मंगलवार, 23 जुलाई 2019

नाग पंचमी


Nag panchami mahatv: India देश Agricultural Country था और है। Snake खेतों का रक्षण करता है, इसलिए उसे क्षेत्रपाल कहते हैं। जीव-जंतु, चूहे आदि जो फसल को नुकसान करने वाले तत्व हैं, उनका नाश करके सांप हमारे खेतों को हराभरा रखता है।


साँप हमें कई मूक संदेश भी देता है। साँप के गुण देखने की हमारे पास गुणग्राही और शुभग्राही दृष्टि होनी चाहिए। भगवान Dattatraya की ऐसी शुभ दृष्टि थी, इसलिए ही उन्हें प्रत्येक वस्तु से कुछ न कुछ सीख मिली।


नाग पंचमी Naga Panchami  का Festival पूरे India में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह Hindu का एक प्रसिद्ध Festival है। नाग हमारी Culture का अहम हिस्सा है। नागों को धारण करने वाले भगवान Bholenath की पूजा-आराधना करना भी इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इन्हें शक्ति एवं सूर्य का अवतार भी माना जाता है।



नाग पंचमी कब-क्यों मनाई जाती है :


Nag panchami mahatv: हमारे देश में नागपूजा प्राचीनकाल से चली आ रही है। Shravan  माह के शुक्ल पक्ष में पंचमी को Nag Panchami के रूप में मनाया जाता है इसलिए इसे ‘नाग पंचमी' के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है। इस दिन नागों का दर्शन शुभ माना जाता है।



कथा Nag Panchami Story


प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई नहीं था।


एक दिन बड़ी बहू ने घर लीपने को पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं को साथ चलने को कहा तो सभी डलिया (खर और मूज की बनी छोटी आकार की टोकरी) और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने लगी। तभी वहां एक सर्प निकला, जिसे बड़ी बहू खुरपी से मारने लगी।


यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा- 'मत मारो इसे? यह बेचारा निरपराध है।'


यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे नहीं मारा तब सर्प एक ओर जा बैठा। तब छोटी बहू ने उससे कहा-'हम अभी लौट कर आती हैं तुम यहां से जाना मत। यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गई और वहाँ कामकाज में फँसकर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई।


उसे दूसरे दिन वह बात याद आई तो सब को साथ लेकर वहाँ पहुँची और सर्प को उस स्थान पर बैठा देखकर बोली- सर्प भैया नमस्कार! सर्प ने कहा- 'तू भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने के कारण तुझे अभी डस लेता।


वह बोली- भैया मुझसे भूल हो गई, उसकी क्षमा माँगती हूं, तब सर्प बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहिन हुई और मैं तेरा भाई हुआ। तुझे जो मांगना हो, माँग ले। वह बोली- भैया! मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ जो तू मेरा भाई बन गया।


कुछ दिन व्यतीत होने पर वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर उसके घर आया और बोला कि 'मेरी बहिन को भेज दो।' सबने कहा कि 'इसके तो कोई भाई नहीं था, तो वह बोला- मैं दूर के रिश्ते में इसका भाई हूँ, बचपन में ही बाहर चला गया था।


उसके विश्वास दिलाने पर घर के लोगों ने छोटी को उसके साथ भेज दिया। उसने मार्ग में बताया कि 'मैं वहीं सर्प हूँ, इसलिए तू डरना नहीं और जहां चलने में कठिनाई हो वहां मेरी पूछ पकड़ लेना। उसने कहे अनुसार ही किया और इस प्रकार वह उसके घर पहुंच गई। वहाँ के धन-ऐश्वर्य को देखकर वह चकित हो गई।


एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा- 'मैं एक काम से बाहर जा रही हूँ, तू अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। उसे यह बात ध्यान न रही और उससे गर्म दूध पिला दिया, जिसमें उसका मुख बेतरह जल गया। यह देखकर सर्प की माता बहुत क्रोधित हुई।


परंतु सर्प के समझाने पर चुप हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहिन को अब उसके घर भेज देना चाहिए। तब सर्प और उसके पिता ने उसे बहुत सा सोना, चाँदी, जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके घर पहुँचा दिया। Nag panchami mahatv


इतना ढेर सारा धन देखकर बड़ी बहू ने ईर्षा से कहा- भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लाना चाहिए। सर्प ने यह वचन सुना तो सब वस्तुएँ सोने की लाकर दे दीं। यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- 'इन्हें झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए'। तब सर्प ने झाडू भी सोने की लाकर रख दी।


सर्प ने छोटी बहू को हीरा-मणियों का एक अद्भुत हार दिया था। उसकी प्रशंसा उस देश की रानी ने भी सुनी और वह राजा से बोली कि- सेठ की छोटी बहू का हार यहाँ आना चाहिए।' राजा ने मंत्री को हुक्म दिया कि उससे वह हार लेकर शीघ्र उपस्थित हो मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि 'महारानीजी छोटी बहू का हार पहनेंगी, वह उससे लेकर मुझे दे दो'। सेठजी ने डर के कारण छोटी बहू से हार मंगाकर दे दिया।


छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी, उसने अपने सर्प भाई को याद किया और आने पर प्रार्थना की- भैया ! रानी ने हार छीन लिया है, तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह हार उसके गले में रहे, तब तक के लिए सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तब हीरों और मणियों का हो जाए। सर्प ने ठीक वैसा ही किया। जैसे ही रानी ने हार पहना, वैसे ही वह सर्प बन गया। यह देखकर रानी चीख पड़ी और रोने लगी।


यह देख कर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी कि छोटी बहू को तुरंत भेजो। सेठजी डर गए कि राजा न जाने क्या करेगा? वे स्वयं छोटी बहू को साथ लेकर उपस्थित हुए। राजा ने छोटी बहू से पूछा- तुने क्या जादू किया है, मैं तुझे दण्ड दूंगा।


छोटी बहू बोली- राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए, यह हार ही ऐसा है कि मेरे गले में हीरों और मणियों का रहता है और दूसरे के गले में सर्प बन जाता है। यह सुनकर राजा ने वह सर्प बना हार उसे देकर कहा- अभी पहिनकर दिखाओ। छोटी बहू ने जैसे ही उसे पहना वैसे ही हीरों-मणियों का हो गया।


यह देखकर राजा को उसकी बात का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं भी पुरस्कार में दीं। छोटी वह अपने हार और इन सहित घर लौट आई।


उसके धन को देखकर बड़ी बहू ने ईर्षा के कारण उसके पति को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है। यह सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी।


तब उसी समय सर्प ने प्रकट होकर कहा- यदि मेरी धर्म बहिन के आचरण पर संदेह प्रकट करेगा तो मैं उसे खा लूँगा। यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बड़ा सत्कार किया। उसी दिन से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियाँ सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं। Nag panchami mahatv



नागपंचमी के दिन क्या करना चाहिए


-इस दिन नागदेव का दर्शन अवश्य करना चाहिए।
-बांबी (नागदेव का निवास स्थान) की पूजा करना चाहिए।
-नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि नागदेव को सुगंध प्रिय है।
-ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा का जाप करने से सर्पविष दूर होता है।
-स्त्रियाँ सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं।



नाग पंचमी पूजन विधि


Nag panchami mahatv इस दिन प्रात: नित्यक्रम से निवृ्त होकर, स्नान कर घर के दरवाजे पर पूजा के स्थान पर गोबर से नाग बनाया जता है. मुख्य द्वार के दोनों ओर दूध, दूब, कुशा, चंदन, अक्षत, पुष्प आदि से नाग देवता की पूजा करते है.


इसके बाद लड्डू और मालपूओं का भोग बनाकर, भोग लगाया जाता है. ऎसी मान्यता है कि इस दिन सर्प को दूध से स्नान कराने से सांप का भय नहीं रहता है. भारत के अलग- अलग प्रांतों में इसे अलग- अलग ढंग से मनाया जाता है.



पूजन-विधि


Nag panchami mahatv नाग पंचमी की पूजा करने के लिये प्रात: घर की सफाई करने के बाद पूजन में भोग लगाने के लिये सैंवई-चावल आदि बनायें. देश के कुछ हिस्सों में नागपंचमी के एक दिन पहले खाना बनाकर रख लिया जाता है.


और नागपंचमी के दिन बासी खाना खाया जाता है. पूरे श्रवन मास में विशेषकर नागपंचमी के दिन, धरती खोदना या धरती में हल, नींव खोदना मना होता है.


पूजा के वक्त नाग देवता का आह्वान कर उसे बैठने के लिये आसन देना चाहिए. उसके पश्चात जल, पुष्प और चंदन का अर्ध्य देना चाहिए. नाग प्रतिमा का दूध, दही, घृ्त, मधु ओर शर्कर का पंचामृ्त बनाकर स्नान करना चाहिए. उसके पश्चात प्रतिमा पर चंदन, गंध से युक्त जल चढाना चाहिए.


इसके पश्चात वस्त्र सौभाग्य सूत्र, चंदन, हरिद्रा, चूर्ण, कुमकुम, सिंदूर, बिलपत्र, आभूषण और पुष्प माला, सौभाग्य द्र्व्य, धूप दीप, नैवेद्ध, ऋतु फल, तांबूल चढाने के लिये आरती करनी चाहिए. इस प्रकार पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है. इस दिन नागदेव की पूजा सुगंधित पुष्प, चंदन से करनी चाहिए. क्योकि नागदेव को सुंगन्ध विशेष प्रिय होती है.


नाग पंचमी कि पूजा के लिये इस मंत्र को प्रयोग करना चाहिए. मंत्र इस प्रकार है.


" ऊँ कुरुकुल्ये हुं फट स्वाहा"
इस मंत्र के काल सर्प दोष की शान्ति भी होती है.



भूलकर भी ये ना करें


1. जो लोग भी नागों की कृपा पाना चाहते हैं उन्हें नागपंचमी के दिन ना तो भूमि खोदनी चाहिए और ना ही साग काटना चाहिए.


2. उपवास करने वाला मनुष्य सांयकाल को भूमि की खुदाई कभी न करे.


3. नागपंचमी के दिन धरती पर हल न चलाएं
4. देश के कई भागों में तो इस दिन सुई धागे से किसी तरह की सिलाई आदि भी नहीं की जाती


5. न ही आग पर तवा और लोहे की कड़ाही आदि में भोजन पकाया जाता है.


6. किसान लोग अपनी नई फसल का तब तक प्रयोग नहीं करते जब तक वह नए अनाज से बाबे को रोट न चढ़ाएं.



सांप से डर लगता है या सपने आते हैं...


अगर आपको सर्प से डर लगता है या सांप के सपने आते हैं तो चांदी के दो सर्प बनवाएं. साथ में एक स्वास्त‍िक भी बनवाएं. अगर चांदी का नहीं बनवा सकते तो जस्ते का बनवा लीजिए.


अब थाल में रखकर इन दोनों सांपों की पूजा कीजिए और एक दूसरे थाल में स्वास्त‍िक को रखकर उसकी अलग पूजा कीजिए.


नागों को कच्चा दूध जरा-जरा सा दीजिए और स्वास्त‍िक पर एक बेलपत्र अर्पित करें. फिर दोनों थाल को सामने रखकर 'ऊं नागेंद्रहाराय नम:' का जाप करें.


इसके बाद नागों को ले जाकर शिवलिंग पर अर्पित करेंगे और स्वास्त‍िक को गले में धारण करेंगे.


ऐसा करने के बाद आपके सांपों का डर दूर हो जाएगा और सपने में सांप आना बंद हो जाएंगे.



राहु-केतु से परेशान हों तो क्या करें


एक बड़ी सी रस्सी में सात गांठें लगाकर प्रतिकात्मक रूप से उसे सर्प बना लें. इसे एक आसन पर स्थापित करें. अब इस पर कच्चा दूध, बताशा और फूल अर्पित करें. साथ ही गुग्गल की धूप भी जलाएं.


इसके पहले राहु के मंत्र 'ऊं रां राहवे नम:' का जाप करना है और फिर केतु के मंत्र 'ऊं कें केतवे नम:' का जाप करें.


जितनी बार राहु का मंत्र जपेंगे उतनी ही बार केतु का मंत्र भी जपना है.


मंत्र का जाप करने के बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए एक-एक करके रस्सी की गांठ खोलते जाएं. फिर रस्सी को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. राहु और केतु से संबंधित जीवन में कोई समस्या है तो वह समस्या दूर हो जाएगी.


हरतालिका पूजा की पूरी जानकारी

 

रविवार, 21 जुलाई 2019

सकारात्मक सोच की शक्ति


The Power of Positive Thinking and Attitude (Hindi Story)



सकारात्मक सोच की शक्ति


सकारात्मक सोच की शक्ति : सकारात्मक सोच ऐसा कोई वरदान नहीं है जो सिर्फ उन गुरुओं के पास होता है जो जीने का तरीका सिखाते हैं। यह हर एक के द्वारा अपनाया जा सकता है। आजकल लोगों में निराशावादी विचारधारा का बीज आसानी से पनप जाने से सकारात्मक सोच एक आसरे की तरह काम करता है जिसका आप सहारा ले सकते हैं। यहाँ पर कुछ सुझाव दिए गए हैं जिसके फलस्वरूप आप सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति बन सकते हैं।


सकारात्मक सोच (Positive Thinking) के बिना जिंदगी अधूरी है| सकारात्मक सोच की शक्ति से घोर अन्धकार को भी आशा की किरणों (Lights of Hope) से रौशनी में बदला जा सकता है| हमारे विचारों पर हमारा स्वंय का नियंत्रण होता है इसलिए यह हमें ही तय करना होता है कि हमें सकारात्मक सोचना है या नकारात्मक|



हर विचार एक बीज है – Every Thought is a Seed|


हमारे पास दो तरह के बीज होते है सकारात्मक विचार (Positive) एंव नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) है, जो आगे चलकर हमारे दृष्टिकोण एंव व्यवहार रुपी पेड़ का निर्धारण करता है| हम जैसा सोचते है वैसा बन जाते है (What we think we become) इसलिए कहा जाता है कि जैसे हमारे विचार होते है वैसा ही हमारा आचरण होता है|


यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दिमाग रुपी जमीन में कौनसा बीज बौते है| थोड़ी सी चेतना एंव सावधानी से हम कांटेदार पेड़ को महकते फूलों के पेड़ में बदल सकते है|



कौनसे रंग का चश्मा पहना है? Positive or Negative


जिस तरह काले रंग का चश्मा पहनने पर हमें सब कुछ काला और लाल रंग का चश्मा पहनने पर हमें सब कुछ लाल ही दिखाई देता है उसी प्रकार नेगेटिव सोच से हमें अपने चारों ओर निराशा, दुःख और असंतोष ही दिखाई देगा और पॉजिटिव सोच से हमें आशा, खुशियाँ एंव संतोष ही नजर आएगा|


यह हम पर निर्भर करता है कि सकारात्मक चश्मे से इस दुनिया को देखते है या नकारात्मक चश्मे से| अगर हमने पॉजिटिव चश्मा पहना है तो हमें हर व्यक्ति अच्छा लगेगा और हम प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई खूबी ढूँढ ही लेंगे लेकिन अगर हमने नकारात्मक चश्मा पहना है तो हम बुराइयाँ खोजने वाले कीड़े बन जाएंगे|



