रेजी का टीचर आयरिश था,इसलिए वो आयरिश एसेंट में ही अंग्रेजी बोलते थे.
गांधीजी ने भारत में छूआछूत का विरोध किया उन्होंने शोषित वर्ग को हरिजन कहा जिसका मतलब होता हैं भगवान के पुत्र उन्होंने उनके साथ समान व्यवहार की सिफारिश की.
गांधीजी ने अपने जीवन के 5 वर्ष फ्रूट,नट्स और सीड्स पर बिताये थे,फिर गिरते स्वास्थ के कारण उन्होंने ये छोड़ दिया था.उन्होंने शुरू में दूध से बने खाद्य सामग्री को भी स्वीकार नहीं कीया था लेकिन बाद में खराब स्वास्थ के कारण बकरी का दूध पीना शुरू कर दिया था. वो कई बार अपनी बकरी को साथ लेकर यात्रा करते थे जिससे उन्हें ताजा दूध मिल सके और कोई उन्हें गाय या भैंस का दूध ना दे दे.
गवर्नमेंट ने न्यूट्रीशनिस्ट को ये बताने के लिए बुलाया गया था कि गांधीजी बिना भोजन के 21 दिन कैसे रह सकते हैं. गांधीजी जब भी उपवास करते थे तब उनकी फोटो नहीं ली जाती थी,क्योंकि इससे आम नागरिकों के उतेजित हो जाने का खतरा बना रहता था.
गांधी वास्तव में एक दार्शनिक एनार्किस्ट थे जो भारत में कोई भी सरकार स्थापित नहीं करना चाहते थे, उनका मानना था कि अगर हर कोई अहिंसा को अपनाता है तो देश स्व-शासित हो सकता हैं. जवाहर लाल नेहरू के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े
गांधीजी की हत्या (Gandhi’s Assassination)

30 जनवरी 1948 के दिन 78 वर्षीय गांधी जो कि भूख हडताल से टूट चुके थे, उन्होंने नई दिल्ली के बिडला हाउस से प्रेयर मीटिंग के लिए प्रस्थान किया. उस समय एक व्यक्ति नाथूराम गोडसे जो कि गांधीजी के विभाजन पर रवैये और मुस्लिमों के प्रति सहिष्णुता से नाराज थे,उन्होंने महात्मा गांधी की सेमी-आटोमेटिक पिस्तौल से पॉइंट ब्लेंक रेंज में 3 बार गोली चलाकर हत्या कर दी. अहिंसा के पुजारी का हिंसा के साथ अंत होना पूरे देश के लिए दुखद समाचार लेकर आया,गोडसे और उनके साथी को इस जुर्म में नवम्बर 1949 में फांसी पर चढाया गया,और उनके साथ मिले अन्य साथियों को आजीवन कारवास का दंड सुनाया गया.

महात्मा गाँधी के नाम पर देश–विदेश में धरोहर


ग्रेट ब्रिटेन जहां उन्होंने देश के स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी,उस देश ने उनके देहांत के 21 वर्षों के बाद उनके नाम पर स्टाम्प ज़ारी किया था.
भारत में उनके नाम पर 53 प्रमुख रोड हैं जबकि भारत के बाहर 48 रोड उनके नाम पर हैं.इसके आलावा कई छोटे बड़े मार्गों के नाम भी महात्मा गाँधी के नाम पर हैं.
भारत में गांधीजी की याद में बहुत कुछ बनाया गया हैं,जिनमे एअरपोर्ट से लेकर सडक तक के नाम शामिल है,कॉलेज,यूनिवर्सिटी, अस्पताल तो लगभग हर शहर में मिल सकते हैं. फिर भी यदि कोई भारत में गांधीजी के जीवन-दर्शन करने चाहे तो निम्न जगहों के भ्रमण अवश्य करने चाहिए
दिल्ली में यमुना नदी के किनारे जहां पर गांधीजी का अंतिम संस्कार किया गया था,वही राज घाट पर ब्लैक मार्बल से गांधीजी की समाधि बनाई गयी हैं.
अहमदाबाद में साबरमती के किनारे भी गांधी आश्रम या साबरमती आश्रम हैं,इस आश्रम का उद्देश्य महत्मा गाँधी का जीवन चित्रित करना और उनके कार्यों को दिखाना हैं.
1963 में गांधी के सहयोगी और तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने इस म्यूजियम की स्थापना की थी, यहाँ पर गांधीजी ने अपनी पत्नी के साथ 12 वर्ष बिताये थे. इसके अलावा पोरबंदर में उनके जन्मस्थान और घर को भी म्यूजियम बनाया गया हैं,वहाँ से कुछ दूरी पर ही कस्तूरबा के घर को भी स्मृति स्थल के रूप में संरक्षित किया गया.
गांधीजी के स्मृति में बचे उनकी कुछ वस्तुओं के अलावा वो कपडे भी है जो वें गोली लगने के समय पहने हुए थे,उन सबको गांधी म्यूजियम, मदुरै में सुरिक्षत रखा गया हैं.

गांधीजी के प्रेरक वचन (Gandhi’s quotes)



  • व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है.

  • अपने प्रयोजन में दृढ विश्वास रखने वाला एक सूक्ष्म शरीर इतिहास के रुख को बदल सकता है.

  • हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें. हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा.

  • आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अंधा बना देगी.

  • थोडा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है.

  • खुदमें वो बदलाव करीए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं.

  • पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे.

  • जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है.

  • ख़ुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं,इन सबमें सामंजस्य में हों.


आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वो इसलिए क्योंकि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi ने अपने अथक प्रयासों के बल पर अंग्रेजो से भारत को आजाद कराया यही नहीं इस महापुरुष ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रहित में लगा दिया। महात्मा गांधी की कुर्बानी की मिसाल आज भी दी जाती है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi के पास सत्य और अहिंसा दो हथियार थे जिन्होनें इसे भयावह और बेहद कठिन परिस्थितयों में अपनाया शांति के मार्ग पर चलकर इन्होनें न सिर्फ बड़े से बड़े आंदोलनों में आसानी से जीत हासिल की बल्कि बाकी लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी बने।

महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और बापू जी के नामों से भी पुकारा जाता है। वे सादा जीवन, उच्च विचार की सोच वाली शख्सियत थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सदाचार में गुजारा और अपनी पूरी जिंदगी राष्ट्रहित में कुर्बान कर दी। उन्होनें अपने व्यक्तित्व का प्रभाव न सिर्फ भारत में ही बल्कि पूरी दुनिया में डाला।

महात्मा गांधी महानायक थे जिनके कार्यों की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। Mahatma Gandhi- महात्मा गांधी कोई भी फॉर्मुला पहले खुद पर अपनाते थे और फिर अपनी गलतियों से सीख लेने की कोशिश करते थे।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमेशा कहते थे,

“बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो”


यानि की वे आदर्शों पर चलने वाले व्यक्ति थे और उनके जीवन के इन्हीं आदर्शों ने उन्हें राष्ट्रपित की संज्ञा दिलवाई।

महात्मा गांधी का प्रारंभिक जीवन – Early life of Mahatma Gandhi Information


महापुरुष महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर में हुआ था। उनके पिता करमचन्द गांधी राजकोट के ‘दीवान’ थे उनकी माता का नाम पुतलीबाई था जो कि धार्मिक विचारों वाली महिला थी और महात्मा गांधी पर भी उनके विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा।

महात्मा गांधी की शुरुआती शिक्षा राजकोट में हुई थी उन्होनें साल 1881 में 10th क्लास में एडमिशन लिया था। आपको बता दें कि गांधी जी जब महज 13 साल के थे तभी उनकी शादी कस्तूरबा से कर दी गई थी यानि की छोटी उम्र से ही गांधी जी ने अपनी जिम्मेदारियां उठानी शुरु कर दी थी लेकिन गांधी जी के कठोर दृढ़संकल्प ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी परिवारिक जिंदगी उनकी पढ़ाई और उनके राष्ट्रहित के विचारों के कभी आड़े नहीं आई।

उन्होनें कभी अपने स्वार्थ की परवाह नहीं की और अपनी आगे की पढ़ाई शादी के बाद भी जारी रखी। महात्मा गांधी ने साल 1887 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और भावनगर के सामलदास कॉलेज में एडमिशन लिया। लेकिन परिवार वालों के कहने पर उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैण्ड जाना पड़ा। जहां उन्होनें अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की।

जब इंग्लेंड से वापस लौटे महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi Returned from England


साल 1891 में गांधी जी बरिस्ट्रर होकर भारत वापस लौटे इसी समय उन्होनें अपनी मां को भी खो दिया था लेकिन इस कठिन समय का भी गांधी जी ने हिम्मत से सामना किया और गांधी जी ने इसके बाद वकालत का काम शुरु किया लेकिन उन्हें इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली।

गांधी जी की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा – Mahatma Gandhi Visit to South Africa


Mahatma Gandhi – महात्मा गांधी जी को वकालत के दौरान दादा अब्दुल्ला एण्ड अब्दुल्ला नामक मुस्लिम व्यापारिक संस्था के मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। इस यात्रा में गांधी जी का भेदभाव और रंगभेद की भावना से सामना हुआ। आपको बता दें कि गांधी जी दक्षिण अफ्रीका पहुंचने वाले पहले भारतीय महामानव थे जिन्हें अपमानजनक तरीके से ट्रेन से बाहर उतार दिया गया। इसके साथ ही वहां की ब्रिटिश उनके साथ बहुत भेदभाव करती थी यहां उनके साथ अश्वेत नीति के तहत बेहद बुरा बर्ताव भी किया गया था।

जिसके बाद गांधी जी के सब्र की सीमा टूट गई और उन्होनें इस रंगभेद के खिलाफ संघर्ष का फैसला लिया।

जब गांधी जी ने रंगभेद के खिलाफ लिया संघर्ष का संकल्प –


रंगभेद के अत्याचारों के खिलाफ गांधी जी ने यहां रह रहे प्रवासी भारतीयों के साथ मिलकर 1894 में नटाल भारतीय कांग्रेस का गठन किया और इंडियन ओपिनियन अखबार निकालना शुरु किया।

इसके बाद 1906 में दक्षिण अफ्रीकी भारतीयों के लिए अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की इस आंदोलन को सत्याग्रह का नाम दिया गया।

गांधी जी की दक्षिणा अफ्रीका से वापस भारत लौटने पर स्वागत – Mahatma Gandhi Return to India from South Africa


1915 में दक्षिण अफ्रीका में तमाम संघर्षों के बाद वे वापस भारत लौटे इस दौरान भारत अंग्रेजो की गुलामी का दंश सह रहा था। अंग्रेजों के अत्याचार से यहां की जनता गरीबी और भुखमरी से तड़प रही थी। यहां हो रहे अत्याचारों को देख गांधी – Mahatma Gandhi जी ने अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जंग लड़ने का फैसला लिया और एक बार फिर कर्तव्यनिष्ठा के साथ वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।

गांधी जी के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन – Mahatma Gandhi Aandolan


राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का चंपारण और खेड़ा आंदोलन – Mahatma Gandhi Champaran and Kheda Andolan
चम्पारण और खेडा में जब अंग्रेज भारत पर शासन कर रहे थे। तब जमीदार किसानों से ज्यादा कर लेकर उनका शोषण कर रहे थे। ऐसे में यहां भूखमरी और गरीबी के हालात पैदा हो गए थे। जिसके बाद गांधी जी ने चंपारण के रहने वाले किसानों के हक के लिए आंदोलन किया और इस आंदोलन में किसानों को 25 फीसदी से धनराशि वापस दिलाने में कामयाब रही।

इस आंदोलन में महात्मा गांधी ने अहिंसात्मक सत्याग्रह को अपना हथियार बनाया और वे जीत गए। इससे लोगों के बीच उनकी एक अलग छवि बन गई।

इसके बाद खेड़ा के किसानों पर अकाली का पहाड़ टूट पड़ा जिसके चलते किसान अपनों करों का भुगतान करने में असमर्थ थे। इस मामले को गांधी जी ने अंग्रेज सरकार के सामने रखा और गरीब किसानों का लगान माफ करने का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने प्रखर और तेजस्वी गांधी जी का ये प्रस्ताव मान लिया और गरीब किसानों की लगान को माफ कर दिया।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का खिलाफत आंदोलन (1919-1924) – Mahatma Gandhi Khilafat Andolan


गरीब, मजदूरों के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी ने मुसलमानों द्दारा चलाए गए खिलाफत आंदोलन को भी समर्थन दिया था। ये आंदोलन तुर्की के खलीफा पद की दोबारा स्थापना करने के लिए चलाया गया था। इस आंदोलन के बाद गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता का भरोसा भी जीत लिया था। वहीं ये आगे चलकर गांधी – Mahatma Gandhi जी के असहयोग आंदोलन की नींव बना।

महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन (1919-1920) – Mahatma Gandhi Asahyog Andolan


रोलेक्ट एक्ट के विरोध करने के लिए अमृतसर के जलियां वाला बाग में सभा के दौरान ब्रिटिश ऑफिस ने बिना वजह निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवा दी जिसमें वहां मौजूद 1000 लोग मारे गए थे जबकि 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस घटना से महात्मा गांधी को काफी आघात पहुंचा था जिसके बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजीने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलकर आंदोलन करने का फैसला लिया था। इसके तहत गांधी जी ने ब्रिटिश भारत में राजनैतिक, समाजिक संस्थाओं का बहिष्कार करने की मांग की।

इस आंदोलन में महात्मा गांधी ने प्रस्ताव की रुप रेखा तैयार की वो इस प्रकार है –


सरकारी कॉलेजों का बहिष्कार

सरकारी अदालतों का बहिष्कार

विदेशी मॉल का बहिष्कार

1919 अधिनियम के तहत होने वाले चुनाव का बहिष्कार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का चौरी-चौरा काण्ड (1922) – Mahatma Gandhi Chauri Chaura Andolan


