गुरुवार, 8 अगस्त 2019

सुषमा स्वराज



सुषमा स्वराज (१४ फरवरी,१९५२- ०६ अगस्त, २०१९) एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और भारत की पूर्व विदेश मंत्री थीं। वे वर्ष २००९ में भारत की भारतीय जनता पार्टी द्वारा संसद में विपक्ष की नेता चुनी गयी थीं, इस नाते वे भारत की पन्द्रहवीं लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता रही हैं। इसके पहले भी वे केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में रह चुकी हैं तथा दिल्ली की मुख्यमन्त्री भी रही हैं। वे सन २००९ के लोकसभा चुनावों के लिये भाजपा के १९ सदस्यीय चुनाव-प्रचार-समिति की अध्यक्ष भी रही थीं।


अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज ने एस॰डी॰ कालेज अम्बाला छावनी से बी॰ए॰ तथा पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गयीं। वर्ष २०१४ में उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जबकि इसके पहले इंदिरा गांधी दो बार कार्यवाहक विदेश मंत्री रह चुकी थीं। कैबिनेट में उन्हें शामिल करके उनके कद और काबिलियत को स्वीकारा। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।



प्रारम्भिक जीवन


सुषमा स्वराज (विवाह पूर्व शर्मा) का जन्म १४ फरवरी १९५२ को हरियाणा (तब पंजाब) राज्य की अम्बाला छावनी में, हरदेव शर्मा तथा लक्ष्मी देवी के घर हुआ था। उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख सदस्य रहे थे। स्वराज का परिवार मूल रूप से लाहौर के धरमपुरा क्षेत्र का निवासी था, जो अब पाकिस्तान में है। उन्होंने अम्बाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक किया।१९७० में उन्हें अपने कालेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था। वे तीन साल तक लगातार एस॰डी॰ कालेज छावनी की एन सी सी की सर्वश्रेष्ठ कैडेट और तीन साल तक राज्य की श्रेष्ठ वक्ता भी चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ से विधि की शिक्षा प्राप्त की। पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें १९७३ में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला था। १९७३ में ही स्वराज भारतीय सर्वोच्च न्यायलय में अधिवक्ता के पद पर कार्य करने लगी। १३ जुलाई १९७५ को उनका विवाह स्वराज कौशल के साथ हुआ, जो सर्वोच्च न्यायालय में उनके सहकर्मी और साथी अधिवक्ता थे। कौशल बाद में छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे, और इसके अतिरिक्त वे मिजोरम प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है, बांसुरी, जो लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही हैं।६७ साल की आयु में ६ अगस्त, २०१९ की रात ११.२४ बजे सुषमा स्वराज का दिल्ली में निधन हो गया।



राजनीतिक जीवन


७० के दशक में ही स्वराज एन.सी.सी. से जुड़ गयी थी। उनके पति, स्वराज कौशल, सोशलिस्ट नेता जॉर्ज फ़र्नान्डिस के करीबी थे, और इस कारण ही वे भी १९७५ में फ़र्नान्डिस की विधिक टीम का हिस्सा बन गयी। आपातकाल के समय उन्होंने जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल की समाप्ति के बाद वह जनता पार्टी की सदस्य बन गयी। १९७७ में उन्होंने अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के लिए विधायक का चुनाव जीता और चौधरी देवी लाल की सरकार में से १९७७ से ७९ के बीच राज्य की श्रम मन्त्री रह कर २५ साल की उम्र में कैबिनेट मन्त्री बनने का रिकार्ड बनाया था। १९७९ में तब २७ वर्ष की स्वराज हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष बनी।