नकारात्मक से सकारात्मक की ओर:-


सकारात्मकता (Positivity) की शुरुआत आशा और विश्वास से होती है| किसी जगह पर चारों ओर अँधेरा है और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा और वहां पर अगर हम एक छोटा सा दीपक जला देंगे तो उस दीपक में इतनी शक्ति है कि वह छोटा सा दीपक चारों ओर फैले अँधेरे को एक पल में दूर कर देगा| इसी तरह आशा की एक किरण सारे नकारात्मक विचारों को एक पल में मिटा सकती है|


नकारात्मकता को नकारात्मकता समाप्त नहीं कर सकती, नकारात्मकता को तो केवल सकारात्मकता ही समाप्त कर सकती है| इसीलिए जब भी कोई छोटा सा नकारात्मक विचार मन में आये उसे उसी पल सकारात्मक विचार में बदल देना चाहिए|


उदाहरण के लिए अगर किसी विद्यार्थी को परीक्षा से 20 दिन पहले अचानक ही यह विचार आता है कि वह इस बार परीक्षा (Exam) में उत्तीर्ण नहीं हो पाएगा तो उसके पास दो विकल्प है – या तो वह इस विचार को बार-बार दोहराए और धीरे-धीरे नकारात्मक पौधे को एक पेड़ बना दे या फिर उसी पल इस नेगेटिव विचार को पॉजिटिव विचार में बदल दे और सोचे कि कोई बात नहीं अभी भी परीक्षा में 20 दिन यानि 480 घंटे बाकि है और उसमें से वह 240 घंटे पूरे दृढ़ विश्वास के साथ मेहनत करेगा तो उसे उत्तीर्ण होने से कोई रोक नहीं सकता| अगर वह नेगेटिव विचार को सकारात्मक विचार में उसी पल बदल दे और अपने पॉजिटिव संकल्प को याद रखे तो निश्चित ही वह उत्तीर्ण होगा|


“सकारात्मक सोचना या न सोचना हमारे मन के नियंत्रण में है और हमारा मन हमारे नियन्त्रण में है| अगर हम अपने मन से नियंत्रण हटा लेंगे तो मन अपनी मर्जी करेगा और हमें पता भी नहीं चलेगा की कब हमारे मन में नकारात्मक पेड़ उग गए है|”



ऐसे लायें सकारात्मक सोच


1. अपने रवैये पर नियंत्रण रखें: कई बार आपका यह प्रण करना कि आप कुछ नकारात्मक नहीं सोचेंगे और अपने आस पास फैली नकारात्मकता पर विजयी होंगे, जिंदगी को देखने के आपके नज़रिए को एक नयी दिशा देता है। लोग हमेशा दूसरों को अपनी जिंदगी चलाने का मौका देकर सबसे बड़ी गलती करते हैं। आपको हर हालत में ऐसा करने से बचना चाहिए और अपने जीवन से जुड़े सारे महत्वपूर्ण फैसले खुद लेने चाहिए।


2. ध्यान करें: वैज्ञानिक मानते हैं कि ध्यान के वक़्त, जब दिमाग किसी विशेष विचार की ओर केन्द्रित रहता है तो उससे उर्जा बिखरती है। यह उर्जा इंसान के अन्दर मजबूती लाती है जिससे वह आम जीवन में कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करने में सक्षम होता है। हर दिन कम से कम 10 मिनट तक ध्यान लगाने की कोशिश करें। किसी अँधेरे कमरे का चुनाव करें जहाँ बाधाएं न हों और आँखें बंद कर गहरी सांस लें। अपने दिमाग में से सारे विचार निकाल दें। शुरुआत में यह प्रक्रिया मुश्किल लगेगी पर अभ्यास से यह काफी आसान हो जाएगा। 3. सकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों से मिलें: इस जगत में हर एक इंसान के पास किसी भी विषय को लेकर अपनी एक विचारधारा होती है। सकारात्मक विचारधारा वाले व्यक्तियों से मिलने से आपकी सोच और उद्देश्य भी सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ेंगी, जबकि नकारात्मक सोच रखने वाले लोग आपकी जिंदगी से सकारात्मकता को निकाल देते हैं। ऐसे लोगों के साथ रहे जो आपको सकारात्मक वाईब्स देते हों। आपको अपने आप में परिवर्तन ज़रूर महसूस होगा।


4. अपने लक्ष्य पर टिके रहें: अपना लक्ष्य अपनी दिली अभिलाषा के अनुसार ही चुनें। उसपर हमेशा टिके रहे चाहे वह कितना ही मुश्किल क्यों न दिखे। उनपर विश्वास करना और उनको पाने के लिए मेहनत करना सीखें। दुनिया को आपको देने के लिए कई नए दृष्टीकोण हैं और इनको अगर आप खुले दिमाग और आशावादी सोच रखते हुए अपनाएंगे तो आपकी जिंदगी बदल जायेगी। कड़ी मेहनत करें और अपने लक्ष्य की तरफ हर दिन एक कदम आगे बढायें। एक बार आपने इसे पा लिया तो आप नए जोखिम उठाने की चुनौती ले पायेंगे। हर छोटे या बड़े लक्ष्य को पाने के बाद आपमें अपनी क्षमता को लेकर आत्मविश्वास आएगा।


5. अपनी मानसिक रचना में बदलाव लायें: किसी भी परिस्थिति में आपकी प्रतिक्रिया कैसी होती है यह आपकी सोचने की शक्ति में अंतर ला सकता है। किसी कठिन परिस्थिति में सकारात्मक प्रतिक्रिया देना उस परिस्थिति को आसान बना देता है और आप आसानी से उससे उबर पाते हैं, जबकि नकारात्मक विचारधारा से मुश्किल ज़रुरत से ज्यादा बड़ी दिखती है। आपके सोचने के तरीके में बदलाव से आप दुनिया को नए नज़रिए से देख पायेंगे और आप देख पायेंगे कि दुनिया कितनी सुन्दर है जिसकी आजतक आपने कल्पना भी नहीं की थी।


6. अपने स्वभाव पर सवाल उठाएं?: किसी भी बदलाव का प्रतिरोध करना इंसान की फितरत में शामिल होता है। पर जब आप अपने आप पर सवाल उठाएंगे कि आखिर इस प्रतिरोध का मकसद क्या है, आपको अपने आप मुश्किल इतनी बड़ी नहीं दिखेगी जितना आपने सोच रखा था। इसलिए अपने मकसद पर सवाल उठाना आपके रक्षात्मक स्वभाव को कम करेगा और आपको संभावनाओं को देखने की शक्ति देगा ताकि आपका अनुभव बढ़ सके। आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि सकारात्मक सोच सकारात्मकता लाती है जबकि प्रतिकूल सोच रखने वाले नकारात्मकता को अपने पास बुलाते हैं। इसलिए सकारात्मक सोच कर आप अपने आप को नयी संभावनाओं के लिए खुला रख रहे हैं और अपनी जिंदगी जीने योग्य बना रहे हैं।


गांधीजी के तीन बन्दर के सन्देश

 

बालों के झड़ने के लक्षण और झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान: त्वचा की तरह, बाल भी पूरे शरीर में मौजूद रहते हैं. शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बालों की मोटाई व घनेपन में भी भिन्नता होती है. सभी मनुष्यों में सिर के बाल सबसे ज़्यादा मोटे और घने होते हैं तथा प्रमुखता से नजर आते हैं. बालों का झड़ना केवल आपकी सिर की त्वचा को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है. इसका कारण आनुवांशिक, हारमोनल परिवर्तन, चिकित्सा दशा या औषधियों का प्रभाव हो सकता है. किसी को भी बाल झड़ने की समस्या हो सकती है.


गंजेपन का मतलब है सिर से बालों का गायब होना. बालों के झड़ने का कोई उपचार लेने से पहले किसी एक्सपर्ट से बात करें तथा अपने बालों के झड़ने के कारण तथा उनके संभावित उपचार विकल्पों के बारे में जानकारी ले लें.



बालों के झड़ने के लक्षण


सिर में बालों का धीरे-धारे घटते जाना:


यह बालों के झड़ने का सबसे आम कारण है, जो पुरूषों तथा स्त्रियों दोनों को प्रभावित करता है. पुरूषों में यह अक्सर माथे के दोनों तरफ से एक रेखा में शुरू होता है, जो कि काफी हद तक अंग्रेजी के एम अक्षण जैसा होता है. स्त्रियों में आमतौर पर माथे की हेयरलाइन घनी रहती है लेकिन बालों के बीच का हिस्सा चौड़ा हो जाता है जो कि ‘‘क्रिसमस ट्री’’ से काफी मेल खाता है.



चकत्तों में बालों का झड़ना:


कुछ लोग अपने सिर पर सिक्के के आकार के गंजेपन के चकत्ते महसूस करते हैं जो कि आमतौर पर तब तक अनदेखे रह जाते हैं जब तक कि वे नाई के यहां जाते हैं. इस प्रकार का बालों का झड़ना भवों, बरौनियों, दाढ़ी, छाती, हाथ-परों तथा जननांगों के आसपास भी देखे जा सकते हैं. कुछ मामलें में प्रभावित त्वचा बालों के झड़ने से पहले चिपचिपी या दर्दनाक हो सकती है.



हल्के से छूने से गुच्छों में बालों का झड़ना:


किसी शारीरिक या भावनात्मक आघात से बाल ढीले पड़ सकते हैं. कंघी करने या बालों को धोने या हल्के से सहलाने पर भी मुठ्ठी भर बाल आपके हाथ में आ सकते हैं. इस प्रकार के बालों के झड़ने में आमतौर पर सिर पर बहुत बाल रह जाते हैं, हालांकि चकत्तों में गंजेपन की स्थिति नहीं पैदा होती है.



पूरे शरीर से बालों का झड़ना:


पूरे शरीर से बालों की प्राथमिकता क्षति को एलोपेशिया टोटानिस के रूप में जाना जाता है. कुछ चिकित्सीय उपचारों में, जैसे कि कैन्सर के लिए केमोथेरेपी से भी पूरे शरीर के बाल झड़ सकते हैं. बाद में आमतौर पर बाल फिर से उग आते हैं.



सिर पर रूसी या पपड़ी पड़ने या फंगल इंफेक्शन के कारण बालों का झड़ना:


टिनिया बारबेई जो कि सलून में किसी रैजर के इस्तेमाल के कारण पनप कर दाढ़ी या सिर की त्वचा को प्रभावित करता है, उन हिस्सों पर बालों की क्षति पैदा कर सकता है, क्रेडल कैप एक अन्य फंगल इंफेक्शन है जो शिशुओं को प्रभावित करता है और जिसके कारण उनके बाल ठीक से नहीं उग पाते हैं या टूट जाते हैं. कई बार प्रभावित हिस्सों से रिसाव भी होता है. सिर की त्वचा पर रूसी उत्पन्न होकर त्वचा में खुश्की या स्कैल्प सोरायसिस का कारण बन सकती है जब तक प्रभावित क्षेत्र में बालों की समस्या के कारण का उपचार नहीं किया जाता, बाल ठीक से नहीं उगेंगे तथा टूटते रहेंगे.
बालों के झड़ने के उपचार के लिए बालों के झड़ने के उपचार के लिए बालों के झड़ने के प्रकार तथा कारण का निदान बहुत महत्त्वपूर्ण है.


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान

बाल झड़ने के कारण ये भी हे


1. तनाव


सबसे पहली और अहम वजह तनाव है। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि इस समस्या की जड़ तनाव है। जो शख़्स तनाव की गिरफ्त में आया, उसे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अब तक हुईं विभिन्न रिसर्च में भी यह बात स्पष्ट हुई है कि तनाव के चलते हमारे बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं।



2. आनुवंशिक


बालों के झड़ने एक प्रमुख कारण आनुवंशिक भी है, जिसे एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया कहा जाता है (1)। अमेरिका अकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी का मानना है कि बाल झड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही होता है। अगर आपके परिजनों को यह समस्या रह चुकी है, तो संभवत: आपको भी इसका सामना करना पड़ सकता है।



3. हार्मोन में बदलाव


मेनपॉज होने, गर्भावस्था की स्थिति में या थायराइड होने पर शरीर में हार्मोन बदलने लगते हैं। इस कारण से भी बाल झड़ सकते हैं।



4. असंतुलित भोजन खाना


खानपान में सावधानी न बरतने से भी बाल कमज़ोर होकर गिरने लगते हैं। यह समस्या ज़्यादातर उन लोगों के साथ होती है, जो जंक फूड खाना पसंद करते हैं। जंक फूड में ऐसा कोई पौषक तत्व नहीं होता, जो हमारी सेहत व बालों के लिए अच्छा हो। इसके अलावा, यह समस्या उन्हें भी होती है, जो खानपान में संतुलन नहीं बनाकर रखते यानी नियमानुसार भोजन नहीं करते।



5. केमिकल युक्त उत्पादों का प्रयोग


आजकल सैलून में जाकर विभिन्न तरह के हेयर ट्रिटमेंट करावा फैशन का हिस्सा बन गया है। हम सोचते हैं कि अगर बालों की स्ट्रेटिंग या फिर कलर नहीं करवाया, तो हम सुंदर नहीं दिखेंगे, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि इन सब प्रकिया में केमिकल युक्त उत्पादों का प्रयोग किया है। ये उत्पाद किसी भी लिहाज़ में हमारे बालों के लिए सही नहीं हैं। इनके उपयोग से हम गंजे तक हो सकते हैं।



6. डैंड्रफ


इन दिनों हर कोई डैंड्रफ की समस्या से जूझ रहा है। अगर इसे गंभीरता से न लिया जाए, तो इसके कारण सिर पर जगह-जगह मोटी परत बननी शुरू हो जाती है। यह परत सफेद, सिल्वर या फिर लाल रंग की हो सकती है। इसे सोराइसिस यानी त्वचा संबंधी रोग कहा जाता है और इसी कारण बाल टूटकर गिरने लगते हैं ।



7. प्रोटीन की कमी


हमारे बाल प्रोटीन के कारण बनते, बढ़ते और मज़बूत होते हैं। बालों के लिए इस प्रोटीन को केराटिन कहा जाता है। अगर हमारे भोजन में प्रोटीन की कमी होती है, तो बाल कमज़ोर होने लगते हैं। परिणामस्वरूप बाल रूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं ।



8. एनीमिया


महिलाओं में खून की कमी होना आम बात है, जिस कारण महिलाओं को एनीमिया हो जाता है। यह भोजन में आयरन की कमी के कारण होता है। आयरन की कमी होने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पाती हैं। ये लाल रक्त कोशिकाएं ही हैं, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कर ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण बालों को विकसित होने के लिए ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और टूटकर गिरने लगते हैं ।


इनके अलावा, बुढ़ापा, थायराइड और विटामिन-बी6 व फोलिक एसिड की कमी से भी बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है।


अब हम बात करते हैं बाल झड़ने के घरेलू उपायों के बारे में, जिनकी मदद से हमारे बाल काले, घने व लंबे हो जाएंगे।


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान

झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान


अचानक गंजापन और बालों का झड़ना किसी बीमारी का कारण हो सकता है, इसलिए आपको तुरंत डॉंक्टरी सलाह लेनी चाहिए। आजकल महिलाओं में भी यह समस्या काफी दिख रही है। क्या है इसका कारण और उपाय, बता रहे हैं अजय शर्मा