5 फरवरी को चौरा-चौरी गांव में कांग्रेस ने जुलूस निकाला था जिसमें हिंसा भड़क गई थी दरअसल इस जुलूस को पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी लेकिन भीड़ बेकाबू होती जा रही थी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक थानेदार और 21 सिपाहियों को थाने में बंद कर आग लगा ली। इस आग में झुलसकर सभी लोगों की मौत हो गई थी इस घटना से महात्मा राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी – Mahatma Gandhi का ह्रद्य कांप उठा था। इसके बाद यंग इंडिया अखबार में उन्होनें लिखा था कि,

“आंदोलन को हिंसक होने से बचाने के लिए मै हर एक अपमान, यातनापूर्ण बहिष्कार, यहां तक की मौत भी सहने को तैयार हूं”

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का सविनय अवज्ञा आंदोलन/डंडी यात्रा/नमक आंदोलन (1930) – Mahatma Gandhi Savinay Avagya Andolan/ Dandi March / Namak Andolan


राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी ने ये आंदोलन ब्रिटिश सरकार के खिलाफ चलाया था इसके तहत ब्रिटिश सरकार ने जो भी नियम लागू किए थे उन्हें नहीं मानना का फैसला लिया गया था अथवा इन नियमों की खिलाफत करने का भी निर्णय लिया था। आपको बता दें कि ब्रिटिश सरकार ने नियम बनाया था की कोई अन्य व्यक्ति या फिर कंपनी नमक नहीं बनाएगी।

12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा द्धारा नमक बनाकर इस कानून को तोड़ दिया था उन्होनें दांडी नामक स्थान पर पहुंचकर नमक बनाया था और कानून की अवहेलना की थी।

Mahatma Gandhi – गांधी जी की दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 से लेकर 6 अप्रैल 1930 तक चली। दांडी यात्रा साबरमति आश्रम से निकाली गई। वहीं इस आंदोलन को बढ़ते देख सरकार ने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन को समझौते के लिए भेजा था जिसके बाद गांधी जी ने समझौता स्वीकार कर लिया था।

महात्मा गांधी का भारत छोड़ो आंदोलन- (1942) – Mahatma Gandhi Bharat Chhodo Andolan


ब्रिटिश शासन के खिलाफ महात्मा गांधी ने तीसरा सबसे बड़ा आंदोलन छेड़ा था। इस आंदोलन को ‘अंग्रेजों भारत छोड़ों’ का नाम दिया गया था।

हालांकि इस आंदोलन में गांधी जी को जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन देश के युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फोड़ के माध्यम से इस आंदोलन को चलाते रहे उस समय देश का बच्चा-बच्चा गुलाम भारत से परेशान हो चुका था और आजाद भारत में जीना चाहता था। हालांकि ये आंदोलन असफल रहा था।

महात्मा गांधी के आंदोलन के असफल होने की कुथ मुख्य वजह नीचे दी गई हैं –


ये आंदोलन एक साथ पूरे देश में शुरु नहीं किया गया। अलग-अलग तारीख में ये आंदोलन शुरु किया गया था जिससे इसका प्रभाव कम हो गया हालांकि इस आंदोलन में बड़े स्तर पर किसानों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था।

भारत छोड़ों आंदोलन में बहुत से भारतीय यह सोच रहे थे कि स्वतंत्रता संग्राम के बाद उन्हें आजादी मिल ही जाएगी इसलिए भी ये आंदोलन कमजोर पड़ गया।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का भारत छोड़ो आंदोलन सफल जरूर नहीं हुआ था लेकिन इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासकों को इस बात का एहसास जरूर दिला दिया था कि अब और भारत उनका शासन अब और नहीं चल पाएगा और उन्हें भारत छोड़ कर जाना ही होगा।

Mahatma Gandhi- राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी जी के शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलाए गए आंदोलनो ने गुलाम भारत को आजाद करवाने में अपनी महत्पूर्ण भूमिका निभाई है और हर किसी के जीवन में गहरा प्रभाव छोड़ा है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के आंदोलनों की खास बातें – Important things about Mahatma Gandhi’s movements


महात्मा गांधी -Mahatma Gandhi की तरफ से चलाए गए सभी आंदोलनों में कुछ चीजें एक सामान थी जो कि निम्न प्रकार हैं –

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी जी के सभी आंदोलन शांति से चलाए गए।

आंदोलन के दौरान किसी की तरह की हिंसात्मक गतिविधि होने की वजह से ये आंदोलन रद्द कर दिए जाते थे।

आंदोलन सत्य और अहिंसा के बल पर चलाए जाते थे।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की कुछ खास बातें – Some special things of Mahatma Gandhi

सादा जीवन, उच्च विचार –

राष्ट्रपति महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi सादा जीवन उच्च विचार में भरोसा रखते थे उनके इसी स्वभाव की वजह से उन्हें ‘महात्मा’ कहकर बुलाते थे।

सत्य और अहिंसा –


राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के जीवन के 2 हथियार थे सत्य और अहिंसा। इन्हीं के बल पर उन्होनें भारत को गुलामी से आजाद कराया और अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर किया।

छूआछूत को दूर करना था राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी का मकसद


Mahatma Gandhi – महात्मा गांधी का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली छुआछूत जैसी कुरोतियों को दूर करना था इसके लिए उन्होनें काफी कोशिश की और पिछड़ी जातियों को उन्होनें ईश्वर के नाम पर हरि ‘जन’ नाम दिया।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी जी की मृत्यु – Death of Mahatma Gandhi


नाथूराम गोडसे और उनके सहयोगी गोपालदास ने 30 जनवरी 1948 को बिरला हाउस में गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

 

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शनिवार, 28 सितंबर 2019

कुमकुमार्चन पूजा




Kumkum Archana
देवीकी उपासनामें कुमकुमार्चनका महत्वपूर्ण स्थान है । अनेक स्थानोंपर नवरात्रिमें भी विशेष रूपसे यह विधि करते हैं

१. देवीकी मूर्तिपर कुमकुमार्चन करनेकी पद्धतियां


पद्धति १ : ‘देवीका नामजप करते हुए एक चुटकीभर कुमकुम (रोली), देवीके चरणोंसे आरंभ कर देवीके सिरतक चढाएं अथवा देवीका नामजप करते हुए उन्हें कुमकुमसे आच्छादित करें ।’

कुछ स्थानोंपर देवीको कुमकुमार्चन करते समय कुमकुम केवल चरणोंपर अर्पित किया जाता है ।

२. देवीकी मूर्तिपर कुमकुमार्चन पूजा  करनेका शास्त्रीय आधार


‘मूल कार्यरत शक्तितत्त्वकी निर्मिति लाल रंगके प्रकाशसे हुई है, इस कारण शक्तितत्त्वके दर्शकके रूपमें देवीकी पूजा कुमकुमसे करते हैं । कुमकुमसे प्रक्षेपित गंध-तरंगोंकी सुगंधकी ओर ब्रह्मांडांतर्गत शक्तितत्त्वकी तरंगें अल्प कालावधिमें आकृष्ट होती हैं, इसलिए मूर्तिमें सगुण तत्त्वको जागृत करने हेतु लाल रंगके दर्शक तथा देवीतत्त्वको प्रसन्न करनेवाली गंध-तरंगोंके प्रतीकके रूपमें कुमकुम- उपचार (शृृंगार)को देवीपूजनमें अग्रगण्य स्थान दिया गया है । मूल शक्तितत्त्वके बीजका गंध भी कुमकुमसे पैâलनेवाली सुगंधसे साधर्म्य दर्शाता है, इसलिए देवीको जाग्रत करने हेतु कुमकुमके प्रभावी माध्यमका प्रयोग किया जाता है ।’

३. देवी की मूर्ति को कुमकुमार्चन करने के सूक्ष्म-स्तरीय लाभ


[caption id="attachment_264" align="aligncenter" width="1044"] kumkumarchana puja vidhi in hindi[/caption]

४. कुमकुमार्चनके फलस्वरूप हुई अनुभूति


देवीके शृंगारमें प्रयुक्त कुमकुमको मस्तकपर लगानेसे प्रार्थना एवं नामजप अच्छा होना तथा उत्साह प्रतीत होना : ‘२७.१.२००४ के दिन हम देवालयमें कुमकुमार्चन हेतु गए थे । हमारे द्वारा दिए गए कुमकुमसे पुजारीने दोनों मूर्तियोंका अर्चन किया तथा उसके उपरांत प्रार्थना कर वह कुमकुम हमें दिया । कुमकुम लेते हुए मैंने देवीसे प्रार्थना की, ‘हे सातेरीदेवी, इस कुमकुमसे हमें शक्ति मिले, हमसे प्रार्थना एवं नामजप उत्तम हो ।’ तबसे मैं जब भी अपने माथेपर कुमकुम लगाती हूं, मेरा नामजप आरंभ हो जाता है और एक अनोखे उत्साहकी प्रतीति होती है ।


श्री लक्ष्मी सूक्त


काम, क्रोध, लोभ वृत्ति से मुक्ति प्राप्त कर धन, धान्य, सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए उपयोगी स्तोत्र है।
श्री लक्ष्मीसूक्तम्‌ पाठ

पद्मानने पद्मिनि पद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि।
विश्वप्रिये विश्वमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व॥


- हे लक्ष्मी देवी! आप कमलमुखी, कमल पुष्प पर विराजमान, कमल-दल के समान नेत्रों वाली, कमल पुष्पों को पसंद करने वाली हैं। सृष्टि के सभी जीव आपकी कृपा की कामना करते हैं। आप सबको मनोनुकूल फल देने वाली हैं। हे देवी! आपके चरण-कमल सदैव मेरे हृदय में स्थित हों।


पद्मानने पद्मऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे।
तन्मे भजसिं पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्‌॥


- हे लक्ष्मी देवी! आपका श्रीमुख, ऊरु भाग, नेत्र आदि कमल के समान हैं। आपकी उत्पत्ति कमल से हुई है। हे कमलनयनी! मैं आपका स्मरण करता हूँ, आप मुझ पर कृपा करें।

अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने।
धनं मे जुष तां देवि सर्वांकामांश्च देहि मे॥


- हे देवी! अश्व, गौ, धन आदि देने में आप समर्थ हैं। आप मुझे धन प्रदान करें। हे माता! मेरी सभी कामनाओं को आप पूर्ण करें।

पुत्र पौत्र धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्‌।
प्रजानां भवसी माता आयुष्मंतं करोतु मे॥


- हे देवी! आप सृष्टि के समस्त जीवों की माता हैं। आप मुझे पुत्र-पौत्र, धन-धान्य, हाथी-घोड़े, गौ, बैल, रथ आदि प्रदान करें। आप मुझे दीर्घ-आयुष्य बनाएँ।

धनमाग्नि धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसु।
धन मिंद्रो बृहस्पतिर्वरुणां धनमस्तु मे॥


- हे लक्ष्मी! आप मुझे अग्नि, धन, वायु, सूर्य, जल, बृहस्पति, वरुण आदि की कृपा द्वारा धन की प्राप्ति कराएँ।

वैनतेय सोमं पिव सोमं पिवतु वृत्रहा।
सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः॥


- हे वैनतेय पुत्र गरुड़! वृत्रासुर के वधकर्ता, इंद्र, आदि समस्त देव जो अमृत पीने वाले हैं, मुझे अमृतयुक्त धन प्रदान करें।

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभामतिः।
भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां सूक्त जापिनाम्‌॥


- इस सूक्त का पाठ करने वाले की क्रोध, मत्सर, लोभ व अन्य अशुभ कर्मों में वृत्ति नहीं रहती, वे सत्कर्म की ओर प्रेरित होते हैं।

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुक गंधमाल्यशोभे।


भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरी प्रसीद मह्यम्‌॥


- हे त्रिभुवनेश्वरी! हे कमलनिवासिनी! आप हाथ में कमल धारण किए रहती हैं। श्वेत, स्वच्छ वस्त्र, चंदन व माला से युक्त हे विष्णुप्रिया देवी! आप सबके मन की जानने वाली हैं। आप मुझ दीन पर कृपा करें।

विष्णुपत्नीं क्षमां देवीं माधवीं माधवप्रियाम्‌।
लक्ष्मीं प्रियसखीं देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम॥


- भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी, माधवप्रिया, भगवान अच्युत की प्रेयसी, क्षमा की मूर्ति, लक्ष्मी देवी मैं आपको बारंबार नमन करता हूँ।

महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्‌॥


- हम महादेवी लक्ष्मी का स्मरण करते हैं। विष्णुपत्नी लक्ष्मी हम पर कृपा करें, वे देवी हमें सत्कार्यों की ओर प्रवृत्त करें।

चंद्रप्रभां लक्ष्मीमेशानीं सूर्याभांलक्ष्मीमेश्वरीम्‌।
चंद्र सूर्याग्निसंकाशां श्रिय देवीमुपास्महे॥


- जो चंद्रमा की आभा के समान शीतल और सूर्य के समान परम तेजोमय हैं उन परमेश्वरी लक्ष्मीजी की हम आराधना करते हैं।

श्रीर्वर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाभिधाच्छ्रोभमानं महीयते।
धान्य धनं पशु बहु पुत्रलाभम्‌ सत्संवत्सरं दीर्घमायुः॥


- इस लक्ष्मी सूक्त का पाठ करने से व्यक्ति श्री, तेज, आयु, स्वास्थ्य से युक्त होकर शोभायमान रहता है। वह धन-धान्य व पशु धन सम्पन्न, पुत्रवान होकर दीर्घायु होता है।

॥ इति श्रीलक्ष्मी सूक्तम्‌ संपूर्णम्‌ ॥


 

 

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शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

जानिए क्या है RERA

 

घर खरीदने वालों की सुरक्षा के लिए तथा बिल्डरों की धोखाधड़ी से ग्राहकों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने रीयल एस्टेट (नियमन एवं विकास) कानून (रेरा) लागू किया है.
भारत सरकार ने 26 मार्च 2016 को रियल एस्टेट (रेगुलेशन और डिवेलपमेंट) एक्टर 2016 अधिनियमित किया और इसके सभी प्रावधान 1 मई, 2017 से लागू हो गए। सभी बिल्डर्स से कहा गया कि वे जुलाई 2017 तक अपने प्रोजेक्ट्स को RERA के तहत रजिस्टर कराएं। जो रियल एस्टेट एजेंट्स इसके दायरे में आते हैं, वे अब भी खुद को रजिस्टर कराने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। कई राज्यों को अब भी इस कानून के नियमों को नोटिफाई करना है और डिवेलपर्स/प्रमोटरों को अपने प्रोजेक्ट्स को RERA में रजिस्टर्ड कराना है।



क्या है RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट)-


What is the RERA (Real Estate Regulatory Act)?