८० के दशक में भारतीय जनता पार्टी के गठन पर वह भी इसमें शामिल हो गयी। इसके बाद १९८७ से १९९० तक पुनः वह अम्बाला छावनी से विधायक रही, और भाजपा-लोकदल संयुक्त सरकार में शिक्षा मंत्री रही। अप्रैल १९९० में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया, जहाँ वह १९९६ तक रही। १९९६ में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता, और १३ दिन की वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रही। मार्च १९९८ में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव जीता। इस बार फिर से उन्होंने वाजपेयी सरकार में दूरसंचार मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में शपथ ली थी। १९ मार्च १९९८ से १२ अक्टूबर १९९८ तक वह इस पद पर रही। इस अवधि के दौरान उनका सबसे उल्लेखनीय निर्णय फिल्म उद्योग को एक उद्योग के रूप में घोषित करना था, जिससे कि भारतीय फिल्म उद्योग को भी बैंक से क़र्ज़ मिल सकता था।


अक्टूबर १९९८ में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, और १२ अक्टूबर १९९८ को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। हालांकि, ३ दिसंबर १९९८ को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, और राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आई। सितंबर १९९९ में उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के विरुद्ध चुनाव लड़ा। अपने चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने स्थानीय कन्नड़ भाषा में ही सार्वजनिक बैठकों को संबोधित किया था। हालांकि वह ७% के मार्जिन से चुनाव हार गयी। अप्रैल २००० में वह उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में वापस लौट आईं। ९ नवंबर २००० को उत्तर प्रदेश के विभाजन पर उन्हें उत्तराखण्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फिर से सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जिस पद पर वह सितंबर २००० से जनवरी २००३ तक रही। २००३ में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों में मंत्री बनाया गया, और मई २००४ में राजग की हार तक वह केंद्रीय मंत्री रही।


अप्रैल २००६ में स्वराज को मध्य प्रदेश राज्य से राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित किया गया। इसके बाद २००९ में उन्होंने मध्य प्रदेश के विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से ४ लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की। २१ दिसंबर २००९ को लालकृष्ण आडवाणी की जगह १५वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता बनी और मई २०१४ में भाजपा की विजय तक वह इसी पद पर आसीन रही। वर्ष २०१४ में वे विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा लोकसभा की सांसद निर्वाचित हुई हैं और उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। भाजपा में राष्ट्रीय मन्त्री बनने वाली पहली महिला सुषमा के नाम पर कई रिकार्ड दर्ज़ हैं। वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने वाली पहली महिला हैं, वे कैबिनेट मन्त्री बनने वाली भी भाजपा की पहली महिला हैं, वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमन्त्री थीं और भारत की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार पाने वाली पहली महिला भी वे ही हैं। वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।



कीर्तिमान एवं उपलब्धियां


१९७७ में ये देश की प्रथम केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल सदस्या बनीं, वह भी २५ वर्ष की आयु में।
१९७९ में २७ वर्ष की आयु में ये जनता पार्टी, हरियाणा की राज्य अध्यक्षा बनीं।
स्वराज भारत की किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की प्रथम महिला प्रवक्ता बनीं।
इनके अलावा भी ये भाजपा की प्रथम महिला मुख्य मंत्री, केन्द्रीय मन्त्री, महासचिव, प्रवक्ता, विपक्ष की नेता एवं विदेश मंत्री बनीं।
ये भारतीय संसद की प्रथम एवं एकमात्र ऐसी महिला सदस्या हैं जिन्हें आउटस्टैण्डिंग पार्लिमैण्टेरियन सम्मान मिला है। इन्होंने चार राज्यों से ११ बार सीधे चुनाव लडे।
इनके अलावा ये हरियाणा में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की चार वर्ष तक अध्यक्षा भी रहीं।



सुषमा ने राजनीति और सरकार में हमेशा उच्च मानक स्थापित किये


बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुये आज कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पाटीर् (भाजपा) और सरकार में अपनी हर भूमिका का बेहतरीन निर्वहन करते हुये हमेशा उच्च मानक स्थापित किये हैं।


भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री मोदी ने यहां कहा, “भारतीय राजनीति की सशक्त नेत्री, प्रखर वक्ता, पूर्व विदेश मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने पाटीर् और सरकार में अपनी हर भूमिका का बेहतरीन निर्वहन करते हुए हमेशा उच्च मानक स्थापित किये हैं। उनके निधन की खबर से मैं स्तब्ध हूं और सहसा विश्वास ही नहीं हो रहा है कि वे अब हमारे बीच नहीं हैं।”


उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश और पाटीर् के साथ ही उनका निधन मेरी व्यक्तिगत क्षति है। श्रीमती स्वराज के साथ 4०-42 वषोर्ं का लम्बा सम्पर्क रहा है। जब वर्ष 1977 में वह मात्र 25 वर्ष की थीं तो मुजफ्फरपुर में श्री जॉर्ज फनार्ंडीस की सभा में उन्हें सुनने का सौभाग्य मिला था। उन्होंने कहा कि भाजपा और भारतीय राजनीति में श्रीमती स्वराज का स्थान हमेशा रिक्त रहेगा, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनका अचानक हमारे बीच से सदा के लिए चली जाना स्तब्धकारी और अत्यंत दुखदायी है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को असीम शांति प्रदान करें और सबको इस आघात को सहने की शक्ति दें।


स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि वह श्रीमती स्वराज के निधन की खबर से स्तब्ध हैं। वह एक सादगीपसंद, कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और आदर्शवादी नेता थीं। वह भाजपा की वरिष्तम नेताओं में से एक थीं। उनके निधन से भाजपा और देश को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में मुश्किल है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और संकट की इस घड़ी में परिजनों को कष्ट सहन करने की शक्ति दें।


ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि श्रीमती स्वराज भारतीय राजनीति की एक महान हस्ती थी। उन्होंने विदेश मंत्री के कार्यकाल में अपनी बेहतर कार्यप्रणाली एवं संवाद की श्रेष्ठ शैली से अंतरार्ष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की पहचान स्थापित की। वह एक कुशल नेता एवं प्रखर वक्ता थीं। वह एक सफल विदेश मंत्री के रूप में सदैव याद की जाएंगी। ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करें।



सुषमा स्वराज: कैसे उन्होंने जरूरतमंदों की मदद की


Aug 7, 2019, 11:40 AM IST
भारत के विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज के कार्यकाल को उनके मानवीय पक्ष के लिये ज़्यादा माना जायेगा जो 2014-19 के बीच नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान सामने आया। वह सबसे सुलभ मंत्रियों में से एक थीं और सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय थीं। जरूरतमंद लोग अक्सर ट्विटर पर उनसे विदेशों से मदद के लिए टैग करते हैं और वह उनकी मदद करती थीं। इस वजह से वह सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय थीं। यहाँ कुछ उदाहरण हैं कि कैसे स्वराज ने उनमें से कुछ लोगों की मदद की।



सुषमा स्वराज की Love Story किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं, पिता के सामने यूं कह डाला था अपने दिल का हाल


Sushma Swaraj Love Story: देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) का कार्डिक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। वह बीजेपी की एक प्रखर नेता के साथ-साथ मजबूत और साहसी राजनेता थीं। उन्होंने राजनीतिक को लेकर कई बड़े फैसले लिए। वहीं दूसरी ओर उनकी निजी जिंदगी के बारे में बात करें तो शायद ही काफी कम लोगों को पता होगा कि उन्होंने भी लव मैरिज की थी। उस दौर में जहां लड़कियों को पर्दे में रखा जाता था। ऐसे में सुषमा को भी अपनी शादी के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी।



ऐसे हुई थी सुषमा स्वराज की शादी


सुषमा स्वराज की शादी जाने-माने वकील कौशल स्वराज से हुई थी। दोनों को इश्क कॉलेज के दिनों में हुआ था। जिसके बाद दोनों ने 13 जुलाई 1975 में शादी की थी। दोनों की मुलाकात चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हुई थी। शुरुआत में तो दोनों के बीच प्यार की कोई बात नहीं थी। लेकिन दोनों लोग अच्छे दोस्त जरूर बन गए थे। जो आगे चलकर प्यार में तब्दील हो गया। इस बारे में सुषमा ने जब अपने घर पर बताया तो उनके पिता हरदेव शर्मा जो कि RSS से जुड़े हुए थे, काफी नाराज हो गए। हालांकि उनका अपनी बेटी सुषमा से काफी लगाव था, जिसके बाद वह शादी के लिए तैयार हो गए।



कौन है कौशल स्वराज?