गंजेपन को डॉंक्टरी भाषा में एलोपेसिया कहते हैं। यह बीमारी आज आम होती जा रही है। पुरुषों में गंजापन ज्यादा देखा जाता है, पर अब महिलाएं भी गंजेपन का शिकार हो रही हैं। बहुत हद तक जीवनशैली से जुड़ी इस बीमारी के कई प्रकार हैं, जिनके कारण भी अलग-अलग हैं। तेजी से बढ़ती इस बीमारी से लड़ने के लिए उपाय भी अनेक उपलब्ध हैं, जिनमें हेयर ट्रांसप्लांट से लेकर घरेलू उपचार तक शामिल हैं।



गंजेपन के प्रकार


एंड्रोजेनिक एलोपेसिया


यह सबसे ज्यादा होने वाला गंजापन है और महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में होता है। इसीलिए इसे पुरुषों का गंजापन भी कहते हैं। इस गंजेपन के लिए टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन संबंधी बदलाव और आनुवंशिकता जिम्मेदार है।



एलोपेसिया एरीटा


इसमें सिर के अलग-अलग हिस्सों से बाल गिरने लग जाते हैं, जिससे सिर पर गंजेपन का पैच-सा लगा दिखाई देता है। यह शरीर की इम्यून (रोग प्रतिरोधक) क्षमता के कमजोर होने के कारण होता है।



ट्रैक्शन एलोपेसिया


यह लंबे समय तक एक ही ढंग से बालों के खिंचे रहने के कारण होता है जैसे किसी खास तरह का हेयरस्टाइल या चोटी रखना।



महिलाओं में गंजेपन का कारण


पहले यह धारणा थी कि गंजापन सिर्फ पुरुषों में ही होता है और महिलाओं के सिर्फ बाल झड़ते हैं, लेकिन अब महिलाओं में भी गंजेपन की समस्या सामने आने लगी है। स्टडी के मुताबिक जब फोलीसाइल सिकुड़ने लगते हैं तो बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं और वहां गंजापन आ जाता है। महिलाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। कई बार इसी समस्या के चलते लम्बे और मोटे बाल, छोटे और पतले बालों में बदल जाते हैं। महिलाओं में एकदम से कभी भी गंजापन नहीं आता। पहले उनके बाल झड़ते हैं, पतले होते होते है और बाद में गंजापन आ जाता है।



महिलाओं में गंजेपन के कारण


आनुवंशिक गुण
उम्र बढ़ने के कारण
सर्जरी, कीमोथेरेपी या किसी दवा के प्रभाव के कारण
मेनोपॉज के कारण।



पुरुषों में गंजापन


पुरुषों में गंजेपन की शुरुआत कनपटी से होती है, जबकि महिलाओं में गंजेपन की शुरुआत बीच की मांग से होती है। दोनों में ही गंजेपन के कारण भिन्न-भिन्न होते हैं।



उपचार का तरीका


एलोपेसिया के उपचार का सबसे पहला चरण है लक्षणों के आधार पर इसकी पहचान। इस दौरान मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का पूरा ब्यौरा लिया जाता है। गंजेपन का पैटर्न, सूजन या संक्रमण का परीक्षण, थायरॉइड और आयरन की कमी की पहचान के लिए ब्लड टैस्ट और हार्मोनल टैस्ट आदि की मदद से इसकी जांच हो सकती है। इसके उपचार के लिए इन दवाओं और विधियों का इस्तेमाल स्थिति की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।



आयरन की पूर्ति


कुछ मामलों में बाल झड़ने की रोकथाम महज आयरन युक्त सप्लीमेंट से ही हो जाती है। विशेष रूप से महिलाओं में गंजेपन के
उपचार के लिए आयरन की गोलियां अधिक प्रभावी हैं।



प्लेटलेट रिच प्लाज्मा थेरेपी (पीआरपी)


इस थेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स से उपचार किया जाता है, जिससे त्वचा को एलर्जी का रिस्क नहीं रहता और बाल उगने शुरू हो जाते हैं।



मेसोथेरेपी


इस थेरेपी के दौरान स्कल्प की त्वचा पर विटामिन और प्रोटीन को सुई की मदद से डाला जाता है। इससे हेयर फोलिकल्स को ठीक कर दोबारा बाल उगाने की कोशिश की जाती है।



लेजर लाइट


कम पावर की लेजर लाइट की मदद से बालों की जड़ों में ऊर्जा का संचार बढ़ाते हैं, जिससे बाल दोबारा उग सकें।



हेयर ट्रांसप्लांटेशन


इस विधि से बालों को एक स्कल्प से दूसरे स्कल्प में स्थानांतरित किया जाता है। इस दौरान एक व्यक्ति के सिर से दूसरे के सिर में बाल इस तरह लगाए जाते हैं कि जिस हिस्से से बाल निकाले गए हों वे दूसरे के सिर में उसी हिस्से पर लगाए जाएं। इसके साथ-साथ बाल झड़ने की रोकथाम से जुड़े अन्य उपचारों को भी किया जाता है। और कुछ ही महीने में आपके सिर पर बालों की स्थिति बेहतर हो जाती है और आपके चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है।



फल भी हैं कारगर


पपीता हेयर पैक


विटामिन-ए से भरपूर पपीता बालों के प्राकृतिक तेल को रीस्टोर कर नमी को बनाए रखने का काम करता है। रूखे बालों के लिए यह रामबाण है। पके हुए पपीते को ऑलिव ऑयल के साथ मिक्स कर बालों में लगाने से बाल मुलायम बनते हैं। पपीते को मसल कर उसमें थोड़ा-सी दही और दो बूंद ग्लिसरीन डालें और इस पेस्ट को 30 मिनट के लिए बालों पर लगा कर छोड़ दें। इस पैक से आपके बालों में चमक आएगी और दो मुंहे बालों से भी छुटकारा मिलेगा।



बाल झड़ने से रोकने के घरेलू इलाज


महंगे कॉस्मेटिक्स पर पैसे बहाने की जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में ही ऐसी चीजें उपलब्ध हैं, जो बाल झड़ने की रोकथाम में मददगार भी हैं। आप इन्हें आजमा कर बालों को घना और खूबसूरत बना सकते हैं।



आलू का रस


आलू को पीस कर इसका जूस निकाल लें और सिर पर लगा कर 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद हल्के शैपू से बाल साफ करें। इससे बालों का गिरना तो कम होगा ही, बालों की कंडीशनिंग भी हो जाएगी, क्योंकि वह नैचुरल कंडीशनर भी है।



मेहंदी की पत्ती


सरसों के तेल में मेहंदी की पत्तियों को उबाल लें। ठंडा हो जाने के बाद इसमें केश तेल, खासकर नारियल का तेल मिला कर नियमित इस्तेमाल करें।



प्याज का जूस


प्याज के रस में सल्फर अच्छी मात्रा में होता है, जो शरीर में कोलाजेन की मात्रा बढ़ाता है। इससे बाल घने होते हैं। प्याज का रस निकाल कर इसे बालों पर 15 मिनट तक लगाएं और फिर शैंपू से बाल साफ करें। आप हल्के गंजेपन के उपचार में प्याज के रस को एलो वेरा के साथ मिला कर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे नहाने से पहले 5 से 15 मिनट तक सिर पर लगा कर रखें।



हिना पैक


मेहंदी से न सिर्फ बालों की रंगत बरकरार रहती है, बल्कि यह बालों को मजबूत भी बनाती है। इसमें हल्का आंवला पाउडर मिला कर लगाने के 15 मिनट बाद धो लें। इससे बालों की कंडीशनिंग होगी और बाल मजबूत रहेंगे।



मेथी


बालों को झड़ने से रोकने में मेथी काफी कारगर है। मेथी के बीज में ऐसे हार्मोन पाए जाते हैं, जो बालों के विकास को बढ़ाने के साथ-साथ हेयर फॉलिकल्स को भी बनाता है। साथ ही इसमें प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड पाया जाता है, जो बाल को बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।



तेल मालिश


नारियल तेल, बादाम तेल, जैतून तेल, कैस्टर तेल और आंवला तेल काफी प्रभावी होता है। इनमें से एक या एक से अधिक तेल से हर दूसरे दिन सिर पर मालिश करें। मालिश करने से पहले तेल को थोड़ा गर्म कर लें, ताकि स्कल्प इसे अच्छे से सोख सके।



घरेलू उपचार


1. नारियल का दूध


सामग्री :एक कप नारियल का दूध
बनाने की विधि :हेयर डाय ब्रश की मदद से नारियल के दूध को अपने सिर पर लगाएं।
इसके बाद सिर को तौलिये से ढक दें और करीब 20 मिनट के लिए इसे छोड़ दें।
अब तौलिये को हटाकर बालों को ठंडे पानी से धो लें।
अंत में बालों को शैंपू से साफ कर लें।
कब करें इस्तेमाल :इस प्रक्रिया को आप हफ़्ते में एक बार कर सकते हैं।

इस तरह है फ़ायदेमंद :नारियल के दूध में प्रचुर मात्रा में विटामिन-ई और फैट होता है, जो बालों को माश्चराज़ कर उन्हें स्वस्थ बनाता है। साथ ही इस दूध में प्रोटीन, मिनरल्स व अन्य ज़रूरी तत्व होते हैं, जो बालों को बढ़ने में मदद करते हैं (5)। नारियल के दूध को सिर पर लगाने से बालों के झड़ने की समस्या कम हो सकती है। इसी प्रकार, नारियल के तेल में भी ये सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो बालों को जड़ से मज़बूत करते हैं।

2. नीम


सामग्री :10-12 नीम की सूखी पत्तियां
पानी से भरा बर्तन
बनाने की विधि :नीम की पत्तियों को पानी में तब तक उबालें, जब तक कि पानी आधा न रह जाए।
इसके बाद पानी को ठंडा होने दें।
अब बालों को इस पानी से धो लें।
कब करें इस्तेमाल :जब भी आप शैंपू करें इस मिश्रण से बालों को ज़रूर धोएं। अगर यह संभव हो, तो हफ़्ते में एक बार कर सकते हैं।


ऐसे है लाभकारी :नीम में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद है, जो डैंड्रफ से लड़ने में मदद करता है। इसके अलावा, यह सिर को साफ कर, बालों को उगने में मदद करता है (6)। नीम, रक्त प्रवाह को संतुलित रखता है, जिस कारण बालों की जड़ों को पर्याप्त पोषण मिलता है और बाल मज़बूत होते हैं। यह सिर से जुओं को खत्म करने में भी कारगर है ।


नोट : नीम मिश्रित पानी आंखों के लिए हानिकारक है। इसलिए, नीम के पानी से सिर धोते समय ध्यान रखें कि यह पानी आंखों में न जाए।



3. मेथी


सामग्री :दो चम्मच मेथी के बीज
चार चम्मच दही
एक अंडा
या फिर एक कप मेथी के बीज
बनाने की विधि :


प्रक्रिया नंबर-1 मेथी के बीज को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें
अगली सुबह, इन बीजों का पेस्ट बना लें।
अब इसमें थोड़ा पानी डालकर मिक्स कर लें।
बाद में इसमें दही और अंडे का सफ़ेद हिस्सा मिला लें।
अब इस पेस्ट को अपने बालों पर लगाएं।
करीब आधे घंटे बाद पानी से बालों को धो लें।
प्रक्रिया नंबर-2 मेथी के बीजों को पानी में डालकर रातभर के लिए छोड़ दें।
अगली सुबह, इन्हें पीसकर पेस्ट तैयार कर लें।
अब इस पेस्ट को बालों की जड़ों से लेकर ऊपरी छोर तक लगाएं और शॉवर कैप से सिर को ढक लें।
करीब 40 मिनट बाद ठंडे पानी से सिर को धो लें।
कब करें इस्तेमाल :बाल झड़ने के इस घरेलू उपाय का आप महीने में एक या दो बार प्रयोग कर सकते हैं।


इस तरह है फ़ायदेमंद :मेथी के बीज बालों को बढ़ने में मदद करते हैं और बालों के रोम छिद्रों का फिर से निर्माण करते हैं। इसके अलावा, ये बालों को मज़बूत व लंबा करते हैं और उनमें प्राकृतिक निखार लाते हैं ।



4. अंडा


सामग्री :


दो अंडे या फिर एक अंडा
एक चम्मच जैतून का तेल
बनाने की विधि :


प्रक्रिया नंबर-1 दोनों को तोड़कर एक कटोरे में डाल लें।
अंडे में से योक यानी पीले हिस्से को अलग कर दें।
अब अंडों को तब तक मिक्स करें, जब तक कि ये गाड़े न हो जाएं।
हेयर डाय ब्रश की मदद से इस पेस्ट को अपने सिर व बालों पर लगाएं।
सिर को शॉवर कैप से ढक लें।
करीब 20 मिनट बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें और फिर शैंपू कर लें।
प्रक्रिया नंबर-2 अंडे के सफ़ेद हिस्से को जैतून के तेल में मिला लें।
पेस्ट बनने तक इसे अच्छे से मिक्स करें और सिर व बालों पर लगाएं।
करीब 15-20 मिनट बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें और बाद में शैंपू कर लें।
कब करें इस्तेमाल :हफ़्ते में कम से कम दो बार इस्तेमाल करें।


ऐसे है लाभकारी :अंडे में प्रोटीन, विटामिन-बी, बायोटिन और ज़रूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो बालों के लिए फ़ायदेमंद हैं (9)।



5. प्याज़ का रस


सामग्री :एक प्याज़
एक कॉटन बॉल
या फिर एक प्याज़
दो चम्मच शहद
थोड़ा-सा गुलाब जल
बनाने की विधि :


प्रक्रिया नंबर-1 प्याज़ को पीसकर उसका रस निकाल लें।
अब इसमें रूई को डुबाकर, रस को बालों की जड़ों से लेकर ऊपरी छोर तक लगाएं।
करीब आधे घंटे बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें और बाद में शैंपू भी करें।
प्रक्रिया नंबर-2 प्याज़ को निचोड़कर उसका जूस निकाल लें।
इसमें दो चम्मच शहद को मिक्स कर दें।
प्याज़ की दुर्गंध को दूर करने के लिए, इसमें गुलाब जल मिला सकते हैं।
इस मिश्रण को अपने बालों में लगाएं और 40-50 मिनट बाद पानी से धो दें।
कब करें इस्तेमाल :


आप इस मिश्रण को हफ़्ते में एक बार अपने बालों पर लगा सकते हैं।


किस प्रकार है लाभकारी :प्याज़ में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है, जो सिर पर संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं को खत्म करने में मदद करता है (10)। इसके अलावा, प्याज़ में उच्च मात्रा में सल्फर पाया जाता है, जो बालों के रोम छिद्रों में रक्त प्रवाह को बेहतर कर, बालों को बढ़ने में मदद करता है ।


नोट : प्याज़ के रस को बालों पर लगाते समय ध्यान रखें कि अगर यह रस आंखों में चला गया, तो आपको जलन महसूस हो सकती है। इसलिए, रस को बालों पर लगाते समय और बाद में सिर धोते समय सावधानी बरतें।


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान

6. मुलेठी


सामग्री : एक चम्मच मुलेठी का पाउडर
एक कप दूध
एक चम्मच केसर
बनाने की विधि :मुलेठी पाउडर व केसर को दूध में डालकर मिक्स कर लें।
रात को सोने से पहले इस मिश्रण को सिर पर उस जगह लगाएं, जहां से बाल उड़ चुके हैं।
अगली सुबह, सिर को अच्छी तरह से धो लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे हफ़्ते में दो बार सिर पर लगाएं।