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डिेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद घर ग्राहकों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ाना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को पास कर दिया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।



क्यों जरुरी है RERA?


काफी वक्त से घर खरीददार इस बात की शिकायत कर रहे थे कि रियल एस्टेट की लेनदेन एकतरफा और ज्यादातर डिवेलपर्स के हक में थीं। RERA और सरकार के मॉडल कोड का मकसद मुख्य बाजार में विक्रेता और संपत्ति के खरीददार के बीच न्यायसंगत और सही लेनदेन तय करना है। उम्मीद की जा रही है कि RERA बेहतर जवाबदेही और पारदर्शिता लाकर रियल एस्टेट की खरीद को आसान बनाएगा। साथ ही राज्यों के प्रावधान केंद्रीय कानून की भावना को कमजोर नहीं करेंगे। RERA भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री का पहला रेगुलेटर है। रियल एस्टेट एक्ट के तहत यह अनिवार्य किया गया कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने रेगुलेटर और नियमों का गठन करेंगे, जिसके मुताबिक कामकाज होगा।


How RERA Will Impact Property Market And Real Estate Buyers



घर खरीददारों पर क्या होगा RERA का प्रभाव


How will RERA impact home buyers



कुछ अहम अनुपालन हैं:



  • कोई भी अतिरिक्त इजाफा या परिवर्तन के बारे में आवंटियों को सूचना देना।

  • किसी भी इजाफे या बदलाव के बारे में 2/3 आवंटियों की मंजूरी की जरूरत होगी।

  • RERA में रजिस्ट्रेशन से पहले किसी तरह का लॉन्च या विज्ञापन नहीं किया जाएगा।

  • अगर बहुमत अधिकार तीसरे पक्ष को ट्रांसफर किया जाना है तो 2/3 सहमति की जरूरत होगी।

  • प्रोजेक्ट प्लान, लेआउट, सरकारी मंजूरी और लैंड टाइटल स्टेटस और उप-ठेकेदारों की जानकारी साझा करना।

  • वक्त पर प्रोजेक्ट पूरा होकर ग्राहकों को मिल जाए, इस पर जोर दिया जाएगा।

  • पांच साल की दोष दायित्व अवधि के कारण कंस्ट्रक्शन की क्वॉलिटी में इजाफा।

  • ब्योरेवार समय या काफी फ्लैट्स बिक जाने के बाद आरडबल्यूए का गठन।

  • इस कानून का सबसे सकारात्मक पहलू है कि यह फ्लैटों, अपार्टमेंट आदि की खरीद के लिए एक एकीकृत कानूनी व्यवस्था मुहैया कराता है,

  • साथ ही पूरे देश में उसका मानकीकरण करता है।


अब आपको इस कानून की मुख्य बातों के बारे में बताते हैं:


रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना:


रियल एस्टेट के लिए सही रेगुलेटर (जैसे कैपिटल मार्केट के लिए सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड अॉफ इंडिया) की जरूरत लंबे वक्त से थी। इस कानून के तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। इसका मकसद ग्राहकों के हितों की रक्षा, जमा किए डाटा को संग्रहित करना और मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनाना है। समय की बर्बादी को रोकने के लिए प्राधिकरण को अधिकतम 60 दिनों के भीतर आवेदन का निपटारा करना अनिवार्य है। यह सीमा तभी बढ़ाई जा सकती है, अगर देरी का कोई कारण दर्ज हो। इसके अलावा रियल एस्टेट अपीलीय प्राधिकरण (REAT) में अपील की जा सकती है।


अनिवार्य रजिस्ट्रेशन:


केंद्रीय कानून के मुताबिक सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स (जहां विकसित होने वाला कुल क्षेत्रफल 500 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा है या किसी भी चरण में 8 से ज्यादा अपार्टमेंट्स बनने अनिवार्य हैं) का अपने राज्य के RERA में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। जिन मौजूदा प्रोजेक्ट्स को कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) या अॉक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी नहीं हुआ है, उन्हें भी इस कानून के तहत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन कराते वक्त प्रोमोटर्स को प्रोजेक्ट की जानकारी जैसे-जमीन की स्थिति, प्रोमोटर की जानकारी, अप्रूवल, पूरे होने का समय इत्यादि बतानी होगी। जब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और सभी मंजूरियां मिल जाएंगी, तब प्रोजेक्ट की मार्केटिंग की जा सकती है।


रिजर्व अकाउंट:


प्रोजेक्ट्स में देरी होने की सबसे मुख्य वजह है कि एक प्रोजेक्ट के लिए पैसा जमा कर उसे दूसरे प्रोजेक्ट में निवेश कर दिया जाता है। इस पर रोक लगाने के लिए प्रोमोटर्स को प्रोजेक्ट का 70 प्रतिशत पैसा अलग रिजर्व अकाउंट में रखना होगा। इस खाते की राशि को सिर्फ जमीन या निर्माण के कामों में खर्च किया जा सकता है। किसी पेशेवर से इसे सर्टिफाइड कराना भी जरूरी है।


प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस देख सकेंगे ग्राहक:


RERA के लागू होने के बाद घर खरीददार RERA की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस मालूम कर सकेंगे। प्रोजेक्ट में कितना काम पूरा हुआ, इसकी जानकारी प्रोमोटर्स को नियमित अंतराल पर नियामक को देनी होगी।


टाइटल रिप्रेजेंटेशन:


प्रोमोटर्स को अब सही टाइटल और जमीन पर रुचि के लिए सकारात्मक वॉरंटी बनानी होगी, जिसे बाद में घर खरीददार उनके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं। गलत टाइटल की खोज की जानी चाहिए। इसके अलावा उन्हें टाइटल और प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन के लिए इन्श्योरेंस भी हासिल करनी होगी, जिसका मुनाफा बिक्री समझौते के निष्पादन के बाद अलॉटी को दिया जाना चाहिए।


बिक्री समझौते का मानकीकरण:


इस कानून के तहत प्रोमोटर्स और घर खरीददार के बीच बिक्री समझौते का मानक मॉडल है। मिसाल के तौर पर प्रोमोटर्स ने घर खरीददारों के लिए कई धाराएं डालीं, जो उनके लिए सजा जैसी थीं, लेकिन प्रमोटर्स अगर कोई गलती करते थे तो उन पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती थी। लेकिन एेसे क्लॉज अब बीते दिनों की बात हो जाएंगे और घर ग्राहकों को भविष्य में एक संतुलित अग्रीमेंट मिलेगा।


पेनाल्टी:


इस कानून का उल्लंघन न हो, इसके लिए सख्त जुर्माने (प्रोजेक्ट की लागत का 10 प्रतिशत) का प्रावधान है।



RERA के तहत कारपेट एरिया की परिभाषा:


RERA definition of carpet area

प्रॉपर्टी का एरिया तीन तरीकों से कैलकुलेट किया जाता है-कारपेट एरिया, बिल्ड-अप एरिया और सुपर बिल्ड-अप एरिया। इसलिए जब भी बात प्रॉपर्टी खरीदने की आती है तो आप क्या चुकाएंगे और आपको क्या मिलेगा, इसके बीच काफी फर्क होता है। महाराष्ट्र RERA के चेयरमैन गौतम चटर्जी ने कहा, अब यह सभी बिल्डर्स के लिेए अनिवार्य है कि वे अपार्टमेंट का साइज कारपेट एरिया (चार दीवारों के बीच का एरिया) के आधार पर बताएं। इस्तेमाल होने वाले इल एरिया में टॉयलेट एवं किचन भी शामिल होंगे। इससे पारदर्शिता आएगी, जो पहले नहीं थी।
RERA के मुताबिक कारपेट एरिया किसी अपार्टमेंट का इस्तेमाल होने वाला एरिया होता है, जिसमें बाहरी दीवारों का एरिया, सर्विस शाफ्ट, बालकनी और वरांडा एरिया शामिल नहीं होते। फ्लैट के अंदर की दीवारों का एरिया इसका हिस्सा होता है।
RERA की गाइडलाइंस के मुताबिक, बिल्डर को सटीक कारपेट एरिया की जानकारी देनी होगी, ताकि ग्राहकों को यह पता चल सके कि वह किसके लिए भुगतान कर रहे हैं। लेकिन कानून के तहत बिल्डरों को कारपेट एरिया के आधार पर फ्लैट बेचना अनिवार्य नहीं है।



रियल एस्टेट इंडस्ट्री पर RERA का असर:


Impact of RERA on real estate industry

शुरुआती बैकलॉग
प्रोजेक्ट की बढ़ी हुई लागत
चुस्त नकदी
पूंजी की लागत में इजाफा
एकत्रीकरण
प्रोजेक्ट लॉन्च टाइम में बढ़ोतरी


शुरुआती तौर पर मौजूदा और नए प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन पर काफी काम करना होगा। पिछले पांच वर्षों में पूरे हुए प्रोजेक्ट्स का स्टेटस, प्रोमोटर की जानकारी, विस्तृत निष्पादन योजना तैयार करने की जरूरत है। जानिए क्या है RERA
RERA के आने से घर खरीद से जुड़े सभी विवादों का निपटारा स्टेट रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी और रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल करेगा। एेसे मामलों के लिए सिविल कोर्ट या कंज्यूमर फोरम का सहारा नहीं लिया जाएगा। मामलों के तेजी से निपटारे के लिए RERA ने मूल सिद्धांत तय किए हैं। इसकी सफलता वक्त पर विवादों का निपटारा करने वाली संस्थाओं का गठन और कैसे इन विवादों को सुलझाया जाएगा, इस पर निर्भर करेगा।



RERA के तहत कौन से प्रोजेक्ट्स आएंगे:


Which projects come under RERA

  • प्लॉटेड डिवेलपमेंट के अलावा कमर्शियल और रिहायशी प्रोजेक्ट्स

  • 500 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा या 8 यूनिट्स वाले प्रोजेक्ट्स।

  • कानून के लागू होने से पहले बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट वाले प्रोजेक्ट्स।

  • जिस प्रोजेक्ट का मकसद रेनोवेशन, रिपेयर, री-डिवेलपमेंट है और पुन: आवंटन, मार्केटिंग, विज्ञापन, नए अपार्टमेंट्स की बिक्री या नया

  • आवंटन नहीं करना है, वह RERA के तहत नहीं आएंगे।

  • हर चरण को नया रियल एस्टेट प्रोजेक्ट माना जाएगा, जिसके लिए नया रजिस्ट्रेशन होगा।


किन चीजों पर बिल्डर को माननी होगी RERA की बात:


How can a builder be RERA compliant

  • प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन

  • विज्ञापन

  • निकासी – पीओसी विधि

  • कारपेट एरिया

  • वेबसाइट अपडेशन/भंडाफोड़

  • प्रोजेक्ट में बदलाव-2/3 अलॉटीज की मंजूरी

  • प्रोजेक्ट अकाउंट्स-अॉडिट

  • अलॉटी से लिया गया 70 प्रतिशत फंड प्रोजेक्ट के अकाउंट में जमा कराना होगा। इसका इस्तेमाल सिर्फ निर्माण और जमीन की लागत को

  • कवर करने के लिए होगा।

  • पर्सेंटेज कंप्लीशन मेथड के अनुपात में निकासी होगी।

  • निकासी किसी इंजीनियर, आर्किटेक्ट या सीए द्वारा सर्टिफाइड होनी चाहिए।

  • गैर-अनुपालन पर प्रोजेक्ट के बैंक खाते फ्रीज करने के RERA के प्रावधान।

  • देरी पर ब्याज कंज्यूमर और प्रोमोटर दोनों के लिए एक समान होगा।


RERA के तहत बिल्डर को क्या-क्या जानकारियां देनी होंगी:


What information does a builder need to provide under RERA

  • नंबर, टाइप और अपार्टमेंट का कारपेट एरिया।

  • किसी भी बड़े इजाफे या बदलाव के लिए प्रभावित आवंटियों से सहमति।

  • ना बिक पाने वाली इन्वेंट्री या लंबित मंजूरियों जैसी जानकारियों को हर तिमाही में RERA की वेबसाइट पर अपडेट करना।

  • तय वक्त में प्रोजेक्ट पूरा करना।

  • विज्ञापन में झूठे बयान या कमिटमेंट नहीं करना।

  • प्रोमोटर मनमाने ढंग से यूनिट को रद्द नहीं कर सकता।


RERA के तहत कैसे रजिस्टर कराएं प्रोजेक्ट्स:



  • How to register projects under RERA
    RERA के तहत प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन कराते वक्त सभी मंजूरियों का प्रमाणपत्र, प्रारंभिक प्रमाणपत्र, मंजूर किया गया प्लान, लेआउट प्लान, स्पेसिफिकेशन, विकास कार्य का प्लान, प्रस्तावित सुविधाएं, अलॉटमेंट लेटर, सेल अग्रीमेंट और कन्वेयंस डीड पेश करने पड़ते हैं।

  • नए और मौजूदा प्रोजेक्ट्स का लॉन्च से पहले RERA के तहत रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।

  • RERA और RERA अपीलीय ट्रिब्यूनल में विवाद का 6 महीने में निपटारा।

  • एक ही प्रोजेक्ट के विभिन्न चरणों का अलग-अलग रजिस्ट्रेशन होगा।

  • डिवेलपर्स को RERA को पिछले 5 वर्षों में लॉन्च हुए प्रोजेक्ट का उनके स्टेटस के साथ ब्योरा दोना होगा। साथ ही बताना होगा कि देरी क्यों हुई।

  • RERA की वेबसाइट पर अपडेट।

  • अगर डिवेलपर की गलती नहीं है और देरी हुई है तो अधिकतम 1 साल का एक्सटेंशन लिया जा सकता है।

  • सीए द्वारा प्रोजेक्ट के अकाउंट का सालाना अॉडिट।

  • आरडब्ल्यूए के फेवर में कॉमन एरिया का कन्वेयंस डीड।

  • निर्माण और लैंड टाइटल का इंश्योरेंस।

  • प्रोजेक्ट के पूरा होने की समयावधि।

  • निर्माण और जमीन के टाइटल के लिए बीमा लागत को RERA कैसे प्रभावित करेगा?