स्वराज कौशल मात्र 34 साल की उम्र में देश के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बन गए थे। इसके अलावा वह 1999-2004 तक सांसद भी रहे थे और 1990 से 1993 तक मिजोराम के राज्यपाल भी रह चुके थे।



नहीं रहीं सुषमा स्वराज, आखिरी ट्वीट में कश्मीर पर कहा था- 'इसी का इंतजार था'


पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनकर पूरे देश में शोक की लहर है। बीजेपी ही नहीं, बल्कि विरोधी दलों के नेता भी सुषमा स्वराज के निधन से स्तब्ध हैं। निधन से महज तीन घंटे पहले ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के लेकर ट्वीट किया था। सुषमा स्वराज ने अपने ट्वीट में कहा था, 'मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।'
सुषमा स्वराज ने मौत से कुछ घंटे पहले कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले की सराहना की थी
उन्होंने पीएम को धन्यवाद देते हुए ट्वीट किया था, 'इसी दिन की प्रतीक्षा कर रही थी'
पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के काम की सराहना विपक्षी दलों ने भी की
सुषमा ने इस बार का लोकसभा चुनाव खराब तबीयत का हवाला देते हुए नहीं लड़ा था



सुषमा स्वराज का निधन, शाम 4 बजे होगा अंतिम संस्कार


भारत की पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का मंगलवार रात निधन हो गया. बुधवार शाम चार बजे दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार होगा.


मंगलवार रात को घर पर हुआ था कार्डिएक अरेस्ट
दिल्ली के एम्स अस्पताल में कराया गया भर्ती
रात से ही घर पर श्रद्धांजलि, नेताओं और क़रीबी लोगों का लगा तांता
बुधवार दोपहर 12 से 3 बजे तक दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर पार्टी मुख्यालय में दी जाएगी श्रद्धांजलि
शाम 4 बजे लोधी रोड शवदाह गृह में होगी अंत्येष्टि
67 साल उम्र में हुआ निधन
दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री
बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री
भारत में पहली पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री
सात बार सांसद (6 लोकसभा, 1 राज्यसभा) और तीन बार विधायक
पिछले ही साल सुषमा स्वराज ने ये ऐलान किया था कि वो साल 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी. इस घोषणा के बाद सुषमा के पति और पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने कहा था, ''एक समय के बाद मिल्खा सिंह ने भी दौड़ना बंद कर दिया था. आप तो पिछले 41 साल से चुनाव लड़ रही हैं.''


67 साल की सुषमा राजनीति में 25 बरस की उम्र में आईं थीं. सुषमा के राजनीतिक गुरु लाल कृष्ण आडवाणी रहे थे.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी है.


अपने ट्वीट्स में उन्होंने लिखा है, ''भारतीय राजनीति का एक महान अध्याय ख़त्म हो गया है. भारत अपने एक असाधारण नेता के निधन का शोक मना रहा है, जिन्होंने लोगों की सेवा और गरीबों की ज़िंदगी बेहतर के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. सुषमा स्वराज जी अनूठी थीं, जो करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत थीं. सुषमा जी अद्भुत वक्ता और बेहतरीन सांसद थीं. उन्हें सभी पार्टियों से सम्मान मिला. बीजेपी की विचारधारा और हित के मामले में वो कभी समझौता नहीं करती थीं. बीजेपी के विकास में उन्होंने बड़ा योगदान दिया.''

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