इस तरह है लाभकारी :मुलेठी में ऐसे गुणकारी तत्व मौजूद हैं, जो सिर से खुजली व डैंड्रफ को पूरी तरह से साफ कर देते हैं। साथ ही बालों को बढ़ने में मदद करते हैं ।



7. ग्रीन टी


सामग्री :दो टी बैग्स (ग्रीन टी)
दो-तीन कप गर्म पानी
बनाने की विधि :दोनों टी बैग्स को गर्म पानी में डाल दें और पानी के ठंडा होने तक का इंतज़ार करें।
टी बैग्स को बाहर निकालकर, पानी से बालों को धो लें।
साथ ही सिर की मसाज करें।
कब करें इस्तेमाल :जब भी आप शैंपू करें, तो बाद में इसे कंडीशनर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।


कैसे करेगा फ़ायदा :ग्रीन टी बालों के रोम छिद्रों को उत्तेजित कर, उन्हें बालों उगाने के लिए प्रेरित करती है। इसके अलावा, यह मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाती है, जिससे बालों को पोषित होने में मदद मिलती है ।



8. चुकंदर


सामग्री :चुकंदर के कुछ पत्ते
दो चम्मच मेहंदी
आधा कप चुकंदर का रस
बनाने की विधि :एक बर्तन में दो कप पानी डालकर गर्म करें और उसमें चुकंदर के पत्ते डाल दें।
पानी को तब तक उबालें, जब तक कि पानी आधा न रह जाए।
अब पत्तियों को निकालकर पीस लें और उनका पेस्ट बना लें।
पेस्ट में मेहंदी और चुकंदर का रस अच्छे से मिला लें।
अब बालों को हल्का-सा गीला करके, ब्रश की मदद से यह पेस्ट बालों पर लगाएं।
करीब 20-30 मिनट बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें।
कब करें इस्तेमाल :आप इसे हफ़्ते में तीन-चार बार इस्तेमाल कर सकते हैं।


क्यों है फ़ायदेमंद :चुकंदर में पोटेशियम, प्रोटीन और विटामिन-बी व सी होता है। ये सभी गुण स्वास्थ बालों के लिए बेहतर ज़रूरी हैं ।


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान

9. हिबिस्कुस पाउडर


सामग्री :10 चाइनीज़ हिबिस्कुस फूल
2 कप शुद्ध नारियल तेल
बनाने की विधि :


प्रक्रिया नंबर-1चाइनीज़ हिबिस्कुस फूल को नारियल के तेल में मिलाकर गर्म कर लें।
जब फूल अच्छी तरह से जल जाएं, तो तेल को अलग कर लें।
इस तेल को हर रात सिर व बालों पर लगाए और अगली सुबह धो लें।
प्रक्रिया नंबर-2चाइनीज़ हिबिस्कुस फूल को अच्छी तरह से मसल दें और नारियल तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें।
अब इस पेस्ट को सिर व बालों पर लगाए और कुछ घंटों बाद धो लें।
कब करें इस्तेमाल :आप इस घरेलू उपचार को बाल झड़ने की दवा के रूप में एक महीने तक हफ़्ते में दो या तीन बार इस्तेमाल करें।


कैसे है लाभकारी :चाइनीज़ हिबिस्कुस फूल में विटामिन-सी, फॉस्फोरस और राइबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो मुलायम व लंबे बालों के लिए जरूरी हैं। यह पुष्प जीवाश्मों को भी नष्ट करने में सक्षम है, जिससे बालों को बढ़ने में मदद मिलती है ।



10. आंवला


सामग्री :


4-5 आंवला
एक कप नारियल तेल
बनाने की विधि :आंवले को नारियल तेल में तब तक उबालें, जब तक कि तेल काला न हो जाए।
जब तेल ठंडा हो जाए, तो इससे सिर व बालों की मालिश करें।
इसके करीब 20-30 मिनट बाद शैंपू से सिर धो लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे हफ़्ते में दो बार बालों पर लगाया जा सकता है।


कैसे करता है फ़ायदा :आंवले को विटामिन-सी का प्रमुख स्रोत माना गया है। विटामिन-सी से न सिर्फ बालों की अच्छी तरह से वृद्धि होती है, अपितु मज़बूती भी मिलती है । विटामिन-सी, कोलेजन का निर्माण करने में भी मदद करता है, जो बलों के विकास के लिए ज़रूरी है। इसके अलावा, यह आयरन को सोख लेता है, जिससे बाल स्वस्थ रहते हैं। इतना ही नहीं आंवला बालों को समय से पहले सफ़ेद होने से रोकता है । आंवले का नियमित रूप से प्रयोग करने पर बालों के रोम छिद्र मज़बूत हो जाते हैं।



11. हिना


सामग्री :एक कप हिना पाउडर
आधा कप दही
बनाने की विधि :दोनों सामग्रियों को एक बर्तन में डालकर मिला लें।
अब इस मिश्रण को अपने बालों पर लगाकर छोड़ दें।
जब बाल सूख जाएं, तो पानी से धोकर शैंपू कर लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे आप महीने में एक बार अपने बालों पर लगा सकते हैं।


कैसे है लाभकारी :


यह पूरी तरह से प्राकृतिक हेयर कलर व कंडीशनर है। इसके उपयोग से बाल सुंदर, स्वस्थ व मज़बूत होते हैं। भारतीय इतिहास में इसका प्रयोग वर्षों से आयुर्वेदिक औषधी के तौर पर किया जा रहा है। अगर इसे अन्य उत्पादों के साथ मिलाकर उपयोग किया जाए, तो बालों के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।



12. नारियल तेल


सामग्री :


एक-दो चम्मच नारियल का तेल
बनाने की विधि :


तेल को हल्का गर्म करके एक कटोरी में डाल लें।
अब इस तेल को सिर पर लगा, हल्के हाथों से सिर व बालों की जड़ों में मालिश करें।
मालिश के बाद या तो आप आधे घंटे बाद सिर धो लें या फिर इसे रात को लगाकर अगली सुबह शैंपू कर सकते हैं।
कब करें इस्तेमाल :


इससे हफ़्ते में एक या दो बालों की मालिश कर सकते हैं।


बालों के लिए है लाभकारी :


नारियल तेल में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो बालों को मज़बूती प्रदान करते हैं और प्राकृतिक सुंदरता देते हैं ।



13. एलोवेरा


सामग्री :एलोवेरा के कुछ पत्ते
बनाने की विधि :एलोवेरा के पत्तों को गर्म पानी में डालकर उबाल लें और फिर उन्हें पीसकर पेस्ट तैयार कर लें।
अब बालों को धोकर, पेस्ट को बालों पर अच्छे से लगाएं।
इसके बाद, हल्के हाथों से सिर की मालिश करें।
करीब 15 मिनट बाद बालों को ठंडे पानी से धो लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे हफ़्ते में तीन दिन लगा सकते हैं। बेहतर होगा कि इसे सुबह नहाते समय लगाएं।


कैसे होता है फ़ायदा :सिर व बालों में मौजूद पीएच लेवल को संतुलित करने में एलोवेरा अहम रोल निभाता है। यह बालों व सिर के अंदर जाकर काम करता है और बालों को टूटकर गिरने से रोकता है।



14. नींबू का रस


सामग्री :एक चम्मच दही
दो चम्मच नींबू का रस
बनाने की विधि :इन सामग्रियों को एक कटोरी में अच्छे से मिला लें।
बालों को धोने से पहले इसे सिर पर हल्के हाथों से लगाएं।
करीब आधे घंटे बाद शैंपू से सिर को धो लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे मिश्रण को हफ़्ते में एक-दो बार लगा सकते हैं। इसे लगाने से बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।


ऐसे है लाभकारी :नींबू में अल्फा-हाइड्रोक्सी एसिड पाया जाता है, जो मृत कोशिकाओं को हटाता है और डैंड्रफ को भी जड़ से खत्म कर देता है। नींब में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जिसे बालों की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है । नींबू, सिर के रोम छिद्रों में कसाव लाता है, जिस कारण बाल झड़ना कम हो जाते हैं।


नोट : नींबू में एसिड होता है, जो आंखों के लिए अच्छा नहीं होता। इसलिए, जब भी नींबू से बना कोई भी मिश्रण सिर पर लगाएं, तो आंखें बंद कर लें। इसके अलावा, नींबू के रस से बने मिश्रण का लगातार इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे बाल ड्राई हो सकते हैं।



15. दही


सामग्री :


एक कटोरी दही
थोड़े से मेथी के दाने
बनाने की विधि :मेथी के दानों को मिक्सी में पीस लें।
अब इस पाउडर को दही में डालकर मिक्स कर लें।
इस मिश्रण को सिर व बालों पर लगाएं और हल्के हाथों से सिर की मालिश करें।
करीब 20 मिनट बाद गुनगुने पानी से बालों को धोकर, शैंपू कर लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे हफ़्ते में एक या दो बार सिर पर लगाया जा सकता है।


इस तरह है फ़ायदेमंद :दही को सबसे अच्छा प्राकृतिक कंडीशनर माना जाता है। इसे लगाने से बाल न सिर्फ मुलायम हो जाते हैं, बल्कि उनमें प्राकृतिक निखार भी आ जाता है। इसके अलावा, दही में प्रोटीन पाया जाता है, जिससे बाल जड़ों से मज़बूत, लंबे व घने होते हैं। दही में विटामिन-डी और बी5 प्रचुर मात्रा में होता है, जो स्वस्थ बालों के लिए ज़रूरी हैं ।



16. आलू


सामग्री :एक आलू
एक चम्मच शह
एक चम्मच पानी
बनाने की विधि :आलू को धोने के बाद, उसका छिलका उतार लें।
इसे छोटे टुकड़ों में काट लें और मिक्सी में पीसकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। पेस्ट बनाने के लिए थोड़ा-सा पानी भी डाल सकते हैं।
इसके बाद पेस्ट को मलमल के कपड़े में डालकर निचोड़ लें।
निचोड़ने से जो रस निकलेगा, उसमें शहद और पानी डालकर मिला लें।
अब इस मिश्रण को अपने सिर व बालों पर लगाएं।
करीब 30 मिनट बाद शैंपू से बाल धो लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे हफ़्ते में एक बार बालों पर लगाएं।


इसलिए है लाभकारी :आलू में पोटेशियम, विटामिन-सी और आयरन पाया जाता है। बालों की देखभाल के लिए, ये सभी तत्व आवश्यक हैं। खासकर पोटिशियम की कमी होने पर बाल टूटकर गिरने लगते हैं (25)।



17. करी पत्ता


सामग्री :थोड़ी-सी हरी करी पत्तियां
एक कटोरी दही
बनाने की विधि :करी की ताज़ी हरी पत्तियों को पानी डालकर पीस लें।
अब इस पेस्ट में दही मिला दें।
इस मिश्रण को सिर व बालों पर लगाने के बाद मालिश करें।
करीब 25 मिनट बाद शैंपू से सिर धो लें।
कैसे करें इस्तेमाल :


इसे हफ़्ते में एक बार लगा सकते हैं।


इस तरह है फ़ायदेमंद :करी पत्ते में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह बालों के लिए टॉनिक का काम करता है। इसके अलावा, यह एंटी फंगल व एंटी इंफ्लेमेटरी के तौर पर भी काम करता है ।



18. धनिया का रस


सामग्री :एक कप कटी हुईं धनिये की पत्तियां
तीन-चार चम्मच पानी
बनाने की विधि :धनिये के पत्तों को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें।
इसके बाद पेस्ट में से रस निकाल कर, हेयर डाय ब्रश के जरिए सिर व बालों पर लगाएं।
करीब एक घंटे बाद शैंपू कर लें।
कब करें इस्तेमाल :आप हफ़्ते में दो-तीन बार सुबह नहाने से पहले इसे सिर पर लगा सकते हैं।


कैसे करता है फ़ायदा :धनिया बालों को मुलायम करता है और उन्हें टूटकर गिरने से रोकता है। साथ ही साथ, यह बालों को बढ़ने में भी मदद करता है।



19. शिकाकाई


सामग्री :


शिकाकाई
एलोवेरा
आंवला
नीम पाउडर
बनाने की विधि :इन सभी सामग्रियों को एक समान मात्रा में लेकर मिलाएं और पेस्ट बना लें।
अब मिश्रण को अपने सिर और बालों पर लगाएं।
थोड़ी देर बाद बालों को गुनगुने पानी से धो लें और शैंपू ज़रूर करें।
कब करें इस्तेमाल :इस घरेलू उपचार को बाल झड़ने की दवा के रूप में महीने में दो बार इस्तेमाल कर सकते हैं।


इसके फ़ायदे :शिकाकाई के प्रयोग से सिर में होने वाली खुजली व जलन से आराम मिलता है। इसके अलावा, यह बालों की जड़ों में जाकर पोषक तत्व प्रदान करता है और डैंड्रफ को खत्म करता है।



20. शहद, जैतून का तेल व दालचीनी


सामग्री :


शहद
जैतून का तेल
दालचीनी
बनाने की विधि :इन सभी सामग्रियों को एक बर्तन में डालकर मिक्स कर लें।
इस पैक को सिर व बालों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें।
फिर बालों को पानी से धोकर, शैंपू कर लें।
कब करें इस्तेमाल :इसे हफ़्ते में एक बार लगाया जा सकता है।


कैसे है लाभप्रद :यह हेयर पैक बालों को उचित मॉश्चराइज़र प्रदान करता है। साथ ही बालों को बढ़ने में मदद करता है।



बालों को झड़ने से रोकने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं


जिस तरह पौष्टिक आहार हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, उसी प्रकार बालों को पोषित करने के लिए सतुंलित भोजन करना जरूरी है। यहां हम जानते हैं कि हमारे बाल न झड़ें, उसके लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान

भोजन में करें शामिल :


पालक
शकरकंद
अखरोट
गाजर
अंडा
बादाम
केला



इन्हें कहें न :


शक्कर युक्त पेय पदार्थ
अत्याधिक मीठा
शराब
जंक फूड
अधिक चाय व कॉफी


झड़ते हैं बाल तो हो जाएं सावधान

क्या करें :


खूब पानी पिएं : पानी जितना पिया जाए, उतना कम होता है। कहा जाता है कि दिन भर में आठ-दस गिलास पानी ज़रूर पीना चाहिए। इससे न सिर्फ हमारी पाचन क्रिया बेहतर होती है, बल्कि हमारे चेहरे पर भी हर समय ताज़गी रहती है। इसके अलावा, पानी पीने से सिर के बाल भी स्वस्थ रहते हैं।


व्यायाम : नियमित व्यायाम करने से शरीर में रक्त का संचार बढ़ जाता है और सिर तक ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में पहुंच पाती है, जिससे बालों का झड़ना कम होता है। कहा भी जाता है कि अगर स्वस्थ रहना है, तो रोज 15 से 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए ।


सिर को रखें साफ : गंदे सिर में संक्रमण होने की आशंका ज़्यादा होती है। इसलिए, निश्चित समयांतराल में सिर को अच्छे शैंपू से धोना चाहिए, ताकि डैंड्रफ जैसी समस्या न हो। इसके अलाव, समय-समय पर हेयर कट करवाना भी ज़रूरी है।