  • आंतरिक संचय से भूमि और मंजूरी की लागत को बाहर किया जाएगा क्योंकि प्रीलॉन्च का कॉन्सेप्ट खत्म हो जाएगा। वर्तमान ऋण वित्तपोषण

  • की जगह इक्विटी वित्तपोषण ले लेगा।

  • पूंजी की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि डिवेलपर्स को अब जमीन और मंजूरी की लागत के लिए फंड इक्विटी के जरिए जुटाना होगा।

  • मंजूरी मिलने में देरी के कारण डिवेलपर्स के लिेए ऋण वित्तपोषण सही रास्ता नहीं रह गया है। चूंकि इस सेक्टर में आना मुश्किल हो गया है, इसलिए एकत्रीकरण की संभावना है।

  • कोई प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए मजबूत वित्तीय और निष्पादन क्षमता की जरूरत होगी।

  • प्रोजेक्ट लॉन्च करने का समय बढ़ सकता है क्योंकि विवरण को अंतिम रूप देने में बहुत समय लगेगा।

  • ड्राइंग, यूटिलिटी लेआउट आदि जैसे विवरणों को प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले अंतिम रूप देना होगा।


रियल एस्टेट एजेंट्स पर क्या होगा RERA का असर:


How will RERA impact real estate agents

रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डिेवेलपमेंट एक्ट), (RERA) के तहत रियल एस्टेट एजेंटों को लेनदेन की सुविधा के लिए खुद को रजिस्टर्ड कराना होगा। भारत में ब्रोकर्स का सेगमेंट करीब 4 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री है। पूरे देश में 5 से 9 लाख ब्रोकर्स हो सकते हैं। हालांकि यह पारंपरिक रूप से असंगठित और अनियमित हैं।
यह इंडस्ट्री में जवाबदेही लाएगा, क्योंकि जो पेशेवर और पारदर्शी बिजनेस में यकीन करते हैं, वे पूरा फायदा उठा ले जाएंगे। अब एजेंट्स का रोल और अहम हो जाएगा, क्योंकि उन्हें ग्राहक को सही जानकारी और RERA के तहत रजिस्टर्ड डिवेलपर चुनने में मदद भी करनी होगी।
RERA के आने के बाद ब्रोकर्स किसी भी एेसी सुविधा या सेवा का वादा नहीं कर सकते, जो दस्तावेज में न लिखी हो। इतना ही नहीं, उन्हें बुकिंग के वक्त ग्राहकों को पूरी जानकारी और दस्तावेज मुहैया कराने होंगे। RERA को गैरजिम्मेदाराना और अनुभवहीन ब्रोकर्स की पहचान करनी होगी, क्योंकि नियम से न चलने वाले दलालों को भारी जुर्माना, जेल या दोनों हो सकते हैं। जानिए क्या है RERA



एजेंट्स को RERA की इन बातों को मानना पड़ेगा:


How can brokers become RERA compliant

1. सेक्शन 3-RERA में रजिस्ट्रेशन कराए बिना प्रमोटर बिक्री के लिए विज्ञापन, किताब या बिक्री की पेशकश नहीं कर सकता।


2.सेक्शन 9 : RERA रजिस्ट्रेशन के बिना कोई एजेंट किसी प्रोजेक्ट को नहीं बेच सकता।


-जो भी बिक्री एजेंट करेंगे, उसमें उनका RERA नंबर भी लिखा होगा।


-रजिस्ट्रेशन को रिन्यू भी कराना होगा।


-अगर नियमों का उल्लंघन किया गया तो रजिस्ट्रेशन रद्द या ब्लॉक किया जा सकता है।


3. सेक्शन 10– कोई एजेंट बिना रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट को नहीं बेच सकता।


-किताबें और रिकॉर्ड बनाए रखें।


-व्यापार की गलत नीतियों में शामिल न हों।


-कोई गलत बयान-मौखिक, लिखित, विजुअल


-विशेष मानक वाली सर्विसेज का प्रतिनिधित्व


-प्रतिनिधित्व करें कि प्रोमोटर या खुद के पास अप्रूवल या संबंधन है।


-अखबार में विज्ञापन के प्रकाशन को अनुमति देना और गलत सेवाओं की पेशकश नहीं करना।


-ग्राहकों को बुकिंग के वक्त सभी डॉक्युमेंट्स मुहैया कराना। जानिए क्या है RERA




एेसे दर्ज कराएं RERA में शिकायत:


When and how should you file a complaint under RERA?

आरआईसीएस के पॉलिसी हेड दिग्बिजॉय भौमिक ने कहा, रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट 2016 के सेक्शन 31 के तहत रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी या निर्णायक अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऐसी शिकायतें प्रमोटरों, आवंटियों या रियल एस्टेट एजेंटों के खिलाफ हो सकती हैं। ज्यादातर राज्यों के नियमों में RERA को अपरिवर्तनीय बनाया गया है, जिसमें फॉर्म और प्रक्रिया है। इसके तहत आवेदन किया जा सकता है। चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश या उत्तर प्रदेश के मामले में इन्हें फॉर्म एम या फॉर्म एन कहा गया है। (ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मामलों में भी एेसा ही है) जानिए क्या है RERA
राज्यों के RERA के तहत शिकायतें तय फॉर्म के रूप में होनी चाहिए। RERA के तहत पंजीकृत प्रोजेक्ट अगर नियमों का उल्लंघन करते हैं तो तय समय सीमा के भीतर उनके खिलाफ इस कानून के प्रावधानों के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। एसएनजी एंड पार्टनर्स लॉ फर्म में पार्टनर अजय मोंगा ने कहा, ”जिन लोगों ने एनसीडीआरसी में शिकायतें दर्ज कराई हैं, वह उन्हें वापस लेकर RERA में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अन्य अपराध (धारा 12, 14, 18 और 19 के तहत शिकायतें छोड़कर) RERA प्राधिकरण के सामने दायर की जा सकती हैं”।



RERA के तहत लागू सजा


Applicable penalties under RERA जानिए क्या है RERA




























लागू धाराएंअपराधलागू सजाएं
सेक्शन 9 (7)गलत बयान या धोखाधड़ी के माध्यम से पंजीकरण एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर रद्द किया जाएगा
सेक्शन 9 और 10 का उल्लंघनहासिल किए हुए रजिस्ट्रेशन का उल्लंघन10,000 रुपये प्रति दिन की सजा, जिस दौरान डिफॉल्ट  यूनिट की लागत का 5% तक बढ़ाया जाता है
सेक्शन 65RERA प्राधिकरण के आदेशों का उल्लंघन बेची गई यूनिट की कीमत का 5 प्रतिशत जुर्माना
सेक्शन 66

 
अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेशों का उल्लंघन   एक साल जेल या बेची गई यूनिट की कीमत का 10 प्रतिशत जुर्माना

RERA के फायदे:


Benefits of RERA

  • इंडस्ट्री गवर्नेंस और पारदर्शिता

  • प्रोजेक्ट की योग्यता और वितरण

  • मानकीकरण एवं क्वॉलिटी

  • निवेशकों का बढ़ेगा भरोसा

  • ज्यादा निवेश को बढावा और पीई फंडिंग

  • नियामक वातावरण


डिवेलपर: जानिए क्या है RERA



  • कॉमन और बेस्ट प्रैक्टिस

  • बेहतर कार्यकुशलता

  • सेक्टर का एकत्रीकरण

  • कॉरपोरेट ब्रैंडिंग

  • ज्यादा इन्वेस्टमेंट

  • अॉर्गनाइज्ड फंडिंग में बढ़ोतरी


खरीददार:



  • ग्राहकों के हितों की सुरक्षा

  • क्वॉलिटी उत्पाद और समय पर डिलिवरी

  • संतुलित अग्रीमेंट्स और ट्रीटमेंट

  • पारदर्शिता-कारपेट एरिया के आधार पर बिक्री

  • पैसे की सुरक्षा और उपयोगिता पर पारदर्शिता


एजेंट्स: जानिए क्या है RERA



  • सेक्टर का एकत्रीकरण (अनिवार्य स्टेट  रजिस्ट्रेशन की वजह से)

  • बेहतर पारदर्शिता

  • बेहतर कार्यकुशलता

  • शानदार प्रथाओं को अपनाने से कम मुकदमेबाजी


पढ़िए ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी यहाँ

बुधवार, 25 सितंबर 2019

फ्रेशर्स को रिज्यूमे बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना है।


फ्रेशर्स के लिए इंटरव्यू और रिज्यूमे टिप्स: किसी भी जॉब को हासिल करने की सबसे पहली सीढ़ी रिज्यूमे ही होता है।फ्रेशर्स को जॉब नही मिलने के सबसे बड़े कारणों में से एक है उनका रिज्यूमे ढंग का नही बना होना। जब एक ही प्रोफाइल के लिए एक जैसे क्वालिफाईड में से कुछ लोगों को ही चुना जाता है तो उनके रिज्यूमे में ऐसा क्या अलग होता है जिससे उनका रिज्यूमे शॉर्टलिस्ट कर लिया जाता है।


If you are a fresher and going to a job interview, then today we are going to give you some tips here. That will help a lot in a job interviews.

फ्रेशर्स के लिए इंटरव्यू और रिज्यूमे टिप्स

फ्रेशर्स रिज्यूमे बनाते समय रखें इन खास बातों का ध्यान (Resume Tips For Freshers)-


1. रिज्यूमे इंट्रेस्टिंग हो-


आपका रिज्यूमे आपका फर्स्ट इंप्रैशन होता है इसलिए रिज्यूमे को छोटा और इंट्रेस्टिंग बनाएं। कोई भी नियोक्ता किसी भी रिज्यूमे को पढ़ने के लिए औसतन 6 सेकंड का समय लेता है इसलिए इस बात का ध्यान रखा जाए कि इन 6 सेकंडों में ही उसे इंप्रैस कर लिया जाए। इसलिए छोटा और आकर्षक रिज्यूमे बनाया जाए और उसमें सिर्फ उन्ही प्वॉइंट्स को हाइलाइट करें जो कि आपके मजबूत पक्ष में शामिल हो। रिज्यूमे बड़ा और कंफ्यूज क्रिएट करने वाला बिल्कुल भी नही बनाएं। इस बात का भी ध्यान रखे कि आपका रिज्यूमे नियोक्ता को भटकाए या इरिटेट नही करें।



2.इंट्रोडक्शन देते समय कॉन्फिडेंट रहे-


किसी भी इंटरव्यू का सबसे पहला क्वेश्चन होता है इंट्रोडक्शन देना। इसलिए इंट्रोडक्शन के लिए पहले ही प्रैक्टिस कर लें अगर आप इंट्रोडक्शन देते हुए अटके तो इसका मतलब साफ है कि आपमें कॉन्फिडेंस की कमी है। खासकर फ्रेशर को इंट्रोडक्शन देने में दिक्कतें आती है इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि पहले ही खुद को प्रजेंट करने की अच्छे से प्रैक्टिस कर लें। अगर आप इंटरव्यू देते समय गड़बड़ी कर देंगे तो आगे आपका इंटरव्यू कभी अच्छा नही जाएगा।



3.कंपनी के बारे में पहले से जान लें-


इंटरव्यू में जाने से पहले कंपनी के बारे में अच्छे से जरूर जान लें। अधिकतर इंटरव्यू में फ्रेशर्स से कंपनी के बारे में पूछा जाता है ऐसे में अगर आप कंपनी के बारे में ठीक से नही बता पाते है तो ये माना जाता है कि आप उस जॉब या इंटरव्यू को लेकर सीरियस नही है। कंपनी के बारे में लेटेस्ट जानकारी जानने के लिए आप उनकी ऑफिसियल वेबसाइट पर जा सकते है। इसके अलावा अगर आप किसी के रिफरेंस से जा रहे है तो उससे भी उस कंपनी के बारे में जान सकते है।



4.पर्सनल डिटेल-


रिज्यूमे बनाते समय सबसे पहले आपको अपनी पर्शनल डिटेल्स के बारे में बताना होता।एक फ्रेशर को अपने रिज्यूमे में अपना पूरा नाम, पता, जन्मतिथि, कॉन्टेक्ट नंबर और ईमेल आईडी देना चाहिए इसके अलावा पर्शनल डिटेल्स में कोई अन्य बात नही होनी चाहिए। पर्सनल डिटेल में सिर्फ इतनी बातें ही बताएं।


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5.करियर ऑब्जेक्टिव-


एक फ्रेशर्स के लिए करियर ऑब्जेक्टिव के बारे में बताना जरूरी होता है क्योंकि उसके पास एक्सपीरियंस के बारे में बताने को कुछ नही होता है। करियर ऑब्जेक्टिव के बारे में बताते हुए आप अपने करियर में क्या हासिल करना चाहते है उसकी समरी लिख सकते है। लेकिन इतना ध्यान रखें कि करियर ऑब्जेक्टिव के बारे में आप जिस प्रोफाइल के लिए आवेदन कर रहे है उससे मिलता जुलता ही लिखें।



6.क्वालिफिकेशन-


यहां पर आपको अपने एजुकेशन के बारे में लिखना है। आपने जिस इंस्टीट्यूट से ग्रेजुएशन अथवा पोस्ट ग्रेजुएशन किया है उसके बारे में डिटेल में लिखे। इसमें कोर्स का नाम, पासिंग ईयर, इंस्टीट्यूट का नाम शामिल होना चाहिए। साथ ही अगर आपको कोई अवार्ड मिला है तो उसके बारे में भी यहां पर लिख सकते है।



7.एडिशनल कोर्सेस अथवा डिप्लोमा-


अगर आपने अपनी पढ़ाई के अलावा कोई एडिशनल कोर्स या डिप्लोमा कोर्स किया है तो उसके बारे में भी लिखें। इसके अलावा आपने किसी आर्ट फॉर्म की ट्रेनिंग ली है तो उसके बारे में भी यहां पर बता सकते है।



8.एक्सपीरियंस-


फ्रेशर्स को अधिकतर ये कंफ्यूजन रहता है कि एक्सपीरियंस में क्या लिखा जा सकता है। लेकिन अगर आपने उस जॉब से संबंधित कोई ट्रेनिंग ली है या इंटर्नशिप की है तो उसके बारे में डिटेल में लिख सकते है। इसके अलावा कोई पार्ट टाइम जॉब किया है तो उसके बारे में भी लिख सकते है।



9.हॉबिज और स्किल्स-


अपनी हॉबी और स्किल के बारे में भी जरूर लिखे। लेकिन सिर्फ उन्ही स्किल और हॉबी के बारे में लिखे जिसके बारे में वास्तव में आप जानते है। क्योंकि हो सकता है इंटरव्यू के दौरान आपसे उस हॉबी के बारे में पूछा जाए।



10.रिफरेंस-


अगर आप फ्रेशर है तो किसी का रिफरेंस आपके बहुत काम आ सकता है। किसी अपने परिचित से आप उनका रिफरेंस ले सकते है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें रिफरेंस में किसी का नाम और नंबर देने से पहले उसको इस बारे में बता जरूर दें।



11.जब सैलरी के बारे में बात करें-


किसी भी जॉब को करने का आखिरी में एक ही मकसद है पैसा कमाना, इसलिए आप फ्रेशर हो या एक्सपीरियंस आपसे सैलरी के बारे में जरूर पूछा जाएगा। इंटरव्यू के दौरान आपसे सैलरी एक्सपेक्टेशन के बारे में पूछा जाएगा ऐसे में फ्रेशर होने के नाते आपको सैलरी फिगर बताने में सावधानी रखनी जरूरी है। इसके लिए आप 'एज पर कंपनी स्टैंडर्ड' बोलकर भी सैलरी के बारे में बता सकते है।


बृहन्मुंबई महानगरपालिका वाहनचालक भरती 2020

मंगलवार, 24 सितंबर 2019

पिंपल मुंहासे से बचाव


मुंहासे क्या हैं?