मसाज है ज़रूरी : हफ़्ते में एक बार तो हल्के गुनगुने तेल से सिर की मालिश करनी ही चाहिए। इससे बालों को निश्चित पोषण मिलता है। ध्यान रहे कि मसाज हल्के हाथों से बालों की जड़ों में की जाए। मसाज के एक घंटे बाद बालों को शैंपू से धो लेना चाहिए। इस बीच, बालों को शॉवर कैप से ढक कर रखें, ताकि धूल-मिट्टी बालों से न चिपक जाए।


जिस तरह हम अपने शरीर से प्यार करते हैं और उसकी देखभाल करते हैं, उसी तरह बालों को भी उचित रखरखाव की ज़रूरत है। अगर आप यहां बताए गए इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं, तो निश्चित मानिए कि आपके बालों को कुछ नहीं होगा। उम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा। आप अपने सुझाव नीचे दिए कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं।


बालों को घना बनाने के लिए कैसे करें कड़ी पत्‍ते का इस्‍तेमाल

बुधवार, 17 जुलाई 2019

श्री गुरुदेव दत्त




एक बार की बात है माँ अनुसूया त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश जैसे पुत्र की प्राप्ति के लिए कड़े तप में लीन हो गईं, जिससे तीनों देवों की अर्धांगिनियां सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती को जलन होने लगी।

श्री गुरुदेव दत्त के बारे में जानकारी

तीनों ने अपनी पतियों से कहा कि वे भू लोक जाएं और वहां जाकर देवी अनुसुया की परीक्षा लें।ब्रह्मा, विष्णु और महेश संन्यासियों के वेश में अपनी जीवनसंगिनियों के कहने पर देवी अनुसुया की तप की परीक्षा लेने के लिए पृथ्वी लोक चले गए।अनुसुया के पास जाकर संन्यासी के वेश में गए त्रिदेव ने उन्हें भिक्षा देने को कहा, लेकिन उनकी एक शर्त भी थी।अनुसुया के पतित्व की परीक्षा लेने के लिए त्रिदेव ने उनसे कहा कि वह भिक्षा मांगने आए हैं लेकिन उन्हें भिक्षा उनके सामान्य रूप में नहीं बल्कि अनुसुया की नग्न अवस्था में चाहिए।अर्थात देवी अनुसुया उन्हें तभी भिक्षा दे पाएंगी, जब वह त्रिदेव के समक्ष नग्न अवस्था में उपस्थित हों।त्रिदेव की ये बात सुनकर अनुसुया पहले तो हड़बड़ा गईं लेकिन फिर थोड़ा संभलकर उन्होंने मंत्र का जाप कर अभिमंत्रित जल उन तीनों संन्यासियों पर डाला।पानी की छींटे पड़ते ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ही शिशु रूप में बदल गए। शिशु रूप लेने के बाद अनुसुया ने उन्हें भिक्षा के रूप में स्तनपान करवाया।अनुसुया के पति अत्रि जब घर वापस आए तब अनुसुया ने उन्हें तीन बालकों का राज बताया। अत्रि तो पहले ही अपनी दिव्य दृष्टि से पूरे घटनाक्रम को देख चुके थे।अत्रि ने तीनों बालकों को गले से लगा लिया और अपनी शक्ति से तीनों बालकों को एक ही शिशु में बदल दिया, जिसके तीन सिर और छ: हाथ थे।ब्रह्मा, विष्णु, महेश के स्वर्ग वापस ना लौट पाने की वजह से उनकी पत्नियां चिंतित हो गईं और स्वयं देवी अनुसुया के पास आईं।सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती ने उनसे आग्रह किया कि वे उन्हें उनके पति सौंप दें। अनुसुया और उनके पति ने तीनों देवियों की बात मान ली और त्रिदेव अपने वास्तविक रूप में आ गए।अनुसुया और अत्रि से प्रसन्न और प्रभावित होने के बाद त्रिदेव ने उन्हें वरदान के तौर पर दत्तात्रेय रूपी पुत्र प्रदान किया, जो इन तीनों देवों का अवतार था।दत्तात्रेय का शरीर तो एक था लेकिन उनके तीन सिर और छ: भुजाएं थीं। विशेष रूप से दत्तात्रेय को विष्णु का अवतार माना जाता है।

दत्तात्रेय के अन्य दो भाई चंद्र देव और ऋषि दुर्वाशा थे। चंद्रमा को ब्रह्मा और ऋषि दुर्वाशा को शिव का रूप ही माना जाता है।जिस दिन दत्तात्रेय का जन्म हुआ आज भी उस दिन को हिन्दू धर्म के लोग दत्तात्रेय जयंती के तौर पर मनाते हैं।

भगवान दत्तात्रेय से एक बार राजा यदु ने उनके गुरु का नाम पूछा,भगवान दत्तात्रेय ने कहा : "आत्मा ही मेरा गुरु है,तथापि मैंने चौबीस व्यक्तियों से गुरु मानकर शिक्षा ग्रहण की है।"

उन्होंने कहा मेरे चौबीस गुरुओं के नाम है : श्री गुरुदेव दत्त के बारे में जानकारी


१) पृथ्वी

२) जल

३) वायु

४) अग्नि

५) आकाश

६) सूर्य

७) चन्द्रमा

८) समुद्र

९) अजगर

१०) कपोत

११) पतंगा

१२) मछली

१३) हिरण

१४) हाथी

१५) मधुमक्खी

१६) शहद निकालने वाला

१७) कुरर पक्षी

१८) कुमारी कन्या

१९) सर्प

२०) बालक

२१) पिंगला वैश्या

२२) बाण बनाने वाला

२३) मकड़ी

२४) भृंगी कीट

भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा-विष्णु-महेश के अवतार माने जाते हैं।


भगवान शंकर का साक्षात रूप महाराज दत्तात्रेय में मिलता है और तीनो ईश्वरीय शक्तियों से समाहित महाराज दत्तात्रेय की आराधना बहुत ही सफल और जल्दी से फल देने वाली है। महाराज दत्तात्रेय आजन्म ब्रह्मचारी, अवधूत और दिगम्बर रहे थे। वे सर्वव्यापी है और किसी प्रकार के संकट में बहुत जल्दी से भक्त की सुध लेने वाले हैं, अगर मानसिक, या कर्म से या वाणी से महाराज दत्तात्रेय की उपासना की जाये तो भक्त किसी भी कठिनाई से शीघ्र दूर हो जाते हैं।

दत्तात्रेय के अवतार


श्रीपाद वल्लभ
नृसिंह सरस्वती
स्वामी समर्थ
मणिक प्रभु

पितृ दोष का निवारण कर दिलाते हैं उन्नति श्री दत्तात्रेय भगवान के ये चमत्कारिक मंत्र


पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है। अत: जिन मनुष्यों को पितृ दोष का अनुभव हो रहा हो या घर में निरंतर कोई न परेशानी बनी रहती हो तो उन्हें प्रतिदिन श्री दत्तात्रेय भगवान के नाम का जाप करना चाहिए। इतना ही नहीं दत्त भगवान के दर्शन करने से भी जीवन में सबकुछ अच्छा घटित होने लगता है।

अमावस्या और पूर्णिमा के दिनों तो दत्त नाम की माला अवश्‍य जपना चाहिए।

श्री गुरुदेव दत्त के बारे में जानकारी
साल भर की सभी पूर्णिमा के अलावा 'मार्गशीर्ष पूर्णिमा' यानी श्री दत्तात्रेय भगवान की जयंती के दिन उनके दो पवित्र महाशक्तिशाली मंत्र 'श्री दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा' तथा 'श्री गुरुदेव दत्त' का नाम की माला फेरने से या निरंतर इन नामों का जाप करने से पितृ दोष दूर होकर जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती है तथा उन्नति के नए मार्ग खुलते हैं। इसके साथ निम्न अन्य दत्त मंत्रों का जाप जीवन में बहुत ही लाभदायी और चमत्कारिक माने गए हैं।

* भगवान दत्तात्रेय के चमत्कारिक मंत्र -


मंत्र- ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नम:

दत्त गायत्री मंत्र -


मंत्र- ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमही तन्नो दत्त: प्रचोदयात

मंत्र- ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा।

उपरोक्त इन मंत्रों का जाप स्फटिक की माला से नित्य 108 बार करना चाहिए।

* मानसिक रूप से जाप करने का मंत्र -


मंत्र- ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां ॐ द्रां।

भगवान दत्तात्रेय के तीन मुख का रहस्य एवं परिचय


हिन्दू धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की प्रचलित विचारधारा के विलय के लिए ही भगवान दत्तात्रेय ने जन्म लिया था, इसीलिए उन्हें त्रिदेव का स्वरूप भी कहा जाता है। दत्तात्रेय को शैवपंथी शिव का अवतार और वैष्णवपंथी विष्णु का अंशावतार मानते हैं। दत्तात्रेय को नाथ संप्रदाय की नवनाथ परंपरा का भी अग्रज माना है।

शिक्षा और दीक्षा : भगवान दत्तात्रेय ने जीवन में कई लोगों से शिक्षा ली। दत्तात्रेय ने अन्य पशुओं के जीवन और उनके कार्यकलापों से भी शिक्षा ग्रहण की। दत्तात्रेय जी कहते हैं कि जिससे जितना-जितना गुण मिला है उनको उन गुणों को प्रदाता मानकर उन्हें अपना गुरु माना है, इस प्रकार मेरे 24 गुरु हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य, कपोत, अजगर, सिंधु, पतंग, भ्रमर, मधुमक्खी, गज, मृग, मीन, पिंगला, कुररपक्षी, बालक, कुमारी, सर्प, शरकृत, मकड़ी और भृंगी।

ब्रह्मा जी के मानसपुत्र महर्षि अत्रि इनके पिता तथा कर्दम ऋषि की कन्या और सांख्यशास्त्र के प्रवक्ता कपिलदेव की बहन सती अनुसूया इनकी माता थीं। श्रीमद्भागवत में महर्षि अत्रि एवं माता अनुसूया के यहां त्रिदेवों के अंश से तीन पुत्रों के जन्म लेने का उल्लेख मिलता है।

पुराणों अनुसार इनके तीन मुख, छह हाथ वाला त्रिदेवमयस्वरूप है। चित्र में इनके पीछे एक गाय तथा इनके आगे चार कुत्ते दिखाई देते हैं। औदुंबर वृक्ष के समीप इनका निवास बताया गया है। विभिन्न मठ, आश्रम और मंदिरों में इनके इसी प्रकार के चित्र का दर्शन होता है।
दत्तात्रेय के शिष्य : उनके प्रमुख तीन शिष्य थे जो तीनों ही राजा थे। दो यौद्धा जाति से थे तो एक असुर जाति से। उनके शिष्यों में भगवान परशुराम का भी नाम लिया जाता है। तीन संप्रदाय (वैष्णव, शैव और शाक्त) के संगम स्थल के रूप में भारतीय राज्य त्रिपुरा में उन्होंने शिक्षा-दीक्षा दी। इस त्रिवेणी के कारण ही प्रतीकस्वरूप उनके तीन मुख दर्शाएं जाते हैं जबकि उनके तीन मुख नहीं थे।

पितृदोष से सुरक्षा हेतु कष्ट की तीव्रता के अनुसार उचित उपासना


१. किसी भी प्रकार का कष्ट न हो रहा हो, तो भी आगे चल कर कष्ट न हो इसलिए, साथ ही यदि थोडासा भी कष्ट हो तो ‘श्री गुरुदेव दत्त’ नामजप १ से २ घंटे करें । शेष समय प्रारब्ध के कारण कष्ट न हो इस हेतु एवं आध्यात्मिक उन्नति हो इसलिए सामान्य मनुष्य अथवा प्राथमिक अवस्था का साधक कुलदेवता का नामजप अधिकाधिक करे ।

२. मध्यम कष्ट हो तो कुलदेवता के नामजप के साथ ‘श्री गुरुदेव दत्त ।’ नामजप प्रतिदिन २ से ४ घंटे करें । गुरुवार को दत्तमंदिर जाकर सात परिक्रमाएं करें एवं बैठकर एक-दो माला जप वर्षभर करें । तत्पश्चात् तीन माला नामजप जारी रखें ।

३. तीव्र कष्ट हो तो कुलदेवता के नामजप के साथ ही ‘श्री गुरुदेव दत्त ।’ नामजप प्रतिदिन ४ से ६ घंटे करें ।

पितृपक्ष में दत्तात्रेय देवता का नामजप करने का महत्त्व


पितृपक्ष में दत्तात्रेय देवता का नामजप करने से पितरों को शीघ्र गति मिलती है; इसलिए उस काल में प्रतिदिन दत्तात्रेय देवता का न्यूनतम ६ घंटे (७२ माला) नामजप करें ।

१. भगवान श्री दत्त के नामजप से पितृदोष से रक्षा कैसे होती है ?


अधिकांश लोग साधना नहीं करते । अतएव वे माया में अत्यधिक लिप्त होते हैं । इसलिए मृत्यु के उपरांत ऐसे व्यक्तियों की लिंगदेह अतृप्त रहती है । ऐसे अतृप्त लिंगदेह मत्र्यलोक में (मृत्युलोक में) अटक जाते हैं । (मृत्युलोक भूलोक एवं भुवर्लाेक के मध्य में है ।) भगवान श्री दत्त के नामजप के कारण मृत्युलोक में अटके पूर्वजों को गति मिलती है । इसलिए आगे चलकर वे उनके कर्म के अनुसार आगे-आगे के लोक में जाते हैं । इससे स्वाभाविक रूप से उन से व्यक्ति को होने वाले कष्ट की तीव्रता घट जाती है ।

२. सुरक्षा-कवच निर्माण होना


भगवान श्री दत्त के नामजप से निर्मित शक्ति से नामजप करने वाले के सर्व ओर सुरक्षा-कवच निर्माण होता है । लाभ का स्तर, मात्रा और हमारे जप, जो अन्य कारकों के अलावा, हमारे आध्यात्मिक स्तर पर निर्भर करता है की गुणवत्ता पर निर्भर करता है ।

साधना विधि –


श्री दत्तात्रेय जी की प्रतिमा,चित्र या यंत्र को लाकर लाल कपडे पर स्थापित करने के बादचन्दन लगाकर,फ़ूल चढाकर,धूप की धूनी देकर,नैवेद्य चढाकर दीपक से आरती उतारकरपूजा की जाती है,पूजा के समय में उनके लिये पहले स्तोत्र को ध्यान से पढा जाता है,फ़िर मन्त्र का जप किया जाता है,
उनकी उपासना तुरत प्रभावी हो जाती है और शीघ्र ही साधक को उनकी उपस्थिति काआभास होने लगता है।
साधकों को उनकी उपस्थिति का आभास सुगन्ध के द्वारा,दिव्य प्रकाश के द्वारा,या साक्षातउनके दर्शन से होता है।

साधना के समय अचानक स्फ़ूर्ति आना भी उनकी उपस्थिति का आभास देती है।

पढ़िए और अध्यात्म के बारे में यहाँ

विनियोग –

श्री गुरुदेव दत्त के बारे में जानकारी

पूजा करने के आरम्भ में भगवान श्री दत्तात्रेय के लिय आवाहन किया जाता है,
एक साफ़ बर्तन में पानी लेकर पास में रखना चाहिये,बायें हाथ में एक फ़ूल और चावल के दाने लेकर इस प्रकार से विनियोग करना चाहिये-

” ॐ अस्य श्री दत्तात्रेय स्तोत्र मंत्रस्य भगवान नारद ऋषि: अनुष्टुप छन्द:,श्री दत्त परमात्मा देवता:, श्री दत्त प्रीत्यर्थे जपे विनोयोग: “,
इतना कहकर दाहिने हाथ से फ़ूल और चावल लेकर भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा,चित्र या यंत्र पर चढाने चाहिये,

फ़ूल और चावल को चढाने के बाद हाथों को पानी से साफ़ कर लेना चाहिये,और दोनों हाथों को जोडकर प्रणाम मुद्रा में उनके लिये जप / ध्यान स्तुति को करना चाहिये।

जप स्तुति इस प्रकार है –
” जटाधाराम पाण्डुरंगं शूलहस्तं कृपानिधिम। सर्व रोग हरं देव,दत्तात्रेयमहं भज॥”
मंत्र
पूजा करने में फ़ूल और नैवेद्य चढाने के बाद आरती करनी चाहिये और आरती करने के समय यह स्तोत्र पढना चाहिये –

जगदुत्पति कर्त्रै च स्थिति संहार हेतवे। भव पाश विमुक्ताय दत्तात्रेय नमो॓‍ऽस्तुते॥
जराजन्म विनाशाय देह शुद्धि कराय च। दिगम्बर दयामूर्ति दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
कर्पूरकान्ति देहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च। वेदशास्त्रं परिज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
ह्रस्व दीर्घ कृशस्थूलं नामगोत्रा विवर्जित। पंचभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
यज्ञभोक्त्रे च यज्ञाय यशरूपाय तथा च वै। यज्ञ प्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णु: अन्ते देव: सदाशिव:। मूर्तिमय स्वरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥

भोगलयाय भोगाय भोग योग्याय धारिणे। जितेन्द्रिय जितज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
दिगम्बराय दिव्याय दिव्यरूप धराय च। सदोदित प्रब्रह्म दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
जम्बूद्वीपे महाक्षेत्रे मातापुर निवासिने। जयमान सता देवं दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
भिक्षाटनं गृहे ग्रामं पात्रं हेममयं करे। नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वक्त्रो चाकाश भूतले। प्रज्ञानधन बोधाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
अवधूत सदानन्द परब्रह्म स्वरूपिणे। विदेह देह रूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
सत्यरूप सदाचार सत्यधर्म परायण। सत्याश्रम परोक्षाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
शूल हस्ताय गदापाणे वनमाला सुकंधर। यज्ञसूत्रधर ब्रह्मान दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
क्षराक्षरस्वरूपाय परात्पर पराय च। दत्तमुक्ति परस्तोत्र दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥
दत्तविद्याठ्य लक्ष्मीशं दत्तस्वात्म स्वरूपिणे। गुणनिर्गुण रूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥

शत्रु नाश करं स्तोत्रं ज्ञान विज्ञान दायकम।सर्वपाप शमं याति दत्तात्रेय नमोऽस्तुते॥

इस स्तोत्र को पढने के बाद एक सौ आठबार ” ऊँ द्रां “ बीज मंत्र का मानसिक जप करना चाहिये।
इसके बाद रुद्राक्ष की माला से , दस माला का नित्य जप इस मंत्र से करना चाहिये ” ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा “

धार्मिक मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय भक्त की पुकार पर शीघ्र प्रसन्न होकर किसी भी रूप में उसकी कामनापूर्ति या संकटनाश करते हैं।

गुरुवार और हर पूर्णिमा की शाम भगवान दत्त की उपासना में विशेष मंत्र का स्मरण बहुत ही शुभ माना गया है।

इन मंत्रों के जप से भी शीघ्र सफलता प्राप्त होती है –

ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमही तन्नो दत: प्रचोदयात्

ॐ ऐं क्रों क्लीं क्लूंप ह्रां ह्रीं ह्रूं सौ:

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः

दत्तविद्याठ्य लक्ष्मीशं दत्तस्वात्म स्वरूपिणे, गुणनिर्गुण रूपाय दत्तात्रेय नमोस्तुते

ॐ आं ह्रीं क्रों दत्तात्रय नमः

!! ॐ नमः शिवाय !!

॥ श्रीदत्तमाला मन्त्र ॥


।। ॐ नमो भगवते दत्तात्रेयाय, स्मरणमात्रसन्तुष्टाय,
महाभयनिवारणाय महाज्ञानप्रदाय, चिदानन्दात्मने
बालोन्मत्तपिशाचवेषाय, महायोगिने अवधूताय,
अनसूयानन्दवर्धनाय अत्रिपुत्राय, ॐ भवबन्धविमोचनाय,
आं असाध्यसाधनाय, ह्रीं सर्वविभूतिदाय,
क्रौं असाध्याकर्षणाय, ऐं वाक्प्रदाय, क्लीं जगत्रयवशीकरणाय,
सौः सर्वमनःक्षोभणाय, श्रीं महासम्पत्प्रदाय,
ग्लौं भूमण्डलाधिपत्यप्रदाय, द्रां चिरंजीविने,
वषट्वशीकुरु वशीकुरु, वौषट् आकर्षय आकर्षय,
हुं विद्वेषय विद्वेषय, फट् उच्चाटय उच्चाटय,
ठः ठः स्तम्भय स्तम्भय, खें खें मारय मारय,
नमः सम्पन्नय सम्पन्नय, स्वाहा पोषय पोषय,
परमन्त्रपरयन्त्रपरतन्त्राणि छिन्धि छिन्धि,
ग्रहान्निवारय निवारय, व्याधीन् विनाशय विनाशय,
दुःखं हर हर, दारिद्र्यं विद्रावय विद्रावय,
देहं पोषय पोषय, चित्तं तोषय तोषय,
सर्वमन्त्रस्वरूपाय, सर्वयन्त्रस्वरूपाय,
सर्वतन्त्रस्वरूपाय, सर्वपल्लवस्वरूपाय,
ॐ नमो महासिद्धाय स्वाहा ।।



 

 

एजुकेशन लोन



हर किसी का सपना होता है,कि वह अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त करके किसी ऊंची पोस्ट पर कार्यरत हो जाए | जिससे उसकी लाइफ आराम से गुजर सके | लेकिन जितना सोचना और कहना आसान है | उतना करना काफी मुश्किल है | यदि आप अच्छी शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं | तो भले ही देर में सही लेकिन आपको कामयाबी जरूर हासिल होती है | लेकिन यदि आप शिक्षा ही नहीं प्राप्त कर पाते हैं | तो जिंदगी में कामयाब व्यक्ति बनना थोड़ा मुश्किल का काम हो जाता है | साधारण शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं आती है | लेकिन उच्च शिक्षा हासिल करना कई मिडिल क्लास स्टूडेंट के लिए थोड़ा मुश्किल का काम हो जाता है | क्योंकि उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए केवल आपकी मेहनत ही नहीं बल्कि पैसे की भी जरूरत पड़ती है |

पैसे ना होने के कारण बहुत से विद्यार्थी अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते | लेकिन अब भारत सरकार ऐसे प्रतिभावान छात्रों की मदद के लिए आगे आइ हैं | और कई ऐसी योजनाओं का संचालन कर रही है | जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में पैसे को लेकर कोई परेशानी नहीं आएगी | क्योंकि भारत सरकार और कई ऐसे बैंक हैं , जो विद्यार्थियों के सपने को पूरा करने के लिए Education Loan उपलब्ध कराते हैं |

कोई भी विद्यार्थी Education Loan प्राप्त करके अपनी शिक्षा को हासिल कर सकता है | और अपने सपने को पूरा करता है | लेकिन Education Loan प्राप्त करना भी इतना आसान काम नहीं है | आज हम यहां पर आपको Education Loan कैसे प्राप्त कर सकते हैं ? इसके लिए आपको क्या-क्या करना पड़ेगा | उसकी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं | जिसका उपयोग करके आप आसानी से लोन प्राप्त कर सकते हैं |

एजुकेशन लोन क्या है –
Education Loan प्राप्त करने के बारे में जानने से पहले हमें यह जानना बेहद जरूरी है | कि स्टूडेंट लोन क्या है ? साधारण भाषा में कहें तो जब कोई विद्यार्थी अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी बैंक या प्राइवेट संस्था से लोन लेता है | तो उसे स्टूडेंट लोन कहा जाता है | स्टूडेंट लोन प्राप्त करके कोई भी विद्यार्थी अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकता है |

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Education Loan किसे मिल सकता है –
लोन स्टूडेंट लोन के बारे में जाने के बाद दूसरी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है , की स्टूडेंट लोन कैसे मिल सकता है ? कोई भी बैंक या प्राइवेट संस्था किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले लोन वापसी के बारे में भी सोचती हैं | साधारण भाषा में कहें तो आमतौर पर उन व्यक्तियों को बैंकों और संस्थानो द्वारा लोन प्रदान किया जाता है | जो व्यक्ति लोन वापसी की क्षमता रखते हैं | Education Loan को लेने के लिए कुछ मामलों में किसी की गारंटी की जरूरत पड़ती है | गारंटर कोई भी हो सकता है | चाहे वह आपका कोई दोस्त, रिश्तेदार या अभिभावक भी हो सकता है |

Education Loan का दायरा –


भारत में लगभग सभी बैंकों और प्राइवेट संस्थानों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है | लोन विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई में होने वाले खर्चे की पूर्ति के लिए उपलब्ध कराया जाता है | लोन के अंतर्गत देश – विदेश में पढ़ाए जाने वाले लगभग सभी कोर्स शामिल हैं | आप कक्षा 12 की स्कूली शिक्षा से लेकर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन , पीएचडी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एग्रीकल्चर मैनेजमेंट ,कंप्यूटर कोर्स, CA जैसी उच्च शिक्षा के लिए भी लोन प्राप्त कर सकते हैं | इसके अतिरिक्त यदि आप विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं | तो आप इसके लिए भी प्राइवेट संस्थान और बैंक से एजुकेशन लोन प्राप्त कर सकते हैं |

Education Loan के लिए आवश्यक दस्तावेज –


लोन के लिए आवेदन करते समय आपको नीचे बताए गए कुछ आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी | आवश्यक दस्तावेज इस प्रकार हैं –

एज प्रूफ
पासपोर्ट साइज फोटो
मार्कशीट
बैंक पासबुक
ID प्रूफ
एड्रेस प्रूफ
कोर्स डिटेल्स
अभिभावक और विद्यार्थी का पैन कार्ड और आधार कार्ड
अभिभावक की इनकम का प्रूफ
ऊपर बताए गए दस्तावेजों की आवश्यकता आपको एजुकेशन लोन लेते समय पड़ेगी | इन दस्तावेजों के अतिरिक्त अन्य डाक्यूमेंट्स की भी जरूरत पड़ सकती है | क्योंकि हर बैंक और संस्था के अपने कुछ अलग नियम और शर्तें होती हैं |

Education Loan के प्रकार –


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भारत में एजुकेशन को चार प्रकारों में डिवाइड किया गया है | इंहें आप इस तरह से समझ सकते हैं –

Undergraduate Loan –
जैसा की आप नाम से ही समझ चुके होंगे कि इस तरह के लोन अंडर ग्रेजुएट होते हैं | इस तरह के लोन कोई भी विद्यार्थी जो हाई सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी करके ग्रेजुएशन के लिए देश विदेश में पढ़ाई करना चाहता है | वह इस प्रकार के लोन के लिए अप्लाई कर सकता है |

Career Education Loan –
इस तरह के लोन ऐसे विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाता है जो किसी सरकारी कॉलेज , संस्थान जैसे – ITI , इंजीनियरिंग , टेक्नोलॉजी आदि से पढ़ाई करके अपना करियर बनाना चाहते हैं | ऐसे करिए एजुकेशन लोन कहा जाता है |

Professional Graduate Student Loan –
इस तरह के लोन केवल उन विद्यार्थियों को भी मिल सकता है | जो अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर के आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं |

Parents Loan –
इस तरह के लोग किसी अभिभावक द्वारा अपने बच्चे के लिए लिया जाता है | जब कोई अभिभावक अपने बच्चे की पढ़ाई पूरी करने के लिए किसी बैंक के संस्थान से लोन प्राप्त करना चाहता है | तो वह फाइनेंस लोन के अंतर्गत आता है |

Education Loan के फायदे –


Education Loan प्राप्त करने के कई फायदे हैं | जो कि निम्नलिखित है –

Student Loan का सबसे बड़ी बात यह है की आप लोन आसानी से लोन प्राप्त कर सकते हैं |
एजुकेशन लोन प्राप्त करके कोई भी व्यक्ति विद्यार्थी अपने सपने को पूरा कर सकता है |
पहले जहां पैसों की कमी के कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थी आगे की पढ़ाई नहीं कर सकते थे | अब एजुकेशन लोन के द्वारा वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं |
इसके साथ लोन लंबे समय के लिए मिल सकता है | इसलिए वापस करने के लिए काफी समय मिलता है |
इसके संबंध का एक और फायदा यह है | कि इस लोन के लिए आपको बहुत कम ब्याज का भुगतान करना पड़ता है | कई बैंक और संस्थाएं ऐसी हैं जो कई डिस्काउंट पर एजुकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं |

Education Loan के लिए आवेदन करने से पहले ध्यान देने –
लेने से पहले आपको उस बैंक के संस्था के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए | साथी उनके नियम और शर्तों को भी सावधानी पूर्वक पूरी तरह से पढ़ लेना चाहिए | इसके साथ ही साथ हम आपको सलाह देंगे कि आपको अपनी जरूरत के हिसाब से ही लोन लेना चाहिए | जरूरत से ज्यादा लोन लेने पर आपको लोन की अदायगी पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है | क्योंकि आजकल मंदी का दौर चल रहा है | और मार्केट की स्थिति काफी अच्छी नहीं है | इसलिए Education Loan प्राप्त करते समय इस की अदायगी के बारे में भी पूरी प्लानिंग कर लेना चाहिए | ताकि बाद में किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े |

Education Loan पर कितना ब्याज लगता है –


आमतौर पर बैको संस्थानों द्वारा प्रदान किए जा रहे हैं एजुकेशन लोन पर अन्य लोन की तुलना में ब्याज दर काफी कम होती है | इसके साथ ही कुछ बैंक लड़कियों के लिए ब्याज दर में काफी डिस्काउंट भी प्रदान करती हैं | इसलिए लोन प्राप्त करते समय बैंकों द्वारा Education Loan पर लगाया जा रहे ब्याज दर के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए |

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Education Loan पर प्रोसेसिंग फीस कितनी होती है –


आजकल लगभग सभी बैंक में लोन प्रोसेसिंग फीस वसूली जाती है | जो कि लोन प्राप्त करने वाले आवेदनकर्ता को ही देनी पड़ती है | लेकिन जब बात Education Loan की आती है | तो एजुकेशन लोन के मामले में कोई भी प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती है | यदि यदि आप से कोई बैंक प्रोसेसिंग फीस की मांग कर रहा है तो उसके आप शिकायत भी कर सकते हैं |

क्या Education Loan लेने के लिए किसी गारंटर की जरूरत पड़ती है –
आमतौर पर सभी बैंकों द्वारा किसी भी लोन प्रदान करते समय किसी गारंटी या सिक्योरिटी की मांग की जाती है | लेकिन यदि बात हम एजुकेशन लोन की करें | तो Education Loan में लगभग 4 लाख रुपए तक किसी गारंटर या सिक्योरिटी की जरूरत नहीं पड़ती है | लेकिन यदि आप इस से अधिक का लोन प्राप्त करना चाहते हैं | तो बैंक के नियमों के अनुसार आपको सिक्योरिटी या गारंटर की आवश्यकता पड़ सकती है

Education Loan कैसे प्राप्त करें –


सबसे पहले आपको बैंक या संस्था का चयन करना होगा | जहां से आप एजुकेशन जीवन प्राप्त करना चाहते हैं |
उसके पश्चात आपको उसे बैंक में जाकर Education Loan के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करना होगा | और फिर बैंक द्वारा बताए गए सभी चरणों का पालन करके आप | लोन प्राप्त कर सकते हैं |

एजुकेशन लोन लेने में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?