जब हमारी त्वचा पर मौजूद तेल ग्रंथियां बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाती हैं, तो मुंहासों का जन्म होता है। हथेलियों और तलवों को छोड़कर, ये तेल ग्रंथियां हमारे पूरे शरीर की त्वचा पर मौजूद होती हैं। त्वचा के रोम छिद्र अंदर से इन तेल ग्रंथियों वाली कोशिकाओं से जुड़े होते हैं। यही रोम छिद्र सीबम पैदा करते हैं, जो त्वचा की खूबसूरती और उसके भीतर तेल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। जब हमारे शरीर में हार्मोनल बदलाव होता है, तो हमारी त्वचा की तेल ग्रंथियों में तेल संतुलन बिगड़ जाता है। इस संतुलन के बिगड़ने की वजह से ही हमारी त्वचा पर मुंहासे नज़र आने लगते हैं।

पिंपल/मुंहासों के प्रकार – Types of Pimples in Hindi


पिंपल छह प्रकार के होते हैं:


पेपुल्स (Papules) – ये गुलाबी रंग के ठोस दाने होते हैं, जिनकी वजह से कभी-कभी दर्द भी होता है।

फुंसी या दाना (Pustules) – ये छोटे दाने होते हैं, जिनके मुंह में मवाद भरा होता है।

नोड्यूल्स (Nodules) – ये त्वचा पर थोड़ी गहराई में पनपते हैं। इनका आकार बड़ा होता है और इनकी वजह से दर्द भी होता है।

पुटी (Cysts) – ये त्वचा पर ज़्यादा गहराई में पनपते हैं और इनकी वजह से दर्द भी हो सकता है। फुंसी की तरह ही इनमें भी मवाद भरा होता है। कई बार ये ठीक होने के बाद त्वचा पर दाग छोड़ देते हैं।

पिंपल/मुंहासे के लक्षण – Pimple Symptoms in Hindi


पिंपल निकलने का कोई खास लक्षण नहीं होता है। लेकिन, कभी-कभी जहां पिंपल निकलने वाला हो, वहां आपको दर्द महसूस हो सकता है। अगर लगातार कुछ दिनों से आपको पेट से जुड़ी परेशानियां हो रही हों या आप तनाव में हों, तो भी पिंपल हो सकते हैं। सच तो ये है कि पिंपल का होना या न होना, त्वचा और शरीर की बनावट पर निर्भर करता है। इसका कोई निर्धारित लक्षण नहीं होता है।

पिंपल/मुंहासे होने के कारण – What Causes Pimple in Hindi


1. अनुवांशिकता


पिंपल की समस्या अनुवांशिक हो सकती है। अगर आपके परिवार में किसी को बार-बार पिंपल होते हैं, तो आपको भी पिंपल की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

2. हार्मोनल बदलाव


बढ़ती उम्र के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से भी पिंपल होते हैं। खासकर महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के समय शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण पिंपल हो सकते हैं।

3. दवाओं के कारण


कभी-कभी तनाव, मिर्गी या मानसिक बीमारी से जुड़ी कुछ दवाओं के सेवन से भी पिंपल निकल सकते हैं।

4. कॉस्मेटिक का ज़्यादा इस्तेमाल


कॉस्मेटिक यानी सौंदर्य प्रसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल करने से पिंपल निकल सकते हैं। कई बार महिलाएं पूरे दिन मेकअप में रहती हैं और रात को ठीक से मेकअप नहीं उतारती हैं। इस वजह से भी पिंपल हो सकते हैं। इसलिए, महिलाओं को हल्का मेकअप करने और नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

5. खानपान से जुड़ी बुरी आदतें


न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और द अकादमी ऑफ़ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स की ओर से प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च ग्लाइसेमिक भोजन, जैसे – बेकरी के खाद्य पदार्थ और हाई शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन करने से भी पिंपल होते हैं। (5) इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट, ऑयली चीज़ें और जंक फ़ूड के ज़्यादा सेवन से भी पिंपल हो सकते हैं।

6. तनाव


ज़्यादा समय तक तनाव में रहने से भी पिंपल की परेशानी हो सकती है। जब आप तनाव में होते हैं तो आपके शरीर के अंदर कुछ बदलाव होते हैं जिस कारण पिंपल हो सकता है। दरअसल, तनाव से न्यूरोपैट्राइड्स नामक रसायन निकलता है जिससे तनाव और भी बढ़ सकता है।

7. बदलता मौसम और प्रदूषण


ज़्यादा समय तक धूल-मिट्टी और प्रदूषित वातावरण में रहने से पिंपल होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, अगर आप एक शहर से दूसरे शहर तक ज़्यादा आना-जाना करते हैं, तो बदलते मौसम के कारण भी आपको पिंपल हो सकते हैं।

पिंपल/मुंहासे का इलाज – Pimple Treatments in Hindi


लेज़र उपचार –


उपचार की इस आधुनिक विधि में मुंहासे में मौजूद बैक्टीरिया को मारने के लिए स्पंदित लेज़र किरणों का इस्तेमाल किया जाता है। यह विधि मुंहासों को नियंत्रित करती है और भविष्य में मुंहासे होने की आशंका को कम करती है।

होम्योपैथिक उपचार –


उपचार की इस विधि में मुंहासे होने की मूल वजह को दूर करने पर ध्यान दिया जाता है। यह एक समग्र उपचार विधि है, जो मुंहासे के ब्रेकआउट से राहत पाने में आपकी मदद कर सकती है। मुंहासे के इलाज के लिए होम्योपैथी के डॉक्टर आमतौर पर सल्फ़र, काली ब्रोमैटम, आर्कटियमलाप्पा, बेलाडोना और नक्स वोमिका से बनी दवाओं के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। हालांकि, आपको डॉक्टर की सलाह लिए बिना किसी भी तरह की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।

हर्बल उपचार –


इस उपचार विधि में आमतौर पर घर में या घर के आस-पास पाई जाने वाली चीज़ों, जैसे हल्दी, नीम, लहसुन, एलोवेरा आदि की सहायता से इलाज होता है।

ब्लू लाइट से उपचार –


यह मुंहासे के इलाज की सबसे नई विधि है। इसका इस्तेमाल लाल मुंहासों और सूजन वाले मुंहासों के इलाज के लिए किया जाता है। दरअसल, प्रोपेयोनिबैक्टीरियम एकनेस नाम के बैक्टीरिया को मुंहासों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है। हमारी त्वचा की तेल ग्रंथियों में रहने वाला यह बैक्टीरिया नीली रोशनी के संपर्क में आते ही नष्ट हो जाता है। इसके अलावा, नीली रोशनी की गर्मी से त्वचा की तेल ग्रंथियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे कम सीबम बनता है। मुहांसो के लिए यह एक अच्छा उपचार हो सकता है।

आयुर्वेदिक उपचार –


मुंहासे के उपचार की आयुर्वेदिक विधि और हर्बल विधि में आमतौर पर एक जैसी जड़ी-बूटियों का ही इस्तेमाल होता है। आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने के लिए सूखी और ताज़ी जड़ी-बूटियों को एक निश्चित मात्रा में आपस में मिलाया जाता है। आयुर्वेद के वैद्य मुंहासों के इलाज के लिए आमतौर पर त्रिफला गुगुलु, चंदनासवा और सरीवद्यासवा जैसी आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं।

How to Remove Pimples at Home in Hindi

पिंपल/मुंहासे हटाने के घरेलू उपाय –Pimple Home Remedies in Hindi


1. बर्फ़ – Ice


एक छोटे बर्फ़ के टुकड़े को एक साफ़ कपड़े में लपेट लें।
अपने पिंपल के ऊपर धीरे-धीरे उस बर्फ़ के टुकड़े को रगड़ें। लेकिन ध्यान रखें कि आप ज़्यादा देर तक बर्फ़ को पिंपल पर न रखें।
आप ऐसा दो से तीन मिनट तक करें।
पिंपल पर बर्फ़ रगड़ने से उसकी सूजन कम होती है और वो धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। (6) (7) अगर पिंपल निकलने की शुरुआत होते ही ये नुस्खा आज़माया जाए, तो इससे ज़्यादा फ़ायदा होता है।

2. टूथपेस्ट – Toothpaste


आप रूई में थोड़ा सा टूथपेस्ट लेकर पिंपल पर लगाएं। ऐसा करने से आपके पिंपल का आकार घट सकता है। ध्यान रहे कि आप सफ़ेद टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करें, जेल टूथपेस्ट का नहीं।
ये नुस्खा आप रात में आज़माएं और सुबह उठकर चेहरा पानी से धो लें।

3. मुल्तानी मिट्टी – Fullers Earth


दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी,एक चम्मच गुलाब जल,चार से पांच बूंद नींबू का रस को मिलाकर एक पेस्ट बना लें। आप चाहे तो इसमें थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं।
हाथ से इस पेस्ट को पूरे चेहरे पर या सिर्फ़ पिंपल वाली जगह पर लगाएं।
इस पेस्ट को दस से पंद्रह मिनट तक लगाकर रखें फिर पानी से धो लें।
मुल्तानी मिट्टी ना सिर्फ़ त्वचा की गंदगी को बाहर निकालती है, बल्कि त्वचा से बेकार तेल को भी खींच लेती है। साथ ही यह मिट्टी रक्त प्रवाह को बढ़ाती है। यह मिट्टी खासतौर पर तैलीय त्वचा के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद होती है।
अगर आपकी त्वचा रूखी है, तो इस नुस्खे का इस्तेमाल थोड़ा ध्यान से करें। दरअसल, पेस्ट को ज़्यादा देर तक लगाकर रखने से आपकी त्वचा का रूखापन बढ़ सकता है।

4. एलोवेरा – Aloe vera


इसमें कुछ खास तैयारी की ज़रूरत नहीं पड़ती है। एलोवेरा को जब आप तोड़ेंगे, तो आपको उसके अंदर एक द्रव्य दिखेगा। आपको उसी द्रव्य या जेल का इस्तेमाल करना होता है।
एलोवेरा से निकले जेल को सीधे पिंपल वाली जगह पर लगाएं।
जेल को दस से पंद्रह मिनट तक पिंपल पर लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
चेहरे और पीठ पर मौजूद मुंहासों के इलाज के लिए एलोवेरा जेल को मुंहासे वल्गैरिस उपचार में और पूरे चेहरे और पीठ में उपयोग में लाया जाता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीइन्फ़्लैमेट्री गुण त्वचा में होनी वाली सूजन और जलन को कम करते हैं।

5. नींबू – Lemon


एक छोटी कटोरी में नींबू का रस निकाल लें और उस रस में रुई का छोटा-सा टुकड़ा डुबो लें।
सोने से पहले रुई से नींबू के रस को पिंपल वाली जगह पर लगाएं।
नींबू त्वचा की जलन और सूजन को कम करने में मदद करता है। नींबू में एंटीमाइक्रोबायल और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मार देते है। नींबू का रस पिंपल के दाग़ मिटाने में भी कारगर साबित हो सकता है।
अगर आपकी त्वचा थोड़ी ज़्यादा संवेदनशील है, तो इस नुस्खे के इस्तेमाल में सावधानी बरतें। नींबू का रस आपकी त्वचा को रूखा बना सकता है और आपकी त्वचा में जलन भी हो सकती है।

6. लहसुन – Garlic


लहसुन की कलियों का पेस्ट बनाकर उसमें थोड़ा-सा पानी मिला लें।
इस पेस्ट को सीधे पिंपल के ऊपर लगाएं। इस्तेमाल से पहले लहसुन का रस पानी में पूरी तरह से घुलने दें। इसके बाद ही तैयार हुए पेस्ट को पिंपल पर लगाएं।
पेस्ट को पांच से दस मिनट तक लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
लहसुन में एलिसिन के एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मुंहासों के लिए ज़िम्मेदार माने जाने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं।

7. शहद – Honey


एक कटोरी में थोड़ी मात्रा में शहद लें।
अपनी उंगली से शहद को पिंपल पर लगाएं।
अब इसे 20 से 25 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। फिर पानी से पिंपल वाली जगह को धो लें।
शहद एक चमत्कारी मास्क है, जो मुंहासों को आसानी से हटाता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है, जो पिंपल पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारता है। इसमें हाइड्रेटिंग गुण भी होते हैं, जिससे त्वचा स्वस्थ होती है।

8. हल्दी – Turmeric


हल्दी में पर्याप्त मात्रा में पानी मिलाकर इसका पेस्ट बना लें।
पेस्ट को उंगली से पिंपल पर अच्छी तरह लगाएं।पिंपल मुंहासे से बचाव
पेस्ट को सूखने के लिए 10 से 15 मिनट का समय दें और फिर उसे पानी से धो लें।
हल्दी एक एंटीसेप्टिक औषधि है। आमतौर पर त्वचा में संक्रमण होने पर हल्दी के लेप का इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि हल्दी त्वचा पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारती है और त्वचा की कोशिकाओं को जल्द ठीक करती है। इसलिए यह पिंपल के उपचार में भी कारगर साबित हो सकती है।

9. गुलाब जल – Rose water


दो चम्मच ग़ुलाब जल में दो चम्मच चंदन पाउडर को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। पिंपल मुंहासे से बचाव
इस पेस्ट को उंगली से पिंपल वाली जगह पर लगाएं।
पेस्ट के अच्छी तरह सूखने तक इंतज़ार करें और फिर इसे पानी से धो लें।
गुलाब जल त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें मौजूद एस्ट्रिंजेंट और स्किन टोनर के गुण मुंहासों के दाग़ मिटाने में मदद करते हैं और त्वचा को ज़रूरी नमी भी प्रदान करते हैं। यह एस्ट्रिंजेंट और स्किन टोनर का काम करता है।

10. नारियल तेल – Coconut oil


एक कटोरी में एक या दो चम्मच नारियल तेल डालकर उसे गुनगुना कर लें।
इसे हर कुछ घंटों में लगाते रहें।
नारियल तेल ठंडा होता है और यह त्वचा को नर्म रखता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसके कारण इसे मॉस्चुराइज़र और लोशन में भी मिलाया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट त्वचा की कोशिकाओं को फ़िर से भरता है। इसलिए, नारियल तेल को हर तरह के पिंपल के इलाज में कारगर माना जाता है।पिंपल मुंहासे से बचाव

11. नीम – Neem


नीम के पत्तों को धूप में अच्छी तरह से सुखाकर पाउडर बना लें।
अब एक चम्मच नीम पाउडर में बराबर मात्रा में मुल्तानी मिट्टी मिला लें।
ज़रूरत के अनुसार इस मिश्रण में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट तैयार करें।
तैयार हुए पेस्ट को उंगली से पिंपल पर लगाएं और इसे सूखने दें।
पेस्ट को 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें और सूखने के बाद उसे पानी से धो लें।
मुंहासों के उपचार के लिए घरेलू नुस्खे के तौर पर नीम का इस्तेमाल काफ़ी प्रचलित है। नीम एक प्राकृतिक एस्ट्रिजेंट है, जिसकी पत्तियों में एंटीफ़ंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा नीम की पत्तियां हमारे खून को साफ़ रखने में मदद करती हैं। इन्हीं खूबियों की वजह से नीम की पत्तियों को पिंपल के उपचार की कारगर औषधि माना जाता है।

12. ग्लिसरीन – Glycerine


बिना किसी तैयारी के ग्लिसरीन को त्वचा पर सीधे भी लगाया जा सकता है।
रुई की सहायता से पिंपल वाली जगह पर थोड़ा-सा ग्लिसरीन लगाएं।
आप दिन में दो से तीन बार पिंपल पर ग्लिसरीन लगा सकते हैं। कुछ घंटों के लिए पिंपल पर ग्लिसरीन लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
यह एक ऐंटिमाइक्रोबायल एजेंट है जिससे त्वचा स्वस्थ होती है। ग्लिसरीन हमारी त्वचा को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है।

13. पपीता – Papaya


पपीता के कुछ टुकड़ों को अच्छी तरह से कुचलकर पेस्ट बना लें।
अपने चेहरे को अच्छी तरह से धो लें और फिर इस पेस्ट को पिंपल पर लगाएं।
10 से 15 मिनट तक इस पेस्ट को लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
पिंपल के इलाज में पपीता को काफ़ी कारगर औषधि माना जाता है। यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है और त्वचा से अत्यधिक तेल को बाहर निकालता है। साथ ही पपीता पिंपल में पस को बनने से रोकता है और त्वचा को मुलायम बनाता है।

पिंपल/मुंहासे से बचाव के लिए क्या खाएं – Diet for Pimples in Hindi


क्या खाएं?


हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, खीरा, शकरकंद, गाजर और शिमला मिर्च खाएं।
मौसमी फलों को अपने भोजन में शामिल करें।
दही का नियमित सेवन करें।
ग्रीन टी पिएं।
अखरोट, काजू और किशमिश का सेवन करें।

क्या ना खाएं?


ज़्यादा तेल वाली चीज़ें या जंक फ़ूड, जैसे- पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स आदि का ज़्यादा सेवन न करें।
ज़्यादा मीठा खाने से परहेज करें।
ऐसी चीज़ों से दूर रहें, जिनमें ग्लिसेमिक की मात्रा अधिक होती है, जैसे – सफ़ेद ब्रेड, सफ़ेद चावल, प्रोसेस्ड फ़ूड आदि।

पिंपल/मुंहासे से बचाव – पिंपल को कैसे रोकें? – Pimple Prevention Tips in Hindi


अपने चेहरे को हर रोज़ दो बार धोएं। इससे आपके चेहरे पर जमने वाली धूल-मिट्टी साफ़ हो जाती है और पिंपल होने का खतरा काफ़ी कम हो जाता है।
अपने मेकअप ब्रश को अच्छी तरह से धोने की आदत डालें। इससे ब्रश में बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं।
हर रोज़ दस से बारह गिलास पानी पिएं ताकि आपके शरीर की अशुद्धियां बाहर निकलती रहें।
अगर कोई पिंपल निकले तो उसे दबाए नहीं। ऐसा करने से पिंपल अन्य जगहों पर फैल सकता है।
ज़्यादा नमक खाने से पिंपल हो सकता है इसलिए सीमित मात्रा में नमक का सेवन करें।
पौष्टिक और संतुलित आहार लेने की आदत डालें।
भाप लें, यह त्वचा के रोमछिद्रों को खोलने में मदद करता है और पिंपल और ब्लैकहेड को आसानी से हटाता है।
हर समय अपने चेहरे को न छुएं। ऐसा करने से हाथ में मौजूद बैक्टीरिया आपके चेहरे की त्वचा तक पहुंच सकता है और आपको पिंपल का शिकार बना सकता है।

 

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सोमवार, 23 सितंबर 2019

चंद्रयान-२



चंद्रयान-२ के बारेमे पूरी जानकारी


चंद्रयान-२ के बारेमे पूरी जानकारी : Chandrayaan-2 is the second lunar exploration mission developed by the Indian Space Research Organisation, after Chandrayaan-1. It consisted of a lunar orbiter, the Vikram lander, and the Pragyan lunar rover, all of which were developed in India.

चंद्रयान-२ या द्वितीय चन्द्रयान, चंद्रयान-1 के बाद भारत का दूसरा चन्द्र अन्वेषण अभियान है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है।अभियान को जीएसएलवी संस्करण 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया। इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल हैं। इन सब का विकास इसरो द्वारा किया गया है। भारत ने चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार 02:43 अपराह्न को सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया।


चंद्रयान-2 लैंडर और रोवर चंद्रमा पर लगभग 70° दक्षिण के अक्षांश पर स्थित दो क्रेटरों मज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच एक उच्च मैदान पर उतरने का प्रयास करेगा। पहिएदार रोवर चंद्र सतह पर चलेगा और जगह का रासायनिक विश्लेषण करेगा। पहिएदार रोवर चन्द्रमा की सतह पर चलेगा तथा वहीं पर विश्लेषण के लिए मिट्टी या चट्टान के नमूनों को एकत्र करेगा। आंकड़ों को चंद्रयान-2 कक्षयान के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जायेगा।


चंद्रयान -1 ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) 14 नवंबर 2008 को चंद्र सतह पर उतरा, जिससे भारत चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया। यूएसएसआर, यूएसए और चीन की अंतरिक्ष एजेंसियों के बाद, चंद्रयान -2 लैंडर की एक सफल लैंडिंग चंद्रमा पर नरम लैंडिंग हासिल करने वाला भारत चौथा देश होगा। सफल होने पर, चंद्रयान -2 सबसे दक्षिणी चंद्र लैंडिंग होगा, जिसका लक्ष्य 67 ° S या 70 ° अक्षांश पर उतरना होगा।


हालाँकि, लगभग 1:52 बजे IST, लैंडर लैंडिंग से लगभग 2.1 किमी की दूरी पर अपने इच्छित पथ से भटक गया और अंतरिक्ष यान के साथ जमीनी नियंत्रण ने संचार खो दिया।


8 सितंबर 2019 को इसरो द्वारा सूचना दी गई कि ओरबिटर द्‍वारा लिए गए ऊष्माचित्र से विक्रम लैंडर का पता चल गया है। परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क नहीं हो पाया है।


चंद्रयान-२ के बारेमे पूरी जानकारी

इतिहास


12 नवंबर 2007 सोमवार को इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (रोसकोसमोस) के प्रतिनिधियों ने चंद्रयान-2 परियोजना पर साथ काम करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। ऑर्बिटर तथा रोवर की मुख्य जिम्मेदारी इसरो की होगी तथा रोसकोसमोस लैंडर के लिए जिम्मेदार होगा.


भारत सरकार ने 18 सितंबर 2008 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अभियान को स्वीकृति दी थी। अंतरिक्ष यान के डिजाइन को अगस्त 2009 में पूर्ण कर लिया गया जिसमे दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अपना संयुक्त योगदान दिया.


हालांकि इसरो ने चंद्रयान -2 कार्यक्रम के अनुसार पेलोड को अंतिम रूप दिया परंतु अभियान को जनवरी 2013 में स्थगित कर दिया गया। तथा अभियान को 2016 के लिये पुनर्निर्धारित किया। क्योंकि रूस लैंडर को समय पर विकसित करने में असमर्थ था। रोसकोसमोस को बाद में मंगल ग्रह के लिए भेज़े फोबोस-ग्रन्ट अभियान मे मिली विफलता के कारण चंद्रयान -2 कार्यक्रम से अलग कर दिया गया। तथा भारत ने चंद्र मिशन को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का फैसला किया।


इस अभियान को श्रीहरिकोटा द्वीप के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान द्वारा भेजे जाने की योजना है; उड़ान के समय इसका वजन लगभग 3,250 किलो होगा।दिसंबर 2015 को, इस अभियान के लिये 603 करोड़ रुपये की लागत आवंटित की गई।


चंद्रयान-२ के बारेमे पूरी जानकारी

चंद्रयान 2 की विशेषताएँ


1. चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर एक Soft लैंडिंग का संचालन करने वाला पहला अंतरिक्ष मिशन हैं।


2. पहला भारतीय मिशन, जो घरेलू तकनीक के साथ चंद्र सतह पर एक soft लैंडिंग का प्रयास करेगा।


3. पहला भारतीय मिशन, जो घरेलू तकनीक के साथ चंद्र क्षेत्र का पता लगाने का प्रयास करेगा।


4. 4th देश जो चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।



ऑर्बिटर


ऑर्बिटर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चन्द्रमा की परिक्रमा करेगा. इस अभियान में ऑर्बिटर को पांच पेलोड के साथ भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। तीन पेलोड नए हैं, जबकि दो अन्य चंद्रयान-1 ऑर्बिटर पर भेजे जाने वाले पेलोड के उन्नत संस्करण हैं। उड़ान के समय इसका वजन लगभग 1400 किलो होगा। ऑर्बिटर उच्च रिज़ॉल्यूशन कैमरा (Orbiter High Resolution Camera) लैंडर के ऑर्बिटर से अलग होने पूर्व लैंडिंग साइट के उच्च रिज़ॉल्यूशन तस्वीर देगा।[1][32] ऑर्बिटर और उसके जीएसएलवी प्रक्षेपण यान के बीच इंटरफेस को अंतिम रूप दे दिया है।[33]लॉन्च के समय, चंद्रयान 2 ऑर्बिटर बयालू के साथ-साथ विक्रम लैंडर में भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) के साथ संचार करने में सक्षम होगा। ऑर्बिटर का मिशन जीवन एक वर्ष है और इसे 100X100 किमी लंबी चंद्र ध्रुवीय कक्षा में रखा जाएगा।



लैंडर


चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह एक चंद्र दिन के लिए कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो लगभग 14 पृथ्वी दिनों के बराबर है।श्री विक्रम के पास, बैंगलोर के पास बयालू में आईडीएसएन के साथ-साथ ऑर्बिटर और रोवर के साथ संवाद करने की क्षमता है। लैंडर को चंद्र सतह पर एक नरम लैंडिंग को निष्पादित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।चन्द्रमा की सतह से टकराने वाले चंद्रयान-1 के मून इम्पैक्ट प्रोब के विपरीत, लैंडर धीरे-धीरे नीचे उतरेगा।  लैंडर किसी भी वैज्ञानिक गतिविधियों प्रदर्शन नहीं करेंगे। लैंडर तथा रोवर का वजन लगभग 1250 किलो होगा। प्रारंभ में, लैंडर रूस द्वारा भारत के साथ सहयोग से विकसित किए जाने की उम्मीद थी। जब रूस ने 2015 से पहले लैंडर के विकास में अपनी असमर्थता जताई। तो भारतीय अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से लैंडर को विकसित करने का निर्णय लिया। रूस लैंडर को रद्द करने का मतलब था। कि मिशन प्रोफ़ाइल परिवर्तित हो जाएगी। स्वदेशी लैंडर की प्रारंभिक कॉन्फ़िगरेशन का अध्ययन 2013 में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र(SAC),अहमदाबाद द्वारा पूरा कि गयी।


चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के लिए अनुसंधान दल ने लैंडिंग विधि की पहचान की। और इससे जुड़े प्रौद्योगिकियों का अध्ययन किया। इन प्रौद्योगिकियों में उच्च संकल्प कैमरा, नेविगेशन कैमरा, खतरा परिहार कैमरा, एक मुख्य तरल इंजन (800 न्यूटन) और अल्टीमीटर, वेग मीटर, एक्सीलेरोमीटर और इन घटकों को चलाने के लिए सॉफ्टवेयर आदि है।लैंडर के मुख्य इंजन को सफलतापूर्वक 513 सेकंड की अवधि के लिए परीक्षण किया जा चुका है। सेंसर और सॉफ्टवेयर के बंद लूप सत्यापन परीक्षण 2016 के मध्य में परीक्षण करने की योजना बनाई है।  लैंडर के इंजीनियरिंग मॉडल को कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के चुनलेरे में अक्टूबर 2016 के अंत में भूजल और हवाई परीक्षणों के दौर से गुजरना शुरू किया। इसरो ने लैंडिंग साइट का चयन करने के लिए और लैंडर के सेंसर की क्षमता का आकलन करने में सहायता के लिए चुनलेरे में करीब 10 क्रेटर बनाए।



“चंद्रयान-2” से भारत देश को होने वाले लाभ –



  • धरती के बाद चांद पर भौगोलिक आधिपत्य की होड़ में भारत अग्रणी बनकर उभरेगा.फ्रांस का अमेरिका के बाद भारत भी सैन्य दृष्टि से

  • महत्वपूर्ण स्पेस कमांड वाला देश बन सकता है.