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एजुकेशन लोन के लिए जरुरी है कि भारत या विदेश में किसी वैध संस्था से मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी में आपका एडमिशन तय हो चुका हो.
किसी व्यक्ति की संपूर्ण और सफल जिंदगी के लिए क्वालिटी एजुकेशन बहुत जरुरी है. कुछ लोगों के लिए यह किसी शीर्ष इंस्टीच्यूट से ग्रेजुएशन करना हो सकता है. ऐसे दौर में जब पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, देश-विदेश के शीर्ष इंस्टीच्यूट में पढ़ने का खर्च काफी अधिक है. इसे ध्यान में रखते हुए पैरेंट म्युचुअल फंड्स में निवेश करते हैं, कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट तो कुछ यूलिप का सहारा लेते हैं. इन सबके बाद भी आपकी पढ़ाई के लिए रकम कम पड़ सकती है.
एजुकेशन लोन के रूप में आपको ऐसी परिस्थितियों में काफी मदद मिलती है. यह लोन आपकी जरूरत और उपलब्ध रकम के बीच की खाई को भरता है.

एक अध्ययन के अनुसार पढ़ाई का खर्च सालाना 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. इस समय अगर पढ़ाई का खर्च 2.5 लाख रुपये है तो 15 साल बाद एमबीए करने में 20 लाख रुपये खर्च होंगे.

अगर कोई पैरेंट अभी से 15 सालों तक हर महीने 2000 रुपये का निवेश करता है और इस पर औसत रिटर्न 12 फीसदी मान लें तो वह करीब 9 .5 लाख रुपये ही जोड़ पायेगा.

एजुकेशन लोन में क्या कवर होता है?

इसमें कोर्स की बेसिक फीस और कॉलेज के दूसरे खर्च (रहने, एग्जाम और अन्य) कवर होते हैं. लोन के लिए कौन अप्लाय कर सकता है? पढ़ाई करने वाला छात्र मेन बॉरोअर होता है.उसके पैरेंट्स, या भाई-बहन को बॉरोअर हो सकते हैं.
लोन किसे मिल सकता है? भारत में पढ़ाई या उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्र लोन ले सकते हैं. दोनों जगह पढ़ाई के लिए लोन की रकम अलग हो सकती है और यह बैंक पर भी निर्भर करता है.
लोन के तहत किस तरह के कोर्स आते हैं? लोन लेकर फुल टाइम, पार्ट टाइम या वोकेशनल कोर्स किये जा सकते हैं. इसके अलावा इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल, होटल मैनेजमेंट और आर्किटेक्चर आदि में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए लोन लिया जा सकता है. योग्यता और कागजातों की जरूरत लोन के लिए आवेदन करने वाले का भारतीय नागरिक होना जरुरी है. इसके साथ ही भारत या विदेश में किसी वैध संस्था से मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन तय हो चुका हो. आवेदक का बारहवीं की परीक्षा पास कर चुका होना जरुरी है. कुछ बैंक हालांकि एडमिशन तय होने से पहले भी लोन दे देते हैं. रिजर्व बैंक के मुताबिक एजुकेशन लोन के लिए उम्र की अधिकतम सीमा नहीं है, लेकिन कुछ बैंकों ने सीमा तय कर रखी है.
बैंक इसके लिए हालांकि आवेदक से संस्थान का एडमिशन लेटर, फीस स्ट्रक्चर, 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन की मार्कशीट मांग सकते हैं. इसके अलावा को एप्लिकेंट की सेलरी स्लिप या आयकर रिटर्न (आईटीआर) की कॉपी मांगी जा सकती है.

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लोन की फाइनेंसिंग, गिरवी की जरूरत
लोन की जरूरत के हिसाब से बैंक 100 फीसदी तक फाइनेंस कर सकते हैं. अभी चार लाख रुपये तक के लोन के लिए किसी मार्जिन मनी की जरूरत नहीं है. भारत में पढ़ाई करने के लिए लोन की रकम का पांच फीसदी और विदेश में पढ़ाई के लिए 15 फीसदी मार्जिन मनी की जरूरत होती है.

ब्याज दर
बैंक इस समय लोन पर एमसीएलआर और अतिरिक्त स्प्रेड के हिसाब से ब्याज वसूलते हैं. अडिशनल स्प्रेड इस समय 1 .35 फीसदी से लेकर तीन फीसदी तक हो सकता है.
रीपेमेंट लोन को छात्र चुकाता है. आमतौर पर कोर्स खत्म होने के छह महीने बाद रीपेमेंट शुरू हो जाता है, कई बार बैंक छह महीने की मोहलत भी देते हैं. यह मोहलत जॉब पाने के छह महीने भी हो सकती है या कोर्स खत्म होने के बाद एक साल की हो सकती है. पांच से सात साल में यह लोन चुकाना होता है, कई बार बैंक इसे आगे बढ़ा सकते हैं. कोर्स की अवधि के दौरान लोन पर ब्याज सामान्य ही होता है और इएमआई के रूप में यह ब्याज चुकाना होता है, जिससे कोर्स पूरा होने के बाद छात्र पर ज्यादा बोझ न पड़े. सावधानी लोन के लिए आवेदन करते वक्त उसकी प्रोसेसिंग, प्री पेमेंट, लेट पेमेंट फीस आदि के बारे में चेक करना चाहिए. अधिकतर बैंक लोन एमाउंट का 0 .15 फीसदी प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं.

पढ़िए और आर्टिकल पैसा और फाइनान्स के बारे में यहाँ

इनकम टैक्स में छूट आयकर कानून के सेक्शन 80E के तहत लोन के ब्याज के रूप में चुकाई गयी रकम पर छूट मिलती है. यह छूट किसी व्यक्ति को खुद, बच्चों या कानूनी माता-पिता द्वारा बच्चे की शिक्षा के लिए लिए गए लोन के चुकाए गए ब्याज पर मिलती है. लोन के कुल ब्याज को आप अपनी कर योग्य आय में से घटा सकते हैं. यह छूट अधिकतम आठ सालों तक ली जा सकती है. निष्कर्ष एजुकेशन लोन एक शुरुआती लोन के रूप में आपकी क्रेडिट रेटिंग को बेहतरीन बनाने में मददगार साबित हो सकता है. इसके लिए जरुरी है कि आप सही समय पर इसे चुका दें. इससे आपके लिए भविष्य में होम, कार या दूसरे लोन आसानी से पाने का मौका मिलेगा.

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दूर के ढोल सुहावने



दूर के ढोल सुहावने


राघव और वेद दोनों सगे भाई थे। एक ही माता-पिता की संतान होने के बावजूद दोनों के व्यवहार और चाल-चलन में जमीन आसमान सा अंतर था।

वेद जहाँ पढाई-लिखाई में हमेशा आगे रहता था वहीं राघव को तो जैसे किताबों से नफरत सी थी। वेद न सिर्फ अपने माता-पिता की बल्कि पूरे मोहल्ले के बड़े-बुजुर्गों का आदर सम्मान करता था। लेकिन राघव ने कभी किसी को आदर देना और शिष्टाचार सीखा ही नहीं था। जब देखो बस अपनी तीखी जबान का प्रदर्शन कर अपने पर गर्व मेहसूस करता था।


बचपन से जवानी में कदम रखते ही राघव को इस छोटे से शहर में अपना दम घुटता सा लगता था। उस पर एक माध्यम परिवार में पैदा होने का दुःख उसे सताता था। जब भी किसी चीज की फरमाइश करता तो सिमित आमदनी का बहाना बना माता-पिता मना कर देते। आखिर उन्हें भी तो घर में आती पगार के हिसाब से ही महीना भर घर का खर्चा उठाना होता था। लेकिन राघव तो जैसे इन सब बातों से बेखबर बस अपनी जरूरतों के पूरा न होने पर अपने ही माता-पिता को दोष देता रहता था।


माता-पिता ने बहुत बार राघव को समझाया भी था कि वह अपने आचरण में सुधार लाए नहीं तो आगे चल कर बहुत दुःख उठाना पड़ेगा। लेकिन राघव कहाँ किसी की सुनने वाला था। दोस्तों यारों और सिनेमा के माधयम से बड़े शहरों की चमक-दमक उसे हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती रहती थी। सिनेमा में दिखाए गए बड़े शहर के लोगों को अच्छे-अच्छे कपड़े पहने, बहुमंज़ली इमारतों में मीटिंग करते, पार्टी करते, पांच सितारा होटलों में खाना खाते या नयी-नयी गाड़ियों में घुमते देखा था।


इन सब तड़क-भड़क वाली जिंदगी के सपनों को मन में संजोते हुए उसका तो जीवन में सिर्फ एक ही मकसद था। किसी तरह बड़े शहर, जैसे दिल्ली या मुंबई, चला जाए ताकि बाकी की जिंदगी मजे में बीते।


अपने जेब खर्च से पैसे बचा बचा कर जो कुछ इकठे कर सका था बस वही लेकर घर से एक दिन राघव अपने सपनों की नगरी मुंबई की तरफ निकल पड़ा। चलने से पहले उसने एक चिट्ठी माता-पिता के लिए लिख गया था कि वह बड़े शहर जा रहा है, कहाँ कुछ नहीं लिखा। सुबह उठने पर सब परेशां की इस लड़के ने क्या किया। इधर-उधर पूछने से पता चला कि किसी ने उसे स्टेशन की तरफ जाते देखा था। बस, और कोई खबर किसी से नहीं मिली।

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उधर तेजी से भागती रेलगाड़ी में बैठा राघव इन सब बातों से अंजान अपने सपनों की दुनिया में खोया था। मुंबई पहुँचते ही वह सबसे पहले नए कपड़े खरीदेगा, आलिशान होटलों में खाना खाएगा, समुन्दर किनारे ठंडी हवा का आनंद लेगा। इन्ही सुनहरी पलों में अपना भविष्य देखते हुए जैसे ही कोई स्टेशन आता तो फ़ौरन ही अपने सहयात्रिओं से पूछने लगता ” मुंबई आगया क्या। ” रेलगाड़ी के उस डब्बे में बैठे सब यात्री अबतक जान चुके थे कि राघव पहली बार मुंबई जा रहा है।

आखिर ट्रैन मुंबई सेंट्रल पर जब रुकी तो वहां लोगों की भीड़ देख एक बार तो चौंक सा गया। इतने लोग तो शायद उसके पूरे शहर में भी नहीं रहते थे। अपने बैग को कंधे पर लटका कर धीमी गति से वह स्टेशन से बाहर निकला और कभी इस सड़क अपर तो कभी दूसरी सड़क पर निकल जाता। ऐसा लगता था मानो आज ही सारा मुंबई घूम लेगा। कुछ देर बाद जब भूख लगी तो एक छोटे से होटल में जाकर भोजन किया।

भोजन करने के बाद उसके पास सिर्फ 1200 रूपए ही बचे थे। इस महानगरी में तो इतने पैसे ज्यादा दिन नहीं चल पाएंगे, यह सोचते ही उसने सोचा कि क्यों न पहले रहने का इंतज़ाम किया जाए फिर नौकरी की तलाश करूंगा।


दूर के ढोल सुहावने

होटल वाले से रहने की जगह का पुछा तो उसने जो बताया वह सुन तो राघव के होश उड़ गए। मायूस सा होकर होटल वाले से कोई भी नौकरी दिलवाने को कहा। शायद होटल वाले को उस पर दया आ गयी। उसने ने उसे अपने यहाँ काम पर रख लिया। काम था किचन में हाथ बताना, साफ़ सफाई रखना, बर्तन मांजना इतियादी। पगार मात्र 3500 रूपए महीना मगर खाना पीना और सोने की जगह  मिलेगी। सोचा अभी इसे ही कर लेता हूँ, साथ-साथ कोई बड़ी नौकरी ढूंढ़ता रहूंगा।

सुबह 5 बजे उठता, साफ़ सफाई करता और फिर सारा दिन किचन में कभी सब्जी काटता तो कभी बर्तन मांजता। रात को 12 बजे के करीब खाना खा कर सो जाता। फिर वही सुबह 5 बजे उठना पड़ता। यह क्रम पूरे 15 दिन तक चलता रहा। अब तक उसने न तो अपनी सपनों की नगरी मुंबई के दर्शन किए थे और न ही समुन्दर की लहरों को निहारने का मौका मिला था। थोड़ा सा खाली समय मिलता तो होटल के बाहर आ खड़ा होता और बहुमंजली इमारतों और आलिशान कारों के दर्शन कर लेता था।

एक दिन छुट्टी लेकर वह सारा दिन दफ्तरों और दुकानों के चक्कर लगाता रहा कि कहीं कोई अच्छी नौकरी मिल जाए। लेकिन हर जगह उसे निराशा ही हाथ लगी। फिर कुछ दिन बाद यही किया तो बात समझ में आयी कि नौकरी एक होती है तो पाने वाले दस पहले ही खड़े होते हैं। नौकरी उसे ही मिलती है जिसका कोई जानने वाला हो। लेकिन उसे तो कोई भी इस शहर में जानता ही नहीं था। दिन भर घूमने के बाद रात वापिस होटल पहुंचा और सोने चला गया।

बिस्तर पर लेटा ही था कि दिमाग में तरह तरह के विचार प्रकट होने लगे। क्या मैं इस होटल में काम करने के लिए अपने माता-पिता को छोड़ के भागा था, बड़े शहर में आने से क्या फ़ायदा हुआ, बड़ी-बड़ी करों को खरीदने और आलिशान घर में रहने के लिए पैसा कहाँ से लाऊंगा। मुझे इस महानगरी में बड़ी नौकरी कौन देगा, मैं तो यहाँ किसी को जानता तक नहीं। यह सब सोचते हुए उसको नींद आगयी।


सुबह फिर वही 5 बजे उठा और साफ़ सफाई करते हुए रात भर मन में चल रहे विचारों के बारे में सोचता रहा। आखिर सुबह 9 बजे वह होटल मालिक के पास गया और नौकरी छोड़ने की बात कही। होटल मालिक एक दयावान प्रवर्ति का आदमी था।

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उसने राघव को समझाया कि महानगरों की चमक-दमक से प्रभावित होकर न जाने कितने युवक युवतियां रोज़ मुंबई पहुँचते हैं। लेकिन इस चमक के पीछे बिछी धूल को नहीं देख पाते, उस संघर्ष से अनजान होते हैं जो उन्हें इस नगरी में रहने भर के लिए करना पड़ता है। लाखों में एक-आधा ही कुछ बन पाता है बाकी तो सिर्फ दाल-रोटी के चक्कर में ही फंस कर रह जाते हैं, जो उन्हें अपने छोटे शहर में रहते हुए भी मिल जाती।


उस होटल मालिक ने राघव को 2000 रूपए दिए और वादा लिया कि वह अपने घर वापिस लौट जाएगा। उनकी कही बातों को सुन राघव ने उनके पाँव छुए और स्टेशन की तरफ चल पड़ा। जब यहाँ अपने सपने लेकर आया था तो मात्र 1200 रूपए उसके पास थे लेकिन आज जीवन की वास्तविकता का ज्ञान लेकर लौट रहा है तो 2000 रूपए हैं। यह तो कोई घाटे का सौदा नहीं रहा। वह मुस्करा उठा और ट्रैन में चढ़ गया।


अपने शहर के स्टेशन पर उतर कर घर की ओर चल पड़ा। रास्ते भर माता-पिता और भाई से कैसे मिलेगा, बस यही सोचता रहा। घर पहुँच उसने जब दरवाजा खटखटाया तो माँ ने दरवाजा खोला। राघव को देख उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू टपकने लगे और उन्होंने आगे बढ़ कर उसे गले लगा लिया। अंदर पिता को खड़े देख राघव उनके पैरों से लिपट गया और माफ़ी मांगने लगा। मगर माता-पिता और भाई को सबसे ज्यादा ख़ुशी तब हुई जब राघव ने खुद की वचन दिया कि अब वह इसी छोटे शहर में रह कर अपनी पढ़ाई पूरी करेगा और फिर नौकरी करेगा।

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सबने महसूस किया कि अब राघव बदल चुका है। अपनी पढ़ाई पूरी कर राघव ने नौकरी करना शुरू कर दिया। अब वह लोगों से मिलजुल कर रहता और बड़े-बुजुर्गों का आदर सम्मान करता।

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सपने देखना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन उन सपनों को साकार करने के लिए मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है।

सबको महानगरों की चमक-दमक सुहावनी दिखती है लेकिन उनके पीछे छिपी संघर्ष की कहानी नहीं दिखती। तभी कहते हैं, दूर के ढोल सुहावने।  

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अक्षय के बेटे आरव को क्रिकेट से है नफरत




लंदन। अभिनेता अक्षय कुमार (Akshay Kumar) क्रिकेट के प्रशंसक हैं, लेकिन उनके बेटे आरव को यह खेल पसंद नहीं। क्यों? क्योंकि अक्षय इसे काफी देखते हैं।

एक बयान में कहा गया, अक्षय जब फिलिप्स ह्यू क्रिकेट लाइव का हिस्सा बने तो उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपने प्यार और आरव क्यों इसे नापसंद करते हैं इसका खुलासा किया।

क्रिकेट विश्व कप 2019 के फाइनल मुकाबले में इग्लैंड ने न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। इस मैच को लेकर बॉलीवुड सितारे भी काफी एक्साइटेड नजर आए। अक्षय कुमार, नीना गुप्ता और अनुपम खेर भी फाइनल मुकाबला देखने लॉर्ड्स के क्रिकेट स्टेडियम में पहुंचे। इस दौरान अक्षय कुमार ने खुलासा किया कि उनके बेटे आरव को ये खेल बिलकुल पसंद नहीं है और इसके पीछे की वजह उन्होंने शेयर.

मैच शुरू होने से पहले फिलिप्स ह्यू क्रिकेट लाइव बातचीत में अक्षय कुमार पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, वीवीएस लक्ष्मण और प्रेजेंटर जतिन सपरू के साथ मस्ती करते नजर आए। इस दौरान अक्षय ने खुलासा किया कि उनके बेटे आरव को क्रिकेट पसंद नहीं है लेकिन बेटी नितारा को बहुत पसंद है।

अक्षय ने कहा, ‘‘मेरे बेटे को क्रिकेट पसंद नहीं, लेकिन मेरी बेटी (नितारा) को पसंद है। वह महज छह साल की है और उसे क्रिकेट पसंद है। मेरे बेटे को क्रिकेट से नफरत है क्योंकि मैं इस खेल को बहुत ज्यादा देखता हूं, लेकिन मेरी बेटी को मेरा क्रिकेट देखना पसंद है क्योंकि तब उसे इसे देखने का मौका मिलता है।’’

‘केसरी’ अभिनेता पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली और अनुभवी स्पिनर हरभजन सिंह के साथ क्रिकेट के बारे में चर्चा करते हुए कुछ पुरानी यादों में खो गए।

अक्षय ने कहा, ‘‘मैं अपने स्कूल के लिए क्रिकेट खेलता था। सामान्यत: खिलाडिय़ों का चयन उनकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी कौशल के लिए किया जाता है, लेकिन मुझे याद है कि मुझे टीम में मेरे फील्डिंग कौशल के लिए लिया जाता था।’’

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शरारती रिंकू shararati Rinku Story




रिंकू स्कूल से वापिस लौटा ही था कि उसकी मम्मी ने उसे बुलाकर खूब डांटा। shararati Rinku Story  पास वाली आंटी ने उन्हें बताया था कि कल रिंकू ने उनके बेटे के हवाई जहाज़ वाले खिलोने को तोड़ दया था। रिंकू की माँ भी उसकी इस आदत से तंग आ चुकी थी। आए दिन कोई न कोई उसकी शिकायत ले उनके पास पहुँच जाता। मगर रिंकू था कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा था।
रिंकू को एक बुरी आदत थी। जब भी किसी दुसरे बच्चे के पास कोई खिलौना देखता वो उसे तोड़ देता। माँ को कई बार तो तोड़े गए खिलोने के पैसे तक देने पड़ते थे। माँ ने उसे कई बार समझाया कि किसी दिन कोई बड़ी चीज तोड़ देगा तो उसके पैसे मैं कहाँ से चूका पाऊँगी।
मगर दूसरों के खिलोने तोड़ना मानो रिंकू की आदत सी बन गयी थी। तोड़ने फोड़ने में उसे मजा आता था। ये उसका मनोरंजन था।

कुछ दिनों बाद रिंकू के पापा अपना दौरा ख़तम कर वापिस आ गए। तब उसकी मम्मी ने उसके पापा से उसकी खूब शिकायत की। यह भी बताया कि कैसे कई बार तो टूटे खिलोने के पैसे तक देने पड़े।

 

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रिंकू के पापा ने एक दिन उसे अपने कमरे में बुलाया और उसके हफ्ते के जेब खर्च के 50 रूपए देकर बोले ” यह तुम्हारा इस हफ्ते का जेब खर्च।” रिंकू बहुत खुश हुआ। तभी पापा ने उसे कहा ” 50 मिले हैं, जाओ इसमें से 10 रुपए का कोई भी अपनी पसंद का खिलौना बाजार से ले आयो।”

रिंकू दौड़ा दौड़ा गया और अपनी पसंद की एक खिलोने वाली कार ले आया और उस से खेलने लगा। कुछ देर बाद उसके पापा ने उससे एक गिलास पानी माँगा। रिंकू अपनी कार छोड़ पानी लेने रसोई में गया और पानी का गिलास ले वापिस आया।

वापिस आकर उसने देखा कि उसकी खिलोने वाली कार तो टूटी फूटी जमीन पर पड़ी थी। चिल्ला के बोला ” मेरी कार किसने तोड़ी।” तब पापा ने कहा ” सॉरी, मैं तेरी कार से खेल रहा था कि टूट गयी। तुम ऐसा करो जो 40 रुपए तुम्हारे पास बचे हैं उनमें से एक 10 और खर्च कर दूसरी कार ले आओ।”

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रिंकू फिर बज़ार गया और दूसरी कार खरीद लाया। नयी कार से खेलते हुए वो पहली वाली कार के टूटने को भूल गया।
रात को खाना खा जब सोने का वक़्त आया तो रिंकू ने देखा कि उसकी दूसरी कार भी टूटी पड़ी थी। पापा से पुछा तो जवाब मिला ” अपने खिलोने संभाल कर रक्खा करो, कार नीचे पड़ी थी और उस पर मेरा पैर पड़ गया।”

रिंकू बहुत दुखी हुआ और रोनी सी सूरत बना सोने चला गया। अगले दिन इतवार था सो चूल जाने की कोई जल्दी नहीं थी। पापा की भी छुट्टी थी। देर तक सोता रहा। जब उठा तो पापा ने दुबारा सॉरी कहा और उसे एक और कार खरीदने को कहा।

रिंकू की जेब में अभी भी 30 रुपए बाकी बचे थे। लेकिन उसे तो पूरा हफ्ता जेब खर्च इन्ही 30 रुपए में चलाना है, यह सोच उसका दूसरी कार खरीदने का मन ना हुआ। कुछ देर बाद पापा ने उसे अपने एक काम से बाजार जाने को कहा। जब वो जाने को ही था कि पापा बोले ” बेटा, आती बार अपनी कार खरीदना ना भूलना।”

रिंकू जब घर लौटा तो उसके हाथ में एक नयी कार थी। मगर जेब में सिर्फ 20 रुपए जिनसे उसे पूरे हफ्ते अपना जेब खर्च चलना था। दिन भर खेलने के बाद उसने नयी कार को संभाल कर अपनी मेज पर रख दिया।

अगले दिन सुबह उठा तो देखा कि नयी कार मेज से गायब थी। उसके दिल को एक झटका सा लगा। इधर उधर देखा पर कार नहीं मिली। उसने मम्मी और पापा से पुछा तो उन्होंने भी कार को ढूंढ़ना शुरू कर दिया। सब ढून्ढ रहे थे तभी पापा ने आवाज लगाई ” अरे, कार तो यहाँ है। ” रिंकू भागता हुआ पापा की तरफ लपका तो कार अपने हाथ में ले आते हुए पापा से जा टकराया। और इस टक्कर में कार फिर नीचे गिर के टूट गयी।

रिंकू तो बस रोने लगा। पापा ने बहुत समझाया कि कार तो हमारी टक्कर की वजह से टूटी है लेकिन रिंकू कहाँ चुप होने वाला था। बस रट लगाए जा रहा था ” मेरी 3 कार टूट गयी, मेरी 3 कार टूट गयी “
उस दिन तो रिंकू स्कूल भी रोते हुए ही गया। जब घर आया तो मुँह लटका सा था। मम्मी ने पुछा तो ठीक से जवाब भी नहीं दिया। शाम पापा जब घर आए तो उसकी रोनी सूरत देख पूछ लिया “क्या हुआ, इतने उदास क्यों हो। ” तब रिंकू ने कहा ” मेरे पास ना तो खिलोने हैं और ना ही उतने पैसे की और खिलोने खरीद सकूँ। जेब खर्च भी सिर्फ 20 रुपए ही बचा है। “

तब पापा ने उसे अपनी गोद में बिठा समझाया ” तुम्हे अपने खिलोने टूटने पर इतना दुःख हो रहा है, तो सोचो जिनके खिलोने तुम तोड़ते हो उनको भी कितना दुःख होता होगा। उनके भी तो जेब खर्च ख़तम हो जाता होगा अपने लिए नए खिलोने खरीदने में। ”

पापा की ये बात रिंकू के मन को छु गयी। उसने उसी समय पापा से वादा किया कि अब कभी किसी का खिलौना नहीं तोडूंगा।

कभी कुछ ऐसा नहीं करना चाहिए जिससे किसी का नुक्सान हो।

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दन्त परी – Tooth Fairy


दन्त परी – Tooth Fairy घर का सारा काम निबटा कर मैं लेटी ही थी कि मेरी बेटी मुनमुन रोती चिल्लाती मेरे कमरे में भागी आयी। मैं भी हड़बड़ा कर उठी और उसे गोद में उठा सीने से चिपका कर पुछा दन्त परी – Tooth Fairy
” क्या हुआ मुनमुन, रो क्यों रही हो।”

उसको चुप कराने के चक्कर में ये भी न देखा कि उसके मुँह से खून निकल रहा था। मैं पहले तो घबरा गयी, लेकिन अपनी घबराहट छुपाते हुए उसे मुँह खोलने को कहा। मुँह खुलते ही चैन की सांस ली और थोड़ा मुस्कराते हुए उसे समझाया ” अरे, पगली कुछ नहीं हुआ। सिर्फ दूध का दाँत टूट गया है, कुछ दिनों में दूसरा और बहुत ही मजबूत दाँत निकल आएगा।” मगर मुनमुन थी कि रोए ही जा रही थी ” मेरा आगे का दाँत टूट गया, अब सब मुझे चिढ़ाएँगे।” उसकी बात भी सही थी, बच्चों को तो बस एक बहाना भर चाहिए किसी को चिढ़ाने का। उनका दिन तो उस मस्ती में ही गुजर जाता है। कोई द्वेष नहीं, कोई खराब मंशा नहीं बस जी भर कर हँसने का मौका मिल जाता है।

दन्त परी – Tooth Fairy

उसे चुप करवाने के लिए मैंने उसे Tooth Fairy (दन्त पारी) के बारे में भी बताया। ” देखो, अब तुम इस दाँत को धो कर अपने तकिये के नीचे रख कर सो जाओ। जब सुबह उठोगी तो दन्त परी तुम्हे एक गिफ्ट देगी।” बस फिर क्या था, गिफ्ट मिलने के सोच ने ही उसका रोना बंद कर दिया। दिन में ना जाने कितनो बार उसने पूछा ” मुम्मा, tooth fairy मुझे क्या गिफ्ट देंगी।” और में हँसते हुए उसे इंतज़ार करने को कह देती।

अगली सुबह मुनमुन जल्दी से उठी और दौड़ी हुई मेरे पास आयी ” मुम्मा, tooth fairy मेरे लिए क्या गिफ्ट लायी।” और मैंने उसे गिफ्ट को तकिये के नीचे ढूंढ़ने को कहा। इतना सुनते ही तेजी से भागी अपने कमरे की तरफ और तकिया उठा के देखा तो वहाँ 100 रूपए का नोट पड़ा था।

मायूस सी हो बोली ” मुम्मा, यहाँ तो कोई भी गिफ्ट नहीं है, बस एक नोट पड़ा है।” तब मैंने उसके हाथ में 100 रूपए का नोट दे समझाया कि अब वह इन 100 रुपयों से अपनी मन पसंद गिफ्ट खरीद सकती है। मायूस चेहरे पर एकदम से ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी। शाम को उसे बाजार ले जाकर मैंने उसकी मन पसंद गिफ्ट उसे ले दिया।
लेकिन झेलना तो था ही मुनमुन को। मैंने उसे समझाया ” देखो मुनमुन, तुम शायद भूल गयी हो कि तुमने भी अपने साथियों के साथ मिल किसी और के दाँत टूटने का मजाक बनाया होगा। आज तुम्हारी बारी है मजाक बनने की तो इसमें तुम्हे बुरा नहीं मानना चाहिए।”

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यही तो है बचपन की मस्ती, खेलो कूदो और हँसते हँसाते एक दुसरे के साथ मिलजुल कर रहो। इन छोटी बातों को चिढ़ाना नहीं बल्कि सब तरफ हँसी बिखेरने की तरह समझो।
याद रखो, ये बचपन के पल दुबारा लौट के नहीं आते। बस इसी तरह ख़ुशी ख़ुशी तुम भी उस हँसी में शामिल हो जाओ।

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