  • ISRO की शक्तिशाली रॉकेट व भारी-भरकम पेलोड छोड़ने की क्षमता का दुनिया को पता चला.

  • संचार, सेंसर प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में ISRO की क्षमता का प्रदर्शन होगा

  • 2022 में प्रस्तावित भारत के अंतरिक्ष में मानव मिशन ” गगणयान मिशन ” का रास्ता साफ होगा.

  • चांद पर मिशन भेजने वाले तीन ताकतवर देशों के क्लब का चौथा सदस्य बन जाएगा.

  • चंद्रयान-2 में रखे गए पेलोड से मिलने वाले डाटा से वहां पानी और खनिजों की मौजूदगी का पता चलेगा जिससे वैज्ञानिक प्रयोग शुरु होंगे.


रोवर


रोवर का वजन 27 किग्रा है और सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होगा इलेक्ट्रिक पावर जनरेशन क्षमता- 50 W है। चंद्रयान 2 का रोवर प्रज्ञान नाम का 6 पहियों वाला रोबोट वाहन है, जो संस्कृत में 'ज्ञान' का अनुवाद करता है। यह 500 मीटर (½-a-km) तक यात्रा कर सकता है और इसके कामकाज के लिए सौर ऊर्जा का लाभ उठाता है। यह केवल लैंडर के साथ संवाद कर सकता है। रोवर चन्द्रमा की सतह पर पहियों के सहारे चलेगा, मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करेगा, उनका रासायनिक विश्लेषण करेगा और डाटा को ऊपर ऑर्बिटर के पास भेज देगा जहां से इसे पृथ्वी के स्टेशन पर भेज दिया जायेगा.


प्रारंभिक योजना में रोवर को रूस में डिजाइन और भारत में निर्मित किया जाना था। हालांकि, रूस ने मई 2010 को रोवर को डिजाइन करने से मना कर दिया। इसके बाद, इसरो ने रोवर के डिजाइन और निर्माण खुद करने का फैसला किया। आईआईटी कानपुर ने गतिशीलता प्रदान करने के लिए रोवर के तीन उप प्रणालियों विकसित की:


त्रिविम कैमरा आधारित 3डी दृष्टि - जमीन टीम को रोवर नियंत्रित के लिए रोवर के आसपास के इलाके की एक 3डी दृश्य को प्रदान करेगा।
काइनेटिक कर्षण नियंत्रण - इसके द्वारा रोवर को चन्द्रमा की सतह पर चलने में सहायक होगा और अपने छह पहियों पर स्वतंत्र से काम करने की क्षमता प्रदान होगी।
नियंत्रण और मोटर गतिशीलता - रोवर के छह पहियों होंगे,प्रत्येक स्वतंत्र बिजली की मोटर के द्वारा संचालित होंगे। इसके चार पहिए स्वतंत्र स्टीयरिंग में सक्षम होंगे। कुल 10 बिजली की मोटरों कर्षण और स्टीयरिंग के लिए इस्तेमाल कि जाएगी।



पेलोड


इसरो ने घोषणा की है कि एक विशेषज्ञ समिति के निर्णय के अनुसार ऑर्बिटर पर पांच तथा रोवर पर दो पेलोड भेजे जायेंगे हालांकि शुरुआत में बताया गया था कि नासा तथा ईएसए भी इस अभियान में भाग लेंगे और ऑर्बिटर के लिए कुछ वैज्ञानिक उपकरणों को प्रदान करेंगे,इसरो ने बाद में स्पष्ट किया कि वजन सीमाओं के चलते वह इस अभियान पर किसी भी गैर-भारतीय पेलोड को साथ नहीं ले जायेगी.



ऑर्बिटर पेलोड


चन्द्र सतह पर मौजूद प्रमुख तत्वों की मैपिंग (मानचित्रण) के लिए इसरो उपग्रह केन्द्र (ISAC), बंगलौर से लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास) और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL), अहमदाबाद से सोलर एक्स-रे मॉनिटर (XSM).
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से एल और एस बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर); चन्द्र सतह पर वॉटर आइस (बर्फीले पानी) सहित अन्य तत्वों की खोज के लिए. एसएआर से चन्द्रमा के छायादार क्षेत्रों के नीचे वॉटर आइस की उपस्थिति की पुष्टि करने वाले और अधिक साक्ष्य प्रदान किये जाने की उम्मीद है।
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से इमेजिंग आईआर स्पेक्ट्रोमीटर (IIRS); खनिज, पानी, तथा हाइड्रॉक्सिल की मौजूदगी संबंधी अध्ययन हेतु चन्द्रमा की सतह के काफी विस्तृत हिस्से का मानचित्रण करने के लिए.
अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (SPL), तिरुअनंतपुरम से न्यूट्रल मास स्पेक्ट्रोमीटर (ChACE2); चन्द्रमा के बहिर्मंडल के विस्तृत अध्ययन के लिए.
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद से टेरेन मैपिंग कैमरा-2 (टीएमसी-2); चन्द्रमा के खनिज-विज्ञान तथा भूविज्ञान के अध्ययन के लिए आवश्यक त्रिआयामी मानचित्र को तैयार करने के लिए.



लैंडर पेलोड


सेइसमोमीटर - लैंडिंग साइट के पास भूकंप के अध्ययन के लिए [6]
थर्मल प्रोब - चंद्रमा की सतह के तापीय गुणों का आकलन करने के लिए[6]
लॉंगमोर प्रोब - घनत्व और चंद्रमा की सतह प्लाज्मा मापने के लिए[6]
रेडियो प्रच्छादन प्रयोग - कुल इलेक्ट्रॉन सामग्री को मापने के लिए[6]



रोवर पेलोड


लेबोरेट्री फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम्स (LEOS), बंगलौर से लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS).
PRL, अहमदाबाद से अल्फा पार्टिकल इंड्यूस्ड एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (APIXS).



चन्द्रयान-द्वितीय (लैण्डर एवं ऑर्बिटर का सम्मिलित रूप)


मिशन प्रकार चन्द्र कक्षयान , लैंडर तथा रोवर
संचालक (ऑपरेटर) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो)
वेबसाइट www.isro.gov.in/chandrayaan2-home
मिशन अवधि कक्षयान: 1 वर्ष
विक्रम लैंडर: <15 दिन[1]
प्रज्ञान रोवर: <15 दिन[1]
अंतरिक्ष यान के गुण
निर्माता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो)
लॉन्च वजन कुल योग: 3,877 कि॰ग्राम (8,547 पौंड)[2][3]
पेलोड वजन कक्षयान: 2,379 कि॰ग्राम (5,245 पौंड)[2][3]
विक्रम लैंडर:1,471 कि॰ग्राम (3,243 पौंड)[2][3]
प्रज्ञान रोवर : 27 कि॰ग्राम (60 पौंड)[2][3]
ऊर्जा
कक्षयान: 1 किलोवाट[4] विक्रम लैंडर: 650 वाट


प्रज्ञान रोवर: 50 वाट
मिशन का आरंभ
प्रक्षेपण तिथि 15 जुलाई 2019, 21:21 यु.टी.सी (योजना) थी, जो तकनीकी गड़बड़ी के चलते 22 जुलाई 2019 को 02:41 अपराह्न की गई थी।
रॉकेट भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान संस्करण 3[5]
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
ठेकेदार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
चन्द्रमा कक्षीयान
कक्षीय निवेशन सितंबर 6, 2019 (योजना)
कक्षा मापदंड
निकट दूरी बिंदु 100 कि॰मी॰ (62 मील)[6]
दूर दूरी बिंदु 100 कि॰मी॰ (62 मील)[6]


लिथियम ऑयन बैटरी के बारेमे पूरी जानकारी 

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

पितृ पक्ष व श्राद्ध के बारेमे पूरी जानकारी



पितृ पक्ष व श्राद्ध के बारेमे पूरी जानकारी


पितृ पक्ष व श्राद्ध के बारेमे पूरी जानकारी : आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पंद्रह दिन पितृपक्ष (पितृ = पिता) के नाम से विख्यात है। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर पार्वण श्राद्ध करते हैं। पिता-माता आदि पारिवारिक मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात्‌ उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं।
श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ (जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है।) भावार्थ है प्रेत और पित्त्तर के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है।


हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं जिसमे हम अपने पूर्वजों की सेवा करते हैं।


आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक ब्रह्माण्ड की ऊर्जा तथा उस उर्जा के साथ पितृप्राण पृथ्वी पर व्याप्त रहता है। धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति का बड़ा सुन्दर और वैज्ञानिक विवेचन भी मिलता है। मृत्यु के बाद दशगात्र और षोडशी-सपिण्डन तक मृत व्यक्ति की प्रेत संज्ञा रहती है। पुराणों के अनुसार वह सूक्ष्म शरीर जो आत्मा भौतिक शरीर छोड़ने पर धारण करती है प्रेत होती है। प्रिय के अतिरेक की अवस्था "प्रेत" है क्यों की आत्मा जो सूक्ष्म शरीर धारण करती है तब भी उसके अन्दर मोह, माया भूख और प्यास का अतिरेक होता है। सपिण्डन के बाद वह प्रेत, पित्तरों में सम्मिलित हो जाता है।


पितृपक्ष भर में जो तर्पण किया जाता है उससे वह पितृप्राण स्वयं आप्यापित होता है। पुत्र या उसके नाम से उसका परिवार जो यव (जौ) तथा चावल का पिण्ड देता है, उसमें से अंश लेकर वह अम्भप्राण का ऋण चुका देता है। ठीक आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से वह चक्र उर्ध्वमुख होने लगता है। 15 दिन अपना-अपना भाग लेकर शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पितर उसी ब्रह्मांडीय उर्जा के साथ वापस चले जाते हैं। इसलिए इसको पितृपक्ष कहते हैं और इसी पक्ष में श्राद्ध करने से पित्तरों को प्राप्त होता है।पुराणों में कई कथाएँ इस उपलक्ष्य को लेकर हैं जिसमें कर्ण के पुनर्जन्म की कथा काफी प्रचलित है। एवं हिन्दू धर्म में सर्वमान्य श्री रामचरित में भी श्री राम के द्वारा श्री दशरथ और जटायु को गोदावरी नदी पर जलांजलि देने का उल्लेख है एवं भरत जी के द्वारा दशरथ हेतु दशगात्र विधान का उल्लेख भरत कीन्हि दशगात्र विधाना तुलसी रामायण में हुआ है।


भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने हमें अपना जीवन धारण करने तथा उसका विकास करने में सहयोग दिया।


पितृपक्ष में हिन्दू लोग मन कर्म एवं वाणी से संयम का जीवन जीते हैं; पितरों को स्मरण करके जल चढाते हैं; निर्धनों एवं ब्राह्मणों को दान देते हैं। पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार में मृत माता-पिता का श्राद्ध किया जाता है, परंतु गया श्राद्ध का विशेष महत्व है। वैसे तो इसका भी शास्त्रीय समय निश्चित है, परंतु ‘गया सर्वकालेषु पिण्डं दधाद्विपक्षणं’ कहकर सदैव पिंडदान करने की अनुमति दे दी गई है।


एकैकस्य तिलैर्मिश्रांस्त्रींस्त्रीन् दद्याज्जलाज्जलीन्। यावज्जीवकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति।


अर्थात् जो अपने पितरों को तिल-मिश्रित जल की तीन-तीन अंजलियाँ प्रदान करते हैं, उनके जन्म से तर्पण के दिन तक के पापों का नाश हो जाता है। हमारे हिंदू धर्म-दर्शन के अनुसार जिस प्रकार जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है; उसी प्रकार जिसकी मृत्यु हुई है, उसका जन्म भी निश्चित है। ऐसे कुछ विरले ही होते हैं जिन्हें मोक्ष प्राप्ति हो जाती है। पितृपक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण किया जाता हैं। इन्हीं को पितर कहते हैं।
दिव्य पितृ तर्पण, देव तर्पण, ऋषि तर्पण और दिव्य मनुष्य तर्पण के पश्चात् ही स्व-पितृ तर्पण किया जाता है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं। जिस तिथि को माता-पिता का देहांत होता है, उसी तिथी को पितृपक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है।


शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में अपने पितरों के निमित्त जो अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुरूप शास्त्र विधि से श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं और घर-परिवार, व्यवसाय तथा आजीविका में हमेशा उन्नति होती है। पितृ दोष के अनेक कारण होते हैं। परिवार में किसी की अकाल मृत्यु होने से, अपने माता-पिता आदि सम्मानीय जनों का अपमान करने से, मरने के बाद माता-पिता का उचित ढंग से क्रियाकर्म और श्राद्ध नहीं करने से, उनके निमित्त वार्षिक श्राद्ध आदि न करने से पितरों को दोष लगता है। इसके फलस्वरूप परिवार में अशांति, वंश-वृद्धि में रूकावट, आकस्मिक बीमारी, संकट, धन में बरकत न होना, सारी सुख सुविधाएँ होते भी मन असन्तुष्ट रहना आदि पितृ दोष हो सकते हैं। यदि परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई हो तो पितृ दोष के निवारण के लिए शास्त्रीय विधि के अनुसार उसकी आत्म शांति के लिए किसी पवित्र तीर्थ स्थान पर श्राद्ध करवाएँ। अपने माता-पिता तथा अन्य ज्येष्ठ जनों का अपमान न करें। प्रतिवर्ष पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण अवश्य करें। यदि इन सभी क्रियाओं को करने के पश्चात् पितृ दोष से मुक्ति न होती हो तो ऐसी स्थिति में किसी सुयोग्य कर्मनिष्ठ विद्वान ब्राह्मण से श्रीमद् भागवत् पुराण की कथा करवायें। वैसे श्रीमद् भागवत् पुराण की कथा कोई भी श्रद्धालु पुरुष अपने पितरों की आम शांति के लिए करवा सकता है। इससे विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।


मत्स्य पुराण में तीन प्रकार के श्राद्ध प्रमुख बताये गए है। त्रिविधं श्राद्ध मुच्यते के अनुसार मत्स्य पुराण में तीन प्रकार के श्राद्ध बतलाए गए है, जिन्हें नित्य, नैमित्तिक एवं काम्य श्राद्ध कहते हैं।


यमस्मृति में पांच प्रकार के श्राद्धों का वर्णन मिलता है। जिन्हें नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि और पार्वण के नाम से श्राद्ध है।


नित्य श्राद्ध- प्रतिदिन किए जानें वाले श्राद्ध को नित्य श्राद्ध कहते हैं। इस श्राद्ध में विश्वेदेव को स्थापित नहीं किया जाता। यह श्राद्ध में केवल जल से भी इस श्राद्ध को सम्पन्न किया जा सकता है।


नैमित्तिक श्राद्ध- किसी को निमित्त बनाकर जो श्राद्ध किया जाता है, उसे नैमित्तिक श्राद्ध कहते हैं। इसे एकोद्दिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। एकोद्दिष्ट का मतलब किसी एक को निमित्त मानकर किए जाने वाला श्राद्ध जैसे किसी की मृत्यु हो जाने पर दशाह, एकादशाह आदि एकोद्दिष्ट श्राद्ध के अन्तर्गत आता है। इसमें भी विश्वेदेवोंको स्थापित नहीं किया जाता।


काम्य श्राद्ध- किसी कामना की पूर्ति के निमित्त जो श्राद्ध किया जाता है। वह काम्य श्राद्ध के अन्तर्गत आता है।


वृद्धि श्राद्ध- किसी प्रकार की वृद्धि में जैसे पुत्र जन्म, वास्तु प्रवेश, विवाहादि प्रत्येक मांगलिक प्रसंग में भी पितरों की प्रसन्नता हेतु जो श्राद्ध होता है उसे वृद्धि श्राद्ध कहते हैं। इसे नान्दीश्राद्ध या नान्दीमुखश्राद्ध के नाम भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का कर्म कार्य होता है। दैनंदिनी जीवन में देव-ऋषि-पित्र तर्पण भी किया जाता है।


पार्वण श्राद्ध- पार्वण श्राद्ध पर्व से सम्बन्धित होता है। किसी पर्व जैसे पितृपक्ष, अमावास्या या पर्व की तिथि आदि पर किया जाने वाला श्राद्ध पार्वण श्राद्ध कहलाता है। यह श्राद्ध विश्वेदेवसहित होता है।


सपिण्डनश्राद्ध- सपिण्डनशब्द का अभिप्राय पिण्डों को मिलाना। पितर में ले जाने की प्रक्रिया ही सपिण्डनहै। प्रेत पिण्ड का पितृ पिण्डों में सम्मेलन कराया जाता है। इसे ही सपिण्डनश्राद्ध कहते हैं।


गोष्ठी श्राद्ध- गोष्ठी शब्द का अर्थ समूह होता है। जो श्राद्ध सामूहिक रूप से या समूह में सम्पन्न किए जाते हैं। उसे गोष्ठी श्राद्ध कहते हैं।


शुद्धयर्थश्राद्ध- शुद्धि के निमित्त जो श्राद्ध किए जाते हैं। उसे शुद्धयर्थश्राद्ध कहते हैं। जैसे शुद्धि हेतु ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए।


कर्मागश्राद्ध- कर्मागका सीधा साधा अर्थ कर्म का अंग होता है, अर्थात् किसी प्रधान कर्म के अंग के रूप में जो श्राद्ध सम्पन्न किए जाते हैं। उसे कर्मागश्राद्ध कहते हैं।


यात्रार्थश्राद्ध- यात्रा के उद्देश्य से किया जाने वाला श्राद्ध यात्रार्थश्राद्ध कहलाता है। जैसे- तीर्थ में जाने के उद्देश्य से या देशान्तर जाने के उद्देश्य से जिस श्राद्ध को सम्पन्न कराना चाहिए वह यात्रार्थश्राद्ध ही है। इसे घृतश्राद्ध भी कहा जाता है।


पुष्ट्यर्थश्राद्ध- पुष्टि के निमित्त जो श्राद्ध सम्पन्न हो, जैसे शारीरिक एवं आर्थिक उन्नति के लिए किया जाना वाला श्राद्ध पुष्ट्यर्थश्राद्ध कहलाता है।


धर्मसिन्धु के अनुसार श्राद्ध के ९६ अवसर बतलाए गए हैं। एक वर्ष की अमावास्याएं'(12) पुणादितिथियां (4),'मन्वादि तिथियां (14) संक्रान्तियां (12) वैधृति योग (12), व्यतिपात योग (12) पितृपक्ष (15), अष्टकाश्राद्ध (5) अन्वष्टका (5) तथा पूर्वेद्यु:(5) कुल मिलाकर श्राद्ध के यह ९६ अवसर प्राप्त होते हैं।'पितरों की संतुष्टि हेतु विभिन्न पित्र-कर्म का विधान है।



पुराणोक्त पद्धति से निम्नांकित कर्म किए जाते हैं :-


एकोदिष्ट श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध, नाग बलि कर्म, नारायण बलि कर्म, त्रिपिण्डी श्राद्ध, महालय श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध कर्म उपरोक्त कर्मों हेतु विभिन्न संप्रदायों में विभिन्न प्रचलित परिपाटियाँ चली आ रही हैं। अपनी कुल-परंपरा के अनुसार पितरों की तृप्ति हेतु श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए। कैसे करें श्राद्ध कर्म महालय श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त घर में क्या कर्म करना चाहिए।


पितृपक्ष के दौरान कभी भी किसी को गलत काम नहीं करना चाहिए अर्थात किसी भी तरीके का गलत काम अन्यथा पित्र अर्थात हमारे पूर्वज हमें श्राप दे देते हैं जिससे हमें पितृदोष का भोगी बनना पड़ता है और जीवन में कई कस्ट झेलने पड़ते हैं इसीलिए विश्वास करिए पूर्वज हमारे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे वह इस इस काल में मान्यता है कि धरती पर उतर आते हैं जो हमारे सभी कर्मों को देख रहे होते हैं तो क्या हमें नहीं लगता हम भी उन्हें खुश रखें ध्यान रहे पूर्वजों का आशीर्वाद जन्म जन्मांतर तक हमारे साथ रहता है अगर हम सत्कर्म अर्थात हमेशा अच्छे काम करते रहेंगे तो वह हमें आशीर्वाद अवश्य देंगे और हमारा जीवन सुखमय और विकास की ओर बढ़ता रहेगा और श्राद्ध अर्थात श्रद्धा भाव से किया गया हर एक कर्मकांड हमारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति दिलाता है और उन्हें अनंत काल तक खुश रखता है।


एक बात और ध्यान रखें हमेशा श्राद्ध या पितृपक्ष के दौरान किया गया कार्य पवित्र मन और श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए ऐसा यह सोचकर नहीं करना चाहिए कि 15 -16 दिन का पितृपक्ष किसी ना किसी तरह निकल जाए बस। हमेशा श्राद्ध करने से पूर्व या पित्र विसर्जन या तिलांजलि या पिंड दान कोई भी कार्य करने से पूर्व पितरों को अर्थात पूर्वजों को अपनी अंतरात्मा ,मन और दिल में उतार लें उनको याद करें उनके कर्मों को याद करें । अपनी गलतियों की क्षमा मांगे।



क्यों जरूरी है श्राद्ध, क्या है पितृ पक्ष का महत्व और क्या है सही तरीका


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में हमारे पूर्वज मोक्ष प्राप्ति की कामना लिए अपने परिजनों के निकट अनेक रूपों में आते हैं। इस पर्व में अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व उनकी आत्मा की शांति देने के लिए श्राद्ध किया जाता है और उनसे जीवन में खुशहाली के लिए आशीर्वाद की कामना की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार जिस तिथि में माता-पिता, दादा-दादी आदि परिजनों का निधन होता है। इन 16 दिनों में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना उत्तम रहता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उसी तिथि में जब उनके पुत्र या पौत्र द्वारा श्राद्ध किया जाता है तो पितृ लोक में भ्रमण करने से मुक्ति मिलकर पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। हमारे पितरों की आत्मा की शांति के लिए ‘श्रीमद भागवत् गीता’ या ‘भागवत पुराण’ का पाठ अति उत्तम माना जाता है।


ज्योतिष में नवग्रहों में सूर्य को पिता व चंद्रमा को मां का कारक माना गया है। जिस तरह सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण लगने पर कोई भी शुभ कार्य का शुभारंभ मना होता है, वैसे ही पितृ पक्ष में भी माता-पिता, दादा-दादी के श्राद्ध के पक्ष के कारण शुभ कार्य शुरू करने की मनाही रहती है, जैसे-विवाह, मकान या वाहन की खरीदारी इत्यादि।



कैसे करें श्राद्ध पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध सामान्यत:


दोपहर 12 बजे के लगभग करना ठीक माना जाता है। इसे किसी सरोवर, नदी या फिर अपने घर पर भी किया जा सकता है। परंपरा अनुसार, अपने पितरों के आवाहन के लिए भात, काले तिल व घिक का मिश्रण करके पिंड दान व तर्पण किया जाता है। इसके पश्चात विष्णु भगवान व यमराज की पूजा-अर्चना के साथ-साथ अपने पितरों की पूजा भी की जाती है। अपनी तीन पीढ़ी पूर्व तक के पूर्वजों की पूजा करने की मान्यता है। ब्राह्मण को घर पर आमंत्रित कर सम्मानपूर्वक उनके द्वारा पूजा करवाने के उपरांत अपने पूर्वजों के लिए बनाया गया विशेष भोजन समर्पित किया जाता है। फिर आमंत्रित ब्राह्मण को भोजन करवाया जाता है। ब्राह्मण को दक्षिणा, फल, मिठाई और वस्त्र देकर प्रसन्न किया जाता है व चरण स्पर्श कर सभी परिवारजन उनसे आशीष लेते हैं।


पित पृक्ष में पिंड दान अवश्य करना चाहिए ताकि देवों व पितरों का आशीर्वाद मिल सके। अपने पितरों के पसंदीदा भोजन बनाना अच्छा माना जाता है। सामान्यत: पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों के लिए कद्दू की सब्जी, दाल-भात, पूरी व खीर बनाना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद पूरी व खीर सहित अन्य सब्जियां एक थाली में सजाकर गाय, कुत्ता, कौवा और चींटियों को देना अति आवश्यक माना जाता है। कहा जाता है कि कौवे व अन्य पक्षियों द्वारा भोजन ग्रहण करने पर ही पितरों को सही मायने में भोजन प्राप्त होता है, क्योंकि पक्षियों को पितरों का दूत व विशेष रूप से कौवे को उनका प्रतिनिधि माना जाता है। पितृ पक्ष में अपशब्द बोलना, ईर्ष्या करना, क्रोध करना बुरा माना जाता है व इनका त्याग करना ही चाहिए। इस दौरान घर पर लहसुन, प्याज, नॉन-वेज और किसी भी तरह के नशे का सेवन वर्जित माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे शु्द्ध घी का दिया जलाकर गंगा जल, दूध, घी, अक्षत व पुष्प चढ़ाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। घर में गीता का पाठ करना भी इस अवधि में काफी अच्छा माना गया है। यह सब करके आप अपने पितरों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यदि इस अवसर पर अपने पूर्वजों के सम्मान में उनके नाम से प्याऊ, स्कूल, धर्मशाला आदि के निर्माण में सहयोग करें तो माना जाता है कि आपके पूर्वज आप पर अति कृपा बनाए रखते हैं।


यह महत्वपूर्ण है कि पितरों को धन से नहीं, बल्कि भावना से प्रसन्न करना चाहिए। विष्णु पुराण में भी कहा गया है कि निर्धन व्यक्ति जो नाना प्रकार के पकवान बनाकर अपने पितरों को विशेष भोजन अर्पित करने में सक्षम नहीं हैं, वे यदि मोटा अनाज या चावल या आटा और यदि संभव हो तो कोई सब्जी-साग व फल भी यदि पितरों को प्रति पूर्ण आस्था से किसी ब्राह्मण को दान करता है तो भी उसे अपने पूर्वजों का पूरा आशीर्वाद मिल जाता है। यदि मोटा अनाज व फल देना भी मुश्किल हो तो वो सिर्फ अपने पितरों को तिल मिश्रित जल को तीन उंगुलियों में लेकर तर्पण कर सकता है, ऐसा करने से भी उसकी पूरी प्रक्रिया होना माना जाता है। श्राद्ध व तर्पण के दौरान ब्राह्मण को तीन बार जल में तिल मिलाकर दान देने व बाद में गाय को घास खिलाकर सूर्य देवता से प्रार्थना करते हुए कहना चाहिए कि मैंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो किया उससे प्रसन्न होकर मेरे पितरों को मोक्ष दें, तो इससे आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है व व्यक्ति का पूर्ण श्राद्ध का फल प्राप्त हो जाता है। यदि माता-पिता, दादा-दादी इत्यादि किसी के निधन की सही तिथि का ज्ञान नहीं हो तो इस पर्व के अंतिम दिन यानी अमावस्या को उनका श्राद्ध करने से पूर्ण फल मिल जाता है।


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